युद्ध और इंसानों का चोली दामन का साथ रहा है!

चाहे किसी भी सभ्यता का इतिहास उठाकर देख लीजिए, वहां सैकड़ों जंगों की दास्तान लिखी मिल जाएगी. ये युद्ध साम्राज्य के विस्तार, आन-बान-शान, राजनैतिक स्वतंत्रता, संसाधन आदि के लिए लड़े गए थे.

हालांकि आज के इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी जंगों के बारे में बताएंगे जो अजीबो-गरीब मुद्दों पर लड़ी गईं. यही नहीं कुछ युद्ध तो ऐसी वजहों से लड़े गए जिनके बारे में जानकर आपकी हंसी छूट जाएगी.

तो आइए ज्यादा देर न करते हुए आपको बताते हैं इतिहास में लड़े गए कुछ ऐसे युद्ध जिनके पीछे की वजह बहुत ही अजीब थी–

‘सूअर’ के लिए लड़े अमेरिका-ब्रिटेन

कोई सपने में भी नहीं सोच सकता था कि एक सूअर भी युद्ध का कारण बन सकता है. वो भी दुनिया की दो महाशक्तियों ब्रिटेन और अमेरिका के बीच. वर्ष 1859 में ऐसा वास्तव में हो चुका है.

हुआ यूं कि अमेरिका और ब्रिटेन के वैंकूवर के बीच एक आईलैंड सैन जुआन की जमीन पर दोनों देश अपना अधिकार बताते थे. यहां अमेरिकी नागरिक और ब्रिटेन की एक कंपनी के कर्मचारी रहते थे. ये दोनों ही इसकी उपजाऊ जमीन पर अधिकार जमाते थे.

एक दिन अमेरिकी किसान लाइमन कटलर ने ब्रिटिश नागरिक के एक पालतू सूअर को गोली मार दी. दरअसल, वह सूअर अमेरिकन किसान के आलू के खेतों को बर्बाद कर रहा था. इसी को लेकर दोनों गुटों में झगड़ा हो गया और ब्रिटिश नागरिकों ने कटलर को गिरफ्तार करने तक की धमकी दे डाली.

इस बात का पता जब अमेरिकी अधिकारियों को चला तो उन्होंने मिलिट्री को बताया. यूएस आर्मी ने कैप्टन जॉर्ज पिकेट को एक छोटी टुकड़ी के साथ सैन जुआन भेज दिया. पिकेट ने समूचे आईलैंड को अमेरिका का घोषित कर दिया जिसके जवाब में ब्रिटिश सेना ने अपने एक सशस्त्र नौसैनिक बेड़े को आईलैंड पर भेज दिया.

इसके बाद दोनों देशों की सेना आमने सामने खड़ी हो गई. हालांकि किसी ने भी एक दूसरे पर कोई हमला नहीं किया मगर वह दोनों ही एक दूसरे के पहल करने का इंतजार कर रहे थे.

कई सप्ताह तक तनाव की स्थिति बने रहने के बाद दोनों गुटों ने आपस में समझौता किया कि सैन जुआन आईलैंड पर दोनों देशों की संयुक्त सेनाएं रहेंगी. इसके बाद वहां पर फिर से शांति कायम हो पाई.

किसी ने नहीं सोचा था कि एक सूअर इतने बड़े तनाव का कारण बन सकता है!

The Pig War (Pic: trendymen)

दंगों का कारण बनी ‘रथ-रेस’

532 ईसा पूर्व टर्की के कांस्टेंटिनोपल यानी के इस्तांबुल में उन दिनों राजा जस्टिनियन का राज था. इसके हिप्पो ड्रोम इलाके के लोगों में रथ रेस का बड़ा ही क्रेज था. इसलिए रथ रेसिंग के कई गुट बन गए थे जो स्पोर्ट्स फैन कम… हुड़दंगी ज्यादा थे!

इन्हीं में से दो गुट ब्लूज और ग्रीन्स अपनी बर्बरता के लिए कुख्यात थे.

रथ रेस उनके लिए इतनी जरूरी थी कि अक्सर उसके लिए वह एक दूसरे से लड़ बैठते थे.

रथ रेस के पीछे होती लड़ाई देख राजा जस्टिनियन ने रथ रेसिंग बैन कर दी. दोनों गुटों के लीडर को कैद में रख लिया गया और उन्हें छोड़ने से इंकार कर दिया गया. इसके बाद रथ रेस को हमेशा के लिए ख़त्म करने के लिए उन्होंने दोनों गुटों के लीडर को मारने का फरमान सुना दिया.

इसके बाद दोनों गुट अपनी लड़ाई भूलकर एक हो गए और राजा के खिलाफ विद्रोह की घोषणा कर दी. इसके बाद वहां दंगे भड़क गए. कई लोग इस दंगे की चपेट में आ गए. रथ रेस के कारण शुरू हुई इस लड़ाई में आम जनता का सबसे ज्यादा नुक्सान हुआ.

दंगाईयों ने राजा के तख्तापलट की भी कोशिश की. हालांकि राजा ने चाल चलते हुए ब्लूज के लोगों को घूस देकर अपनी तरफ कर लिया और बाकी के गुंडों पर हमला बोल दिया. कुछ समय बाद ये जंग तो खत्म हो गई, लेकिन इस लड़ाई के खत्म होने तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी थी.

Wars Fought For kinda weird Reasons (Representative Pic: flickr)

एक कुत्ते की वजह से हुए ‘दंगे’

20वीं सदी में तो गजब ही हो गया जब एक कुत्ते की वजह से दो देशों में जंग छिड़ गई!

दरअसल 1910 में हुए द्वितीय बाल्कन युद्ध के बाद से ही ग्रीस और बुल्गारिया एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गए थे.

इस आग को हवा तब मिली जब अक्टूबर 1925 में एक ग्रीक सैनिक अपने कुत्ते के पीछे भागते हुए बॉर्डर क्रॉस कर गया. अपने क्षेत्र में ग्रीस सैनिक को देखते ही बुल्गारिया के एक सैनिक ने उसे शूट कर दिया जिसमें उसकी मौके पर ही मौत हो गई.

इस कार्यवाही का असर यह रहा कि ग्रीस में बुल्गारिया के खिलाफ आंदोलन छिड़ गया. मारे गए सैनिक की एक शोक सभा की गई. ग्रीस के कई सौ लोगों के अंदर गुस्से का गुबार फूल रहा था. उन्होंने बुल्गारिया को ख़त्म करने की कसमें खा ली. एक बार जैसे ही शोक सभा ख़त्म हुई ग्रीस के बहुत सारे लोग बुल्गारिया की ओर बढ़ने लगे.

एक बार जैसे ही ग्रीस लोग बुल्गारिया की धरती पर पहुंचे उन्होंने वहां के गाँवों पर हमला कर दिया और उन्हें अपने कब्जे में ले लिया. उन्होंने तो पेट्रिक सिटी पर गोलीबारी करने की तैयारी भी कर ली थी, लेकिन तभी ‘लीग ऑफ नेशन्स’ ने दोनों देशों का समझौता कराया.

इस संगठन ने हमले की निंदा की और बाद में एक अन्तर्राष्ट्रीय समिति ने दोनों देशों के बीच सीजफायर करवाई. सीजफायर में काफी देर हो चुकी थी क्योंकि कई लोगों की जान इस दंगे के चक्कर में चली गई थी.

War Greece And Bulgaria (Representative Pic: wikipedia)

‘कटे कान’ के लिए स्पेन से लड़ा ब्रिटेन

हुआ यूं कि एक ब्रिटिश नाविक रॉबर्ट जेनकिन्स ने अपनी संसद में प्रतिनिधियों को अपना कटा हुआ और कमजोर कान दिखाया. यहां उसने बताया कि 7 साल पहले एक स्पेनिश कोस्ट गॉर्ड ने स्मगलिंग का आरोप लगाते हुए उसका कान काट दिया था. इसके बाद पूरे ब्रिटेन में ये बात ऐसी फैली जैसे ‘जंगल की आग’!

हर किसी ने स्पेन से इसका बदला लेने की ठान ली.

दरअसल, साल 1700 की शुरूआत से ही स्पेन और ब्रिटेन के बीच कोल्डवार चल रही थी. इसे हवा दी जेनकिन्स के कान ने और इसी के साथ ही इतिहास में पहली बार किसी के कान की वजह से युद्ध की शुरूआत हुई.

दोनों देशों ने अपनी सारी दौलत लगा दी सी युद्ध में. हर किसी को सेना में भर्ती किया जाने लगा ताकि सैनिकों की कोई कमी न पड़े. इस जंग की शुरुआत 1739 में हुई थी और करीब दो साल तक यह चलती रही.

इस जंग के आखिर में हुआ कुछ भी नहीं. किसी को जीत हासिल नहीं हुई. इसमें बस पैसे और लोगों की जान ही बर्बाद हुई और कुछ नहीं.

Cold War (Representative Pic: rbth)

468 वर्ग मीटर भूमि के टुकड़े के लिए हुआ युद्ध!

आज की तारीख में भले ही मिशिगन और ओहियो दो राइवल फुटबॉल प्लेइंग देशों के लिए जाने जाते हों, लेकिन इनकी ये दुश्मनी काफी पुरानी है. इनकी यह दुश्मनी फुटबॉल के कारण नहीं बल्कि जमीन के छोटे से टुकड़े के कारण हुई थी.

दोनों की दुश्मनी साल 1803 में सीमा पर 468 वर्ग मीटर भूमि के टुकड़े को लेकर शुरू हुई थी.

उस जमाने में नए बने ओहियो ने टोलिडो सिटी के छोटे से हिस्से को अपना घोषित कर दिया. साल 1830 में मिशिगन ने टोलिडो सिटी को अपना बताते हुए ओहियो के साथ जोरदार बहस शुरू कर दी. दोनों में से कोई भी हार मानने के लिए तैयार नहीं था. दोनों ही उस छोटे से जमीन के टुकड़े के पीछे पागल हुए पड़े थे.

इतना ही नहीं आगे चल कर यह मामला युद्ध तक खिंच गया जिसे इतिहास में टोलिडो वार के नाम से जाना जाता है. तब ओहियो के राष्ट्रपति एंड्रयू जैक्सन ने 1835 में हस्तक्षेप किया और साल 1836 में समझौता करा दिया. इसके तहत मिशिगन ने ऊपरी पेनिसुला के एक भाग के बदले में टोलिडो को ओहियो का राज्य घोषित कर दिया.

The Toledo War (Pic: pinterest)

तो यह थी कुछ ऐसी लड़ाईयां जो बेकार के कारणों के कारण शुरू हुई थी. इनके कारण वाकई में बेहद अजीब थे और शायद इन पर लड़ाई करने का कोई मतलब नहीं बनता था. हालांकि अब तो जो हो गया वो तो हो गया.

वैसे हम और आप भी कई बार ऐसी बेवकूफियों के कारण लड़ाई के चक्कर में फंस जाते हैं… तो अगर आपको कोई वाकया याद हो तो कमेन्ट-सेक्शन में अवश्य शेयर करें!

Web Title: Wars Fought For kinda weird Reasons , Hindi Article

Featured Image Credit: time