विश्व के इतिहास पर नज़र डाले तो हम पायेंगे कि समाज में पुरूषों की प्रधानता ही रही है. इसके कारण महिलाओं को हमेशा चुनौतियों की कसौटी से होकर गुजरना पड़ा. कुछ ऐसे नियमों का पालन तक करना पड़ा, जिन्हें किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता.

एक समय में रोम सम्राज्य की महिलाओं की हालत तो ऐसी हो गई थी कि उनके खिलाफ हिंसा के किस्से आम हो चले थे. बहरहाल, समय बदला तो ढ़ेर सारे बदलाव भी हुए. साथ ही उनकी जीवन-शैली में सुधार भी हुआ. दिलचस्प बात तो यह है कि इस बदलाव में महिलाओं की जागरूकता का अहम रोल रहा.

इतिहास में बहुत सी ऐसी महिलाएं हुईं, जिन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के दम पर गलत रीति-रिवाजों को तोड़कर दुनिया को बदलने का दम दिखाया.

तो आईये आज ऐसी ही कुछ महिलाओं को जानते हैं–

सुसान बी एंथोनी

1802 में जन्मी सुसान बी एंथोनी का नाम अमेरिका के बड़े सामज सुधारकों में लिया जाता है. अपने जीवन काल में उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए कई काम किए. इनमें महिलाओं के मताधिकार आंदोलन में उनकी भूमिका को सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्होंने एलिजाबेथ कैडी स्टैंटन के साथ मिलकर 1896 में ‘नेशनल वुमन सुफरागे एसोसिएशन’ की स्थापना की थी.

इस संगठन से उन्होंने महिलाओं को वोट देने के अधिकार के लिए काम किया था. बताते चलें कि यह उनके लिए आसान नहीं रहा, इसके लिए उन्होंने अपने जीवन के 37 वर्षों का समय समर्पित कर दिया.

बड़ी बात तो यह थी कि महिलाओं के लिए उनका देखा गया सपना उनके मरने के 14 वर्षों के बाद पूरा हुआ, जब 19वीं सदी के आसपास अमेरिका में महिलाओं को वोट देने का आधिकार मिल सका.

Susan B. Anthony (Pic: thinglink)

एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल

चिकित्सा के क्षेत्र में महिलाओं का नाम रोशन करने के लिए ‘एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल’ का नाम सम्मान से लिया जाता है. महिलाओं को प्रेरणा देने वाली ब्लैकवेल का जन्म 3 फरवरी 1821 को हुआ था. एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल ने उस दौर में अपनी आंखें खोली थीं, जिस दौर में महिलाओं का ज्यादा पढाया-लिखाया नहीं जाता था.

खैर, एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल के साथ ऐसा नहीं था. असल में वह एक समृद्ध परिवार से थीं, इसलिए उन्होंने अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का मौका मिला. हां, मेडिकल कॉलेज में उनका दाखिला होना, लोगों को हैरान कर देने वाला जरूर था. वह इसलिए क्योंकि उस समय केवल पुरुष ही मेडिकल की पढ़ाई किया करते थे.

वैसे एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल का दाखिला लेना आसान नहीं था. 1847 में जब उन्होंने पहली बार दाखिले के लिए आवेदन किया तो उनका दाखिला खारिज कर दिया गया. आमतौर पर लड़कियां इस तरह के अवरोधों से अपना रास्ता बदल लेती हैं, लेकिन एलिज़ाबेथ ने धैर्य नहीं खोया. अंततः कड़ी मशक्कत के बाद वह न्यूयार्क के जिनेवा मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने में सफल रहीं.

उनके लिए परेशानियां खत्म नहीं हुई थीं. उन्हें दाखिला मिल तो गया था, किन्तु उन्हें पुरुषों के साथ पढ़ाई करने में खासी परेशानी का सामना करना पड़ा.

वह बात और है कि वह इन सबसे पार पाते हुए लगी रही. उनकी मेहनत उस वक्त रंग लाई, जब उन्होंने अपनी कक्षा में प्रथम आकर सभी की जुबान बंद कर दी. आगे वह संयुक्त राज्य में चिकित्सा क्षेत्र की स्नातक की डिग्री लेने वाली पहली महिला बनीं.

माना जाता है कि उनके कारण ही बाद में महिलाओं को भी चिकित्सा के क्षेत्र में प्रवेश आसानी से मिलने लगा और महिलाएं चिकित्सक के रूप में खुद को स्थापित करने लगीं.

Elizabeth Blackwell (Pic: biography)

मेरी क्युरी

मेरी क्युरी एक भौतिकविद और रसायनशास्त्री थीं. उनका जन्म 7 नवम्बर 1867 में हुआ था. अपने जीवन चक्र के दौरान कई महत्वपूर्ण आविष्कार करने के लिए वह विख्यात हुईं. रेडियम की खोज इसमें सबसे अहम रही.

अपनी वैज्ञानिक सोच और कबलियत के चलते वह नोबेल पुरस्कार से सम्मानित की गईं. खास बात तो यह थी कि वह पहली महिला वैज्ञानिक थीं, जिनको नोबल पुरस्कार दिया गया था.

हैरान करने वाली बात तो यह भी थी कि उनकी इस सफलता के बावजूद उनको फ्रांस के पुरुष वैज्ञानिकों का खासा विरोध झेलना पड़ा. यही नहीं वह उनके महत्वपूर्ण वित्तीय लाभों के रास्ते का रोड़ा भी बने. अंतत: स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण 4 जुलाई 1934 को उन्होंने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं.

Marie Curie (Pic: notedlife)

मदर टेरेसा

मदर टेरेसा को कौन नहीं जानता!

उन्हें दुनिया एक संत के रूप में जानती है. 26 अगस्त 1910 में जन्मीं मदर टेरेसा वैसे तो रोम से थी, पर उनको भारतीय नागरिकता भी प्रदान की गई. उनको एक नन की रूप में भारत के कोलकाता शहर भेजा गया था, जहां वह सैंट मेरी हाई स्कूल में बच्चों को पढ़ाया करती थीं.

बाद में उन्होंने एक दूसरे स्कूल में गरीब परिवारों की लड़कियों को मुफ्त शिक्षा देनी शुरू कर दी. आगे वह कोलकाता में चैरिटी मिशन के साथ लाइम लाइट में आईं. उनका यह मिशन भूखे, बेघर, अंधे, कुष्ठ रोगियों के लिए काम करता था.

यहां वह लोगों की देखभाल किया करती थी. साथ ही लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थी, ताकि वह समाज में सिर उठाकर जी सके और किसी पर बोझ न बने.

उनके द्वारा किए गए ये छोटे-छोटे काम कब बड़े हो गए, उन्हें खुद भी पता नहीं चला. कहते हैं कि उन्होंने अपना पूरा जीवन दूसरों के लिए लगा दिया, इसलिए उन्हें नोबल पुस्कार से सम्मानित किया गया.

5 सिंतबर 1997 को कोलकाता में उन्होंने अपनी आखिरीं सांसें ली थीं.

MotherTerisa (Pic: dusbus)

ऐनी फ्रैंक

ऐनी फ्रैंक का जन्म जर्मनी में 12 जून 1929 में हुआ था. ऐनी के व्यक्तित्व की खासियत को इसी से समझा जा सकता है कि वह महज 15 साल की थीं, जब वह मृत्यु को प्यारी हो गई थी. बावजूद इसके इतनी छोटी उम्र में वह दुनिया के लिए एक मिसाल बनी.

गजब की बात तो यह थी कि वह अपने लेखन के लिए विश्वविख्यात हुईं. असल में वह  एक डायरी लेखिका थीं. उन्होंने एक खास डायरी लिखी, जिसका नाम था ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल‘.

यह डायरी यहूदियों के अंधविश्वास, पीड़ित, शिकार और युद्ध पर लिखी गई थी. यही नहीं इसमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किए गए यहूदी लोगों के खतरनाक जीवन के बारे में लिखा गया. उनकी मृत्यु की बाद, जब उनकी यह डायरी छापी तो दुनियाभर में यह चर्चा का विषय बनी.

Anne Frank (Pic: wikipedia)

एलेन जानसन सरलीफ

एलेन जानसन सरलीफ लाइबेरिया की प्रथम महिला राष्ट्रपति थीं. उनका जन्म 10 अक्टूबर 1938 में हुआ. वह अफ्रीका में एक आयरन लेडी के रूप में जानी जाती हैं. उन्होंने सैन्य शासन के अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ आवाज उठाई थी.

एलेन महिलाओं के अधिकारों की वकालत करते हुए उनकी शिक्षा के महत्व के लिए देश में बेहतर काम किए और लोगों के बेहतर भविष्य के लिए कई सराहनीय कार्य किए. अक्सर वह अपने कार्यों के लिए विरोधियों के निशाने पर रहीं.

इस दौरान, उन्होंने बहुत से लोगों की आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ा. हालांकि, उनके इन कामों के लिए 2011 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. यह पुरस्कार उन्हें महिलाओं की सुरक्षा, शांति, महिलाओं के आधिकारों और उनके द्वार किये संघर्ष के लिए दिया गया था.

Ellen Johnson Sirleaf (Pic: wikimedia)

वंगारी मथाई

वंगारी मथाई का जन्म 1 अप्रैल 1940 में केन्याई में हुआ. वह राजनीतिक कार्यकर्ता और एक पर्यावरणविद् के रूप में जानी जाती है. उन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में कई बड़े काम किए. ग्रीन बेल्ट आंदोलन इसका बड़ा उदाहरण है. इसके चलते वह केन्याई महिलाओं के अधिकारों की आवाज उठाने वाली सक्रिय महिला बनीं.

1977 में उन्होंने वनों की कटाई को रूकने के लिए एक आंदोलन शुरू किया. इसमें उन्होंने महिलाओं को अपने आस-पास वातावरण पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया. यह आंदोलन धीरे- धीरे पूरे अफ्रीका में फैल गया, जिसके बाद लगभग 30 लाख से अधिक वृक्षों को लगाया गया.

उन्हें अपने इन कामों के लिए नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया.

Wangari Maathai (Pic: womenscenter)

रोबेर्ट मेंचू तुम

रोबेर्ट मेंचू तुम का जन्म 9 जनवरी 1959 को चिलेल में हुआ था. चूंकि ‘रोबेर्ट मेंचू तुम’ किसान परिवार से थी. उन्हें जमीदारी प्रथा का खिलाफ करते हुए उनके ‘भूमि सुधार आंदोलन’ शुरू करने के लिए जाना जाता है.

उनका यह आंदोलन 1970 से लेकर 1980 के बीच जोरों पर रहा. इसके चलते उन पर कई अत्याचार हुए थे. वह 20 साल की रही होगीं, जब उनके पिता को जेल में डाल दिया गया था. उनकी आंखो के सामने ही उनके भाई को मारा दिया गया.

यह नहीं उनके गांव तक को जला दिया गया. इन सबका खुलासा उन्होंने 1982 में फांस एलिजाबेथ बर्गोस से मुलाकात के दौरान किया. बाद में उनके साक्षात्कारों की श्रृंखला चली. साथ ही उनकी कहानी को पुस्तक बनाया गया.

Rigoberta Menchú Tum (Pic: laverne)

यह थीं कुछ ऐसी महिलाएं, जो दुनिया में अपने अतुलनीय कार्योंं के लिए जानी जाती है. वैसे ये कुछ एक नाम भर हैं, दुनिया में ऐसे कई और नाम मौजूद हैं.

अगर आप किसी ऐसे नाम को जानते हैं, तो नीचे दिए कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.

Web Title: Most Inspirational Woman, Hindi Article

Feature Image Credit: dusbus/indiatimes/womenscenter