कई बार अपनी बात रखने के लिए हथियार उठाने से ज्यादा खतरनाक, विरोध में उठा एक छोटा कदम भी हो सकता है.

विरोध के लिए उठ रही हजारों आवाजों के सामने जमीनी स्तर पर हुई एक छोटी सी घटना इतनी प्रभावशाली होती है कि सत्ता में बैठे लोगों के लिए मुसीबत बन जाती है. ऐसा ही कुछ तब भी हुआ, जब 16 साल की फिलिस्तीनी लड़की, अहद तमीमी ने एक इजराइली सिपाही को थप्पड़ जड़ दिया!

उस दिन के बाद से तो मानों अहद की जिंदगी ही बदल गई. उस एक घटना ने उसे दुनिया भर में प्रसिद्ध कर दिया. आखिर उसने ऐसा क्यों किया और क्या हुआ उस घटना के बाद आइए जानते हैं-

ज्यादतियों ने बनाया विरोधी!

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच वेस्ट बैंक की सीमा को लेकर चल रहा विवाद कोई नया नहीं है. लगभग 50 साल से वेस्ट बैंक के इलाके को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव जारी है, जिसमें इजराइल पर गैरकानूनी तरीके से वेस्ट बैंक पर कब्जा जमाने के आरोप लगते रहे हैं.

वहीं संयुक्त राष्ट्र संघ भी इस विवादित इलाके को इजराइल द्वारा अधिकृत क्षेत्र मानता है. यहां रहने वाले फिलिस्तीनी लोगों की आए दिन इजराइली सिपाहियों से तकरार होती रहती है. यही कारण रहा कि मात्र 16 साल की उम्र में अपने भाई के साथ हुई ज्यादती ने अहद तमीमी को फिलिस्तीनी एक्टिविस्ट बना दिया.

दरअसल इजराइली सेना के एक सिपाही ने रबड़ बुलेट का इस्तेमाल कर तमीमी के छोटे भाई मुहम्मद तमीमी पर गोली चला दी, जिससे वह कोमा में चला गया. न सिर्फ इतना, बल्कि उसके घर पर आंसू गैस से हमला भी किया गया.

हालांकि, वेस्ट बैंक के विवादित हिस्से में फिलिस्तीनी युवाओं और इजराइली सैनिकों के बीच झड़प आम बात है. किन्तु, अहद तमीमी का यह मामला इजराइल और फिलिस्तीन के बीच राष्ट्रीय मुद्दा तब बन गया, जब अपने भाई पर गोली चलाने का बदला लेने के लिए अहद तमीमी ने एक इजराइली सैनिक को थप्पड़ मार दिया.

किसी भी देश के सैनिक को उस देश का सम्मान समझा जाता है और ऐसा ही इजराइल में भी है, इसलिए जब थप्पड़ का विडियो सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचा, तो अहद तमीमी की इजराइल में न सिर्फ निंदा हुई, बल्कि उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है.

गौरतलब हो कि अहद तमीमी को अपने भाई, एक 14 साल के लड़के के लिए आवाज उठाने और अपने घर में जबरदस्ती घुसे हुए सैनिक के खिलाफ गुस्सा जाहिर करने के लिए 8 महीने की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है.

Ahed Tamimi (Pic: pinterest)

अदह तमीमी का गुस्सा कितना जायज

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच हो रही लड़ाई में कुछ फिलिस्तीनी एक ऐसे क्षेत्र में रह रहे हैं, जो इजराइल के प्रशासन में आता है. वहां उन लोगों को लगातार भेदभाव और घृणा का शिकार बनना पड़ता है.

2018 की ह्युमन राइट्स रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल, वेस्ट बैंक में दो स्तरीय प्रणाली के तहत काम करता है, जिसमें फिलिस्तीनियों के साथ भेदभाव होता है. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि नीतियों में भेदभाव के कारण वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनयों के बिल्डिंग परमिट के आवेदनों को नकार दिया गया.

इजराइली प्रशासन ने फिलिस्तीनी लोगों के लगभग 381 घरों को तोड़ दिया, जिससे 588 लोग बेघर हो गए. विरोधियों को लगातार इजराइली सेना का सामना करना पड़ता है, जिसमें वक्त-बेवक्त उनके घरों में तलाशियां होती हैं.

कभी खाने के सामान की सप्लाई रोक दी जाती है तो कभी घरों पर ही हमला कर दिया जाता है. जैसा अहद तमीमी के साथ भी हुआ.

ऐसे में कोई भी इंसान अपना धैर्य खो सकता है!

Ahed Tamimi Girl Who Fight Against Israel (Pic: independent)

परिवार पहले भी करता रहा है विरोध

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब अहद और उनके परिवार ने इजराइली सेना का विरोध किया हो. अदह तमीमी और उनका परिवार पहले भी वेस्ट बैंक के शहर नबी सलेह में शांतिपूर्वक परदर्शन करते रहे हैं.

अहद की मां नरीमन तमीमी और पिता बासेम तमीमी 2009 से इजराइल के जबरन कब्जे के खिलाफ शांतिपूर्वक विरोध दर्ज कराते रहे हैं और कई तरह के प्रतिबंधों के बावजूद दुनिया को वहां के हालातों से रूबरू करवाते रहे हैं.

2012 में अहद तमीमी के पिता को एमनेस्टी इंटरनेशनल की तरफ से ‘प्रिजनर ऑफ कॉन साइंस’ का सम्मान दिया गया. यूरोपियन यूनियन ने भी उनको ह्युमन राइट्स डिफेंडर करार किया. इसके बावजूद भी उन्हें ऑस्ट्रेलिया में अपना भाषण देने के लिए वीजा नहीं दिया गया. जोकि यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि बासेम तमीमी ऐसा क्या कहने वाले थे, जो इजराइल को नागंवार था.

Ahed Tamimi Girl Who Fight Against Israel (Pic: vocfm)

300 से भी ज्यादा बच्चे हैं इजराइल की हिरासत

डिफेंस फॉर चिल्ड्रन इंटरनेशनल- फिलिस्तीन के मुताबिक इजराइली सेना की हिरासत में 300 से अधिक बच्चे हैं. वहीं 2018 की शुरूआत में मुसाब फिरास अल तमीमी नाम के एक लड़के को इजराइली सेना ने सिर्फ इसलिए मार गिराया था, क्योंकि उन्हें लगा था कि उसके पास बंदूक है.

ह्युमैन राइट्स 2018 की रिपोर्ट की मानें तो इजराइली सैनिक उन्हीं को हिरासत में लेते है, जो हिंसा के जरिए विरोध कर रहे होते हैं. जबकि, वह उन लोगों को भी नहीं छोड़ते, जो शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे होते हैं.

रिपोर्ट में ये दावा भी किया है कि वो जिन बच्चों को हिरासत में लेते हैं, उनसे बिना उनके परिजनों की उपस्थिति में सवाल किए जाते हैं और उनसे जबरन यहूदी भाषा में लिखे हुए कबूलनामे पर साइन करवाए जाते हैं.

1 जनवरी 2017 से नवंबर 2017 तक इजराइली सेना ने 62 फिलिस्तीनी लोगों को मार गिराया था, जिसमें 14 बच्चे भी शामिल थे. फिलिस्तीन में हो रही ऐसी घटनाओं पर मीडिया कवरेज कम होने के कारण कई घटनाएं तो सामने तक नहीं आ पाती हैं.

वहीं कुछ लोग अहद तमीमी की तुलना मलाला से भी करते हैं, जिसने पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपन से लड़ते हुए वहां की लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठाई थी. कहते हैं कि अहद तमीमी को इतनी कवरेज इसलिए नहीं मिल रही है, क्योंकि दुनिया भर में विरोध को केवल एक घेरे में बांध दिया गया है.

इस कारण कुछ निर्धारित देशों और समुदायों की निंदा नहीं की जा सकती है. मजबूरन अहद जैसे कितने ही बच्चों को सालों पुरानी दुश्मनी का शिकार बनना पड़ता है.

Ahed Tamimi Girl Who Fight Against Israel (Pic: commonsensewonder)

कहते हैं कि ‘जवानी के समय, जो आदतें बनती हैं वही बदलाव लाती हैं’

किन्तु, अगर इस उम्र में इजराइल और फिलिस्तीन का युवा विरोध, विद्रोह, युद्ध और नफरत के बीच अपनी आदतें बनाएगा, तो यकीनन वो आदतें भविष्य में दोनों देशों के बीच चली रही लड़ाई को और भी ज्यादा बुरा बना देंगी.

इससे अमन की आस हमेशा- हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.

क्यों सही कहा न?

Web Title: Ahed Tamimi Girl Who Fight Against Israel, Hindi Article

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