विश्व के इतिहास में कई ऐसी खौफ़नाक घटनाएं हुईं, जिनके बारे में पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. गौर करने वाली बात है कि ये घटनाएं न केवल अतीत के पन्ने पर एक काले वक्त के तौर पर दर्ज हुई हैं, बल्कि इनसे जुड़ी तस्वीरें भी उस दौर के दर्द को बयां करती हैं!

1937 के आसपास जापान की सेना द्वारा चीन के नानकिंग में की गई बर्बरता इसका एक बड़ा उदाहरण है. इसे ‘रेप ऑफ नानकिंग’ भी कहा जाता है. कहते हैं कि इस कत्लेआम में जहां एक ओर करीब 3 लाख लोग मारे गए थे, वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया था.

तो आईए इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले इस नरसंहार की कहानी को जानते हैं–

चीन ने नहीं टेके घुटने तो…

बात उस दौर की है, जब अपने-अपने अधिकार क्षेत्र, भौगोलिक सीमा और दबदबे को बढ़ाने की दौड़ में कई राष्ट्र युद्ध में थे. इसी क्रम में जापान चहर और सुईयुनान पर अधिकार करते हुए शान्सी पहुंचा, जहां उसे चीनी सेना से कड़ी टक्कर मिली. वह बात और है कि वह इसको जीतते हुए शंघाई पर कब्जा करने में सफल रहा.

शंघाई के बाद जापानी सेना नानकिंग पहुंची. वहां उसने 9 दिसंबर 1937 को चीनी सैनिकों को आत्म समर्पण कर देने की धमकी दी. साथ ही यह भी चेतावनी दी गई कि आत्म समर्पण न करने पर उन्हें इसके बुरे परिणाम भुगतने होंगे.

किन्तु, चीनी सैनिकों ने घुटने टेकने से मना कर दिया… साथ ही इस मामले पर चुप्पी साध ली. यह चुप्पी जापानी सैनिकों को रास नहीं आई. उन्होंने इसका जवाब देने के लिए अपने अधिकारी ‘जेनरल मैटसुई’ के आदेश पर नानकिंग शहर पर हमला बोल दिया.

वैसे तो हर युद्ध के कुछ नियम होते हैं, जिनका पालन सेना को करना अनिवार्य होता है, किन्तु जापानी सैनिकों ने इन सब नियमों को ताक पर रखकर नानकिंग में बड़ी संख्या में बलात्कार, हत्या, लूट और आगजनी आदि वारदातों को अंजाम दिया.

यहां तक कि उन्होंने टोक्यो आधारित एक अखबार को माध्यम बनाकर अपने जापानी अफसरों के बीच एक प्रतियोगिता का आयोजन किया. इसके तहत 100 चीनी लोगों को अपनी तलवार से मौत के घाट उतारने पर उपहार का इंतजाम किया था. बाद में उसमें मारने वालों की संख्या बढ़ाकर 150 कर दी गई थी.

इस तरह जापानी सेना की ज्यादतियां बढ़ती चली गईं.

Nanking Massacre (Pic: Imgur)

छाया था खौफ का मंजर!

आयरिस चैंग की किताब ‘दि रेप ऑफ ननकिंग सिटी‘ की मानें तो जापानी सैनिकों द्वारा करीब 80000 औरतों के साथ बलात्कार किया गया. यही नहीं कई जापानी सैनिकों ने तो मानवता को शर्मसार करते हुए बलात्कार के बाद महिलाओं के स्तन तक काट लिए गये थे. साथ ही उन्हें कील के सहारे दीवारों में जड़ दिया था.

उन्होंने अपनी किताब में यह भी लिखा कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान यूरोपीय देशों ने जितने लोगों को खोया उससे कहीं ज्यादा लोगों को जापानी सेना ने केवल नानकिंग में मौत के घाट उतार दिया था. इतना ही नहीं जापानी सैनिकों ने पिताओं को अपनी बेटियों, और बेटों को अपनी मां के साथ बलात्कार करने तक के लिए मजबूर किया!

यह नरसंहार कितना खतरनाक रहा होगा, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस पर किताब लिखने वाली लेखिका आयरिस चैंग ने आत्महत्या तक कर ली थी.

यहीं नहीं रुका जापान

जापानी सैनिक यहीं नहीं रूके!

उन्होंने अपनी बर्बरता का खेल जारी रखा और अपने सैन्य बल पर उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी चीन पर अपना कब्जा जमाया. उसने चीन के पश्चिमी और उत्तरी-पश्चिमी हिस्से पर भी कब्जा करना चाहा, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सका था. अपनी जीत के सिलसिले को आगे बढ़ाने के लिए 1941 में जापानी सैनिकों ने पर्ल हार्बर पर हमला कर दिया, इसका उसे बड़ा नुक्सान हुआ.

असल में पर्ल हार्बर पर हमले के बाद ही अमेरिका ने उसके खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी. जापान जब तक इसके सामने के लिए खुद को तैयार कर पाता, तब तक सोवियत संघ ने उसके कब्जे वाले ‘मंचूरिया’ पर हमला कर दिया.

अमेरिका की एंट्री ने चीन के साथ चल रहे जापानी युद्ध को कमजोर करने का काम किया. असल में हार्बर पर में जापान के हमले के बाद अमेरिका चीन को जापान के खिलाफ युद्ध लड़ने में मदद करने लगा था. यही कारण रहा कि चीन और जापान के बीच का यह युद्ध पासा पलटने लगा था.

आगे धीरे-धीरे जापान कमजोर होता गया. हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले के बाद तो उसकी कमर ही टूट गई और अंतत: 1945 में उसने हार मानते हुए सरेंडर कर दिया.

इस तरह जाकर उसकी बर्बरता को पूर्ण विराम लगा!

Nanking Massacre (Pic: mgur)

स्मारक बयां करता है ‘दर्द’

इस नरसंहार के दौरान मारे गए लोगों की याद में चीन सरकार ने 1995 में नानजिंग मेमोरियल हॉल का निर्माण किया गया. 1995 में इसको दोबार बनाया गया.

इस स्मारक में आपको उस दौर के कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड पढ़ सकते हैं. साथ ही यहां मौजूद मूर्तियों में वास्तुकला के बेहतरीन नमूने देखने को मिलते हैं. यह स्मारक करीब 28,000 वर्ग मीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है.

डिजाइन की बात की जाए तो इसे तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है. पहले में आउटडोर प्रदर्शनी लगी दिखाई देती है. दूसरे में पीड़ितों के अवशेष और तीसरे में ऐतिहासिक दस्तावेजों के लिए एक प्रदर्शनी हॉल बनाया गया है.

सबके अलग-अलग हैं मत

इतिहास की इस घटना को लेकर अलग-अलग मत हैं, पहला जिसमें जापान की कुशल सेना और योजनाबद्ध तरीके से की गई नानकिंग शहर पर चढ़ाई है, जिसका गुणगान जापान अपने सैन्यबल के शौर्य को जताने के लिए करता है.

वहीं दूसरा मत चाइना की सरकार की विफलता की ओर इशारा करता है, जिसमें सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा करने में बुरी तरह नाकाम रही!

तीसरा मत उन यूरोपीय और अमेरिकी लोगों से जुड़ा था, जोकि अपनी जान जोखिम में डालकर चीनी लोगों की सहायता करने में जुटे हुए थे. ऐसा माना जाता है कि वह जापानी सैनिकों की बर्बरता को दुनिया के सामने लाने की कोशिश कर रहे थे.

यही कारण है कि जापानी सैनिकों की बर्बरता के चलते मरने वालों की संख्या पर आज भी चीनी और जापानी आंकड़े मेल नहीं खाते हैं. जापान मौत के आंकड़ों को चीन के दावे से आधा मानता है, वहीं जापान ने आज तक माफी नहीं मांगी.

The Rape of Nanking Memorial (Pic: travelphotoreport.com)

कहां तो यहां तक कहा जाता है कि आज जापान और चाइना हर मुद्दे जिस तरह से एक दूसरे के खिलाफ खड़े नजर आते हैं, उसमें नानकिंग नरसंहार बड़ा कारण रहा.

आप क्या कहेंगे इस कहानी पर… कमेन्ट-बॉक्स में अवश्य अपनी राय जाहिर करें!

Web Title: Story of Nanking Massacre, Hindi Article

Featured Image  Credit: Raptor/youtube