जब भी हम चिड़ियाघर या वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी जाते हैं, तो हर किसी को सबसे ज्यादा एक्साइटमेंट टाइगर को देखने की रहती है. टाइगर की एक झलक ही दिल में रोमांच पैदा कर देती है.

टाइगर वो जानवर है जो हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है… कभी अपनी विलुप्त हो चुकी प्रजातियों के कारण, तो कभी घटती जनसंख्या के कारण. वहीं, टाइगर को ख़ास महत्व इसलिए भी दिया जाता है क्योंकि यह भारत का राष्ट्रीय जानवर होने के साथ बांग्लादेश, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, म्यांमार और साइबेरिया का भी राष्ट्रीय पशु है.

तो चलिये आज आपको बताते हैं इस ऑल टाइम पॉपुलर जानवर, टाइगर के बारे में कुछ जाने-अनजाने तथ्य–

भीतरी त्वचा भी होती है धारीदार

कभी आपने सोचा है कि टाइगर एक दूसरे को कैसे पहचान पाते हैं? दरअसल, टाइगर की सबसे बड़ी पहचान होती है उनके शरीर पर बनी धारियां. इन धारियों की मदद से ही टाइगर एक दूसरे की पहचान कर पाते हैं. जैसे हर व्यक्ति के पास अलग-अलग उँगलियों के निशान होते हैं उसी तरह बाघ के शरीर पर अलग-अलग धारियां होती हैं, जो उनकी अलग पहचान बताती है. किसी भी एक टाइगर की धारियां दूसरे से कभी नहीं मिलती.

ये धारियां सिर्फ उनके ऊपरी हिस्से तक ही नहीं होती जो हमें नजर आता है बल्कि यह उनकी खाल में भी बनी होती हैं. टाइगर की यह धारियां सिर्फ उन्हें अलग पहचान ही नहीं देती, यह साथ में उसे शिकार करने में भी मदद करती हैं. इनके कारण शिकार का पीछा करते समय वह झाड़ियों के बीच इस प्रकार छिपा रहता है कि शिकार उसे देख ही नहीं पाता और उनका भोजन बन जाता है.

Tigers Have Stripes Even On Their Skins (Pic: alphacoders)

शिकार करने का तरीका है अनोखा!

ज्यादातर टाइगर रात में शिकार करना पसंद करते हैं, क्योंकि रात में इनके देखने की क्षमता इंसान के मुकाबले छह गुना बढ़ जाती है. अपनी इस खूबी के कारण यह रात के अँधेरे में दिन से भी ज्यादा घातक बन जाते हैं.

बाघ बड़ी एकाग्रता और धीरज से शिकार करता है. वह अक्सर पीछे से हमला करता है. वैसे तो बाघ 65 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है पर भारी-भरकम शरीर के कारण वह बहुत जल्दी थक भी जाता है. वह शिकार का लंबी दूरी तक पीछा नहीं कर सकता इसलिए वह छिप कर उनका इंतज़ार करता है. वह शिकार के बहुत निकट तक पहुंचता है और फिर एक दम से उस पर कूद पड़ता है. यदि कुछ गज की दूरी में ही शिकार को दबोच न सका, तो वह उसे छोड़ देता है.

वैसे, हर बीस प्रयासों में उसे औसतन केवल एक बार ही सफलता हाथ लगती है क्योंकि कुदरत ने बाघ की हर चाल से बचने की समझ शिकार बनने वाले जानवरों को भी दी है.

बाघ अगर भूखा हो तो एक रात में 27 से 30 किलो तक मांस खा सकता है पर ज्यादातर अपने एक बार के खाने में यह पांच किलो मांस ही खाते हैं. वहीं, अगर उनका कुछ भोजन बच जाता है, तो उसे बाद में खाने के लिए उसे पत्तों से ढक देते हैं.

Tiger Hide Themselves In Bushes While Hunting (Pic: vocativ)

अकेले रहना पसंद करते हैं!

टाइगर अधिकतर अकेले ही रहना पसंद करते हैं. वह अपने शिकार के लिए जंगल में घूमते रहते हैं. हर बाघ का अपना एक निश्चित क्षेत्र होता है जिसमें किसी दूसरे टाइगर को घुसने की आजादी नहीं होती. यह अपने पेशाब से अपने इलाके पर निशान लगाते हैं. कई बार तो इनका इलाका 10,000 स्क्वायर किलोमीटर तक होता है.

केवल प्रजननकाल में नर और मादा इकट्ठा होते हैं. लगभग साढ़े तीन महीने का गर्भाधान काल होता है और एक बार में 2-3 शावक जन्म लेते हैं. बाघिन अपने बच्चे के साथ रहती है. बाघ के बच्चे शिकार पकड़ने की कला अपनी मां से ही सीखते हैं. ढाई वर्ष के बाद ये स्वतंत्र रहने लगते हैं.

टाइगर की उम्र लगभग 10-15 वर्ष तक होती है. वहीं, जो बाघ चिड़ियाघर या टाइगर रिजर्व में रहते हैं वह 20 वर्ष तक जी जाते हैं.

टाइगर का वैज्ञानिक नाम पैंथेरा टाइग्रिस है. यह वन, दलदली क्षेत्र तथा घास के मैदानों के पास रहना पसंद करता है. इसकी सुनने, सूंघने और देखने की क्षमता तेज होती है. टाइगर अच्छे तैराक भी होते हैं. जिसके कारण ये पानी में भी अपने शिकार को पकड़ लेते हैं.

टाइगर की एक बात बहुत कम लोगों को पता है कि वह इंसान पर बेवजह आक्रमण नहीं करते हैं. वह इंसान का शिकार तभी करते हैं जब उसे बहुत समय से अपना शिकार नहीं मिल रहा हो या फिर जब उन्हें कोई खतरा महसूस हो.

इंसानों से यह हमेशा ही दूर रहते हैं.

Tigers Make Their Territories And Used To Live Alone (Pic: hdanimalswallpapers)

‘तीन प्रजातियां’ हो चुकी हैं विलुप्त!

अगर सौ साल पहले की बात करें, तो भारत में टाइगर की संख्या लाखों में थी, लेकिन अवैध शिकार के कारण साल 2014 में की गई जनगणना के अनुसार आज भारत में महज़ 2226 बाघ ही रह गए हैं. जिसकी वजह से टाइगर विलुप्त होने की श्रेणी में आ चुके हैं.

29 जुलाई को हर साल इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जाता है ताकि बहुत तेजी से घटती बाघों की संख्या पर सबका ध्यान जाए और उन्हें संरक्षित रखा जा सके.

दुनिया भर में आज लगभग 3000 ही कुल जीवित टाइगर बचे हैं. बाघ एक तरह का जंगलों में रखा खुला सोना है. तस्कर इन बाघों का शिकार करते हैं, क्योंकि इनकी खाल, दांत, हड्डियां आदि काले बाजार में बहुत महंगे दामों पर बिका करते हैं. इन्हें खेल, शिकार, परंपरा और दवाइयों के मकसद से मार दिया जाता था. पर सन 1973 में सरकार के प्रोजेक्ट टाइगर अभियान के तहत बाघों को संरक्षित के लिए ठोस कानून बनाए गए. इसके बावजूद भी बाघ शिकारियों के हाथ लग जाते हैं.

वहीं बाघ की पहले नौ प्रजातियां हुआ करती थीं जिनमें बंगाल टाइगर, साइबेरियन, इंडोचाइनीज़, साउथ चाइनीज, सुमात्रा, मलायन, जावा, कैस्पियन और बाली शामिल थीं. किंतु आज जावा, कैस्पियन और बाली टाइगर विलुप्त हो चुके हैं.

There Are Only Few Species Of Tigers Are Left In World (Pic wallpaperswide)

इनकी संख्या कम होने के कई कारण हैं, जैसे जंगलों का सिमटना, ग्लोबल वार्मिंग, लगातार शिकार करना आदि. इनकी तेजी से घटती संख्या को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है, नहीं तो ये खत्म हो जाएंगे.

और तब हम इन्हें चिड़ियाघर और नेशनल पार्कों में भी नहीं देख सकेंगे!

Title: Interesting Facts About Tigers, Hindi Article

Feature Image Credit: wallpaperswide/hdwallpapers