द्वितीय विश्व युद्ध इतिहास का वह पाठ है जिसने पूरी दुनिया ही बदल के रख दी थी. कई सालों तक चले उस युद्ध में कितने ही लोग मारे गए थे.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान कितने ही हथियारों का भी जन्म हुआ और साथ में उन हथियारों को चलाने वालों का भी.

आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन स्नाइपर के बारे में जिन्होंने विश्व युद्ध में और उसके बाद की लड़ाइयों में दुश्मन को दूर से ही गोलियों से भून डाला था.

तो चलिये जानते हैं ऐसे खतरनाक स्नाइपरों के बारे में –

वाइट डेथ

जब बात दुनिया के सबसे प्रसिद्ध स्नाइपरों की होती है तो सबसे पहला नाम वाइट डेथ का ही लिया जाता है. फ़िनलैंड के करेलिया गाँव के सीमो हायहा का नाम ही वाइट डेथ था. वह कोई फौजी के परिवार से नहीं बल्कि एक आम किसान हुआ करते थे.

1939 में जैसे ही रूस ने फ़िनलैंड पर हमला किया मजबूरन सीमो हायहा को देश की रक्षा करने के लिए जंग के मैदान में उतरना पड़ा.

सीमो हायहा सेना में एक स्नाइपर के तौर पर तैनात था. जैसे ही उन्होंने देखा कि रूसी सैनिक उनकी धरती पर आ रहे हैं, उन्होंने अकेले ही उनसे लड़ने का मन बना लिया.

उन्होंने अपने लिए खास सफ़ेद रंग के कपड़े बनवाए ताकि कोई भी उन्हें बर्फ में छिपा हुआ न देख सके. इसके बाद वह चुपके से जाकर बर्फ में छिप जाते और वहीं से रूसी सैनिकों पर हमला करते.

सीमो हायहा रोज बर्फ में छिप कर रूसी सैनिकों को अपना शिकार बनाते. उनके नाम का खौफ सा बन गया था. उन्होंने सीमो हायहा को वाइट डेथ का नाम दिया.

जब जंग ख़त्म हुई तो पता चला कि सीमो हायहा ने तब तक करीब 500 रूसी सैनिकों को मार गिराया था. इस जंग के दौरान उन्हें सिर्फ एक ही बार दुश्मन की गोली छू पाई थी.

White Death (Pic: reddit)

इवान सिदोरेंको

इवान एक बहुत ही रोमांच पसंद व्यक्ति थे. वह हमेशा ही एडवेंचर वाला कामा करना चाहते थे. इसलिए उन्होंने कॉलेज छोड़ सेना में जाने का फैसला किया.

सेना में जाकर भी उन्हें कोई ख़ास मजा नहीं आ रहा था. उनकी रोजाना की जिंदगी एक जैसी ही चल रही थी. इसलिए उन्होंने फिर निशानेबाजी करना शुरू किया.

उनका निशाना बहुत ही अच्छा था. उसे देखते हुए उनके सीनियर अधिकारी उनकी सराहना करने लगे. इसके बाद उनके स्नाइपर की एक टीम बनाने के लिए कहा.

उन्होंने एक टीम बनाई और दूसरे विश्व युद्ध में अपनी सोवियत स्नाइपर टीम लेकर जर्मन सैनिकों को मारने निकल गए.

इवान की बनाई टीम इतनी बढ़िया थी कि जर्मन के सबसे बढ़िया सैनिक भी उनके आगे नहीं टिक पाए. इवान की टीम को एक गोली भी नहीं छू पाई थी.

कहते हैं कि जंग ख़त्म होने तक अकेले इवान ने ही 500 से ज्यादा जर्मन सैनिकों को मार दिया था.

         Ivan Sidorenko (Pic: flickr)

क्रिस काइल

अमेरिकी स्नाइपर में जो सबसे प्रसिद्ध नाम है वह शायद क्रिस काइल का ही होगा. यह मुकाम उन्हें यूँ ही नहीं मिला था. यह मुकाम उन्होंने खुद को मौत के करीब रखकर पाया था.

दरअसल क्रिस अमेरिकी सेना का हिस्सा थे फिर उन्हें इराक में एक मिशन पर भेज दिया गया.

वहीं पर कुछ सालों तक उन्होंने अपनी सेवाएं दीं. इराक में यह पता लगाना बहुत मुश्किल होता था कि कौन दुश्मन और आम नागरिक था. ऐसे में कई निशानेबाजों से गलती हो जाती थी.

हालांकि क्रिस ने कभी भी यह गलती नहीं की. उनका निशाना इतना पक्का था कि हर दुश्मन को उन्होंने अपनी गोली का शिकार बनाया.

कहते हैं कि इराक में उन्होंने करीब 255 दुश्मनों को अपने सटीक निशाने से जहन्नुम पहुंचाया. इस कारण ही हॉलीवुड में उन पर ‘अमेरिकन स्नाइपर’ नामक फिल्म भी बनाई गई.

Chris Kyle (Pic: time)

निकोलाई यकोव्लेविच

निकोलाई यकोव्लेविच रूसी सेना के एक बेहतरीन स्नाइपर थे जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अपनी सेवाएं दी थीं. उन्होंने अपने साहस और प्रतिभा का असली परिचय स्टालिनग्राड के युद्ध में दिया.

उस समय जर्मन सेना रूस के अंदर तक घुस गई थी. धीरे-धीरे वह स्टालिनग्राड तक आ पहुंची थी. रूस के तानाशाह स्टॅालिन ने पीछे हटने से इंकार कर दिया था.

निकोलाई और उनकी टुकड़ी जर्मन सैनिकों की बड़ी सी टुकड़ी के साथ लड़ने लगी. निकोलाई एक स्नाइपर की भूमिका निभाते हुए जर्मन सैनिकों को मारने लगे.

निकोलाई को ख़त्म करने के लिए जर्मन भी अपना एक ख़ास स्नाइपर लेकर आए. हालांकि जर्मन स्नाइपर निकोलाई को मार नहीं पाया. निकोलाई ने उस स्नाइपर को भी मारा और साथ में रूस के सैनिकों को जीत भी दिलाई.

महीनों तक चली उस लड़ाई में निकोलाई ने करीब 200 सैनिकों को अपना शिकार बनाया था.

                         Nikolay Yakovlevich Ilyin (Pic: gazetacrimea)

व्लादिमीर निकोलेविच

यह अपनी खास रणनीतियों के लिए जाने जाते थे. ये हमेशा दो-दो स्नाइपर की टीम बनाते और फिर दुश्मन पर हमला करते.

उनकी यह रणनीति बहुत ही कारगर थी. इसके जरिए ही वह दुश्मन सेना के लोगों को बिना कोई हानि हुए मार डाल देते थे. कहते हैं कि उनकी इस काबिलियत के कारण ही उन्हें रूस के सबसे प्रसिद्ध और अच्छे स्नाइपर में से एक माना जाता था.

दूसरे विश्व युद्ध में सोवियत संघ के दुश्मन यही दुआ करते थे कि कहीं वह व्लादिमीर की गोली का निशाना न बन जाएँ. उनके दुश्मनों ने कितनी ही कोशिश की खुद को बचाने की मगर वह व्लादिमीर की तेज नजरों से खुद को बचा न सके.

दूसरे विश्व युद्ध के अंत तक उन्होंने करीब 456 लोगों को अपनी गोली का निशाना बनाया था.

ज़हाँग ताओ फैंग

ज़हाँग ताओ फैंग चीन का सबसे अच्छा स्नाइपर था. कहते हैं कि उसके निशाने के आगे कोई नहीं टिकता था.

चीनी सेना में सेवाएं देते हुए ज़हाँग ताओ फैंग ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कोरियाई युद्ध में निभाई. आकड़ों के अनुसार उसने करीब 214 लोगों को मौत के घाट उतारा, वो भी महज एक महीने के अंदर. यह तो केवल सामने आये आंकड़े हैं… कहते हैं कि उसने इससे भी ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतारा था.

Zhang Taofang (Pic: mensxp)

फ्योदोर

फ्योदोर का जन्म 2 मार्च 1908 को रूस में हुआ था. द्वितीय विश्व युद्ध के समय उन्होंने सोवियत संघ की ओर से लड़ाई में भाग लिया था. कहते हैं कि उन्होंने 429 लोगों को अपनी गोली का शिकार बनाया.

फ्योदोर रेड आर्मी में और सोवियत का सबसे ख़ास स्नाइपर माना जाता था.

जंग में उसने अपने निशाने से कई अहम मोर्चों पर रूस का बचाव किया. इससे पहले कि दुश्मन पास आता वह उन्हें गोली से उड़ा देते.

इसे देखते ही दुश्मन समझ जाता था कि रूस की नजर उन पर है. यही कारण था कि कोई भी उनके सामने आने से डरता था.

Fyodor Okhlopkov (Pic: tapatalk)

वसीली जाइटसेव

वसीली जाइटसेव का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था. चेल्याबिंस्क क्षेत्र में येलेनोव्स्क गांव में रहने वाले इस शख्स ने बहुत छोटी उम्र से ही निशानेबाजी शुरू कर दी थी. आगे चलकर यही इनका पेशा बन गया और ये एक बेहतरीन स्नाइपर बने.

जब दूसरा विश्व युद्ध हुआ तो ये रूस की रेड आर्मी में भर्ती हो गए. जिसके बाद उन्होंने जर्मन सैनिकों के साथ जंग लड़ी. जर्मन सेना बहुत बड़ी थी मगर वसीली ने इनसे लड़ने में कभी हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी बंदूक उठाई और एक-एक कर 200 से ज्यादा जर्मन सैनिकों को अपना निशाना बनाया.

Vasily Zaytsev (Pic:  anmysite)

बर्ट स्नाइपर, अमेरिका

वियतनाम की जंग में घने जंगल के अंदर भी दुश्मनों को निशाना बनाने वाले बर्ट उस समय के सबसे बढ़िया स्नाइपर थे.

वियतनाम के घने जंगलों में अमेरिकी सैनिकों के लिए दुश्मन को खोजना ही एक बहुत बड़ी चुनौती होती थी… उन्हें मारना तो दूर की बात थी.

हालांकि बर्ट की तेज नजरों से कभी भी कोई दुश्मन नहीं बच पाया. उन्होंने एक-एक कर सभी दुश्मनों को ढेर कर दिया. वियतनाम की मुश्किल परिस्थितियों में भी उन्होंने 100 से ज्यादा दुश्मनों को मार गिराया था.

Bert (Pic: chuckmawhinney)

तो यह थे दुनिया के कुछ सबसे बेहतरीन स्नाइपर. इनकी नजरें इतनी तेज थीं कि कोई भी दुश्मन इनकी नजरों से बच नहीं पाया.

यूं तो फौज में प्रत्येक सैनिक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, मगर स्नाइपर का काम इनसे अलग और थोड़ा मुश्किल होता है.

Web Title: Famous Snipers of World In The World, Hindi Article

Featured Image Credit: theintercept