इंसानों द्वारा बनाई गई अमूल्य से अमूल्य वस्तु भी प्रकृति की सुंदरता के आगे फीकी है. प्रकृति ने हमें वह सुंदर चीजें व जगहें दी हैं जिनका इस्तेमाल हमारे जीवन निर्वाह में तो होता ही है साथ ही यह मनमोहक चीजें हमारे मन को भी संतुष्टि पहुंचाती हैं.

फिर चाहे बात सुंदर जंगलों की हो, पर्वतों की हो, महासागर या फिर नदियों व झरनों की, यह सब प्रकृति द्वारा इंसान को दिए गए वह अनमोल तोहफे हैं जिनका कोई मोल नहीं लगा सकता.

आपको दुनिया के अलग-अलग देशों में बहुत से ऐसे स्थान मिल जाएंगे जो प्रकृति की सुंदरता के प्रतीक हैं.

पश्चिमी अफ्रीका में मौजूद कांगो नदी अपनी सुंदरता और विशालता के कारण विश्व प्रसिद्ध है.

तो चलिए क्यों न थोड़ा और करीब से जानें इस नदी के बारे में–

रिपब्लिक ऑफ कांगो से है पहचान

कांगो नदी का विस्तार लगभर पूरे रिपब्लिक ऑफ कांगो में फैला हुआ है. कांगो नदी इस कारण भी विश्व प्रसिद्ध है क्योंकि यह दुनिया के दूसरे सबसे बड़े वर्षावन के साथ साथ बहती है.

वर्षावन व कांगो नदी की वजह से इस पूरे क्षेत्र की मिट्टी काफी चिकनी रहती है. इस कारण यहां रहने वाले लोग भी चुनिंदा ही हैं.

इस क्षेत्र में केवल शिकारी व मछवारे ही रहते हैं. यहां का वातावरण भी जीवन यापन के नजरिए से सुखद नहीं माना जाता है, क्योंकि यहां पर काफी गर्मी और उमस भरा वातावरण रहता है.

यहाँ पर इंसानों की आवाजाही बहुत कम रहती है, इसलिए यह आज तक सुरक्षित है. आज भी इसकी सुंदरता बरकरार है.

‘इस’ कारण से है विश्व प्रसिद्ध

कांगो नदी के नाम के पीछे भी अपनी एक खास कहानी है.

बताया जाता है कि प्राचीन समय में जब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और रिपब्लिक ऑफ कांगो इस नदी के किनारे रहते थे तो उस समय यहां ज़ैरे का शासन चलता था.

उन्होंने ही इस नदी को ज़ैरे नाम दिया था. हालांकि बाद में इसके नाम में बहुत से बदलाव हुए मगर आखिर में इसे कांगो नाम दिया गया.

अगर समय में थोड़ा और पीछे जाएं तो पता चलता है कि करीब 1300 के समय महाद्वीपों के बहाव से पहले कांगो नदी का विस्तार करीब 7500 मील तक था. यह पश्चिमी छोर से बहते हुए गोंडवानालैंड से गुजरती थी. यह आज के समय में अफ्रीका और दक्षिणी अमेरिका के क्षेत्र हैं.

कांगो नदी अपनी घाटी के कारण काफी प्रसिद्ध है. इसकी घाटी में कई बड़ी नदियों व महासागरों का गिराव है जो इसे खास बनाता है, जैसे कि उत्तर का सहारा महासागर, दक्षिण-पश्चिम में अटलांटिक महासागर और पूर्व में अफ्रीकन नदी!

इसके क्षेत्रफल के बारे जानकारी इकट्ठी करने के लिए एक यूरोपियन इंजीनियर हेनरी मार्टन स्टैनली भी आया था, जिसने दावा किया था कि कांगो नदी की घाटी में बड़ी मात्रा में भूमि है.

उसका क्षेत्रफल बेल्जियम के आकार से 76 गुना तक अधिक है. हेनरी ने यह बात राजा लियोपोल्ड के समक्ष रखी थी, जिसके चलते साल 1885 में राजा ने उस क्षेत्र को अपनी सेना के ठहराव के लिए अपने अधीन कर लिया था.

मगर ऐसा करना मानव अधिकारों के विरुद्ध था जिस वजह से उनका भारी विरोध हुआ और आखिरकार 1908 में उन्हें इस जगह को छोड़ना पड़ा.

The Real Beauty of Congo River (Representative Pic: YouTube)

‘यह घाटी’ है कांगो नदी का स्त्रोत

अगर बात की जाए कांगो के स्त्रोत की तो इसके स्त्रोत हाईलैंड और ग्रेट रिफ्ट घाटी के पहाड़ों को माना जाता है.

इसके अलावा टांगानिका नदी और मावरु नदी भी इसके स्त्रोत के रुप में जानी जाती है. कांगो नदी के साथ जितनी भी उसकी सहायक नदियां हैं, वही कांगो को उसका विस्तार और अलग पहचान देती हैं.

ज़ाम्बिया की चंबेशी नदी भी कांगो की एक सहायक नदी है.

घाटी से निकलने के बाद कांगो बहुत लंबे सफर से होते हुए आती है. घाटी के पहाड़ों से निकलने के बाद यह दक्षिण की तांगनीका झील के साथ बहती हुई आगे बढ़ती है.

आगे आते हुए यह धीरे-धीरे चौड़ी हो जाती है. पानी का स्तर बढ़ने के बाद इसका बहाव भी तेज हो जाता है और इसकी गति बढ़ जाती है.

यहां से कांगो एक 75 मील लंबी घाटी में जाती है, जिसे नरक का द्वार भी कहा जाता है.

75 मील लंबी इस घाटी को पार करने के बाद यह उष्णकटिबंधीय वर्षावन के क्षेत्र में पहुंचती है. इस क्षेत्र में बहते समय कांगो को लुलाबा कहा जाता है. आगे चलकर यह नदी उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में समान रुप में गिर जाती है. यही कारण है कि इसके जल स्तर में कभी औचक परिवर्तन देखने को नहीं मिलता, जैसा दुनिया की अन्य नदियों में दिखता है.

यहां से आगे बढ़कर इसका गिराव सीधे रिपब्लिक ऑफ कांगो के क्षेत्र में होता है. जब यह किसानगनी शहर की सीमा में प्रवेश करती है तो लुलाबा फिर कांगो नदी बन जाती है.

इस तरह आगे बढ़ते हुए यह कांगो देश के कई क्षेत्रों से होते हुए कई सहायक नदियों को अपने साथ मिलाते हुए आखिर में अटलांटिक महासागर में विलीन हो जाती है.

Fishing Is The Main Source of Income For Africans (Representative Pic: Extraordinary Journeys)

अफ्रीकन के लिए फलदायी

अपनी भूगोलिक स्थिति के साथ-साथ कांगो नदी पारिस्थितिक तौर पर भी अफ्रीकन महाद्वीप के लिए बड़ी महत्वपूर्ण मानी जाती है.

कांगो घाटी में आपको 1000 से अधिक प्रजातियों की चिड़ियां भी मिलेंगी, जो दुनिया के किसी और कोने में नहीं पाई जाती.

साथ ही कांगो नदी में मिलने वाली 200 से अधिक प्रजातियों की मछलियां लोगों के जीवन यापन का प्रमुख साधन भी है.

इसके आसपास जो जंगली जीवन देखने को मिलता है वह शायद ही कहीं और हो. कांगो नदी अफ्रीका की वह जगह है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आया करते हैं.

Congo River: Nature’s Beauty At Its Best (Pic: 7themes)

बहरहाल अगर आपको कभी मौका मिले तो इस खूबसूरत कांगो नदी के नजारे का आनंद लेने जरुर जाएँ. इसके वर्षावनों में जाकर यहां मिलने वाले सुंदर पक्षियों को भी देखें. यकीनन ही यहाँ की खूबसूरती आपके दिल में घर कर जाएगी.

Web Title: Congo River: Nature’s Beauty At Its Best, Hindi Article

Featured Image Credit: cntraveler