पगानी ये वो नाम जिस से हर एक कार प्रेमी वाकिफ है.

यह एक अन्तर्राष्ट्रीय कार ब्रांड है. पगानी… एक ऐसा ब्रांड, जो फरारी और लेम्बोर्गिनी जैसी कंपनियों से आंखों में आंख डालकर बात करती है. इस कंपनी की गाड़ियाँ अकसर बड़ी और प्रसिद्ध कंपनियों की गाड़ियों को भी टक्कर दे देती है.

पगानी को बनाने वाले होरेशियो पगानी को बहुत ही कम लोग ही जानते हैं. बहुत कम ही लोग जानते हैं उनकी कहानी कि कैसे वह गरीबी से लड़े, एक कार कंपनी में काम किया और कैसे फिर अपनी खुद की इतनी बड़ी कार कंपनी बनाई.

तो आइए जानते हैं होरेशियो पगानी की प्रेणनादायक कहानी–

बचपन से था गाड़ियों का शौक

पगानी के मालिक होरेशियो पगानी का जन्म अर्जेंटीना के एक बेकर के घर में हुआ था. होरेशियो को बचपन से ही गाड़ियों से बहुत प्रेम था. घर के अर्थिक हालात कमजोर थे, लेकिन इस से होरेशियो के सपनों पर कोई फर्क नहीं पड़ा.

होरेशियो अपने बचपन का ज्यादातर समय घर के पास ही एक गैराज में गुजारा करते थे. उस गैराज में होरेशियो एक लोकल मॉडल मेकर से नाजुक लकड़ी और डूको पेंट के सारे गुर सीखा करते थे.

शायद यही वजह थी कि महज 12 साल की उम्र में लकड़ी और चिकनी मिट्टी से होरेशियो ने गाड़ी का डिजाइन बना दिया था.

इसके बाद तो उन्होंने कभी रुकने की सोची ही नहीं. उन्होंने एक के बाद एक कई सारी और गाड़ियाँ बनाई.

होरेशियो का सपना बहुत बड़ा था. वो खुद की डिजाइन की हुई गाड़ी बनाना चाहते थे. 20 साल की उम्र में होरेशियो ने F3 कार का डिजाइन बना दिया था.

इसके बाद डिज़ाइन बनाने का यह सिलसिला यूँ ही चलता रहा.

Pagani Used To Make Toy Cars In Childhood (Representative Pic: gamblighini)

एक ‘मुलाकात’ जिस ने बहुत कुछ बदल दिया!

जुआन मैनुअल फेनजीओ उस वक्त के महान F1 रेसर थे. जुआन होरेशियो के रोल मॉडल भी थे.

होरेशियो को एक बार उन से मिलने का मौका मिला और वह मुलाकात इतनी प्रभावशाली रही कि होरेशियो और जुआन जिंदगी भर के लिए दोस्त बन गए.

कहते हैं कि जुआन होरेशियो से इतने प्रभावित हो गए थे कि उन्होंने खुद होरेशियो से कहा था कि तुम्हें कारों में काम करना चाहिए.

जब होरेशियो 28 के हुए तो वह नौकरी के लिए इटली जा पहुंचे. कुछ साथ में था तो वह था एक सपना, मेहनत करने की हिम्मत और जुआन का दिया हुआ एक सिफारिशी पत्र.

इन चीजों को अपने साथ लेकर अपनी किस्मत आजमाने होरेशियो निकल पड़े.

Juan Manuel Fangio Inspired Pagani To Make Cars (Pic: wallpapersqq)

लेम्बोर्गिनी में जुआन का ‘सफर’

लीजेंडरी कार रेसर जुआन मैनुअल फेन्गियो की ओर से मिला सिफारिशी पत्र आखिर में काम कर ही गया.

उन्हें लेम्बोर्गिनी में एक नौकरी मिल गई.

होरेशियो लेम्बोर्गिनी में पहले तो निचले स्तर पर थे, लेकिन उनकी मेहनत और लगन नें उन्हें कुछ ही समय में लेम्बोर्गिनी के तीसरे स्तर का डिजाइनर बना दिया था.

उनके द्वारा बनाया गया एक मॉडल लेम्बोर्गिनी ने ‘काउंटचर’ के नाम से मार्केट में उतारा था, जो बहुत सफल रहा.

यह कहना गलत नहीं होगा कि इस मॉडल को लेम्बोर्गिनी के सबसे महानतम मॉडल में से एक माना जाता है.

पगानी के आने से पहले यही वह गाड़ी थी जिसने होरेशियो को कार जगत में मशहूर कर दिया था. इस गाड़ी ने सुपरकार के बाजार मे एक छाप छोड़ दी थी. इतना ही नहीं इसके आने के बाद से तो होरेशियो की किस्मत भी चमकने लगी थी.

पगानी का सपना ‘कार्बन फाइबर कार’

होरेशियो की सोच दूरदर्शी थी. होरेशियो कार जगत में क्रांति लाना चाहते थे. इस क्रांति में वह कार्बन फाइबर को अपना हथियार बनाना चाहते थे.

कार्बन फाइबर एक विशेष चीज थी जो पगानी को आकर्षित करती थी. वह गाड़ियों की बॉडी लोहे की बजाए कार्बन फाइबर से बनाना चाहते थे.

कार्बन फाइबर की यह विशेषता थी कि वह लोहे के मुकाबले वजन में हलका होता है. कार्बन फाइबर कई मायनों में लोहे के मुकाबले ज्यादा मजबूत भी होता है. इसकी सिर्फ एक खामी है कि यह बहुत महंगा होता है.

होरेशियो कार्बन फाइबर के साथ एक बेमिसाल कार बनाना चाहते थे, लेकिन दिक्कत ये थी कि लेम्बोर्गिनी को कार्बन फाइबर में उस वक्त कोई दिलचस्पी नहीं थी.

उन्होंने होरेशियो को यह कहकर मना कर दिया कि जब फरारी को ऐसी टेक्नोलॉजी की जरूरत नहीं है तो हमें वह भला क्यों चाहिए?

इस बात से होरेशियो आहत हुए और नतीजा यह निकला कि पगानी ने 1991 में अपने सपनों की गाड़ी बनाने के लिए लेम्बोर्गिनी को छोड़ दिया. लेम्बोर्गिनी से मिले रिजेक्शन से ज्यादा उन्हें अपने सपने पर भरोसा था.

अपना यही सपना पूरा करने वह निकल पड़े थे अपने नए सफ़र पर.

Pagani Want To Make A Carbon Fiber Car (Representative Pic: motortrend)

शुरू हुआ ‘असली सफर’

होरेशियो ने जब लेम्बोर्गिनी को छोड़ा था, तो उनके सामने वही परेशानी दोबारा से हाथ फैलाए खड़ी थी जिसका सामना उन्होंने बचपन में किया था.

उस परेशानी का नाम था पैसों की तंगी…

पगानी के पास पैसे तो थे क्योंकि वह लेम्बोर्गिनी के मुख्य डिजायनरों में से एक थे, लेकिन इतने नहीं थे कि वह एक सुपरकार बनाने वाली कंपनी खोल सकें.

पगानी ने इस का एक नया रास्ता निकाला. उन्होंने एक कार कंपनी खोलने से पहले उसके लिए पैसे जुटाने के लिए एक दूसरी कंपनी खोली जिस में वह कार्बन फाइबर बना सकें और सुपर कार बनाने लायक पैसे जोड़ सकें.

वह ज्यादा पैसे तो नहीं जुटा पाए, इसलिए उन्होंने इस काम के लिए थोड़ा क़र्ज़ ले लिया.

पगानी ने कर्ज लेकर कार्बन फाइबर बनाने वाली खुद की एक कंपनी खोली. पगानी की मेहनत रंग लाई औऱ यह कंपनी इतनी चली कि कुछ ही समय में ग्राहकों की लाइन लग गई थी.

हालांकि होरेशियो का सपना कुछ और ही था. यह तो बस एक कदम था पूंजी जूटाने के लिए. एक साल के अंदर ही पगानी ने इतना पैसा कमा लिया कि वह तैयार हो गए खुद की कंपनी खोलने के लिए.

आखिर में 1992 में उन्होंने पगानी ऑटोमोबाइल नाम से अपनी कंपनी की शुरुआत की.

…और फिर आई ‘पहली कार’

1992 में होरेशियो ने पगानी ऑटोमोबाइल की तो स्थापना कर दी थी, लेकिन उन्हें अपनी पहली गाड़ी निकालने में 7 साल लग गए.

सात साल बहुत लंबा समय होता है सिर्फ एक गाड़ी के लिए, लेकिन अगर यही तुम्हारा सपना हो तो पता नहीं चलता कि यह सात साल कब निकल गए.

पगानी ने सात साल तक मेहनत करी थी अपनी पहली गाड़ी पगानी जोंडा को लाने के लिए. सात साल में कई परेशानियां उनके सामने आई, लेकिन कोई भी ऐसी नहीं थी जो उनके हौंसले को तोड़ सकती.

सात साल में पहले साल यानी कि 1993 तक उन्होंने रिसर्च करी कि किस तरह एक बेहतरीन सुपरकार को बनाया जा सकता है. 1993 के अंत तक पगानी ने एक प्रोटोटाइप मॉडल का टेस्ट किया जो कि सफल रहा.

हालांकि यह टेस्ट केवल बॉडी का था. एक सुपरकार को एक ताकतवर इंजन भी चाहिए होता है.

यही पगानी को भी चाहिए था!

पगानी ने इंजन को खोजना शुरू किया. पगानी की खोज उसकी पिछली कंपनी जिसमें वह केवल कार्बन फाइबर बनाते थे, उस के एक ग्राहक डेमलर पर जाकर खत्म हुई.

डेमलर ने पगानी के लिए v12 इंजन का जुगाड़ कर दिया था. इस के बाद सन 1994 में पगानी और डेमलर ने एक समझौते में प्रवेश किया जिसमें कार्बन फाइबर की बॉडी के अंदर V12 इंजन लगाया गया जो कि डेमलर का था.

कार बन कर तैयार थी… अब बारी थी उसके नाम की!

होरेशियो पगानी ने उसका नाम अपने पुराने दोस्त या कहें गुरू, अर्जेंटीना के लिजेंड्री कार रेसर जुआन मैनुअल फेनजीओ के नाम से मिलता जुलता रखना था.

हालांकि, पगानी ने 1995 में अपने लंबे समय के दोस्त और संरक्षक जुआन मैनुअल फेनजीओ की मौत के बाद इसे बदलने का फैसला किया और नया नाम रखा ‘पगानी ज़ोंडा सी 12’.

Horacio Pagani With Pagani Zonda (Pic: tn)

जब सपना हुआ पूरा…

1999 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अन्तर्राष्ट्रीय जिनेवा मोटर शो में पहली बार पगानी जोंडा की झलक दुनिया ने देखी. जेनेवा मोटर शो पर दुनिया भर के कार प्रेमियों की नजर थी.

यही वजह थी पगानी जोंडा को यहां लाने की. इसके 6.0 – लीटर वी 12 में से कुल 402 होर्स पावर थी.

कार्बन फाइबर इस्तेमाल करने के कारण इसकी रफ़्तार बाकी गाड़ियों के मुकाबले ज्यादा तेज थी.

0 से 60 मील प्रति घंटे की रफ़्तार तक यह गाड़ी केवल 4.2 सेकंड में पहुँच सकती है. इसकी टॉप स्पिड 185 मील प्रति घंटे के आसपास यानी 297 किलोमीटर प्रति घंटा है.

कंपनी ने ऐसी केवल पांच ही गाड़ियाँ बनाई थी. उस वक्त पगानी जोनंडा की कीमत 320,000 डॉलर के करीब थी.

यह गाड़ी जब मार्केट में आई तो इसने लोगों को अपना दीवाना बना दिया. इसके बाद तो पगानी ने कभी पीछे मुड़कर भी नहीं देखा. इसके बाद तो पगानी का नाम भी प्रसिद्ध सुपरकार कंपनी में आने लगा.

कार्बन फाइबर के उपयोग ने पगानी का नाम और भी ऊंचा कर दिया. पगानी ने आखिर में दिखा ही दिया कि सच्चे दिल से देखे सपने एक दिन जरूर पूरे होते हैं.

Horacio Pagani (Pic: mydrivemedia)

पगानी के बनने की कहानी वाकई में बहुत प्रेरणादायक है. होरेशियो ने बचपन में जो सपना देखा था आखिर में उन्होंने वह पूरा कर ही लिया.

उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी!

न तो बचपन में गरीबी के आगे वह हारे और न ही बड़े होकर लम्बोर्गिनी जैसी बड़ी कंपनी के आगे. उन्होंने कड़ी मेहनत की और आखिर में उन्हें इसका फल मिल ही गया.

वैसे, जिस लैम्बोर्गिनी कंपनी से पगानी निकले थे, उसकी कहानी भी कुछ-कुछ ऐसी ही रही है. उसे आप यहाँ पढ़ सकते हैं!

वैसे आपको ‘पगानी के उदय की कहानी’ कैसी लगी… कमेंट बॉक्स में हमें जरूर बताएं.

Web Title: The Journey Of Pagani Car, Hindi Article

Featured Image Credit: pintrest