उसने पूछा कि काला रंग अशुभ क्यों होता है? आखिर किसी शुभ अवसर पर काले रंग के कपड़े क्यों नहीं पहने जाते?

प्रश्न पेचिदा है. दुल्हन लाल रंग की साड़ी पहनकर आती है क्योंकि लाल रंग को सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. अनेक स्थानों पर दूल्हा-दुल्हन लाल, पीले और गुलाबी रंगों के वस्त्र धारण करते हैं. क्योंकि इन रंगों को सौभाग्य का प्रतीक कहा गया है, जबकि काला रंग को निराशा का प्रतीक माना जाता है.

यह सही कि नवजीवन की शुरुआत सकारात्मकता से होनी चाहिए. तो क्या नीले, भूरे और काले रंग इसके विपरीत हैं? शायद नहीं, तभी तो जब कोई नया मकान बनता है तो उसे लोगों की नजर (नकारात्मकता) से बचाने के लिए काले रंग का मुखौटा लगाया जाता है. इसी प्रकार छोटे सुंदर बच्चों के माथे पर काला टीका लगा दिया जाता है. ऐसा करने वालों को मानना है कि देखने वाले की नजर काले रंग पर टिक जाती है जिससे उनकी नकारात्मकता का बुरा प्रभाव नष्ट हो जाता है. लेकिन प्रश्न तो है कि क्या काला रंग वास्तव में अशुभ है?

जहां तक देश के विभिन्न प्रांतों की परम्पराओं और अनुभव की बात है, हर लगह अलग- अलग अवधारणाएं हैं. कोई भी रंग सर्वकालिक, सर्वभौमिक शुभ या अशुभ नहीं होता, यह जानते हुए भी हम सहज ही अपने-अपने परिवेश की मान्यताओं से जुड़कर प्रचलित परम्पराओं का पालन करने लगते हैं.

काला रंग हर स्थिति में अशुभ ही है, ऐसा देश के किसी भी प्रांत, समाज अथवा सम्प्रदाय में नहीं है. हर घर में खाना बनाने में प्रयुक्त होने वाले हांड़ी, पतीला, कढ़ाई अक्सर नीचे से काले होते हैं. तवा तो शत- प्रतिशत काला होता ही है, लेकिन हम सबका पेेट भरता है. इन कालों के सहयोग बिना हमारी स्थिति एक ही दिन में खराब हो सकती है. जिस तरह काली भैंस के सफेद दूध से दही, घी, मक्खन, मिठाई आदि बनते हैं, उसी प्रकार काले बर्तन हमारे जीवन में विभिन्न व्यंजनों के स्वाद के माध्यम से जीवान्तता घोलते हैं. दुल्हन लाल को प्राथमिकता देती होगी लेकिन रसोई में लाल मिर्च के मूल्य और स्वाद पर काली मिर्च भारी है. रसोई की अंगीठी काले कोयले से लाल होकर ही परिवार में स्वाद और संवाद का वातावरण बनाती है.

काले रंग को बुरा कैसे कहूं जबकि दुनिया भर की सभी सड़कें काली और उन पर दौड़ने वाले शत- प्रतिशत वाहनों के टायर भी काले हैं. काली छतरी बरसात से बचाती है तो तेज धूप से भी बचाव करती है. यूं तो अनेक रंगों की टोपियां, चश्में, जूते मिलते हैं लेकिन दुनिया भर में काली टोपी, काले चश्मे और काले जूते का प्रचलन सबसे ज्यादा है. जब हम किसी विवाद में उलझ जाते हैं तो काले कोट वाले वकील साहिब हमारे मददगार बनते हैं. अचकन काली, जाकेट और हिजाब भी काले.

बेशक आज रंग-बिरंगे कंबल आने लगे हैं लेकिन जो बात काली कम्बली में है वो दूसरों में कहां? क्या यह अजीब नहीं कि हम लाल झंडी को रोकने या सावधान करने की निशानी मानते हैं तो लाल चुनरी से सजी दूल्हनिया को संसार में आगे बढ़ने का आशीर्वाद देते हैं.

काले रंग को लाख बुरा कहो लेकिन बालों के जरा से श्वेत होते ही उन्हें नियमित रूप से काला कर युवा बने रहने का भ्रम पालने वालों का सर्वत्र बहुमत है. ‘काले कजरारे’ नैनों पर झूमने वाले नैनो की जरा सी लाली से ही सहम जाते हैं. अनेक रोगों के ईंजन यानी मधुमेह से बचना हो तो काले जामुन आपकी मदद कर सकते हैं. पूर्वोत्तर भारत में काली पूजा का प्रचलन है तो हमारे कृष्ण कन्हैया काले (सांवले) और रामजी भी काले (सांवले).

प्रकाश बांटने वाला दिया काला तो दिन भर कड़ी मेहनत के बाद विश्रांति प्रदान करने वाली रात्रि काली. घनघोर वर्षा लाने वाले बादल काले, मधुर गीत सुनाने वाली कोयल काली तो एक जमाने में खूब धूम मचाने वाले एचएमवी (हिज मास्टर्स व्हाइस) के रिकार्ड प्लेयर (तवे) भी काले ही होते थे.

ग्रेनाइट तो काला पसंद लेकिन काला रंग अशुभ! इसके जरूर कुछ कारण होने चाहिए. क्या आप जानते हो कि पुस्तक धार्मिक हो या पाठ्यक्रम की, साहित्य की हो या कानून की. मनोरंजन हो या लोकरंजन की, दुनिया की हर पुस्तक की छपाई काली स्याही से होती है. बात बिल्कुल स्पष्ट है कि काले अक्षर ज्ञान बांटते हैं परंतु कुछ लोगों के लिए यही काले अक्षर भैंस बराबर होते हैं. ऐसा लगता है काले अक्षर को भैंस बराबर मानने वालों की दृष्टि में काला और काल सहोदर हैैं. यह भी संभव है कि का(क्या) और ला के मेल से बने होने के कारण वे काले के प्रति आशंकित हो कि वह न जाने कैसा काल ले आये?

काला पानी, काला हांडी, काला डूंगर को कौन नहीं जानता? बेशक आज पोर्ट ब्लेयर आकर्षित करता है, लेकिन आम आदमी के मन पर स्वंतत्रता संग्राम के दौरान कालेपानी की यातनाओं की इतनी गहरी छाप है कि कालापानी आज भी डराता है. उड़ीसा का कालाहांडी गरीबी और पिछड़ेपन का पर्याय होने के कारण तो पाकिस्तान सीमा पर कच्छ के रेगिस्तान में स्थित काला डूंगर अपरिचय के कारण अशांत करता है. कहीं ऐसा तो नहीं ज्यादा ‘कांव-कांव’ करने वाले काले कौए की कर्कश आवाज से लोगों को इतनी अरूचि हो कि वे काले को ही अशुभ मानने लगे हों.

पाठक वृंद! अब तो मान लीजिए कि काले के कुछ कृष्ण पक्ष है तो शुक्ल पक्ष भी कम नहीं है. कुछ लोगों के दबाव में आकर आप शुक्ल पक्ष की अनदेखी नहीं कर सकते. यदि ऐसा किया जाता है तो इसकी गणना काले कारनामों में की जायेगी. यदि कालेधन में कुछ गलत है तो आप नियमों को उदार बनाकर उनका निदान कर सकते हो. पर हां, जिनके मन काले हैं उनका कुछ नहीं किया जा सकता. निश्चित रूप से ब्रह्मांड के ब्लैक होल सरीखे मैले मन वाले धूर्त लोगों के कारण ही ‘काला’ रंग बदनाम हुआ है.

मैं जानता हूं आपके मन में काली बिल्ली के रास्ता काटने की बात भी घूम रही होगी. उसका शुभ- अशुभ से क्या संबंध? आप जानते ही हल्के अंधेरे में भी काले रंग की विजीबिलिटी कम हो जाती है. ‘सर्व भवन्तु सुखिनः और अहिंसा परमोधर्मा’ का उद्घोष करने वाले हमारे पूर्वजों ने काली बिल्ली के रास्ता काटने पर रूकने की बात इसीलिए की ताकि उसका बचाव किया जा सके. वैसे भी बिल्ली आपका घर छोड़कर उस पार तभी भागती है जब उसे यहां पर्याप्त माल नहीं मिला. संदेश स्पष्ट है- आप तो चले माल उड़ाने, लेकिन जल्दबाजी में बिल्ली के लिए कुछ करना भूल गये हो. कुछ रुककर, कुछ करके ही आगे बढ़ो वरना भूखी बिल्ली आपको कोसेगी.’

पाठक वृंद! अब तो मान लीजिए कि काले के कुछ कृष्ण पक्ष है तो शुक्ल पक्ष भी कम नहीं है. कुछ लोगों के दबाव में आकर आप शुक्ल पक्ष की अनदेखी नहीं कर सकते. यदि ऐसा किया जाता है तो इस कृत्य की गणना काले कारनामों में की जायेगी. यदि कालेधन में कुछ गलत है तो आप नियमों को उदार बनाकर उनका निदान कर सकते हो. पर हां, जिनके मन काले हैं उनका कुछ नहीं किया जा सकता. ऐसे लोग जो किसी भी कीमत पर समय, काल, परिस्थिति के अनुसार कुछ सीखने या सुधरने के लिए तैयार ही न हो उनकी तुलना उस जेड ब्लैक काले रंग से की जाती है जिस पर कोई दूसरा रंग नहीं चढ़ता. निश्चित रूप से ब्रह्मांड के ब्लैक होल सरीखे मैले मन वाले धूर्त लोगों के कारण ही ‘काला’ रंग बदनाम हुआ है.

मेरी ‘कांव-कांव’ ज्यादा लम्बी हो इससे पहले ही मैं अपनी बात को यह बताते हुए विराम देता हूं कि महाकवि कालीदास ही नहीं कालीचरण, कालेन्द्र सिंह, कालका दास, जैसे असंख्य सम्मानित लोग हमारे समाज से बुराईयों की कालिख को कम करने में अपने- अपने ढ़ंग से योगदान करते रहे हैं. जय काली!

Web Title: Why Black Color is Negative, Hindi Article, Dr. Vinod Babbar

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