6 अगस्त 1945 का दिन, सुबह करीब सवा आठ बजे होंगे, हर रोज की तरह नए दिन के साथ सैकड़ों जिंदगियां कदमताल कर रही थीं.

तभी जापान के शहर हिरोशिमा में आसमान के ऊपर से एक जलजला आकर धरती से इतनी जोर से टकराया कि देखते ही देखते पूरा शहर खाक में मिल गया.

द्वितीय विश्व युद्ध के दौर की बात है, जब युद्ध अपने आखिरी चरण में था, लेकिन कुछ देश अभी भी दूसरे देश को अपने सामने झुकाने की मंशा लिए इसे जारी रखना चाहते थे. एेसा ही कुछ अमेरिका ने किया.

हालांकि, अमेरिका ने उस वक्त तक परमाणु हथियारों को विकसित कर लिया था, लेकिन उसके परीक्षण नहीं हो पाए थे. शायद इसलिए ही युद्ध की आड़ में अमेरिका ने मानवता की परवाह न करते हुए जापान पर इसका परीक्षण कर डाला.

तो आइए जानते हैं कि आखिर अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी पर ही क्यों किया परमाणु वार –

पहली बार परमाणु बम का इस्तेमाल

पहली बार किसी देश ने युद्ध के दौरान परमाणु बम का इस्तेमाल किया था. इस्तेमाल करने वाला देश था, अमेरिका और उसके निशाने पर था जापान.

अमेरिका का बी-29 बॉम्बर विमान जापान के हिरोशिमा शहर के आसमान में उड़ रहा था, और 6 अगस्त 1945 को उसने विश्व के पहले परमाणु बम ‘लिटिल बॉय’ को धरती की ओर छोड़ दिया. कुछ ही देर में ये धरती से टकरा गया और एक जोरदार धमाके के साथ इसने पूरे शहर को लील लिया.

अमेरिका द्वारा किए गए इस हमले में तुरंत ही लगभग 90 प्रतिशत शहर तबाह हो चुका था और लगभग 1.50 लाख लोगों की इसमें मौत हुई. वहीं हजारों लोगों ने कुछ दिनों बाद रेडिएशन के कारण दम तोड़ दिया.

अभी जापान इस सदमे से उबरा भी नहीं था कि इस हमले के 3 दिन बाद ही 9 अगस्त 1945 को जापान के दूसरे शहर नागासाकी पर अमेरिकी विमानों ने बमों की बौछार शुरू कर दी, और इसी बीच दिन के लगभग 11 बजे बी-29 बॉम्बर विमान ने 21 किलोटन प्लूटोनियम डिवाइस से भरा ‘फैट मैन‘ नामक दूसरा परमाणु बम गिराया. देखते ही देखते इस हमले में 80,000 लोगों की मौत हो गई.

जापान के दोनों शहरों पर तीन दिनों के अंदर हुए दो हमलों ने पूरे शहर को तबाह कर दिया और एक ही झटके में शहर कब्रिस्तान की भांति प्रतीत होने लगे.

इस हमले के तुरंत बाद ही जापान के सम्राट हिरोहीतो ने अमेरिका के सामने रेडियो पर आत्मसमर्पण का ऐलान कर दिया. बताया जाता है कि अगर जापान आत्मसमर्पण नहीं करता तो अमेरिका 19 अगस्त को इससे भी बड़े हमले की तैयारी में था.

अमेरिका ये जंग जीत चुका था और उसके परमाणु बमों के टेस्ट भी सफल रहे, लेकिन किस कीमत पर…?

A Mushroom Cloud Billows after Atomic Bomb Attack. (Pic: theatlantic)

यह था परमाणु हमले का कारण!

असल में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका इसमें शामिल नहीं होना चाहता था, लेकिन उसकी यह स्थिति अन्य देशों के लिए भ्रम का विषय बनी हुई थी. इसके पहले ही जापान द्वितीय विश्व युद्ध में कदम रख चुका था. अब, जबकि जापान इस युद्ध में भागीदार बन ही चुका था तो उसने ताव में आकर शक्ति का प्रदर्शन किया.

जापान ने 7 दिसंबर 1941 को अमेरिका के पर्ल हार्बर बंदरगाह पर धावा बोल दिया, जो प्रशान्त महासागर पर स्थित नौसैनिकों का अड्डा था. इस हमले के दौरान आसमानी बमबारी से अमेरिका ने अपने हजारों सैनिक खो दिए.

जापान के इस कदम से अमेरिका आग-बबूला हो गया और उसे मजबूरन द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेना पड़ा, और अमेरिका में जापान के प्रति बदले की आग सुलगती रही. अंतत: उसने जापान पर परमाणु बम से हमला कर उस त्रासदी का बदला ले ही लिया.

B-29 Bomber Plane was known as the Enola Gay. (Pic: medium)

हमले के बाद कुछ ऐसा था मंजर

अमेरिका द्वारा जापान पर किए गए परमाणु बम हमले से हिरोशिमा के करीब ड़ेढ़ लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई थी. वहीं नागासाकी के लगभग 80 हज़ार लोग बलि चढ़ गए थे. परमाणु हमले के दौरान निकलने वाली भयानक किरणों ने जापान को जितना नुकसान पहुंचाया उसकी कल्पना करना भी शायद हमारे बस में नहीं है.

जबरदस्त तापमान ने कईयों के शरीर को राख कर दिया, घर के घर यूं ही जल उठे, समुद्र के किनारे खड़ी और आसपास घूम रही किश्तियां जल उठीं और देखते ही देखते सब कुछ राख में बदल गया. तापमान और विनाशकारी विकिरण से पेड-पौधों का नामोनिशान तक मिट गया, दूर-दूर तक विराना ही विराना था.

हमले के बाद उसका असर ऐसा था कि जैसे पानी पीने वालों ने जहर पी लिया हो, लगभग सभी लोग मौत की नींद सो गए और जो बचे उन्हें खतरनाक रेडिएशन ले डूबा. मौतों का सिलसिला सालों तक यूं ही चलता रहा. आज भी परमाणु हमले के प्रभाव से लोग बचे नहीं हैं. अधिकतर कैंसर और ल्यूकेमिया से पीड़ित हैं.

इस त्रासदी के बाद जापान में जो पहला पौधा उगा था, वह कनेर का था. आज यह पुष्प हिरोशिमा का आधिकारिक पुष्प है.

Streetcars, Bicyclists, and Pedestrians on Hiroshima. (Pic: theatlantic)

नहीं मिल सका उपचार क्योंकि…

इस हमले के बाद जो लोग बच गए थे, उन्हें पूरी तरह से इलाज नहीं मिल पाया. असल में अधिकतर डाॅक्टर हमले का शिकार हो गए थे, ऐसे में इलाज करने वाला कोई नहीं था, जिंदगी बचाई जाती भी तो कैसे..

हजारों ने हमले के समय ही अपनी जान गवां दी थी. जो बचे थे उन्होंने इलाज के आभाव में अपना दम तोड़ दिया. अस्पताल व चिकित्सालय राख में तब्दील हो चुके थे. कई लोग अपने चीथड़ों को बटोरने में लगे हुए थे, लेकिन वह भी ज्यादा देर तक नहीं.

चूंकि, खून जल चुका था, इसलिए आखिर में उन्होंने भी अपना दम तोड़ दिया. एक अनुमान के मुताबिक इस हमले में 90 फीसदी डाक्टरों की मौत हो गई थी, जिसके चलते कई लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा.

Survivors of the Atomic Bomb Await Emergency Medical Treatment. (Pic: theatlantic)

अमेरिका द्वारा बरसाए गए कहर के बाद कई सालों तक जिंदगियां तबाह रहीं, लेकिन लोगों ने अपने आपको संभाला और अपनी कड़ी मेहनत व लगन के साथ शहर को फिर से खड़ा किया.

आज नित नई तकनीकों और प्रयोगों से यह देश बुलंदियों के आसमान को छू रहा है, वहीं जापान की गिनती विकसित देशों में की जाती है.

Web Title: Atomic Bombing of Hiroshima and Nagasaki by America, Hindi Article

Feature Image Credit: PinArt