महात्मा गांधी ने कहा था, ‘आंख के बदले आंख, पूरे विश्व को अंधा बना देगी’

क्या इन विचारों का कोई मोल नहीं…?

ऐसे विचार सभ्यताओं को पालते और उनको अहिंसा का पोषण देते हैं.

किन्तु, आज समाज भौतिक सुख सुविधाओं का आदी हो चुका है, संसाधनों को नोंचा जा रहा है, और उन्हें अपने उत्तम उपयोग में इस्तेमाल करने की अंधी दौड़ चल रही है.

ऐसे में अगर मानवता को दरकिनार कर भौतिक संसार की बात होती है, तो फिर सालों साल की मेहनत और तरक्की से प्राप्त परमानंद मानव प्रगति की सबसे बुरी अवस्था को दिखाता है.

मानव हत्या या नरसंहार किसी भी रूप में मानव सभ्यता के विकास पर प्रश्न चिह्न लगाते हैं.

आज हम ऐसे ही एक नरसंहार की बात करेंगे, जिसने हिंसा का पोषण किया–

वियतनाम युद्ध और…कत्लेआम

माई लाई दक्षिण वियतनाम में उत्तरी तट के पास क्वांग नोगाई प्रांत स्थित छोटे-छोटे गांवों का एक समूह है, जहां वियतनाम युद्ध के दौरान 16  मार्च 1968 को अमेरिकी सैनिकों ने कत्लेआम मचाया था.

सुबह साढ़े सात बजे होंगे कि सोन माई गांव में अचानक हमला शुरू हो गया. आसमान में अमेरिकी हेलीकॉप्टर मंडराने लगे और धीरे-धीरे वह अपने सैनिकों को उतारने लगे.

अमेरिकी फौजी डिवीजन की 11वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड की चार्ली बटालियन को संदेश मिला कि वियत कोंग या कम्युनिस्ट नेशनल लिबरेशन फ्रंट (एनएलएफ) के गुरिल्ला लड़ाकों ने सोन माई के क्वांग नगाई गांव पर कब्जा कर लिया है.

सैनिकों को सर्च ऑपरेशन कर लड़ाकों को खत्म करने के सख्त आदेश दिए गए थे. ऐसे में सैनिकों की प्लातून ने गांव में प्रवेश किया. हालांकि, गांव में उन्हें गुरिल्ला लड़ाकों की बजाए निहत्थे ग्रामीण लोग मिले, जिनमें से अधिकतर महिलाएं, बच्चे और बूढ़े थे.

सैनिक कमांडर अर्नेस्ट मदीना ने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि ये लोग शायद वियत कोंग गुरिल्ला लड़ाकों से सहानुभूति रखते होंगे, इसलिए पूरे गांव को खत्म कर आग लगा दो.

लेफ्टिनेंट विलियम कैली सैनिकों का नेतृत्व कर रहे थे. आदेश मिलते ही सैनिकों ने ग्रामीणों को समूहों में बांट दिया और उनकी झोपड़ियों की तलाशी लेने लगे. उन्हें केवल कुछ हथियार ही मिले होंगे, फिर भी लेफ्टिनेंट कैली ने ग्रामीणों के ऊपर गोली चलाने के आदेश दे दिया.

The My Lai Massacre was a Search and Destroy Mission. (Pic: Pinterest)

निहत्थे लोगों पर बरसाई गोलियां

इतना सुनते ही बंदूकों के ट्रिगर पर हाथ रखकर लाल हो चुकी आखों वाले इन सैनिकों ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. सैनिकों ने कई महिलाओं के साथ बलात्कार किया.

मां अपने बच्चों को बचाने के लिए अपने पीछे छुपाने लगीं, लेकिन सैनिकों ने उन्हें गोली से छलनी कर दिया और जब बच्चे अपनी मां के मरने के बाद वहां से भागने की कोशिश करने लगे तो उनकी पीठ पर गोलियां चलाई गईं, ग्रेनेड तक से हमला किया गया.

इतने के बाद भी जब क्रूर सैनिकों का मन नहीं भरा तो उन्होंने छोटे बच्चों-बड़े-बूढ़ों के साथ बालों से पकड़कर खाई की ओर घसीटा और उन पर स्वचालित हथियारों से हमला कर दिया.

साथ ही  सैनिकों ने पूरे गांव को आग के हवाले कर दिया.

My Lai Massacre. (Pic: Vietnam Full Disclosure)

…और ऐसे रुकी गोलीबारी

इसी बीच टोही मिशन पर पहुंचे सेना के हेलीकॉप्टर पायलट वारंट ऑफिसर ह्यूग थॉम्पसन ने इस घटना को देखकर गोली बारी रोकने के लिए अपने हेलीकॉप्टर को ग्रामीणों और सैनिकों के बीच लाकर उतार दिया. साथ ही अपने सैनिकों को धमकी दी कि अगर उन्होंने गोली चलाई तो, वे भी फायरिंग शुरू कर देंगे.

इस तरह इस खूनी नरसंहार का खात्मा हुआ, लेकिन अब तक बहुत देर हो चुकी थी. करीब 500 से ज्यादा मासूम और निहत्थे लोग मारे जा चुके थे. मरने वालों में 182 महिलाएं थीं, जिसमें से 17 गर्भवती थीं और 173 बच्चे थे, जिसमें से 56 शिशु थे.

गोलीबारी रुकने के बाद थॉम्पसन और उनके साथियों ने वहां पड़ी लाशों के ढेर के बीच कुछ घायल और जिंदा बचे लोगों-बच्चों और औरतों को चिकित्सा सहायता के लिए अपने साथ लिया और वापस आपमान की ओर उड़ गए.

1998 को ह्यूग थॉम्पसन और उनके दो सहयोगियों को दिखाई गई बहादुरी और साहस के लिए अमेरिकी सेना की ओर से सर्वोच्च सैन्य पदक से सम्मानित किया गया.

पत्रकार ने खोली सैनिकों की पोल

इस खबर को सेना के बड़े अधिकारियों द्वारा एक साल तक छुपाया गया और इस घटना को पर्दे में रखा गया, लेकिन सेमोर हर्श नामक एक अमेरिकी खोजी पत्रकार ने इस नरसंहार की पोल खोली. इस नरसंहार पर कुछ शुरूआती रिपोर्ट आने के बाद रॉन रिडेनहोर नामक 11वीं ब्रिगेड का एक सैनिक ने इस घटना को प्रकाश में लाने के लिए एक अभियान शुरू किया.

हालांकि, वो इस नरसंहार में शामिल नहीं था, लेकिन उसने मामले की जांच के लिए राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन, पेंटागन, स्टेट डिपार्टमेंट और कई अन्य एजेंसियों को कई पत्र लिखे.

जब उनका जवाब नहीं आया तो उसके बाद रिडेनहोर ने उसी खोजी पत्रकार हर्श को एक इंटरव्यू दिया. इस इंटरव्यू को उन्होंने नवंबर 1969 में दिखाया और जल्द ही ये मामला अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छा गया.

इसी के साथ अमेरिका की जनता ने इस वीभत्स घटना का पुरजोर विरोध किया और वियतनाम के लोगों के समर्थन में हजारों अमेरिकी सड़कों पर उतर आए.

देखते ही देखते सड़कें अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों से भर गईं.

Investigative Journalist Seymour Hersh (Pic: The Islamic Monthly)

सैनिकों पर हुई कार्रवाई

रॉन रिडेनहोर के इंटरव्यू के बाद अमेरिकी सरकार जागी और उसकी सेना ने मामले की जांच के लिए मार्च 1970 को लेफ्टिनेंट जनरल विलियम पीयर्स की अगुवाई में एक विशेष जांच दल बनाया गया.

जांच दल ने नरसंहार में शामिल कम से कम 28 अफसरों पर केस चलाने की सिफारिश की, लेकिन लेकिन सेना ने लेफ्टिनेंट विलियम कैली, कमांडर अर्नेस्ट मदीना और कर्नल ऑरान हेंडरसन सहित केवल 14 लोगों को ही दोषी ठहराया.

लेफ्टिनेंट विलियम कैली को गोली चलाने का आदेश देने के लिए हत्या का दोषी पाया गया. मार्च 1971 को कैली को आजीवन कारावास की सजा दी गई और सेना के छह जवानों का कोर्ट मार्शल किया गया.

हालांकि, कैली अपने कप्तान मदीना के आदेशों का पालन कर रहे थे, इसी कारण कई लोगों ने कहा कि कैली को बलि का बकरा बनाया गया है. फिर भी कैली की सजा बाद में कम करके 10 साल कर दी गई और इन्हें 1974 में पैरोल पर छोड़ दिया गया.

Lt. William L. Calley at the Centre. (Pic: taiwannews)

वियतनाम का युद्ध अमेरिका की एक बुरी हार के साथ खत्म हुआ था, जिसमें लगभग 50 हजार अमेरिकी सैनिकों को मौत के घाट उतरने पर मजबूर किया गया.

इसी के साथ माई लाई में हुए नरसंहार के दाग अमेरिका के दामन पर लगे, जिसके निशान आज भी वियतनाम के लोगों पर की गई अमेरिका के जुल्मों की कहानी बयान करते हैं.

Web Title: My Lai Massacre: The Story of American Brutality, Hindi Article

Feature Image Credit: jer-cin