एक समय था जब आज की तरह ढ़ेरों आधुनिक बंदूकें नहीं हुआ करती थी. लोग तीर-कमान और तलवारों से लड़ाई किया करते थे, लेकिन बारूद के आविष्कार ने सब कुछ बदल दिया. उस आविष्कार के बाद तो मानो दुनिया भर में खलबली सी मच गई!

देखते ही देखते वह तेजी से जलने वाला बारूद हथियार बनाने में इस्तेमाल होने लगा. आज आलम यह है कि सारी दुनिया इस बारुद के ढ़ेर पर बैठी है. आये दिन इसका प्रयोग करके कोई न कोई नया हथियार जन्म ले रहा है.

तो आईये जानने की कोशिश करते हैं कि इसका आविष्कार हुआ कैसे और किसने किया–

चीन में हुई बारूद की खोज?

बारूद का आविष्कार पक्के तौर पर किसने किया था, यह आज भी एक विवादित मुद्दा है. इस रहस्य से आज तक पर्दा नहीं उठ सका.

हां! अटकलों का बाजार जरुर गर्म रहा इसकी खोज को लेकर…

बारूद की खोज के लिए सबसे पहला नाम चीन के एक व्यक्ति ‘वी बोयांग‘ का लिया जाता है. कहते हैं कि सबसे पहले उन्हें ही बारूद बनाने का आईडिया आया. माना जाता है कि वी बोयांग ने अपनी खोज के चलते तीन तत्वों को मिलाया और उसे उसमें से एक जल्दी जलने वाली चीज़ मिली. बाद में इसको ही उन्होंंने ‘बारूद’ का नाम दिया.

300 ईसापूर्व में ‘जी हॉन्ग’ ने इस खोज को आगे बढ़ाने का फैसला किया और कोयला, सल्फर और नमक के मिश्रण का प्रयोग बारूद बनाने के लिए किया. इन तीनों तत्वों में जब उसने पोटैशियम नाइट्रेट को मिलाया तो उसे मिला दुनिया बदल देने वाला ‘गन पाउडर‘!

अपनी खोज की विधि को उसने अपनी किताब में भी लिखा.

‘जी हॉन्ग’ की उस किताब को कई वैज्ञानिकों ने पढ़ा, पर उनमें से सिर्फ एक ही व्यक्ति को सफलता हाथ लगी.

उस व्यक्ति ने ‘जी हॉन्ग’ की विधि के अनुसार काम किया, लेकिन बीच में उससे एक भूल हो गई, जिसके कारण वहां एक बहुत बड़ा धमाका हुआ. कहते हैं कि धमाका इतना जबरदस्त था कि प्रयोग करने वाले व्यक्ति का पूरा मुंह ही आग में जल गया था. उसका घर तक आग में तबाह हो गया था.

वहीं, कुछ धारणाओं की मानें तो चीन में गन पाउडर का आविष्कार एक गलती के रूप में हुआ था. जब वह बन गया तो उन्हें खुद भी नहीं पता था कि उसका इस्तेमाल कैसे करें. इस कड़ी में उन्होंने उसे अपने तीरों में लगा कर दागना शुरू कर दिया.

धीरे-धीरे इसका विस्तार हुआ और चीन ने बारूद के इस्तेमाल के चक्कर में पहला रॉकेट भी बना लिया.

History Of Gunpowder (Pic: linkedin)

आधुनिक हथियारों का जन्मदाता

बारूद पर 13 वीं सदी तक चीन का ही अधिकार रहा. माना जाता है कि चीन ने इस बात को गुप्त रखा था. किन्तु धीरे-धीरे दुनिया भर में एक नए आधुनिक आविष्कार की बात तेज़ी से फैल गयी. जब दुनिया को इसका पता चल गया तो चीन ने इसका फायदा उठाया और इसे अपने व्यापार का एक हिस्सा बना लिया.

अंग्रेजों और फ़्रांस की सेना को चीन ने बारूद बेचना शुरू कर दिया. बारूद के इन दोनों खरीदारों के लिए यह एक नई चीज़ थी, जो उन्हें जंग में मदद कर सकती थी.

समय के साथ बारूद के इस्तेमाल के लिए हथियार बनने लगे. तोप में बारूद या गन पाउडर का बेहिसाब इस्तेमाल होने लगा. कहा जाता है कि शुरूआती दौर में गन पाउडर को तोपों में इस्तेमाल किया जाता था. दुश्मन तो इसकी आवाज़ सुनकर दूर से ही काँप जाता था.

गन पाउडर का असली खेल तब शुरू हुआ, जब 15 वीं शताब्दी में पहली बार इसे बंदूक के लिए इस्तेमाल किया गया. उस दिन के बाद से हथियारों का एक नया जन्म हुआ और यह आम हो गया.

Modern Day Weapons (Pic: thetrace)

‘मॉडर्न डे वॉर’ का बना कारण

जब इंसानों के हाथों में बंदूक आने लगी तो वह पहले से भी ज्यादा लड़ने लगे. जंग का विस्तार हो गया. तोपों को भी एक अलग तरीके से इस्तेमाल किया जाने लगा. धीरे-धीरे तोप सिर्फ ज़मीन पर ही नहीं, बल्कि पानी की जंग में भी इस्तेमाल की जाने लगी. जहाजों में इन्हें लादकर ले जाया जाता था और दूर से ही दुश्मन को ख़त्म कर दिया जाता था.

कहा तो यहां तक जाता है कि वास्को डी गामा ने भी भारत के बंदरगाहों पर अपने तोप लगे जहाज़ों के बलबूते ही कब्ज़ा किया था.

यूरोप में तोपों का उपयोग धड़ल्ले से हो रहा था. समय के साथ पूरा विश्व ही अपनी जंग में बारूद का इस्तेमाल करने लगा. रोज नई बंदूकें बनने लगीं. बारूद के इस्तेमाल में बिजली की रफ़्तार से बदलाव हुआ.

वक़्त बदला लेकिन बारूद की अहमियत वही रही. आज ‘मॉडर्न डे वॉर’ में भी बारूद ही है, जो गोलियों में इस्तेमाल हो रहा है. कहते हैं कि 19वीं सदी से गोलियों के अंदर बारूद भरा जा रहा है, जो आज तक नहीं बदला है.

आज होने वाले तमाम युद्धों के लिए भी कई बार बारुद के इस आविष्कार को ही दोषी माना जाता है. कहा जाता है  कि अगर यह नहीं आता तो इतनी खतरनाक लड़ाईयां कभी नहीं होती.

History of Gunpowder (Pic: aame)

बारूद भले ही किसी भी कारण से खोजा गया हो, लेकिन इसने किसी न किसी प्रकार से मानवता पर बुरा असर जरूर डाला है. आज लगभग हर देश बंदूकों और गोलियों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहा है.

परिणाम यह है कि विश्व बारुद के एक ऐसे ढ़ेर पर बैठा हुआ है, जहां आग की एक चिंगारी किसी भी पल सब कुछ राख कर सकती है.

Web Title:History Of Gunpowder, Hindi Article

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