दुनिया भर में कई क्रूर तानाशाह हुए हैं जिन्होंने अपनी क्रूरता से नरसंहार की बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया. कुछ तो ऐसे भी थे जिनके अंदर इंसानियत नाम की कोई चीज ही नहीं थी.

ऐसा ही एक तानाशाह था सद्दाम हुसैन जिसने अपने रास्ते में आने वाले हर व्यक्ति हो मौत के घाट उतार दिया.

अपने राज में उसने लोगों को जीना बेहाल कर दिया था. आज भी उसके समय को याद कर लोग सहम जाते हैं. आखिर क्यों माना जाता है सद्दाम हुसैन को इतना क्रूर आइए जानते हैं–

बचपन की मुश्किलों ने बनाय क्रूर!

सद्दाम हुसैन को इतना खतरनाक बनाने के पीछे उसकी पारिवारिक परवरिश बतायी जाती है. कहते हैं कि व्यक्ति को जैसे संस्कार मिलते हैं वह वैसा ही हो जाता है. यह बात सद्दाम हुसैन के ऊपर बिलकुल लागु होती है. सद्दाम हुसैन का जन्म 28 अप्रैल 1937 में टिक्रत इराक में हुआ था.

सद्दाम का बचपन बहुत ज्यादा अच्छा नहीं रहा. उसके पैदा होने से पहले ही उसके पिता कहीं गायब हो गए. उसके कुछ महीनों बाद ही सद्दाम का एक भाई कैंसर के कारण मारा गया. इन दो हादसों ने सद्दाम की माँ को पागल सा कर दिया इसलिए 3 साल की उम्र में ही सद्दाम को उसके एक रिश्तेदार के घर बगदाद भेज दिया गया.

कई सालों बाद जब सद्दाम वापस अपने घर गया तो उसे लगा था कि अब वह अपनी माँ के साथ समय बिता पाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. उसकी माँ ने दूसरी शादी कर ली थी. जैसे ही सद्दाम अपने घर पहुंचा उसके सौतेले पिता ने मारना शुरू कर दिया. सद्दाम कुछ नहीं कर पाया और वापस अपने रिश्तेदार के पास भाग गया.

माना जाता है कि सद्दाम के क्रूर बनने के पीछे उसके इस कठिन बचपन का भी हाथ था.

Saddam Hussein (Pic: thoughtco)

इराकी प्रधानमंत्री को मारने का किया प्रयास…

बचपन से सद्दाम को किसी का भी प्यार नहीं मिला था इसलिए प्यार क्या होता है इसका मतलब उसे पता ही नहीं था. कठोर बचपन ने उसे इतना सख्त बना दिया कि वह बस क्रूर होता चला गया.

सद्दाम हुसैन बड़ा बनना चाहता था इसलिए उसने राजनीति का रास्ता चुना, जिसमें उसको जल्द ही सफलता हासिल हुई और वर्ष 1957 में वह बाथ पार्टी में शामिल हो गया.

बाथ पार्टी को सत्ता में आना था. उनके रास्ते का काँटा उस समय के इराकी प्रधानमंत्री अब्द अल करीम थे. वह किसी भी तरह से प्रधानमंत्री को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे ताकि वह अपना राज देश में चला सके. सत्ता में आने के लिए बाथ पार्टी ने प्रधानमंत्री का कत्ल करने की सोची.

क्योंकि सद्दाम पार्टी में नया था और नौजवान भी इसलिए कई लोगों की टीम में सद्दाम को भी जगह दी गई. उनका काम था प्रधानमंत्री को किसी भी तरह से मौत के घाट उतारना.

सद्दाम और उसके साथी निकल पड़े थे प्रधानमंत्री को मरने, लेकिन वह इस काम में सफल नहीं हो पाए. इस असफल प्रयास के दौरान सद्दाम घायल भी हो गया था. हर तरफ सद्दाम की खोज होने लगी इसलिए वह भाग के पहले सीरिया और फिर ईजिप्ट चला गया.

थोड़े समय बाद इराक में बाथ पार्टी का राज हो ही गया और इसके साथ ही सद्दाम के पकड़े जाने का खतरा भी टल गया. सद्दाम ने बगदाद में अपनी कानून की पढ़ाई शुरू की ही थी कि बाथ पार्टी से एक बार फिर सत्ता छीन ली गई.

बाथ पार्टी के हाथ से सत्ता जैसे ही गई सद्दाम को उसके जुर्म के लिए पकड़ लिया गया और कई सालों के लिए जेल भेज दिया.सत्ता का भूखा सद्दाम कुछ सालों बाद जेल से भाग गया और बाहर निकलते ही बाथ पार्टी पर अपना राज शुरू कर दिया. पार्टी की कमान संभालते ही सद्दाम ने उसे फिर से सत्ता दिलवा दी. इसके बाद शुरू हुआ सद्दाम का असली खेल.

Saddam Hussein Cruel Dictatorship (Pic: nytimes)

मौत का खेल हुआ शुरू!

सद्दाम का असली राज शुरू हुआ जब 1979 में इराक के राष्ट्रपति ने इस्तीफा दिया. उनके जाते ही उपराष्ट्रपति सद्दाम में देश की डोर अपने हाथों में ले ली और आते ही उसने अपना आतंक शुरू कर दिया.

सबसे पहले सद्दाम ने पड़ोसी देश ईरान के साथ जंग शुरू कर दी. उसने अपने देश में अपने नाम की दहशत फैला दी ताकि वह सत्ता में बना रहे. कई सालों तक सद्दाम ईरान के साथ लड़ता रहा. इस बीच उसने केमिकल हथियारों तक का प्रयोग कर दिया!

माना जाता है कि उन केमिकल हथियारों के कारण करीब 5000 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी. वह बस किसी भी तरह से ईरान का खात्मा चाहता था.

सद्दाम बहुत ही जल्द फैसला सुना दिया करता था. उसे जो नहीं पसंद आता था उसे वह मार दिया करता था. माना जाता है उसकी इस आदत की वजह से ही एक बार उसने बिना वजह जाने ही 148 लोगों की मौत का फरमान सुना दिया. उन लोगों को कसूर बस इतना ही था कि वह उस गाँव के थे जहाँ के कुछ लोगों ने एक बार सद्दाम को मारने की कोशिश की थी. सद्दाम ने बिना पूरी जांच किए ही उन सभी को मौत की सजा दे दी.

सद्दाम यहीं पर नहीं रुका. जैसे ही ईरान के साथ उसकी जंग खत्म हुई उसने उसके कुछ ही समय बाद कुवैत पर भी हमला बोल दिया. रातों रात इराक की सेना कुवैत की सड़कों पर आके कुवैतियों को मारने लगी. सद्दाम ने एक रात में ही जंग का बिगुल बजा दिया. सद्दाम ने अपने राज में लाखों की संख्या में लोगों को मारा. उसके पाप का घड़ा भर गया था और उसके खात्मे का समय नजदीक आ गया था.

Saddam Hussein (Pic: sputniknews)

खत्म हुआ सद्दाम का कत्लेआम…

सद्दाम ने जिस दिन कुवैत पर हमला किया उस ही दिन उसकी मौत की गिनती शुरू हो गई थी. कुवैत के बचाव में अमेरिका ने इराक पर हमला कर दिया. मजबूरन सद्दाम को अपनी सेना को वापस अपने देश लाना पड़ा.

अमेरिका ने सद्दाम से कुवैत को तो बचा लिया था, लेकिन इराक अभी भी उसके कब्जे में था. उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए केमिकल हथियारों की वजह से उसे एक बड़ा खतरा मान लिया गया. सबको लगाने लाग कि वह आगे चल के एक बड़ा खतरा बन सकता है. जब सद्दाम ने कुछ और अन्तर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया तो अमेरिका ने उसके राज को पूरी तरह खत्म करने की ठान ली.

एक और बार अमेरिकी सेना को इराक भेजा गया, लेकिन इस बार उन्हें सद्दाम को पकड़ने के लिए भेजा था. जैसे ही सेना ने इराक पर हमला बोला सद्दाम समझ गया कि अब उसके खात्मे का समय आ चुका है इसलिए वह छुप गया.

कई महीनों तक सेना ने छापेमारी की सद्दाम को ढूँढने के लिए और तब जा के वह एक छोटे से गड्ढे में पाया गया. उसके मिलते ही उसे हिरासत में ले लिया गया. सद्दाम की सरकार भी खत्म हो चुकी थी इसलिए उसके बचने का कोई जरिया नहीं था.

इसके बाद उस पर कानूनी कार्यवाही की गई. वह बचने की कोशिश करता रह गया पर उसके जुर्म किसी से छिपे नहीं थे. आखिर में अदालत ने अपना फैसला सुनाया और 30 दिसंबर 2006 को सद्दाम को मासूमों की मौत का ज़िम्मेदार मानते हुए फांसी पर लटका दिया गया. इसके साथ ही एक क्रूर तानाशाह का अंत हो गया.

Saddam Hussein (Pic: thetrentonline)

कहते हैं जैसी करनी वैसी भरनी. ऐसे ही सद्दाम पर सता का ऐसा रंग चढा कि उसको अपने आगे कोई नजर ही नहीं आता था जो मन में आया वो किया. और आखिर में हुआ वो ही जो खुदा को मंजूर था.

सद्दाम को खुदा के पास ही भेज दिया गया.

Web Title: Saddam Hussein Cruel Dictatorship, Hindi Article

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