दुनिया में शायद ही कोई देश ऐसा रहा हो, जिसने अपनी आज़ादी के लिए कड़ा संघर्ष न किया हो. हां, यह ज़रूर हो सकता है कि किसी को कम करना पड़ा हो और किसी को ज्यादा.

कुल मिलाकर हर देश का अपना एक अलग इतिहास रहा है!

भारत को ही ले लीजिए. यहां के लोगों को ब्रिटिशर्स के ख़िलाफ संघर्ष करना पड़ा, जोकि क्रांति के रास्ते पर चलकर आज़ादी तक पहुंचा.

खैर, जब दो देश सरहद की ज़मीन पर अपना कब्ज़ा जमाने का दावा करते हैं, तब उनकी यह कोशिश युद्ध में तब्दील हो ही जाती है. तो आईये इसी तरह की पृष्ठिभूमि से उपजे एक अनोखे युद्ध की कहानी सुनते हैं, जो न ही आसमां पर लड़ा गया और न ही बंजर जमीन पर.

यह युद्ध लड़ा गया एक ऐसे बेहद बर्फीले मौसम में, जिसमें इंसानी शरीर बर्फ की सिल्ली की तरह जम जाता है–

‘यह’ थी युद्ध की ‘असल वजह’

फॉकलैंड्स नाम का यह युद्ध दो अंग्रेजी देशों अर्जेंटीना और इंग्लैंड के बीच लड़ा गया था.

इसकी शुरुआत 2 अप्रैल 1982 को हुई. असल में फॉकलैंड्स एक आइसलैंड है, जो दक्षिण-पश्चिम अटलांटिक महासागर का हिस्सा है. 19वीं सदी की शुरुआत से ही इस आइसलैंड पर ब्रिटिश फौज का कब्जा रहा. इसका कुछ हिस्सा दक्षिण अमेरिका की सरहदों से भी जुड़ा हुआ है. इंग्लैंड के सबसे बड़े शहर लंदन से इस आइसलैंड की दूरी चौदह हज़ार किलोमीटर दूर है.

फॉकलैंड्स वॉर शुरु होने की सबसे बड़ी वजह आने वाले समय में अपना वर्चस्व कायम रखना था. अर्जेंटीना और इंग्लैंड की सेना को पता था कि अगर भविष्य में अपने देश को घुसपैठियों से सुरक्षित रखना है, तो इस बर्फीले पहाड़ पर उनका कब्ज़ा जमाना ज़रुरी है.

शायद इसलिए ही इंग्लैंड ने चौदह हज़ार किलोमीटर दूर इस चोटी पर अपने जवान तैनात कर रखे थे. शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन बात उस वक्त बिगड़ गई, जब अर्जेंटीना ने बिना किसी एलान के ब्रिटिश फौज द्वारा शासित पहाड़ पर अपने सिपाही भेजने शुरु कर दिए.

यह इंग्लैण्ड को पंसद नहीं आया और उसने मन ही मन अर्जेंटीना को सबक सिखाने का मन बना लिया.

Falkland Islands War (Pic: watchersonthewall)

जब सफ़ेद बर्फ़ की चादर हुई लाल

वैसे अर्जेंटीना का अपनी फौज को ब्रिटिश शासित फॉकलैंड्स पर भेजना थोड़ा हैरान कर देना वाला फैसला था. हैरानी वाला इसलिए, क्योंकि जिस पहाड़ी पर उसने अपने सैनिक भेजे थे, वह दूर-दूर तक बर्फ़ से ढकी हुई थी. इसके ऊपर आसमां पर उड़ने वाले हेलीकॉप्टर और ब्रिटिशर्स के झंडे के अलावा कुछ और दिखाई नहीं देता था.

एक प्रकार से यह अर्जेंटीना के लिए मददगार भी था, क्योंकि इसी बर्फ की आड़ का फायदा उठाते हुए वह अपने सिपाहियों को फॉकलैंड्स पहाड़ियों पर तैनात कर रहा था. जैसे ही ब्रिटिश सैनिकों को इसकी ख़बर लगी उसने अपने सभी जवानों को मोर्चा संभालने का हुक्म दे दिया.

ऐसे युद्धों में यह अहम होता है कि पहाड़ी के ऊपर किसका कब्जा है, क्योंकि ज्यादातर युद्धों में देखा गया है कि, जो फौज़ पहाड़ी के ऊपर पहले से कब्ज़ा जमाए बैठी होती है, उसकी जीत की संभावना बढ़ जाती है. इंग्लैंड की सेना को इसी चीज़ का फायदा मिला. उन्होंने ऊंची पहाड़ी से अर्जेंटीना की सेना पर निशाना साधना शुरु कर दिया.

कुछ ही देर में शांत फॉकलैंड्स आइसलैंड में गोलीबारी की भयानक आवाज गूंजने लगी. अगले कुछ ही घंटों में बर्फ से ढकी सफेद पहाड़ी दोनों देशों के सिपाहियों के खून की वजह से लाल नज़र आने लगी.

अर्जेंटीना सेना फॉकलैंड्स की सूनसान ठंडी पहाड़ियों में ब्रिटिश सैनिकों को लगातार चुनौती दे रही थी. हालांकि, ब्रिटिश सेना उन पर भारी पड़ रही थी. एक तो वह अच्छी पोजिशन में थे. दूसरा यह कि उनके पास ‘रॉयल एयर फोर्स’ की ताकत थी, जोकि उस समय के अच्छे सैन्य बलों में मानी जाती थी.

इसके दम पर इंग्लैंड ने बैटल ऑफ ब्रिटेन वॉर में नाज़ी सेना के ख़िलाफ एक अहम जीत हासिल की थी.

Falkland Islands War (Pic: army)

74 दिनों तक लगातार चला घमासान

‘रॉयल एयर फोर्स’ के आते ही ब्रिटिश और ज्यादा घातक हो गए. बावजूद इसके 74 दिनों तक यह युद्ध चला. इस युद्ध में दोनों देशों ने अपनी ताक़त झोंक दी थी. दोनों देशों के जवान मारे जा रहे थे और उससे कहीं ज़्यादा घायल हो रहे थे, लेकिन पहाड़ी के निचले हिस्से में होने के कारण अर्जेंटीना के सिपाहियों की जान अधिक जा रही थी.

हालात बुरे तब हो गए, जब पहाड़ी के नीचे तैनात अर्जेंटीना के सैंकड़ो सिपाहियों को इंग्लैंड आर्मी के जवानों ने चारों तरफ से घेर लिया था. अर्जेंटीना सेना के सामने आगे कुआं और पीछे खाई वाली नौबत आ गई थी.

अब बात वहां तक पहुंच गई थी, जहां अर्जेंटीना सेना के अधिकारियों को आखिरी फैसला लेना था.

अगर अर्जेंटीना के सिपाही गलती से भी गोलियां चलाने की भूल करते, तो ऊपर बैठी इंग्लैंड आर्मी उन्हें ताबड़तोड़ गोलियों से भून सकती थी. ‘रॉएफ’ ने कुछ इस तरह से अर्जेंटीना के सैनिकों को टारगेट किया कि उन्हें अपने घुटने टेकने ही पड़े. अर्जेंटीना आर्मी के आला अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए अपनी बंदूकें बर्फ की सफेद चादर पर रख दीं.

अब फैसला ब्रिटिश आर्मी को लेना था कि वह अर्जेंटीना के सिपाहियों के सरेंडर को अपनाता है या नहीं. बहरहाल, आपस में काफी विचार विमर्श के बाद ब्रिटिश सेना ने अर्जेंटीना के सिपाहियों के कमज़ोर सरेंडर पर अपनी मज़बूत जीत की मुहर लगा दी थी. इस लड़ाई में अर्जेंटीना के करीब 600 व ब्रिटिश के 200 सैनिकों ने अपनी जान गंवा दी थी.

Falkland Islands War (Pic: itv)

कंपकपाती सर्दी के बीच महीनों तक चली इस लड़ाई में ब्रिटिश आर्मी ने जीत का परचम लहरा दिया था. आज भी इस युद्ध की खौफ़नाक यादें कई साल गुज़रने के बाद भी दोनों देशों के लोगों को रुलाती हैं.

इस युद्ध से जुड़ी कोई अन्य जानकारी आपके पास है, तो नीचे दिए कमेंट बॉक्स में ज़रुर लिखें.

Web Title: Falkland Islands War, Hindi Article

Featured Image Credit: cafdispatch