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अपार्टमेंट में कैद सात बच्चों की सच्ची कहानी

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Sudheer Singh

Sudheer Singh

Staff Writer

बदलते वक्त में फिल्में जिन्दगी का एक अहम हिस्सा बन चुकी हैं. हर दिन कोई न कोई नई फिल्म की कहानी सुर्खियां में रहती है. इस सबमें कहीं न कहीं डॉक्यूमेंट्रीज को उतनी अहमियत नहीं मिल पाती, जितनी उन्हें मिलनी चाहिए. बावजूद इसके कई सारी डॉक्यूमेंट्रीज रहीं हैं, जो अपनी कहानी की वजह से विश्व पटल पर स्थापित हुईं हैं.

क्रिस्टल मोंसे की ‘वॉल्फपाक’ ऐसा ही एक नाम है. 2015 के सनडंस फिल्म फेस्टिवल में इसको यू.एस डॉक्यूमेंट्री ग्रांड जूरी पुरस्कार मिला था. कहते हैं कि इसकी कहानी और किरदार इतने रोचक थे कि कॉफी समय तक यह पहले मीडिया में छाई रही और बाद में खूब सराही गई. तो आईये जानने की कोशिश करते हैं कि इस डॉक्यूमेंट्री में ऐसा क्या था कि लोग इसके दीवाने थे:

कहां से मिली डॉक्यूमेंट्री की कहानी?

यह 2010 की बात है. ‘वॉल्फपाक’ की डॉयरेक्टर क्रिस्टल मोसेल की उम्र 30 की रही होगी. वह एक दिन न्यूयार्क के फर्स्ट एवेन्यू में बैठी थीं, तभी उनकी नज़र 6 विचित्र भाईयों पर पड़ी. उनकी उम्र 11 से 18 साल के बीच की रही होगी. वे सड़क पर असहज तरीके से घूम रहे थे. उनका पहनावा आम नहीं था. उन्होंने काले कलर के सूट के साथ सफेद कलर की शर्ट पहन रखी थी. उन्होंने अपने गले में टाई भी पहन रखी थी. उनके लंबे बाल आकर्षण का केंद्र थे. वह लड़कियों की तरह काफी लंबे थे. उन्हें देखकर लग रहा था, जैसे वह किसी से छुपने की कोशिश कर रहे थे.

इतने में किसी ने उनसे जब पूछा कि वह कौन है? उन्होंने इस तरह का पहनावे को क्यों अपनाया है और उनके नाम क्या है, तो उन्होंने वहां से भागना शुरु कर दिया. उनका इस तरह से भागना खोज का विषय बन गया था.

बाद में पता चला कि वह 6 भाई अपनी एक बहन के साथ न्यूयार्क के एक अपार्टमेंट की 16वीं मंजिल में रहते थे. वह वहां खुफिया लोगों की तरह रहते थे. एकदम गुप्त तरीके से. न किसी से मिलना-जुलना, न ही घर से बाहर निकलना.

ये भाई दिखने में लगभग एक जैसे थे और थोड़े से विचित्र थे, इसलिए वह घर से बाहर निकलना पसंद नहीं करते थे. उन्होंने खुद को उसी फ्लैट में सीमित कर लिया था.

उन्हें फिल्में बहुत पंसद थी. उनके पास लगभग 5000 हजार फिल्मों का कलेक्शन था. उनका मानना था कि उनका जीवन फिल्मों के बिना अधूरा है. इनके बिना उन्हें अपना दिन काटने में मशक्कत करनी पड़ती थी.

The Angulo Brothers in The Wolfpack (Pic: latimes)

हिन्दू भगवानों के नाम पर थे नाम

आपको जानकर हैरानी होगी कि ये सभी भाई एक जैसे दिखते थे. इस कारण उन्हें पहचानना मुश्किल था. इससे भी दिलचस्प बात तो यह है कि उनके पिता ऑस्कर ने उनके बच्चों के नाम हिन्दू घर्म के भगवानों के नाम पर रखे थे. क्रमश: इन भाईयों का नाम गोविंदा, नारायण, मुकुंद, जगदीश, कृष्णा और विष्णु था.

अब बड़ा सवाल यह था कि उन्होंंने अपने बच्चों को फ्लैट तक ही सीमित क्यों कर रहा था?

असल में ऑस्कर अपने बच्चों के लिए बहुत चिंता करते थे. वह नहीं चाहते थे कि उनका कोई भी बच्चा नशाखोर बने. या फिर वह समाज की किसी भी बुराई का शिकार हो. वह उन्हें इस सबसे बहुत दूर रखना चाहते थे. इसके लिए उन्होंंने अपने सातों बच्चों को फ्लैट में कैद कर दिया था. उनके बच्चे अपार्टमेंट के बंद दरवाजे के पीछे ही बड़े हुए थे. हालांकि, वह कभी-कभी अपने बच्चों को बाहर ले जाया करते थे, लेकिन बेहद कम.

ऑस्कर के सामने अपने बच्चों को पढ़ाने की बड़ी समस्या था. उन्होंने इसका भी तोड़ निकाल लिया था. उन्होंंने अपनी पत्नी को बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया. इस तरह से उनका फ्लैट ही पाठशाला बन गया. मां ने अपने बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा अपने कंधों पर ले लिया था. वह उन्हें हर रोज नियमित तरीके से पढ़ाती थी. इसके लिए ऑस्कर उन्हें अलग से पैसे भी देते थे. कुल मिलाकर ऑस्कर एक पिता और पति दोनों की जिम्मेदारियों को अच्छे से निभाने की कोशिश कर रहा था.

हालांकि, डॉक्यूमेंट्री के एक भाग में ऑस्कर को दूसरे रुप भी दिखाया गया है, जिसमें वह शराब के नशे में घर आते थे और अपनी पत्नी सुजैन को पीटते थे.

Crystal Moselle (Pic: the2ndsexandthe7thart)

डायरेक्टर क्रिस्टल मोसेल की चुनौतियां

क्रिस्टल मोसेल को यह कहानी दिलचस्प लगी, तो उन्होंने इस पर डॉक्यूमेट्री बनाने का मन बनाया. हालांकि, यह आसान नहीं था. उनके सामने कई सारी चुनौतियां थी. सबसे बड़ी समस्या इन भाईयों को राजी करना था. चूंकि, इन भाईयों की उम्र इतनी नहीं थी कि वह आसानी से इसके लिए हां करते. एक बहन थी, जो मानिसक रुप से बीमार थी. पिता का भी हाल कुछ ऐसा ही था.

यह स्थिति बहुत संवेदनशील थी. बावजूद इसके मोसेल ने कोशिश की और वह कामयाब रहीं. उन्होंने हर एक मुद्दे को अपनी डॉक्यूमेंट्री में गंभीरता से उभारने की कोशिश की. डॉक्यूमेंट्री के हर भाग में संवेदनशीलता का पूरा ख्याल रखा गया. हर भाग को जीवांत बनाया गया, ताकि लोगों तक सही कहानी जा सके.

इस डॉक्यूमेंट्री की सबसे अच्छी बात यह रही कि इसके अंत में मोसेल अपने उस सवाल का जवाब भी बताने में कामयाब रहीं, जो 2010 में न्यूयार्क के फर्स्ट एवेन्यू की सड़क पर इन 6 भाईयों के भागने पर उनके जेहन में पनपा था. असल में ये भाई अपने पिता को चुनौती देते हुए अपने उस फ्लैट से भाग निकले थे, जहां वह खुफिया तरीके से बड़े हुए थे. यही कारण था कि 2010 में उन सभी को न्यूयार्क के फर्स्ट एवेन्यू की सड़क पर विचित्र पोशाक में देखा गया था.

Photos from the 2015 Sundance Film Festival in Park City, Utah (Pic: latimes)

इस डॉक्यूमेंट्री को सजीव बनाने के लिए मोसेल ने अपना सब कुछ झोंक दिया था. उन्होंने खुद के जीवन में इसके लिए कई सारे बदलाव किये. इससे पहले भी उन्होंने ‘ब्रिंग इट ऑन’ एच एंड एम, ‘दैट वन डे’ म्यू म्यू,’शापशिफिंटिंग’ कलर वार जैसी कई डॉक्यूमेंट्रीज बनाईं. इन सभी को देखकर पता लगाया जा सकता है कि फिल्मों के प्रति उनके अंदर जुनून किस हद तक भरा हुआ है.

इस तरह की दिलचस्प और सच्ची कहानी लोगों तक पहुंचाने के लिए मोसेल की पूरे विश्व में तारीफ़ हुई.

Web Title: Real Story of The Wolfpack, Hindi Article

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Featured image credit / Facebook open graph: hollywoodreporter/nypost.com

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