उस दिन सदैव की भाँति ट्रेन से घर जा रहा था. इस उम्मीद में कि ट्रेन समय से मिल जाएगी.. पीठ पर सदैव की भांति एक बैग था. और दूसरे हाथ में अखबार. स्टेशन पहुंचा तो ट्रेन दो घण्टा लेट थी..हाय !मुंह से सदैव की भांति निकला..ओफ़्फ़ ! मैंने ‘प्रभु जी’ को याद कियाऔर धड़ाम से बैठ गया..

ततपश्चात एक चंचल सी मोहतरमा आईं. हाय! वो कत्थक वाली चाल, भरतनाट्यम वाली अदा, हिपहाप वाला ड्रेस और ब्रेक डांस वाला एट्टीट्यूड. उन्होंने तेरह बार मुंह चमकाया और दस बार अपने हाथ.

आठ बार अपने बालों को संवारा एग्यारह बार घड़ी देखा.. इस अनवरत प्रक्रिया के पश्चात जब वो मोबाइल से बात खत्म करके बैठीं तो आस-पास के सभी लोग भी उनसे अपनी निकटता महसूस करने लगे. बगल वाले लड़के जो सदैव की भांति सेना की भर्ती में असफल होकर हाथ में सरस सलिल लिए घर जा रहे थे, उनके मुंह से आवाज आने लगी..! “अरे यार चल.. अब ट्रेन दो-चार घण्टा क्या, दो चार दिन भी नहीं आए तो कोई बात नहीं.. ”

सहसा देखा एक नाटी कद का सांवला सा लड़का मोहतरमा को बड़ी ही उम्मीद के साथ देखे जा रहा और मोहतरमा अपने मोबाइल में कुछ किए जा रहीं. लड़का अपनी इस उपेक्षा से आहत होकर सरस सलिल पढ़ने लगा… मानों उस जैसा पढ़निहार इस सदी में लालटेन चटाई लेकर भी खोजने पर नहीं मिलेगा.. ये अलग बात थी कि वो जिस पन्ने को पढ़ रहा था उसके एक पेज पर लिखा था.. “नाकाम रोगी मिलें हर शुक्रवार.. महान सेक्स विशेषज्ञ एस के जैन.”

Online Scam and Sex Disease (Pic: Blogspot)

दूसरे पन्ने पर भी कुछ पढ़ाई लिखाई की ही बातें थी जिसमें एक मोहतरमा कूल्हे को मटकाते हुए कुछ उपदेश टाइप दे रही थी. जिसका सार ये था कि ..

‘एक हफ्ते में गोरा बनें.अब आपको सब बोलेंगे हाय! हैंडसम…”

तब मुझे हंसी आई. और मैंने महसूस किया कि मेरा स्वास्थ्य ठीक है.. मोहतरमा के जाते ही स्टेशन का माहौल एकदम आध्यात्मिक हो गया.. तब मुझे विश्वास हो गया की मेरी दृष्टी भी सही-सलामत काम कर रही है..

सहसा देखा मोहतरमा के जाते सभी लड़कों के बदन में जो चुस्ती-फुर्ती आई थी वो अब थकान में बदलने लगी है.. मुझे लगा कि भारत सरकार को एक पत्र लिखूं कि..”माननीय.. सेना की भर्ती में जब गाजीपुर-बलिया से लड़के जाएं तो कृपा करके स्वास्थ्य और बौद्धिक परीक्षण करने के लिए इसी टाइप की मोहतरमाओं को बुलाया जाए.. ताकि हम देश हित में अधिक प्रतिभाशाली, बलशाली और कभी न थकने वाले सैनिक पा सकें..”

लेकिन मैंने अपने इस ‘टुच्चे’ से विचार को पानी की खाली बोतल के साथ फ़ेंक देना ही उचित समझा..ट्रेन आ चुकी थी और मैं बैठ चुका था. कुछ लोग हल्ला कर रहे थे और कुछ लोग हल्ला कर चूके थे.

फिर क्या था..सदैव की भाँति एक और विज्ञापन पर मेरी नज़र गयी.. और जब नज़र गयी तो मैनें पाया की उस विज्ञापन को भी हम पिछले पन्द्रह साल से सदैव की भाँती देख रहे हैं. बचपन से पढ़ रहे हैं, सो विज्ञापन में वही लिखा था, जो लिखा रहता है..

“नाकाम और निराश रोगी मिलें..”
“मर्दाना ताकत बढ़ाएं..शर्तिया इलाज.
डाक्टर एम रहमानी
हर बुद्धवार दिमागी चट्टी.

मुझे उस सरस सलिलमय विज्ञापन के बाद इस गुप्त शर्तिया इलाज वाले दीवालीया विज्ञापन से मन में नाकामियत जैसी निराशा भरने लगी..

सोचने लगा .. आखिर ये जो गुप्त रोग विशेषज्ञ होते हैं. वो गुप्त रोग विशेषज्ञ कम मनोरोग विशेषज्ञ ज्यादा होते हैं.. तभी तो बलिया से लेकर बनारस तक सैकड़ों प्रसिद्ध डाक्टर हैं, लेकिन किसी ने अपना विज्ञापन करने के लिए इन रेलवे लाइन के किनारे वाली दीवालों को नहीं चुना.. न ही किसी सरस सलिल में कोई ऐड ही दिया..

तभी एक और घटना हुई.. देखा सामने एक फालतू सा अखबार रखा है..और आपको बिदित हो कि मेरे जैसा पढ़निहार का भले चौबीस घण्टे सलेबस की किताबों से मुकदमा चले लेकिन वो अखबार में रखे समोसे को मुंह में लेकर चटनी से भीग गयी उस खबर को जरूर पढ़ लेता है. जिसमें सदैव की भाँती लिखा होता है.. गांजा के साथ चार गिरफ्तार. बस ने महिला को टक्कर मारी.. लड़की छेड़ने के चक्कर में चार मनचले हिरासत में..”

लेकिन साहेब..यहाँ कुछ बात अलग थी.. इस अखबार में देखा कि पहले पेज पर एक खबर छपी है.. जिसमें बताया गया है कि नोएडा सेक्टर 63 में अब्लेज़ इन्फ़ो सोल्यूशंस प्राईवेट लिमिटेड के नाम से एक कंपनी चल रही थी. जिसने सोशल ट्रेडिंग के नाम पर 37 अरब की ऑनलाइन ठगी करने में कामयाब होकर फरार होने में नाकामयाब हो गयी है..

Online Scam and Sex Disease, Social Trade Biz Scam (Pic: Team Roar)

और साथ ही साथ उस कम्पनी ने करीब सात लाख लोगों से एक पोंजी स्कीम के तहत 3700 करोड़ से ज़्यादा की रकम इनवेस्टमेंट के नाम पर ऑनलाइन ले लीया है..और तो और इस कंपनी ने अपनी वेबसाइट बनाई . जिसका नाम socialtrade.biz था. और इस पोर्टल से जुड़ने वाले को 5750 रूपये से 57,500 रुपये तक कंपनी के अकाउंट में जमा कराने होते थे. उसके बदले पोर्टल के हर सदस्य को हर क्लिक पर 5 रुपये घर बैठे-ठाले मिल जाते थे.

गुप्त रोग के विज्ञापन से मेरा ध्यान तब झटके से हट गया …

इसी प्रकार हर मेंबर को अपने नीचे दो और लोगों को जोड़ना होता था. जिसके बाद उस सदस्य को एक्स्ट्रा पैसे मिलते थे.
आगे सुनिये ..
इन्फ़ोर्समेंट एजेन्सी से बचने के लिए यह फ्रॉड कंपनी वर्चुअल वर्ल्ड में लगातार नाम बदलती रहती थी.. पहले socialtrade.biz फिर freehub.com और बाद में उसका नाम intmaart.com से frenzzup.com और फिर 3W.com किया गया.
आगे लिखा था कि इसमें फंसने वाले लोग बेहद हाई-फाई, इंटेलेक्चुअल और संस्कारी किस्म के लोग थे..जो फेसबुक की डीपी में चाणक्य का फ़ोटो लगाकर ज्ञान बघारने में सदैव आगे रहते हैं..

मेरे मुंह से निकला.. हाय!

इस समाचार को पढ़ने के बाद मैं कहीं खो सा गया..और दिमाग में झपताल चौगुन की लय में बजने लगा.. पढ़े लिखे समझदार लोग..
फिर याद आया. अतुल बाबू..आपका उदास होना व्यर्थ है, ये तो होना ही था..अरे ! पैसे का विवेक से सम्बन्ध नहीं होता. न ही डिग्री का समझदारी से…

फिर तो उन गुप्त रोग और गोरा बनाने वाले विज्ञापनों की बड़ी याद आई..और मैं पांच मिनट के लिए कहीं खामोश सा हो गया… मानों अब इसी ट्रेन में बुद्धत्व को उपलब्ध हो जाऊँगा..

सहसा मन में एक सवाल कौंधा कि “हकीम एम रहमानी और एस के जैन टाइप डाक्टर अब हाइटेक होने लगे हैं क्या..”?..अब ये रेलवे लाइन से सटी हुई दीवारों और सरस सलिल के पन्नों से निकलकर ऑनलाइन भी आ चुके हैं क्या” ?

तो दिल से आवाज आई.. जी हाँ..जी हाँ…साहेब .. अब बिजनेस स्ट्रेटजी बदल चुकी है.

Online Scam and Sex Disease (Pic: practo.com)

आज मार्केटिंग का एक ही फंडा है.. वो है मनोवैज्ञानिक रूप से किसी चीज की जरूरत पैदा करना. और अपनी खराब चीज को बढ़िया तरीके से बेचना” मल्लब लब्बोलुआब ये है कि अगर इस दौर में आपको अपना सामान बेचना नहीं आता तो आप फेल मार जाएंगे. सामान कितना भी बढ़िया क्यों न हो..आपने इन हकीमों की तरह पैकेजिंग पर ध्यान नहीं दिया तो भी आप फेल..
अब ये ऑनलाइन हकीम पहले अपनी ऑनलाइन ब्रांडिंग करते हैं.
और फिर इस टैगलाइन के साथ विज्ञापन देते हैं…

“क्या आप अपनी नौकरी से परेशान हैं? क्या आपके जीवन में सुख नहीं है..अब घर बैठे ऑनलाइन लाखों कमाएं.. जीवन सुखी बनाएं..”
और मजे की बात ये है कि दुनिया में 98% लोग अपनी नौकरी से परेशान होते हैं..और उतने ही प्रतिशत लोग अपने जीवन से दुःखी होते हैं..

बस इत्ती सी बात होती है. और इत्ती सी बात को पढ़ते ही पढ़े लिखे, समझदार, डिग्रीधारी लोग ये महसूस करने लगते हैं कि वो अपने जीवन में नाकाम और निराश हैं. जापानी तेल की कसम उनके अंदर जोश का अभाव है. और फिर जब लोगों को एक रात वाकई में ये महसूस हो जाता है कि वो सचमुच के नाकाम हैं तो दिवालिया विज्ञापनों में फंस जातें हैं.. बस इन नए ज़माने के हकीमों का बिजनेस चल निकलता है.

बस जरा आँखें खोलने की जरुरत है.. जरा पहचानने की.. क्योंकि मार्केटिंग अब रेलवे स्टेशन की दिवाल और सरस सलिल के पन्नों से निकलकर डिजिटल स्वरूप धारण कर चुकी है.. जापानी तेल अब नाकामी दूर करने के लिए नहीं.. अब फ्यूचर ब्राइट करने के लिए भी बेचा जा रहा है. सो भविष्य में ऐसे रहमानी टाइप डॉक्टर थोक के भाव में मिलेंगे आपको. जो आपको सुखी, सम्पन्न और पांच मिनट में करोड़पति, हर मिनट लाखपति बनाने का ख्वाब दिखाएंगे..और आप उनके शब्द जाल में धीरे-धीरे फंसते चले जाएंगे.. अंत में आपको ये समझ नहीं आएगा कि जो खुद बीमार है वो आखिर हमें कैसे ठीक कर सकता है.. ?

बकौल कुंवर बेचैन..

बोया नहीं कुछ भी मगर फसल ढूढ़तें हैं लोग
ये क्या मजाक चल रहा है क्यारीयों के साथ

तबियत हमारी ठीक रहे भी तो किस तरह
आते हैं खुद हकीम ही बीमारीयों के साथ

Web Title: Online Scam and Sex Disease, By Atul Kumar Rai

Keywords: Scam, Corruption, Intellectual, Fraud, Gupt Rog, Satire, Hindi Story, Social Trade Scam, Network Marketing, Money, Desi Stories