जलियांवाला बाग हत्याकांड‘ का जिक्र आते ही एक खूनी नरसंहार की तस्वीरें आखें के सामने तैरने लगती हैं. साथ ही वह क्रूर जनरल डायर भी याद आता है, जिसकी एक कमांड पर ब्रिटिश सैनिकों की गोलियों ने सैंकड़ों हिन्दुस्तानियों को छलनी कर दिया था.

किन्तु, क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा ही नरसंहार ओमाहा बीच पर भी हुआ था. इसमें हिटलर के नाज़ी सैनिकों की गोलियों ने हजारों अमेरिकियों को मौत की नींद सुला दिया था. आज भी इस नरसंहार से जुड़े लोग उस दिन के बारें में बात करते हैं, तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं और उनके चेहरे पर खौफ साफ़ नज़र आता है–

द्वितीय विश्व युद्ध के साथ कनेक्शन क्यों?

ओमाहा समुद्र तट के नाम से जाना जाने वाले ओमाहा टापू पर, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 6 जून 1944 को हिटलर के नाज़ी सैनिकों ने कब्ज़ा कर लिया था. यह एक अहम क्षेत्र था इसलिए इस पर फ्रांस के मित्र देशों की नज़र थी. वह इस पर आक्रमण को लेकर तैयार थे.

दूसरी तरफ नाजियों द्वारा हथियाए गए फ्रांस के कुछ हिस्सों को स्वतंत्र करवाने के लिए, मार्च 1943 में एक संयुक्त योजना तैयार की गई. इसके लिए मिशन बनाया गया, जिसको ‘ओवरलोड’ के नाम से जाना गया. इस मिशन की पूरी जिम्मेदारी ‘जनरल दवाइट आइजनहावर’ के हाथ में दी गई.

मिशन के मुताबिक पांच अलग-अलग तटों पर बमबारी करके जर्मनी सैनिकों के हाथ से अपने क्षेत्रों को वापस लिया जाना था. इन तटों में उताह, ओमाहा, गोल्ड, जुयो और स्वोर्ड शामिल थे.

अपनी इस योजना की सफलता को पुख्ता करने के लिए योजनाकारों ने लोगों से अपील की, ताकि अगर उनके पास फ्रैंच कोस्ट लाइन की कोई भी तस्वीर है, तो वह उन्हें भेजें. माना जाता है कि इस अपील के बाद करीब 10 मिलियन तस्वीरें लोगों द्वारा भेजी गईं थीं.

बाद में यह तस्वीरें आक्रमण की योजना को मजबूत करने में काफी मददगार साबित हुईं थीं.

General Eisenhower (Pic: historymartinez)

हिटलर को ‘बेवकूफ’ समझने की गलती!

दुश्मन को इस बात की गलतफहमी थी कि हिटलर उनकी योजना से अनजान था. जबकि, हिटलर को इसकी जानकारी मिल चुकी थी. उसने अपनी तैयारी पूरी कर रखी थी. नाजी सेना किसी भी प्रकार के हमले के लिए तैयार थी. उन सभी टापुओं पर सुरक्षा बढ़ा दी गई, जो उनके कब्जे में थे. यहां तक की वहां तोपें तक तैनात कर दी गईं. ये तोपों दूर तक मार करने में सक्षम थीं. इसके अलावा हवाई हमले से बचने के लिए भी नाजियों ने जमीन की गहराई में बंकर बना रखे थे.

हालांकि, दुश्मन को हिटलर के बारे में पता था, इसलिए उसने एक और प्लान बना रखा था. इसके तहत उन्होंने कैलिस तट पर डमी टैंक और सेना की गाड़ियां लगा दीं थीं. वह नाजियों को धोखे में रखना चाहते थे. उन्हें लगा था कि नाजी उनके इस जाल में फंस जायेंगे. किन्तु, होना तो कुछ और ही था.

Approaching Omaha Beach (Pic: Wikipedia)

जब सभी योजनाएं उल्टी पड़ गईं

आख़िरकार हमले का दिन आया. 6 जून 1944 को योजना के मुताबिक ओमाहा बीच पर हवाई जहाज़ों और नेवी के जहाज़ों से बमबारी की गई. टनों के हिसाब से सैकड़ों बम गिराए गए. जर्मन सैनिकों की ओर से कुछ देर बाद जब कोई हलचल नहीं दिखाई गई, तो अमेरिकी सैनिकों को लगा कि सारे नाजी सैनिक उनका शिकार हो गये होंगे.

बस यही उनकी सबसे बड़ी गलती थी, क्योंकि नाजी सैनिक तो बंकरों में छिपे बैठे हुए थे. वह तो बस मौके की तलाश में थे. जैसे ही उनकी मौजूदगी से अनजान अमेरिकी सैनिक ओमाहा बीच पर पहुंचे, नाजी सैनिकों ने एकाएक उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरु कर दी. अमेरिकी सैनिकों के लिए यह स्थिति बिल्कुल अप्रत्याशित थी.

उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि दुश्मन कहां बैठा हुआ है. वह कहां से उन पर गोलियां बरसा रहे हैं.

वह तो बस गोलियों से बचने की कोशिश में लगे हुए थे!

जैसे-तैसे वह आगे बढ़ने की कोशिश करते, लेकिन भौगोलिक स्थिति उनके खिलाफ थी. जर्मन सैनिक एक पहाड़ की चोटी पर बैठे थे और अमरीकी नीचे बीच के बेस पर थे. इस वजह से अमेरिकी सैनिक एक के बाद एक मरते चले गये. देखते ही देखते नाजी सैनिकों ने लाशों के ढ़ेर लगा दिये.

‘ओमाहा बीच’ का पानी अमेरिकी सैनिकों के खून से लाल होता जा रहा था.

आखिरी तक कायम रहा हौंसला और…

इस ंजंग की खास बात यह थी कि अमेरिकी सैनिकों ने आखिरी वक्त तक अपना हौंसला नहीं खोया था. सैंकड़ों साथियों के शहीद होने के बावजूद वह लगातार आगे बढ़ते रहे. वह उस पहाड़ी पर भी पहुंचने में कामयाब हो गये थे, जहां नाजी सैनिक मौजूद थे. सिर्फ वह वहां पहुंचे नहीं थे, बल्कि उन्होंने नाजियों को खदेड़ना तक शुरु कर दिया था.

आख़िर में हजारों साथियों की कुर्बानी के बाद अमेरिकी सैनिकों ने ओमाहा बीच पर कब्ज़ा कर लिया था.

यकीनन इस लड़ाई में अमेरिकी सैनिकों की जीत हुई थी, पर इसकी एक बड़ी कीमत उन्हें चुकानी पड़ी थी. आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम में 2000 से अधिक लोग मारे गए थे, जबकि 4500-5000 लोग घायल हुए थे.

Operation Overlord (Pic: fili1793.blogspot.in)

इतनी बड़ी संख्या में लोगों का मारा जाना अमेरिका के लिए गहरा सदमा था. इसके लिए मिशन का प्लान बनाने वालों आला अफसरों को जिम्मेदार माना गया. कहा गया कि अगर उन्होंने हिटलर को बेवकूफ समझने की गलती न की होती, तो इतने अमेरिकी सैनिक न मारे जाते.

सिर्फ आला अफसर ही नहीं बल्कि, इस मिशन से जुड़े अन्य सभी लोगों को भी कड़ी अलोचनाएं झेलनी पड़ी.

किन्तु, इस सबसे इस जंग में शहीद हुए सैनिक वापस लौटकर आने वाले नहीं थे. अमेरिका के लिए यह एक नरसंहार जैसा ही था, जिसकी कटु यादें आज भी वहां के लोगों की आंखों को नम कर जाती हैं.

इतिहास में दर्ज अन्य खूनी किस्सों की तरह यह भी बताता है कि दुनिया का हर देश अपने सीने में किसी न दर्द को लेकर बढ़ रहा है. ईश्वर आने वाले समय में इस तरह के नरंसहारों से दुनिया को दूर रखें, ताकि फिर किसी की आंखें दर्द से न छलके.

Web Title: Operation Overlord: D-Day to Paris, Hindi Article

Featured image credit / Facebook open graph: theunredacted