प्राचीन रोमन सभ्यता की एक सजीव निशानी ग्लेडिएटोरियल स्कूल के रूप में आज भी सलामत खड़ी है.
हालांकि, यह लगभग खंडहर हो चुका है पर इसकी दरकती दीवारों में सैकड़ों योद्धाओं की महान गाथाएं छिपी हुईं है. लोग आज भी इन कहानियों के किरदारों के साहस को महसूस करने के लिए रोम आते हैं, और फिर ग्लेडिएटोरियल स्कूल की झड़ती दीवारों पर हाथ फेरते हुए आगे चलते जाते हैं.
यूं तो इसके इतिहास में कई महान योद्धाओं की गाथाएं छिपी हैं, पर आज हम जिसकी बात कर रहे हैं वो योद्धा इतिहास के सबसे चर्चित गुलामों में से एक था. उसका नाम है 'स्पार्टाकस'. वहीं 'स्पार्टाकस', जिसकी मूर्ति आज भी रोम के प्रमुख चौराहों पर लगी है.
स्पार्टाकस ने जिस जंग को शुरू किया था, उसे इतिहास में 'तीसरे दास विद्रोह' के रूप में जाना जाता है. हालांकि, स्पार्टाकस का जंग के अलावा और कोई नामोनिशां या कहानी इतिहासकारों को ज्ञात नहीं है.
पर यह सच है कि दासों का यह जाबांज योद्धा आगे चलकर रोमन साम्राज्य के पतन का कारण बना.
तो चलिए एक बार फिर ग्लेडिएटोरियल स्कूल की धराशायी होती इमारत के नीचे से उस इतिहास को खोजने की कोशिश करते हैं, जिसने स्पार्टाकस जैसे रोम सैनानी की एक कैदी बना दिया और फिर एक कैदी से विद्रोही-
सैनिक से दास और फिर बना क्रूर योद्धा
इतिहास में 'स्पार्टाकस' को एक कैदी, विद्रोही और इसके पूर रोम के सैनिक के रूप में लिखा गया है. कोई नहीं जानता कि वह आखिर कहां जन्मा और कैसे उसकी परवरिश हुई. स्पार्टाकस के बारे में कुछ किवदंतियां जरूर मशहूर हैं. प्राचानी यूनानी साहित्यकार प्लूटार्क ने उसे खानाबदोश तबके का थ्रेसियन बताया है, जिसका पूरा नाम 'स्पार्टाकस थ्रेसियन' था और वह थ्रेसियन सभ्यता में जन्मा एक साधारण बालक था.
इस सभ्यता के क्षेत्र को आज के मानचित्र में 'बाल्कन क्षेत्र' के रूप में देखा जा सकता है. उसके पिता और परिवार के बारेे में कोई जानकारी नहीं हैं. केवल इतना कहा जाता है कि वह मेहनती था और यही कारण था कि उसे रोम सेना में सैनिक बनने का मौका मिला, जहां उसने रोम साम्राज्य के लिए काफी मेहनत की. उसकी जांबाजी के चर्चे हर जगह थे, पर बाद में उसने सेना के जगह डाकूओं का दामन थाम लिया.
बस तभी से वह रोमन सैनिकों की नजर की किरकिरी बन गया था. जब डाकुओं से उसके संपर्क का खुलासा हुआ तो पहले तो उसे सेना से निष्कासित किया गया और फिर बंदी बना लिया. बंदी बने स्पार्टाकस को एक ठेेकेदार के हाथों बेच दिया गया, ताकि वह उससे अपना काम करवाते रहें.
इस तरह स्पार्टाकस सैनिक से कैदी और फिर दास बन गया!
सालों तक वह अपने मालिक का दिया हर काम करता रहा. तत्कालीन रोम में शक्तिशाली गुलामों का एक खेल मशहूर था, जिसमें मालिक अपने दासों को मैदान में उतारते थे. स्पार्टाकस बलशाली था और इसलिए उसे 'ग्लैडीएटर' नामक वॉरक्राफ्ट योद्धा बनने का मौका मिला.
यह खेल क्रूर था, जिसमें किसी की जान की कोई कीमत नहीं थी. यह रोमवासियों के लिए मनोरंजन का सबसे बेहतर जरिया था. स्पार्टाकस को ग्लेडिएटर स्कूल में भर्ती कराया गया, ताकि वह भविष्य का क्रूर योद्धा बन सके.
दासता का विरोध कर भागने में रहा कामयाब
स्पार्टाकस जांबाज था, इसलिए उसे किसी को मारने से कोई गुरेज नहीं था. वह बहुत जल्दी ही खेल के दांव पेंच समझ गया था और फिर वो दिन भी आ गया, जब स्पार्टाकस पहली बार मैदान में उतरा. इस रोमांचक मुकाबले को देखने के लिए रोम की तमाम जनता ग्लैडीएटर स्कूल में जमा हुई थी. स्पार्टाकस के विरोध में कई और क्रूर लडाकू थे. हालांकि स्पार्टाकस की ताकत के आगे सभी पस्त हो गए.
स्पार्टाकस ने एक के बाद एक दुश्मनों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया. मैदान में जहां तहां दुश्मनों को रक्त बह रहा था. दर्शकों में उत्साह था और दुश्मनों में डर. उसके साहस से रोम साम्रराज्य का हर व्यक्ति प्रभावित था. इसके बाद यह सिलसिला आम हो गया.
स्पार्टाकस मैदान में उतरता और मिनिटों में दुश्मनों को धूल चटा देता. ऐसा करके वह दर्शकों को तो खुद कर पा रहा था, पर खुद दुख और वेदना से घिरता जा रहा था. वह किसी को बेवजह नहीं मरना चाहता था, पर चूंकि वह दास था इसलिए यह उसका काम था.
उसके मन में आजादी की उम्मीद जा रही थी और इसी उम्मीद के साथ रोमन साम्राज्य और सम्राट के प्रति विद्रोह की भावना भी.
उसने विद्रोह के रूप में छोटे-मोटे जवाबी हमले करना शुरू कर दिए. सैनिकों के साथ झड़पों की खबरें आने लगी थीं. उसने पहली बार 78 ग्लैडीएटर योद्धाओं को एकजुट किया और स्कूल के बुनियादी ढांचे को नष्ट को करते हुए प्रशिक्षकों पर हमला कर दिया.
स्पार्टाकस के पास हथियार नहीं थे, फिर भी...
उनकी तैयारी केवल हमला करने तक ही थी, पर स्पार्टाकस को वहां से भाग निकलने का मौका मिल गया था. उसने अपने टीम के साथियों के साथ वेसुवियस के पहाड़ों से रास्ता खोजते हुए बाहर निकल जाने का साहस कर दिखाया.
प्लूटार्क के अनुसार स्पार्टाकस और उसके साथियों के पास हथियार नहीं थे, इसलिए उन्होंने रसोईघर में इस्तेमाल होने वाले सामानों से पहला हमला किया था. हमले के बाद उन्होंने सैनिकों के हथियार लूट लिए. चूंकि स्पार्टाकस रोम सेना का हिस्सा रह चुका था इसलिए वह जानता था कि सैनिकों के हमला करने की प्रकृति क्या है? यही वजह थी कि उनका पहला हमला ही सफल रहा.
वेसुवियस के दासों का सैन्य प्रशिक्षण जारी रहा पर इसके साथ ही रोम में अपने चहीते योद्धा स्पार्टाकस के विद्रोह की खबर आग की तरह फैल गई. जिसके बाद रोम के अलग-अलग हिस्सों में मालिकों के दास बने लोगों में भी स्पार्टाकस के प्रति गहरी आस्था जागी. उन्होंने उसकी सेना में शामिल होने का प्रण लिया. इसके बाद से जगह-जगह से दासों के विद्रोह करने और भागने की घटनाएं सामने आने लगी.
कहीं—कहीं लोग खुलकर तो कहीं छिपते छिपाते स्पार्टाकस की सेना में शामिल होने लगे. स्पार्टाकस की पत्नी नबिया को जब विद्रोह की सूचना मिली तो उसने भी अपने मालिका विरोध किया और भागने में कामयाब रही. नबिया थ्रेसहोल्ड की दास थी. थ्रेसहोल्ड भविष्यवाणी करने वाला एक पुजारी था.
अंत में महसूस कर ली थी अपनी हार
स्पार्टाकस के सेना बनाने और दासों के विद्रोह की खबर मिलने के बाद रोमन सीनेेट सर्तक हो गए. उन्होंने कभी भी गुलामों के बारे में इतनी गंभीरता से नहीं सोचा था. शायद इसकी जरूरत इसलिए भी नहीं थी, क्योंकि इसके पहले इतने वृहद स्तर पर किसी ने विद्रोह नहीं किया था.
सीनेट को स्पार्टाकस की ताकत का अंदाजा था पर उसने सोचा कि रोम के जांबाज सैनिकों के आगे उसका बस नहीं चल सकता. शायद यही सीनेट की पहली गलती थी कि उसने अपने दुश्मन को कमजोर समझा.
सैन्य कमांडर गायस क्लॉडियस ग्लोब के नेतृत्व में लगभग तीन हजार अकुशल सैनिकों का एक दस्ता तैयार किया गया. जिसका लक्ष्य स्पार्टाकस की ताकत को खत्म कर देना था. अचानक हुए इस हमले के लिए स्पार्टाकस तो तैयार था पर शायद उसकी सेना पूरी तरह से तैयार नहीं थी.
इसलिए उन्हें पहले योद्ध में पीछे हटना पड़ा.
पर कहा जाता है शेर दो कदम पीछे लेता है तो बडे हमले की तैयारी के लिए. हुआ भी ऐसा ही. स्पार्टाकस ने दासों को प्रशिक्षित किया और रात को हमले की गुप्त योजना तैयार की. सही समय देखते हुए स्पार्टाकस ने अपने दास सैनिकों के साथ वेसुवियस पर हमला बोल दिया.
उनके पास हाथ से बने बम थे, जिससे सैनिकों के शिविरों पर हमला किया गया. इसके पहले की सैनिक सम्हल पाते उनकी मौत सामने खडी थी. जो बचने में कामयाब हो गए उन्होंने जंगल का रास्ता पकड लिया. इसके हमले के बाद दासों ने सैनिकों के हथियार लूट लिया.
जब वार्नीस ने सेना को दो हिस्सों में बांटा
पब्लिसियस वर्नियास के कमांडर वार्नीस ने अपनी सेना को दो हिस्सों में बांट दिया. स्पार्टाकस इस बार मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार था. दासों की सेना ने वार्नीस की सेना को धूल चटा कर मैदान से भगा दिया. रोमन क्षेत्रों (नोरा, नुसरिया, थुरी और मेटापोंटियम) पर हमला कर सीनेटरों के घरों को नष्ट कर दिया गया. 72 ईसा पूर्व के अंत तक स्पार्टाकस के सैनिकों की संख्या लगभग 40 हजार तक पहुंच चुकी थी.
रोमन सम्राट किसी भी तरह अपने साम्रराज्य को बचाना8 चाहते थे.
वे दासों की शक्ति को पहचान चुके थे. उन्होंने सीनेटरों की एक शक्तिशाली सेना बनाने की तैयारी शुरू की. जिसके तहत चुनिंदा सैनिकों को दो रोमन कैथोलिक लूसियस गैलियास पब्लिकोला और लेसस कॉर्नेलियस क्लाउडियास के तहत वेसुवियास भेजा गया.
स्पार्टाकस सह-कप्तान क्रिकसन के साथ अल्फोस पर्वत का दौरा कर रहा था. उनके साथ कुछ दास सैनिक भी थे. तभी रोमन सैनिकों की टुकडी ने उन पर हमला बोला. इस जंग में क्रिकसन की मौत हो गई. जिसके बाद पहली बार स्पार्टाकस ने खुद को इतना कमजोर महसूस किया.
हालांकि, उसके पास फिलहाल पीछे हटने के अलावा और कोई चारा नहीं था. स्पार्टाकस ने अपने घुड़सवार दास सैनिकों को जमा किया और फिर रोमन सैनिकों पर हमला बोल दिया. जंग में रोमन सेना को हार का सामना करना पडा.
इसके बाद स्पार्टाकस अपनी सेना के साथ अल्फोस पर्वत को पार कर गॉल प्रांत जाने के लिए निकल पडा.
...और स्पार्टाकस को रोम वापिस आना पड़ा
यह प्रांत रोमन साम्राज्य के बाहर था, इसलिए उसने योजना बनाई कि यदि हम सभी एक बार यहां से निकल गए तो अपना नया जीवन शुरू कर सकते हैं. हालांकि यह काम इतना आसान नहीं था. इस दौरान की कुछ घटनाओं का कोई इतिहास नहीं मिलता है.
क्योंकि, यहां तब ऐसा कुछ हुआ था जिससेे स्पार्टाकस को एक बार फिर रोम वापिस आना पडा.
कॉर्नेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बेरी स्ट्रॉस के मुताबिक, स्पार्टाकस के मन में रोम के पुन: रूपांतरण और पुर्न:निर्माण की योजनाएं थीं. वह उन्हें मूर्त रूप देना चाहता था. बहरहाल स्पार्टाकस वापिस लौटा और उसने दासों की मदद से फिर से रोम के विभिन्न प्रांतों पर हमले किए.
स्पार्टाकस अपनी सेना के साथ आगे का सफर जलमार्ग से पूरा करना चाहता था. जिसके लिए उसे कुछ जहाजों की के साथ जहाज के नेविगेटर की भी जरूरत थी. इसी खोज में उसका संपर्क सिसिली के समुद्री डाकूओं से हुआ.
तब तक डाकुओं को स्पार्टाकस के साहस के किस्से पता चल चुके थे. उन्होंने स्पार्टाकस की मदद की और उन्हें जहाज के साथ नेविगेटर भी दे दिया. पर वह इतिहास अज्ञात है जिसके अनुसार स्पार्टाकस ने समुद्री डाकू को धोखा दिया था.
मार्कस लिसिनीस क्रेरेस बना प्रतिद्वंद्वी
स्पार्टाकस का अगला प्रतिद्वंद्वी मार्कस लिसिनीस क्रेरेस था. जो रोमन सेना का सबसे जांबाज नेता माना जाता था. स्पार्टाकस का जुनून अब नफरत में बदल चुका था इसलिए वह हर चुनौती का सामना करने को तैयार था. स्पार्टाकस ने क्रेरेस की सेना को एक बार नहीं बल्कि दो बार परास्त किया. क्रेरेस के मन में अब बदले की भावना पैदा हो गई थी. वह किसी भी हाल में स्पार्टाकस से अपने अपमान का बदला लेना चाहता था.
एक जंग की समाप्ति के बाद स्पार्टाकस यह समझ चुका था कि क्रेरेस शांत नहीं बैठेगा. इस बार वह अपनी सबसे शक्तिशाली सेना के साथ हमारे सामने होगा. इसीलिए स्पार्टाकस युद्ध के लिए तैयार नहीं था. उसने पहली शांति संधि की मांग की लेकिन क्रेरेस ने इंकार कर दिया.
स्पार्टाकस ने महसूस कर लिया था कि इस बार उसकी शक्ति कम पडने वाली है फिर भी उसने खुद को तैयार किया और दास सैनिकों को जंग में उतरने का आदेश दिया. उसने क्षेत्र की सीमा पर अपने सबसे अच्छे सैनिकों को तैनात किया. क्रेरेस की सेना आगे बढ रही थी. शक्तिशाली सेना और हथियारों के आगे दास सैनिकों की ताकत कम पड गई. उन्होंने सेना का डटकर सामना किया पर वे खुद को उनके हाथों मरने से नहीं बचा सके.
उसे मैदान छोड़ना गंवारा नहीं था, इसलिए...
जंग के मैदान से स्पार्टाकस के पास भाग निकलने के कई मौके थे. पर वह अपने सैनिकों को मरता नहीं छोड़ना चाहता था. इसलिए उसने आखिरी दम तक डटे रहने का निर्णय किया. क्रेस की सेना के तीस हजार सैनिकों ने स्पार्टाकस की दास सेना को रौंद दिया था.
उसने दो चरणों में हमला किया. पहले चरण में घुड़सवार और तीरंदाजों पर हमला किया गया. इसके बाद पैदल सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया. स्पार्टाकस ने मैदान में हुंकार भरी और सेना में जोश पैदा करने के लिए जोर से कहा, अगल आज हम जीतते हैं तो दुश्मनों के कई घोड़े हमारे नियंत्रण में होंगे और यदि आज हम हार गए मेरे पास इस घोड़े के लिए कोई मूल्य नहीं होगा.
गुलामों में लड़ने का उत्साह था पर वे मौत का आभास भी कर रहे थे. जल्दी ही पूरा मैदान घायल सैनिकों की चीख से गूंज उठा. एक के बाद एक तीर सैनिकों की सीने को छलनी कर रहे थे कि तभी एक मौत का तीर स्पार्टाकस की ओर बढा जो उसके सीने को पार करते हुए आगे निकल गया.
स्पार्टाकस घायल था और रोमन सेना के आगे बेबस. फिर भी उसकी आंखों में साहस की चमक थी. सैनिकों ने उसे भाले से घेर लिया. फिर उन्हीं में से एक भाला उसके शरीर के दो टुकड़े करते हुए पार कर गया.
स्पार्टाकस ने वीरगति पा ली थी. उसके इस साहस को 'तीसरा सरविल युद्ध' या 'ग्लेडिएटोरियल वार' के नाम से इतिहास के पन्नों में दर्ज कर लिया गया. स्पार्टाकस की मौत हो चुकी थी पर उसने क्रांति की जो लौ जलाई थी वह आगे चलकर रोमन साम्रराज्य के पतन का कारण बनी.
Web Title: Story of Spartacus, Hindi Article
Representative Feature Image Credit: server2