किसी भी देश के लिए उसकी सांस्कृतिक धरोहर बहुत ही ज्यादा मायने रखती है. वह न सिर्फ उन्हें उनका इतिहास याद दिलाती है बल्कि वह देश की पहचान भी बन जाती है. ऐसी ही एक धरोहर ईजिप्ट में स्थित है जिसे अबु सिंबल के नाम से जाना जाता है. 1960 में जब अबु सिंबल पर संकट के बादल मंडराने लगे थे, तब कई देशों ने एकजुट होकर इसे बचाने का प्रयास किया था. इस एक धरोहर ने सारे विश्व को एकजुट कर दिया था.

इससे पहले हम इस एतिहासिक घटना का वर्णन करें, हमें मिस्र की इस सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जान लेना चाहिए ताकि हम ये समझ सकें कि आखिर क्यों विश्व समुदाय अबु सिंबल को बचाने के लिए बढ़ चढ़ कर आगे आया था–

इतिहास के पन्नों में दर्ज ‘अबु सिंबल’

ईजिप्ट पूरी दुनिया में अपने पिरामिड, ममी और फराओं के लिए मशहूर है. लगभग 5000 साल पुरानी मिश्र की सभ्यता के इतिहास में कई ऐसे राज छुपे हैं जो वैज्ञानिकों के लिए आज भी शोध का विषय बने हुए हैं उन्हीं में से एक है अबु सिंबल. ये ईजिप्ट के दो प्राचीन मंदिर हैं जिन्हें 1300 ईसापूर्व में फैरो रामेसेस द्वितीय ने बनवाया था.

बड़े मंदिर की खासियत ये है कि इन्हें चट्टानों को काटकर बनाया गया है और ये मिश्र की वास्तुकला का अद्भुत नमूना हैं. इस बड़े मंदिर के अंदर रामेसेस द्वितीय और तीन देवताओं की मूर्तियां हैं. इसका अग्रभाग बहुत ही भव्य है. इसमें बैठे हुए फैरो की 4 मूर्तियां बनीं हुई हैं, जिनकी ऊंचाई लगभग 20 मीटर है.

दूसरा मंदिर रामेसेस ने अपनी पत्नी के लिए बनवाया जहां उसने अपनी पत्नी की मूर्ती बनवाई हुई है.

इस बड़े मंदिर की खासियत है कि यहाँ साल में केवल दो बार ही सूरज की रोशनी अंदर तक जाती है. एक 21 फरवरी और दूसरा 21 अक्टूबर. यह दोनों दिन सूरज की रोशनी मंदिर के अंदर तक जाती है और सीधे जाके रामेसेस की मूर्ती पर पड़ती है. रामेसेस ने इसे इतने खास ढंग से बनवाया है कि और किसी भी दिन रोशनी मूर्ती तक नहीं पहुँच पाती. माना जाता है कि यह दोनों दिन में से एक रामेसेस के जन्म का दिन है और दूसरा उसके राजा बनने का.

सालों से यह ईजिप्ट की एक खास पहचान बना हुआ है!

Rescue Of Ancient Egyptian Temple Abu Simbel (Pic: whitesharkegypt)

मंदिर के खतरे ने किया ‘विश्व को एक’

ये अद्भुत नमूना लगभग हजारों सालों तक रेत में दबा रहा. कोई नहीं जानता था कि रेगिस्तान की रेत के नीचे ऐसा नायाब मंदिर बना हुआ है. सन 1813 में इसे स्विस एक्सप्लोरर ने इसे खोज निकाला. यह मंदिर नील नदी के पास बसा हुआ और उस स्विस आदमी को एक अबु सिंबल नाम का बच्चा पहली बार उस जगह पर ले गया था. शुरुआत में रेत के नीचे बस इसका ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा था. इसके बाद उस स्विस आदमी ने बाकियों को भी इसकी जानकारी दी और इस मंदिर से रेत हटाने का काम शुरू हुआ.

क्योंकि इस जगह तक अबु सिंबल नाम का बच्चा उस व्यक्ति को लेके आया था इसलिए इस मंदिर को उसी का नाम दे दिया गया.

1950 तक ये मंदिर और इसकी प्रतिमाएं ऐसे ही खड़ी रहीं, लेकिन 1960 के दशक में इसके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा जब नील नदी पर बांध बनाने का काम शुरू हुआ. दरअसल, बिजली की बढ़ती डिमांड और नील नदी पर हर साल आने वाली बाढ़ पर काबू पाने के लिए ईजिप्ट की सरकार ने इस पर बांध बनाने की योजना बनाई. इस बांध को अबु सिंबल से 280 किलोमीटर दूर अस्वान में बनाया गया और इसका नाम रखा गया अस्वान बांध. यह बाँध कई सुविधाएं तो लाया ही, लेकीन अपने साथ एक नई आफत भी ले आया. बाँध के कारण अबु सिंबल के नजदीक से जाने वाली नदी का स्तर लगातार बढ़ने लगा. उसमें बाढ़ आना का खतरा पनपने लगा. अगर वह नदी का पानी बढ़ता ही जाता तो उससे सबसे बड़ा खतरा अबु सिंबल को ही था. देखते ही देखते ईजिप्ट का यह मंदिर नष्ट हो जाता.

इसलिए इस समस्या के हल के लिए ईजिप्ट और सूडान की सरकार ने युनेस्को से मदद मांगी और यहीं से इस प्राचीन धरोहर को बचाने के लिए विश्व समुदाय के एक जुट होने की कहानी शुरू हुई. कई देशों ने इस एतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए अपने इंजिनियरों को वहां भेजा.

Aswan Dam Become A Threat For Abu Simbel’s Existence (Pic: wikimedia)

सबके साथ ने बढ़ाई ताकत

मामला वैश्विक धरोहर का था तो ये काम बहुत ही सावधानी और सतर्कता के साथ हुआ था. इस नाजुक काम को करने के लिए हाथ के औजारों से लेकर बुलडोजर तक का इस्तेमाल हुआ. दोनों मंदिरों और इनकी मूर्तियों को पूरी सावधानी के साथ 20 टन के ब्लॉक पर नई जगह पर शिफ्ट किया गया. इस मंदिर के पूरे ढाँचे को बहुत ही कम बल-दर के हिसाब से हिलाया गया क्योंकि हर कोई जानता था कि एक गलती और मंदिर हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगा. यही नहीं इसे नए स्थान पर वैसे ही स्थापित किया गया जैसे कि वह पहले था.

इस नामुमकिन से दिखने वाले काम को पूरा करने के लिए पांच महाद्वीपों की 40 टेक्निकल टीमों ने मिलकर अंजाम तक पहुंचाया. इसे स्थानांतरित करने में करीब 40 मिलियन डॉलर खर्च हुए थे. इस मिशन के तहत पूरे 22 स्मारकों को एक जगह से दूसरी जगह पर स्थापित किया गया. वैसे तो ये काम 1968 में पूर्ण हो गया था, लेकिन पूरा कार्य 1980 में जाकर खत्म हुआ.

इस कार्य को पूरा करने के लिए ईजिप्ट की सरकार ने चार मुख्य देशों के प्रति कृतज्ञता जाहिर करते हुए उन्हें उपहार स्वरूप चार मंदिर प्रतिरूप दिए थे. इन्हीं में से एक को न्यूयॉर्क के ‘मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट’ में लोगों के दर्शन के लिए रखा गया है. पूरे विश्व ने एकजुट हो के इस धरोहर को बचाया जो वाकई सराहनीय कार्य था.

Relocating Abu Simbel (Pic: mashable)

इस घटना ने यह दिखाया कि अगर एकजुट हो के कोई काम करें तो कोई भी मुश्किल इनके लिए बड़ी नहीं है. हर किसी ने अपना खून पसीना एक कर दिया इस एक मंदिर को बचाने के लिए.

इससे भी बड़ी बात यह थी कि एक प्राचीन धरोहर अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रूप से रीलोकेट कर दी गयी थी.

Web Title: Rescue Of Ancient Egyptian Temple Abu Simbel, Hindi Article

Feature Representative Image Credit: egypttoursportal