मनुष्य शुरूआत से ही युद्ध करता रहा है, फिर चाहे वह अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए हो या फिर अपने साम्राज्य के विस्तार के लिए. इसके लिए उसने भांति-भांति के शस्त्रों को ईजाद भी किया. किसी जमाने में युद्ध भालों से लड़ा जाता था. फिर इसकी जगह तलवार ने ले ली. उसके बाद बंदूकों और आटोमेटिक मशीन गन का जमाना आ गया.

आजकल अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस एक से बढ़कर एक हथियार मौजूद हैं. रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि जिसके पास जितनी उन्नत टेक्नोलॉजी वाले शस्त्र होंगे, वह उतनी ही बड़ी महाशक्ति होगी. किन्तु, आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं,  जिसने बिना किसी आधुनिक अस्त्र के ना सिर्फ अपने दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, बल्कि उनके बीच जाकर उन्हें कैदी भी बना लिया.

जी, हां हम बात कर रहे हैं द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सेना के महान योद्धा जैक चर्चिल की, जिन्होंने नाजी सेना की नाक में दम कर रखा था. यही नहीं वह अपने धनुष और तलवार के बलबूते सैंकड़ों जर्मन सैनिकों को मारने के साथ-साथ उन्हें बंदी बनाने में कामयाब भी रहे.

जैक चर्चिल ने ऐसा कैसे किया आइये जानने की कोशिश करते हैं–

तीरंदाजी का शौक

जैक चर्चिल 1906 में इंग्लैंड के सुरे कॉउंटी में रहने वाले एलेक्स चर्चिल के घर जन्मे थे. आम बच्चों की तरह चर्चिल बड़े हुए और स्कूल होते हुए मैनचेस्टर रेजीमेंट का हिस्सा बने. यहां से उनकी बटालियन ने उन्हें रंगून भेज दिया गया. रंगून से जैक को मैम्यो भेजा गया, जहां उनका काम बोट के जरिए पेट्रोलिंग करना और चोर, डकैतों को पकड़ाना था.

यहीं पर उन्होंने बैगपाइप नाम का वाद्य यंत्र बजाना सीखा. कुछ दिनों में ही वह बहुत अच्छा बैगपाइप बजाने लगे थे. इसके बाद वह मिलिट्री से बोर हो गए और उन्होंने साल 1936 में ब्रिटेन लौटने पर 10 साल में ही रिटायरमेंट ले ली.

चूंकि वह एक बहुत ही शानदार तीरंदाज थे, इसलिए विश्वयुद्ध की शुरूआत से ही वह विभिन्न प्रकार की आर्करी यानी तीर अंदाजी की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहते थे. इस बीच जैक ने कुछ फिल्मों में छोटे मोटे रोल भी किए. इनमें ‘इवानहोई और थीफ ऑफ बगदाद’ जैसी फिल्मों के नाम शामिल हैं. इसी बीच 1939 में जब वर्ल्ड वार शुरू हुआ और उन्होंने अपनी तीरंदाजी के हुनर को खत्म होते देखा तो उन्होंने तय किया कि वह युद्ध का हिस्सा बनेंगे. वह सेना का हिस्सा कैसे बनें, वह यह सोच ही रहे थे, तभी सेना ने उन्हें युद्ध के लिए बुला लिया.

Jack Churchill Deviant Art (Pic: viking)

ऐसे शुरू हुई ‘फाइटिंग जैक चर्चिल’ की कहानी

साल 1940 में ब्रिटेन की सेना ने फ्रांस के डन्क्रिक के बंदरगाह के आस-पास नाजी वार सैनिकों का विभत्स स्वरुप देखा था. युद्ध का ऐसा मंजर उन्होंने इससे पहले कभी नहीं देखा था. इसी बीच यूरोप में युद्ध की अराजकता बढ़ती ही जा रही थी. वहां नाटकीय रूप में सरकारें बदल रहीं थीं. यहां तक कि कई देशों की सीमाएं और नक्शे तक बदल गए. यहीं पर जैक ने अपने हुनर का जलवा सबके सामने दिखाया और वह फेमस हो गए. इतनी विपरीत परिस्तिथियों में लड़ने के लिए उन्हें फाइटिंग जैक चर्चिल के नाम से जाना जाने लगा.

उनके पास हथियारों की कमी थी. फिर भी जैक अपने धनुष के अलावा एक चौड़ी तलवार, एक कटारी और छोटी सी रिवॉल्वर लेकर चल रहे थे. उनकी बेल्ट में ग्रेनेड यानी हथगोले थे. इसके साथ ही जैक एक छोटे से पैकेट में पानी और खाने के साथ ही कुछ गोलियां भी कैरी कर रहे थे. उन्हें एक छोटी सी सैन्य टुकड़ी का नेतृत्व करने का जिम्मा मिला था.

युद्ध के मैदान में आगे बढ़ते हुए वे सभी एक टॉवर के पास पहुंचे, उन्हें एक खाली गांव की तलाश थी. तभी दुश्मन सैनिकों की एक टुकड़ी पेट्रोलिंग करती हुई उनके पास आ गई. जैक ने टॉवर पर चढ़ कर उन्हें देखा और उन्होंने अपने सैनिकों को उसके सिग्नल देकर आक्रमण का इशारा किया. आगे साथियों में जोश भरते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं अपने तीर से उनके लीडर को मार रहा हूं तुम तैयार रहो’

इसके बाद उन्होंंने अपने तरकश से खुद के बनाए हुए बाण को निकाला और दुश्मन के लीडर पर दाग दिया. उनके इस वार से दुश्मन नेता चित्त हो गया. यह देखते ही नाजी सैनिकों ने जैक की टुकड़ी पर ताबड़-तोड़ गोलियों की बरसात कर दी, किन्तु जैक घबराए नहीं. उन्होंने अपने साथियों को आगे बढ़ने का आदेश दिया. साथ ही अपने धनुष के तीरों से दुश्मन को लहुलुहान करते रहे.

Jack Chuchill (Pic: hobbybunker)

जर्मन सैनिकों को करना पड़ा ‘सरेंडर’

टॉवर पर मौजूद उनका एक साथी उन्हें कवरिंग फायर दे रहा था. इसी बीच जैक को मशीन गन और राइफल्स के चलने की आवाजें सुनाई दे दीं. वह दुश्मन की चाल भांप चुके थे, इसलिए जल्दबाजी न करते हुए उन्होंने योजना के तहत कुछ देर के लिए चुप्पी साथ ली. दुश्मन इसको समझ नहीं पाया और आगे बढ़ने की गलती कर बैठा. इसका फायदा उठाते हुए जैक ने अपनी तलवार को दुश्मन का रक्तपान कराया.

जैक के इस रूप को देखकर पक्षीय सैनिक भी दुश्मनों पर टूट पड़े. ब्रिटिश सेना की ये टुकड़ी, जिसे जैक चर्चिल लीड कर रहे थे, वह जर्मन सैनिकों को लगातार मार रही थी. ये खौफनाक मंजर देखकर जर्मन सैनिकों ने सरेंडर करना ज्यादा उचित समझा.

खैर, यह थी शुरुआत थी, जैक को ऐसे कई और मिशन पूर करने थे.

1941 में इग्लैंड की नई कमांडो फोर्स को ज्वाइन किया. इसके बाद उन्होंने 1943 में इटली के अभियान  के दौरान दुश्मन सैनिकों की टोली में घुसपैठ की. यहां उन्होंने सैनिकों को एक मादक पदार्थ पिलाया और सुबह होते-होते 42 जर्मन सैनिकों को अपना कैदी बना लिया, वो भी अपनी तलवार के बूते.

इस दिन के बाद जैक एक लीजेंड की तरह जाने जाने लगे. उनके किस्से पूरे ब्रिटेन में मशहूर हो गए. जैक चर्चिल ने जिस बहादुरी और शौर्यता के साथ विश्वयुद्ध में जर्मन सैनिकों के छक्के छुड़ाए, वो भी सिर्फ एक तलवार और धनुष के दम पर… वह काबिले तारीफ था.

जैक के अदम्य साहस को सम्मानित करते हुए ब्रिटिश सेना ने उन्हें मिलिट्री क्रॉस और डीएसओ (डिस्टिंगुइश सर्विस ऑर्डर विद बॉर) जैसा वीरता पुरस्कार दिया. यही नहीं इस करिश्माई वीर योद्धा से लोगों को प्रेरणा मिल सके इसके लिए उनकी रियल स्टोरी पर किताब भी लिखी गई. फेमस लेखक रेक्स किंग क्लार्क द्वारा लिखी गई इस बुक का नाम है जैक चर्चिल-अनलिमिटेड बोल्डनेस.

Jack Churchill (Pic: rpmodels.pt)

रिटायरमेंट के बाद उन्होंने ब्रिटेन की टेम्स नदी के किनारे स्टीमबोट्स को सुधारकर बेचने का कारोबार शुरू किया. उनके पास करीब 11 स्टीमबोट्स थीं और इनके जरिये जैक ने रिचमंड से लेकर ऑक्सफोर्ड की यात्रा की थी. साल 1941 में उन्होंने रोजमण्ड डेनी से शादी की थी, जिनसे उन्हें दो बच्चों की प्राप्ति हुई. अंत में 89 साल की उम्र में उन्होंने इंग्लैंड के गर्म काउंटी ऑफ सर्रे में हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं.

तीर-धनुष के इस महान योद्धा के बारे में आप क्या कहेंगे?

Web Title: Bravery Lieutenant Colonel Jack Churchill, Hindi Article

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