आज से ठीक 15 साल पहले एक फरवरी 2003 को घटी एक अनहोनी ने अंतरिक्ष विज्ञान में हुई प्रगति पर प्रश्न चिह्न लगा दिया था.

वो दिन अमेरिका की नासा और भारत के लिए वाकई दुख भरा था. उसने हजारों सपनों को रौंद दिया था जो खुले अंतरिक्ष में उड़ान भरना चाहते थे.

सोलह दिन के अपने शोध अभियान के बाद कोलंबिया स्पेश शटल धरती पर लौट रहा था कि अचानक कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र पर उतरते समय उसमें आग लग गई और जमीन से 20 किलोमीटर ऊपर ही उसमें विस्फोट हो गया.

इसमें सवार भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला समेत सभी सात अंतरिक्ष यात्री मारे गए थे.

हालांकि ये कोई पहली घटना नहीं थी जिसमें अंतरिक्ष यात्रियों की मौत हुई, लेकिन धरती पर लौटते समय हुई सबसे ज्यादा मौतों का ये अपने आप में पहला मामला था.

कल्पना चावला की मौत ने कई लोगों के अंतरिक्ष यात्री बनने के सपने को एक पल में ही ख़त्म कर दिया था.

बचपन से दिल में आसमान में उड़ने का सपना लिए बड़ी हुई कल्पना चावला का यह सफ़र आखिर आखिरी सफ़र कैसे बन गया, आइए जानते हैं–

दूसरे ‘मिशन’ की जिम्मेदारी कल्पना को मिली

आपका संसार देखने का नजरिया तब बदल जाता है जब आप ऊपर अंतरिक्ष से धरती को देखते हैं. एक एस्ट्रोनॉट बनकर अंतरिक्ष की सैर करना वाकई एक यादगार लम्हा और एक सपना सच होने जैसा ही रहता है. कई बच्चे बड़े होकर अंतरिक्ष में जाना चाहते हैं. कुछ घूमने के लिए तो कुछ खोज करने के लिए.

ऐसा ही सपना सजाया था भारत की बेटी और अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने.

सन 2000 में मशहूर अमेरिकी अंतरिक्ष संस्था नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) द्वारा अपने अनुसंधान कार्यक्रमों की कड़ी में कल्पना चावला का दूसरी अंतरिक्ष यात्रा के लिए चयन किया था. इससे पहले भी कल्पना चावला अंतरिक्ष की सैर कर चुकी थीं.

कल्पना चावला ने अपने पहले अंतरिक्ष मिशन के तहत नवंबर 1997 में कोलंबिया अंतरिक्ष यान एसटीएस -87 से उड़ान भरी. इस यात्रा के दौरान उन्होंने 376 घंटे 34 मिनट अंतरिक्ष में बिताए और धरती के 252 चक्कर लगाए.

अंतरिक्ष में जाना उनके लिए हमेशा से एक सपना था. अपनी पहली अंतरिक्ष यात्रा पूरी करने के बाद आखिर में उन्होंने अपने इस सपने को पूरा कर लिया था. मिशन में उन्होंने बहुत अच्छा काम कर के दिखाया इसलिए उन्हें थोड़े ही समय बाद एक और मिशन की जिम्मेदारी दे दी गई.

इस अंतरिक्ष अभियान में सूक्ष्म गुरुत्व पर अध्ययन कर भू और अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी विकास और अंतरिक्ष यात्रियों के स्वास्थ्य जैसे विषयों को मिलाकर कुल 80 प्रयोग किए जाने थे.

कल्पना चावला एक मिशन पहले ही कर चुकीं थी. उन्हें पहले ही अंदाजा था कि अंतरिक्ष में जीवन कैसे व्यतीत करना होता है इसलिए सारा बोझ उनके कंधों पर था. उन्होंने भी कभी इसके लिए मना नहीं किया. खुले दिल से वह इस मिशन पर गईं. आखिर में लोगों से आखिरी बार मिल के और उनसे सफलता की शुभकामनाएं लेके कल्पना चावला निकल पड़ीं अपने सफर पर.

धूएं का बड़ा बादल बनाते हुए उनका अंतरिक्ष यान कुछ ही पलों में सब की आँखों से ओझल हो गया और अंतरिक्ष में चला गया.

Kalpana Chawla With Columbia Space Shuttle Crew. (Pic: wikipedia)

कोलंबिया की आखिरी ‘अंतरिक्ष यात्रा’

एक लंबे समय तक कल्पना और उनकी टीम अंतरिक्ष में रही.

उन्होंने नासा द्वारा बताए गए सारे टेस्ट को पूरा किया. हर चीज उम्मीद के अनुसार हो रही थी. उन्होंने तय समय पर सारे टेस्ट किए और अपना काम पूरा किया. एक और मिशन कल्पना के नेतृत्व में सफल रहा. उन्होंने इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया था. उनका काम अब ख़त्म हो चुका था और अब उन सब को घर वापस आना था.

अंतरिक्ष यान की पृथ्वी के लिए उड़ान के समय मौसम बिल्कुल ठीक था. इसे अपने तय समय सुबह 9:16 मिनट पर फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर पर उतरना था. उनका यान धीरे-धीरे धरती की तरफ आ रहा था. लाखों-करोड़ों नजरें यान के धरती पर उतरने का इंतजार कर रही थीं. सब कुछ ठीक लग रहा था कि तभी उनके यान में कुछ खराबी आने लगी. उनका विमान बड़ी ही तेजी से नीचे की ओर आने लगा.

उस समय यान की रफ़्तार 18 मैक यानी आवाज की गति से 18 गुना ज्यादा थी. यान के बाएं भाग के पिछले हिस्से का तापमान बताने वाले सेंसर पर संदेश नहीं दिख रहे थे और इसके 3 मिनट बाद बाएं भाग के मुख्य टायर के बॉक्स में तापमान तेजी से बढ़ने लगा. इससे यान के बाएं हिस्से के सभी तापमान सेंसरों ने काम करना बंद कर दिया.

यान 57 डिग्री के कोण पर बाईं ओर झुका गया था.

इसके 3 मिनट बाद टायरों के तापमान और उनमें हवा का दबाव बताने वाले सेंसरों ने भी काम करना बंद कर दिया था. मिशन कंट्रोल रूम से यान को संपर्क किया गया और उन्हें बताया गया कि हम आपके टायर प्रेशर के संदेश देख रहे हैं.

अंतरिक्ष यान का अंतिम संदेश कंट्रोल रूम आया ‘रोजर… एर…’ और इसी के साथ उसका कंट्रोल रूम के साथ संपर्क टूट गया. इस समय यान धरती की सतह से 61,170 मीटर ऊपर था.

इसके अगले कुछ मिनटों तक यान पर कई संदेश भेजे गए, लेकिन उनका कुछ भी जवाब नहीं आया. विमान से संपर्क नहीं हो पा रहा था.

उसकी नीचे आने की गति तय सीमा से कहीं ज्यादा थी.

किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है. कुछ पलों पहले सब के चेहरों पर ख़ुशी थी मगर अब वह सभी चेहरे सहमे हुए थे.

इसके कुछ ही देर बाद एक जबरदस्त धमाके के साथ कोलंबिया यान लगभग 2000 टुकड़ों में बंट गया. आसमान में धुंध छा चुकी थी… यान और यात्रियों के टुकड़े लगभग 207 किलोमीटर के एरिया में बिखर गए थे.

पूरी दुनिया ये हादसा देख के चौक चुकी थी. एक पल के लिए हर किसी की साँसे रुक गई थीं. एक सफल मिशन अपने आखिरी पड़ाव पर आने से पहले ही ख़त्म हो गया था. किसी को समझ नहीं आ रहा था कि उन कुछ लम्हों में आखिर हुआ क्या?

जब थोड़ा वक़्त गुज़रा तो सब के चेहरों पर निराशा और आँखों में नमी थी. इसके साथ ही कल्पना चावला और उनकी पूरी टीम एक क्षण में ही इतिहास बन गई.

Columbia Space Shuttle. (Pic: nasa)

हादसे का कारण

अपनी अंतरिक्ष यात्रा पर जाने से पहले कोलंबिया यान में एक मामूली दोष निकला था, लेकिन नासा वैज्ञानिक इस बात से पूरी तरह संतुष्ट थे कि विमान बिना कोई नुकसान के अपनी यात्रा पूरी कर लेगा.

हालाँकि, अपनी यात्रा के आखिरी क्षणों में धरती के बिल्कुल नजदीक कोलंबिया आग के गुबार में बदल गया और धरती पर आते-आते पूरी तरह से हजारों टुकड़ों में बंट गया.

एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबिया अंतरिक्ष यान की उड़ान को तकनीकी कारणों के कारण कई बार रद्द किया गया था.

यान में खराबी पाई जाने के बाद भी इसे उड़ान के लिए तैयार किया गया था. यही नासा की सबसे बड़ी चूक साबित हुई!

उड़ान के कुछ पलों बाद ही उसके प्रणोदक टैंक का एक टुकड़ा टूट गया. वह टुकड़ा सीधा यान के पिछले विंग में घुस गया. इसके कारण यान को बहुत नुक्सान हुआ. इस बात की जानकारी होने के बाद भी नासा ने कल्पना और उनकी टीम को पता नहीं लगने दी थी.

पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय यान के विंग में हुए इसी छेद से गैसें अंदर प्रवेश करने लगीं. हवा के दबाव और घर्षण से यान के बाईं ओर वाले विंग में आग लग गई और यान के अंदर का तापमान तेजी से बढ़ने लगा.

कोलंबिया के प्रोग्राम मैनेजर रहे वेन हेल ने खुलासा करते हुए कहा था कि नासा को ये पता था कि स्पेस शटल कोलंबिया धरती पर लौटते समय दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है. यान के उड़ते समय चूंकि ये इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से काफी दूर था इसलिए इस खराबी को दूर नहीं किया जा सकता था.

इन्होंने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि कोलंबिया यात्रियों को मौत से पहले अपने हेलमेट के आगे लगे शीशे को भी बंद करने तक का मौका नहीं मिला.

कहा जाता है कि तेजी से कम हो रहे हवा के दबाव के कारण सभी यात्री शायद बेहोश हो गए और इसी दौरान ये हादसा हो गया.

रिपोर्ट के अनुसार सुबह ठीक 9:00 बजे तक अंतरिक्ष यात्रियों को ये पता था कि उनका यान पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है और उसके अगले ही सेकेंड में विमान में विस्फोट हो गया.

Kalpna Chawla Inside Space Shuttle (Pic: weinspirelife)

सालों पहले हुआ वह हादसा आज बभी कई लोगों को याद है. आज भी उन्हें याद है कैसे मिशन पर जाते समय ही उन्होंने आखिरी बार कल्पना चावला की मुस्कराहट देखी थी. अगर नासा ने सुरक्षा नियमों में ढील न बरती होती तो आज शायद कल्पना चावला जिंदा होतीं और भारत का नाम ऊंचा कर रही होतीं.

वैसे, जितना बड़ा मिशन होता है… उसमें उतना ही रिस्क होता है और यह रिस्क पार करने वाले ही इतिहास में अपना नाम अजर-अमर करते हैं.

जैसे कल्पना चावला ने अपना और अपनों का नाम अमर किया. आप क्या कहते हैं, कमेन्ट-बॉक्स में अवश्य बताएं!

Web Title: Columbia Disaster The Last Journey of Kalpana Chawla, Hindi Article

Featured Image Credit: veethi/pinterest