आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता, बल्कि आतंकवाद खुद एक मज़हब बन चुका है.

कहा जा सकता है कि दुनिया भर के अमन पसंद देशों के लिए आतंकवाद एक वायरस बन चुका है. दुनिया का लगभग हर देश इस वायरस से ग्रस्त है. मानसिक रुप से कमज़ोर आतंकवादी किसी भी शहर पर, किसी भी बस्ती पर बिना कुछ सोचे समझे आक्रमण कर देते हैं, जिसमें लाखों बेगुनाहों की जान चली जाती है.

ऐसे में हर देश के लिए यह ज़रुरी हो जाता है कि वह ऐसी कमांडो फोर्स को तैयार करें जो इन इंसानियत के दुश्मनों को वक़्त आने पर मुंहतोड़ जवाब दे सके. यही कारण है कि भारतीय सेना के बाद रॉ और पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडो मुश्किल समय में दुश्मन को मात देने की भूमिका निभाते हैं.

जब दुनिया के सबसे बेहतरीन कमांडो फोर्स की बात की जाती है तो यकीनन ज़ेहन में एक फोर्स का नाम ज़रुर आता है. जी हां, आपने बिल्कुल ठीक सोचा यह नाम है अमेरिका की सील कमांडो फोर्स का. सील कमांडो फोर्स को दुनिया की सबसे जांबाज और घातक फोर्स में शामिल किया जाता है.

सील कमांडो वह मुश्किल मिशन करने के लिये जाने जाते हैं जो एक आम इंसान सोच भी नहीं सकता. एक कहावत है कि सांप भी मर जाये और लाठी भी नहीं टूटे. यह कहावत सील कमांडो पर बिल्कुल सटीक बैठती है. सील कमांडो मरने के लिए नहीं बल्कि मारने के लिए जाने जाते हैं, वह भी बिना मरे.

तो आईये दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका की सील कमांडो फोर्स के बारे में जानते हैं–

1962 में पड़ी बुनियाद

यूनाइटेड स्टेट नेवी सील की बुनियाद 1 जनवरी 1962 को रखी गई. हालांकि इस घातक कमांडो फोर्स की ज़रुरत अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद ही महसूस कर ली थी. 1939 से 1945 तक चले दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका के फौजियों ने मोर्चे पर डटकर सामना तो किया था, लेकिन कई नाजुक मौकों पर वह अपने देश को घातक हमलों से नहीं बचा पाये थे. अमेरिकी नागरिकों को उस समय के राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी का ज़रुर शुक्रिया अदा करना चाहिये जिनकी वजह से सील कमांडो फोर्स वजूद में आई थी.

7 दिसंबर 1941 को पर्ल हार्बर पर हुये अटैक के बाद पूरे अमेरिका में तहलका मच गया था. यूएस की पर्ल हार्बर टैरिटरी पर जापानी सेना ने सरप्राइज मिलिट्री स्ट्राइक करके अमेरिकी सरकार की नींद उड़ा दी थी. जापानी सेना की ओर से किया गया यह अटैक अमेरिका के लिए इतना ख़तरनाक साबित हुआ कि इसको आज भी अमेरिकी ‘बैटल ऑफ पर्ल हार्बर’ के नाम से याद करके लरज़ जाते हैं.

इस हमले में कई शहरी लोगों की भी जान चली गई थी. बस, फिर क्या था इस हमले ने उस समय अमेरिका की सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी थी. जिसके बाद अमेरिकी सरकार ने सील कमांडो फोर्स का गठन किया और इसके बाद अमेरिका एक बार फिर मज़बूत राष्ट्र बनकर दुनिया के सामने आया.

Navy Seals Founded By J.F Kennedy (Pic: military)

हर मैदान में लड़ने में फिट!

जब भी आप सील कमांडो फोर्स के बारे में टीवी पर देखते होंगे तो एक सवाल तो ज़ाहिर तौर पर आपके दिमाग़ में आता होगा कि आख़िर सील के मायने क्या हैं?

असल में सील के ऐसा लफ्ज़ है जिसमें पूरी अमेरिका की सुरक्षा के मायने छुपे हैं. सील के एस का मतलब है सी यानि समुद्र, ए का मतलब है एयर और एल का मतलब है लैंड.

यानि सील कमांडो फोर्स सिर्फ एक सीमित सेना का हिस्सा नहीं है बल्कि यह अमेरिका की तीनों महत्वपूर्ण सेना का एक मुख्य अंग है. आपको जानकार हैरानी होगी कि एक नेवी सील कमांडो अमेरिका की तीनों मुख्य सेना की ट्रेनिंग से होकर गुज़रता है.

ऐसा किसी देश में नहीं होता!

हर देश की तीनों सेना के कमांडो अलग- अलग होते हैं, लेकिन सील कमांडो हर वह टास्क कर सकता है जो एक वायु सेना, थल सेना और नौ सेना का कमांडो कर सकता है. यही कारण है कि सील कमांडो को दुनिया के सबसे घातक कमांडोज में शुमार किया जाता है.

इसलिए सील कमांडो को वन मैन आर्मी भी कहा जाता है. यह कमांडो मुश्किल घड़ी में आसमान के नीचे और ज़मीन के ऊपर और पानी के अंदर हर वह टास्क कर सकते हैं जो एक साधारण इंसान या सैनिक सोच भी नहीं सकता.

Seals Can Fight On Land, Air & Water (Pic: history)

कमर तोड़ने वाली होती सील कमांडो बनने की ट्रेनिंग!

सील कमांडो फोर्स दुनिया की एकमात्र ऐसी फोर्स है जिसके कमांडो युद्ध से ज़्यादा ट्रेनिंग के दौरान मारे जाते हैं. इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है की इनकी ट्रेनिंग के क्या मायने हैं.

अगर आपसे पूछा जाये कि दो मिनट में आप कितने पुशअप मार लेंगे तो संभव है आपका जवाब होगा कि पांच… हद से हद दस. वहीं दूसरी ओर क्या आप जानते हैं कि सील कमांडो की सिर्फ भर्ती के दौरान दो मिनट में कितने पुशअप मारने का टास्क मिलता है?

हर सील कमांडो को भर्ती होने भर के लिए दो मिनट में पचास पुशअप मारने होते हैं.

चौंकिये मत, यह तो भर्ती का सिर्फ एक पहलू है. कैंडीडेट को मैंटल टेस्ट के साथ एक असाधारण फिज़ीकल टेस्ट भी पास करना होता है. इसमें स्वीमिंग और रनिंग के कड़े टेस्ट से होकर गुज़रना पड़ता है. कहा जाता है हर साल लाखों की संख्या में अमेरिकी युवा सील कमांडो फोर्स का टेस्ट देते हैं. जिसमें चुनिंदा लोग ही ट्रेनिंग के लिये चुने जाते हैं.

इससे रोचक बात यह है कि ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग पूरी करने में कई युवा हाथ खड़े कर देते हैं. कहा जाता है अंत में अमेरिका की नेवी सील कमांडो फोर्स का हिस्सा सिर्फ पचास युवा ही बन पाते हैं.

सील कमांडो की ट्रेनिंग के दौरान कई ऐसे घातक टास्क होते हैं जिसमें कई ट्रेनी की जान चली जाती है. असल में ट्रेनिंग का मतलब ही यही होता है कि हर असाधारण काम को साधारण समझ कर करना और यह काम सिर्फ सील कमांडो ही कर सकते हैं. इसलिए ट्रेनिंग के दौरान ट्रेनी के अंदर से सारी भावनाओं को निकालकर उसे फ़ौलाद बना दिया जाता है.

जानकर हैरानी होगी कि सील कमांडो को फ्रॉगमैन के नाम से भी जाना जाता है. एक मेंढक कितनी भी ऊंचाई से छलांग मार देता है और सांप से ख़तरा होने पर कितने भी ठंडे और गहरे पानी में डूबकी लगा देता है. यही काम करने के लिये सील कमांडो जाने जाते हैं. इसलिये इन्हें फ्रॉगमैन के नाम से जाना जाता है.

Navy Seals Go Through A Very Hard Training (Pic: navyseals)

मिशन जो सील कमांडोज ने किये पूरे…

जब अमेरिका पर कोई मुश्किल आती है तो सबसे पहले इससे अमेरिकी इंटेलिजेंस निपटने का काम करती है. मुश्किल बड़ी होती है तो फिर उसमें आर्मी का सहयोग लिया जाता है. अंत में जब अमेरिका की आर्मी भी उस ख़तरनाक मुश्किल से निपटने में नाकामयाब रहती है तो फिर सील कमांडो की टुकड़ी को बुलाया जाता है.

आपको जानकर हैरानी होगी 1962 के बाद जो भी मिशन सील कमांडोज के जिम्मे दिया गया उन्होंने उसे बखूबी पूरा किया. ऑपरेशन इराक़ी फ्रीडम की बात हो या फिर बैटल ऑफ वियतनाम वार इन सभी मिशन पर जीत के झंडे लहराने का श्रेय अमेरिकी सील कमांडो को ही जाता है. कहा जाता है अमेरिकी सील फोर्स का एक कमांडो सौ आदमियों की ताक़त रखता है.

इसलिए अमेरिका अपने सील कमांडो को हमेशा मुश्किल समय में ही बाहर निकालता है. मई 2 साल 2011 का ऑपरेशन नेप्टयून स्पीयर किसे याद नहीं होगा, जिसमें सील कमांडो फोर्स ने पाकिस्तान के एबटाबाद में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था.

Seals Performed A Brilliant Job In Vietnam War (Pic: MAHARBAL5022)

सील कमांडो के आगे मौत भी बेबस?

किसी ने कहा है कि योद्धा मैदान में ही मरता है!

इस पंक्ति में कोई दो राय नहीं कि योद्धा मैदान में ही मारे जाते हैं. नेवी सील कमांडो के लिए यह पंक्ति यहां सटीक नहीं बैठती क्योंकि इन कमांडोज के आगे मौत भी बेबस नज़र आती है. कहा जाता है कि सील कमांडो इसलिये जाने जाते हैं कि वह मिशन पर जाते हैं, वहां युद्ध भी करते हैं, दुश्मन को ढेर भी कर देते हैं और वापिस सकुशल लौटकर आ जाते हैं.

वियतनाम के ख़तरनाक युद्ध में सील कमांडो की मौत का रेशियो 200: 01 था. यानि सील के 200 कमांडो इस भयंकर युद्ध में उतरे थे, लेकिन अंत में सिर्फ एक कमांडो की ही मौत हुई थी.

यह जानकारी आपको और हैरान कर देगी कि पूरी यूएस सेना में सील कमांडो की भागीदारी सिर्फ एक प्रतिशत रहती है. बावजूद इसके यह अपने पागलपन और बेख़ौफ होकर लड़ने के जज़्बे की बदौलत पूरी यूएस आर्मी पर भारी पड़ते हैं.

कोर्स पूरा करने के बाद नेवी सील को एक मोटिवेशनल स्पीच दी जाती है. सह स्पीच नेवी सील के कमांडर देते हैं. बीस मिनट की स्पीच में पासिंग आउट कमांडोज को बताया जाता है कि आाख़िर वह दुनिया से क्यों अलग हैं और सील के क्या मायने हैं. यह स्पीच हर उस शख़्स को सुननी चाहिये जो ज़िंदगी में कुछ कर गुज़रने का जज़्बा रखता है.

इराक़ में 200 मिशन को पूरे करने वाले बेहतरीन अमेरिकन स्नाइपर क्रिस काइल को भला कौन नहीं जानता. यह ख़तरनाक बंदूकधारी नेवी सील कमांडो का ही जांबाज था, जो इराक में 200 घातक मिशन करने वाला दुनिया का एकमात्र स्नाइपर था.

Navy Seals Last Day (Pic: military)

वास्तव में अमेरिकन सील कमांडो के जज़्बे को सलाम किया जाना चाहिये, जो अपने देश की सुरक्षा के लिए जान को हथेली पर लेकर युद्ध में कूद पड़ते हैं. सील कमांडोज से जुड़ी अगर आपके पास कोई और रोचक जानकारी हो तो कमेंट बॉक्स में ज़रुर लिखें.

Web Title: Navy Seals Most Dangerous Commando, Hindi Article

Feature Image Credit: pcwallart