देश की शान और राष्ट्रीय धरोहर संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और ताजमहल के बारे में कौन नहीं जानता!

ये तीनों भारत के ऐतिहासिक स्थल हैं, जो पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं. आज की तारीख में अगर हम आप से कहें कि इन्हें भी बेचा जा सकता है, तो शायद वह आप हंस पड़ें.

किन्तु, क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा आदमी भी हुआ, जिसने ऐसा कर दिखाया.

उसने राष्ट्रपति भवन, संसद, लाल किला और ताजमहल का बाकायदा सौदा करते हुए बताया कि इस दुनिया में कुछ भी संभव है. यह आदमी कोई और नहीं ठगी का पर्याय कहा जाने वाला मिस्टर नटवरलाल था!

नटवरलाल अपनी ठगी करने के स्टाइल के लिए भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी ख़ासा मशहूर रहा. वह कितना शातिर था, इसको इसी से समझा जा सकता है कि उसने प्यार की निशानी ताजमहल को एक नहीं… दो भी नहीं बल्कि तीन बार बेच डाला.

तो चलिए भारत के सबसे बड़े इस ठग की ठगी वाली कहानी को जानते हैं–

पूर्व पीएम के नाम पर की ‘ठगी’

नटवरलाल नाम के इस जालसाज ने एक बार भारत की आयरन लेडी इंदिरा गांधी और पूर्व पीएम राजीव गांधी के नाम पर भी ठगी की थी. उसने इसके लिए दिल्ली के कनाट प्लेस की एक घड़ी की दुकान को चुना था. दरअसल, उस जमाने में राजीव गांधी का समय ठीक नहीं चल रह था. इसकी चर्चा आए दिन अखबार में छपती ही रहती थी.

नटवरलाल ने इसे ही अपना हथियार बनाया. वह घड़ी की दुकान में जाता है और दुकान के मालिक से कहता है कि वह नारायण दत्त तिवारी यानी कि वित्तमंत्री का पीए है. वह उससे कहता है कि राजीव जी का बुरा वक्त चल रहा है, इसलिए उन्होंने कांग्रेस के सभी वरिष्ठ सदस्यों की मीटिंग रखी है. इस मुलाकात में वह सभी को भेंट स्वरूप घड़ी प्रदान करना चाहते हैं.

आप मुझे महंगी और टिकाऊ घड़ियां दे दीजिए… पेमेंट ड्राफ्ट द्वारा की जाएगी. एक साथ 93 घड़ियों के लालच में आकर वह उसे घड़ियां देकर अपने एक नौकर को उसके साथ पेमेंट का ड्राफ्ट लेने भेज देता है. अगले दिन जब वह बैंक में उस ड्राफ्ट को भुनाने जाता है, तो उसे वहां जाकर पता चलता है कि उसके साथ ठगी हुई है.

असल में वह ड्राफ्ट नकली था!

Natwarlal (Pic: todaysamachar.in)

…आखिर कैसे बेच डाली उसने ‘संसद’?

वह कितना बड़ा ठग था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने भारत के बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों से ताल्लुक रखने वाले लोग टाटा, बिरला, और अंबानी तक को नहीं छोड़ा.

हद तो तब हो गई, जब उसने राष्ट्रपति भवन, ताजमहल और संसद तक को बेच दिया. दिलचस्प बात तो यह थी कि जब उसने संसद को बेचा, उस वक्त सारे सांसद वहीं उपस्थित थे.

बड़ा सवाल यह था कि उसने ऐसा कैसे किया?

असल में वह बचपन से ही दूसरों के हस्ताक्षरों की नकल बनाने में उस्ताद था. कहते हैं कि चूंकि वह शुरूआत में पेशे से वकील बना, इस कारण उसे झूठ बोलना पड़ता था. आगे यह उसकी आदत बन गई और उसकी ठगी का हथियार भी.

इसी का फायदा उठाते हुए उसने उस समय राष्ट्रपति रहे राजेंद्र प्रसाद के हस्ताक्षर की नकल करते हुए अपनी संसद बेचने जैसे कारनामे को अंजाम दिया. इस तरह नटवर 1970-90 तक ठगी में सक्रिय रहा. उस पर जालसाजी करने के इल्जाम में देश के 8 राज्यों में करीब 100 ठगी के केस दर्ज थे.

यह तो वह मामले थे, जिनसे पर्दा उठा. सैंकड़ों केस तो ऐसे थे, जो कभी सामने ही नहीं आए.

Tajmahal (Pic: Holidify)

कईं बार जेल में डाला गया, लेकिन…

ऐसा भी नहीं कि वह पकड़ा ही नहीं गया. पर चूंकि वह वेश-भूषा बदलने में खूब माहिर था. इसलिए हर बार भाग निकलता था. इसी क्रम में वह 85 साल के आसपास रहा होगा, जब एक बार उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल से कानपुर में पेशी के लिए ले जाने के लिए पुलिस के दो हवलदार भेजे गए. वे उसे लेकर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंचे.

आम कैदियों की तरह वह हवलदारों के साथ ट्रेन का इंतजार कर रहा था. स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर काफी भीड़ थी. इसका फायदा उठाते हुए उसने नटवरलाल ने सांस फूलने की एक्टिंग शुरू कर दी और एक सिपाही को दवा लाने की बात कही. उसने हवलदार से कहा कि बेटा मुझे दवा ला दो मेरे पास पैसे नहीं हैं. जेल में मेरे रिश्तेदार आएंगे तो मैं आपको ये पैसे वापस लौटा दूंगा.

हवलदार उसके झांसे में आ जाता है और दवा लेने चल देता है. जबकि, उसकी पत्नी को मरे काफी समय हो गया था और उसके परिवार वाले उसे पसंद ही नहीं करते थे.

अब बारी दूसरे सिपाही की थी. नटवरलाल ने पेशाब लगने का बहाना बनाया और कहा कि बेटा तुम पुलिस वाले हो और वर्दी में भी. अगर तुम रस्सी पकड़े रहोगे तो मेरा नंबर जल्दी आ जाएगा. उम्र हो चली है और इस आयु में ऐसी शिकायत बढ़ ही जाती है और रहा नहीं जाता. कांस्टेबल उसके झांसे में आ जाता है और रस्सी पकड़कर बाहर खड़ा रहता है.

इसी बीच भीड़-भाड़ में नटवरलाल कब अपनी रस्सी खोलता है और कब वहां से नौ दो ग्यारह हो जाता है, किसी को इसकी कानों कान खबर ही नहीं लगी.

Natwarlal in Jail representative (Pic: TOI)

गांव वाले मानते हैं ‘रॉबिनहुड’, क्योंकि…

नटवरलाल का असली नाम मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव था, किन्तु अपने कारनामों के कारण वह कुछ इस तरह फेमस हुआ कि लोग उसकी असली पहचान तक भूल चुके थे. इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात तो यह थी कि अपनी जालसाजी के दम पर बचपन में ही उसने अपने पड़ोसी के खाते से धन की निकासी की और पकड़ा गया था… बावजूद इसके यह हैरान करता है कि उसके गांव बांगड़ के लोग उसे अपना रॉबिनहुड मानते थे.

उनका कहना है कि वह अमीरों को लूटता था और गरीबों में बांटता था. उसने कभी भी किसी पर हाथ नहीं उठाया. कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि बिहार से तीन ही महान हस्तियां हुईं एक राजेंद्र प्रसाद, जयप्रकाश नारायण और तीसरा नटवरलाल.

वह किस तरह मृत्यु को प्राप्त हुआ, इसका भी कहीं सटीक जवाब नहीं मिलता. उसके भाई गंगा प्रसाद की मानें तो नटवरलाल की मौत साल 1996 में रांची में हुई थी. जबकि, उसके वकील का कहना है कि नटवरलाल की मृत्यु साल 2009 में हुई थी.

बहरहाल, चालाकी और ठगी का दूसरा नाम बन चुके नटवरलाल की कहानी बहुत ही दिलचस्प है. यही वजह है कि उसकी कहानी पर बहुत सी किताबें और फिल्में भी बनी हैं.

Imran Hasmi as a Natwarlal (Pic: Livemint)

साल 1979 में आई फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का किरदार भी उसकी कहानी पर बेस्ड था. वहीं साल 2014 में रिलीज हुई बॉलीवुड स्टार इमरान हाशमी की फिल्म राजा नटवरलाल भी उसी की कहानी से प्रेरित थी.

Web Title: India’s Greatest Conman Natwarlal, Hindi Article

Feature Image Credit: TripAdvisor