परमाणु बम के दुष्प्रभाव से आप सभी अच्छी तरह से वाकिफ होंगे!

जब बात 6 अगस्त 1945 की उस खौफनाक रात की होती है, तो आज भी लोगों की रूह कांप जाती है!

हिरोशिमा और नागासाकी पर उस दिन परमाणु बम से हमला किया गया था. आज सालों बाद वह घटना तो पुरानी हो गई, मगर उसके घाव अब तक नहीं भरे हैं.

पल भर में सब कुछ ख़त्म कर देने वाला परमाणु बम कितना घातक है यह जानते हुए भी कई देश इसे बनाने के अपने रुख पर अड़े हुए हैं और आए दिन इसका परीक्षण किया जाता है. हाल फिलहाल ऐसे परीक्षणों के लिए जिसमें से उत्तर कोरिया फिलहाल चर्चा में हैं.

तो चलिये आज आपको बताते हैं कि कौन से हैं दुनिया के सबसे बड़े परमाणु परीक्षण–

जार बम

जार बम का निर्माण सोवियत संघ ने किया था. यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली परमाणु बम में एक माना जाता है.

इसका परीक्षण 30 अक्टूबर 1961 में कोला प्रायद्वीप पर किया गया था. माना जाता है कि यह इतिहास के सबसे बड़े परमाणु बम का परीक्षण था!

इसका परीक्षण करने के लिए इसको जहाज से 34,000 फिट की ऊंचाई पर ले जाकर नीचे गिराया गया था.

इस बम के गिरने का असर इतना खतरनाक था कि 500 मील से अधिक दूर तक बने घरों की खिड़कियां तक टूट गई थी.

यह बम हर मामले में हिरोशिमा पर गिरे बम से ज्यादा खतरनाक था. इसका आकार, वजन और ताकत सब कई गुना ज्यादा थी.

अगर इसे कभी किसी पर प्रयोग कर लिया जाता तो बहुत बड़ी तबाही मच सकती थी. हालांकि आज तक ऐसा नहीं हुआ.

Tsar Bomb (Pic: rebrn)

सोवियत टेस्ट 219

सेवियत संघ ने जार बम परीक्षण के बाद दुनिया भर में अपने नाम का डंका बजा दिया लेकिन वह अपनी ताकत को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था.

इसलिए सोवियत संघ ने अपनी परमाणु शक्ति को बढ़ाने पर और जोर दिया. उसने इस काम में अपने सभी वैज्ञानिकों को लगा दिया और एक साल के अंदर एक और बम तैयार कर लिया.

24 दिसंबर 1962 को सोवियत संघ ने एक और परमाणु परीक्षण किया. इसके लिए उसने नोवाया ज़ेमल्या द्वीप को चुना जहां पर ‘टेस्ट 219’ किया गया.

रूस का यह बम उसके पहले के परमाणु बम से भी ज्यादा खतरनाक था.

पोखरण एक

यूं तो भारत एक शांतिप्रिय देश है और कभी भी कोई लड़ाई शुरू नहीं करता, फिर भी दुनिया को अपनी ताकत दिखाने के लिए भारत ने भी परमाणु बम बनाया.

इस परीक्षण का एकमात्र उद्देश्य भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाना था, जिससे इसका इस्तेमाल बिजली निर्माण और अन्य शांति प्रिय कार्यों में किया जा सके.

1974 में राजस्थान के पोखरण में भारत के पहले परमाणु बम का सफल टेस्ट किया गया. यूँ तो इसका काम कई सालों पहले से ही शुरू हो गया था, मगर किन्हीं कारणों से इसे पूरा करने में थोड़ा समय लग गया.

यह बहुत बड़ा परमाणु बम नहीं था. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत इसे हमला करने के लिए नहीं बल्कि अपनी ताकत बढ़ाने के लिए करना चाहता था.

जब यह बम भारत ने बनाया तो पूरी दुनिया में भारत का नाम फ़ैल गया. हर कोई चौक गया था कि आजाद होते ही भारत ने इतनी जल्दी परमाणु बम बना लिया.

Pokhran-I (Pic: medium)

कैसल ब्रावो

कैसल ब्रावो एक थर्मोन्यूक्लियर उपकरण है, जिसको संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा बनाया गया था. माना जाता है कि जब इसका परीक्षण किया गया था, तब यूएस सेना को अंदाजा भी नहीं था कि यह कितना खतरनाक हो सकता है. अमेरिका ने 1952 में इस थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस का सफल परीक्षण किया.

थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस का अर्थ होता है हाइड्रोजन आइसोटोप का तरल जो बम में भरा जाता है.

इसकी खास बात यह थी कि यह आकार और वजन में हल्का था, इसलिए इसे विमान में ले जाने में कोई परेशानी नहीं थी.

इसको बनाने के बाद भविष्यवाणी की गई कि यह डिवाइस 5 से 6 मेगाटन का होगा पर वैज्ञानिक चौंक गए जब इसने 15 मेगाटन का उत्पादन किया.

इस बम की ताकत हिरोशिमा के बम से करीब 1000 गुना ज्यादा थी.

यह बम करीब 23,500 पाउंड वजनी है. जैसे ही यह जमीन पर गिरा… ढाई मील तक इसने हर चीज तबाह कर दी. इतना ही नहीं इसकी आग हजारों फीट की ऊंचाई तक गई!

उस समय तक यह सबसे बड़ा परमाणु परीक्षण था.

Castle Bravo (Pic: moziru)

कैसल यांकी

अपने एक परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका इस राह पर और भी आगे चलना चाहता था. इसलिए उसने नए परमाणु बम बनाना जारी रखा.

परमाणु बम बनाने की इस श्रृंखला में अमेरिका ने कैसल यांकी नाम का एक और दमदार परमाणु बम बनाया.

4 मई 1954 को इस परमाणु बम का परीक्षण किया गया. यह अमेरिका का दूसरा सबसे शक्तिशाली परमाणु बम सबित हुआ.

परीक्षण के समय इस बम को 40,000 फीट की ऊंचाई से जमीन पर फेंका गया. जमीन से टकराते ही इसने अपना काम शुरू कर दिया.

कुछ ही पल लगे इस बम को दूर-दूर तक अपनी आग पहुंचाने में. कई मील दूर से भी इसकी भीषण आग और गर्मी को महसूस किया गया.

इस बम का भी असर पहले वाले बम जैसा ही था. इसका इस्तेमाल करना एक बड़े शहर को धूल में मिलाने का कारण बन सकता था.

Castle Yankee (Pic: wikipedia)

सोवियत टेस्ट 123

सोवियत संघ ने 1961 में कई परमाणु परीक्षण किये थे. इसी कड़ी में सोवियत संघ ने नोवाया ज़ेमल्या में ‘टेस्ट 123‘ किया.

माना जाता है कि इसमें बहुत भारी मात्रा में रसायनों का इस्तेमाल किया गया था. रूस परमाणु बम के मामले में सबसे आगे रहना चाहता था, इसलिए उसने परमाणु बम बनाने के लिए कई तरह के प्रयोग किए.

रूस इसकी ऊर्जा पर नियंत्रण रखना चाहता था वहीं, किसी विस्फोट के लिए कितनी ऊर्जा काफी होगी इसके लिए भी इसने कई शोध किए!

लिहाजा जब इसे टेस्ट किया गया तो बाकी परमाणु बम के मुकाबले यह ज्यादा घातक निकला.

Largest Nuclear Detonations In History (Pic: miepvonsydow)

फेज 1, नार्थ कोरिया

जब बात खतरनाक हथियार बनाने की हो तो इसमें उत्तर कोरिया भले कैसे पीछे रह सकता था. 2006 में उत्तर कोरिया ने अपना पहला परमाणु बम परीक्षण किया.

कहते हैं कि उस बम की ताकत इतनी थी कि विस्फोट के बाद दूर तक 4.2 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया.

इससे ही अंदाजा लग जाता है कि आखिर वह बम कितना खतरनाक रहा होगा. उस दिन के बाद से उत्तर कोरिया लगातार परमाणु बम बना रहा है और अमेरिका व अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की बगैर परवाह किये खुलेआम परीक्षण जारी हैं.

North Korea Nuclear Test (Pic: thedailybeast)

कैसल रोमियो

ऑपरेशन कैसल अमेरिका द्वारा किया गया परमाणु बम परीक्षण था. यह ऑपरेशन अमेरिका के लिए काफी महत्वपूर्ण था क्योंकि अमेरिका को दुनिया में अपना वर्चस्व स्थापित रखना था.

इस ऑपरेशन के लिए बिकिनी एटोल और मार्शल द्वीप समूह को चुना गया. कैसल रोमियो का 1 मार्च 1954 को सफल परीक्षण किया गया.

यह भी थर्मोन्यूक्लियर डिवाइस था. इसके जरिए अमेरिका देखना चाहता था कि आखिर वह परमाणु बम के मामले में कितना आगे बढ़ सकता है.

Castle Romeo (Pic: felfedes)

इवी माइक

1952 में अमेरिका द्वारा किए गए इस परमाणु परीक्षण को इवी माइक के नाम से जाना जाता है.

इसे अमेरिका के सबसे घातक हाइड्रोजन बम के रूप में जाना जाता है. इसके बाद ही कई तरह के हाइड्रोजन बम का आविष्कार हुआ.

इस बम ने अमेरिका को यह एहसास दिलाया कि हाइड्रोजन बम आखिर कितने जानलेवा हो सकते हैं. इसके बाद तो अमेरिका लगातार हाइड्रोजन बम बनाने में लग गया.

आज तो हाइड्रोजन वाले परमाणु बम में अमेरिका ने महारत हासिल कर ली है मगर इवी माइक ही था जिसके जरिए इसकी शुरुआत हो पाई.

जब इसका परीक्षण किया गया तो इसका तेज मीलों दूर तक दिखाई दिया और हवा के दबाव से बनी लहरों को कई किलोमीटर दूर तक महसूस किया गया.

Ivy mike (Pic: neoteo)

चगाई

परमाणु बम बनाने के मामले में पाकिस्तान भी पीछे नहीं है. पकिस्तान के पहले परमाणु परीक्षण का नाम चगाई रखा गया था.

अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ने इस बम का निर्माण किया. यूँ तो पाकिस्तान 1970 से ही परमाणु हथियार बनाना चाहता था मगर किन्हीं कारणों से वह इसे बना नहीं पाया.

आखिर में 1998 में उनका बम बन कर तैयार हुआ और उन्होंने इसका सफल परीक्षण किया. इस परीक्षण के लिए एक पहाड़ी इलाके का चयन किया गया.

Largest Nuclear Detonations In History (Pic: himalmag)

परमाणु बम की खोज ने दुनिया को पूरी तरह से बदल दिया है. आज के समय में हर देश चाहता है कि उसके पास एक परमाणु बम हो ताकि मुश्किल की घड़ी में वह इसे इस्तेमाल कर सके.

यूँ तो यह विनाश का कारण भी है मगर इससे आज किसी भी देश की ताकत का पता लगाया जा सकता है.

Web Title: Largest Nuclear Detonations In History, Hindi Article

Featured Image Credit: play