कवि वह होता है, जो अपनी कल्पना को पूरी दुनिया में फैलाता है और मनुष्य के अंदर प्रेरणा जगाता है. उनकी कल्पना की छाया में पृथ्वी और भी सुंदर तरीके से निखरती है. शायद इसी कारण लाल गुलाब की तरह कवि लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं. वैसे तो दुनिया में ढ़ेरो कवि भी हैं, लेकिन आज बात उस कवि की, जो अपनी कल्पनाओं के लिए नहीं बल्कि एके-47 का निर्माण करने के लिए मशहूर हुए. इस विरले कवि का नाम था मिखाइल कलाश्निकोव. आईये जरा नजदीक से जानने की कोशिश करते हैं इस कवि को…

Mikhail Kalashnikovs Postal Code

इस बन्दूक की लोकप्रियता की कहानी बहुत ही दिलचस्प है. 1941 में हो रहे द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान सोवियत लाल सेना टैंक के कमांडर मिखाइल कलाश्निकोव जर्मन सैनिकों द्वारा घायल हो गये थे. मगर मिखाइल चोट के कारण ज्यादा परेशान नहीं थे, बल्कि वह इस सोच में डूब गये थे कि वह कैसे अपने दुश्मनों से भी ज्यादा आधुनिक हथियार बनाएं. ऐसी बन्दूक बनाएं, जो पलक झपकते ही दुश्मनों पर गोलियों की बौछार कर सके. चोटिल होने के कारण मिखाइल अस्पताल के बेड से ही बंदूक के निर्माण कार्य में जुट गये थे. करीब 7 साल की कड़ी मेहनत के बाद इस नई बंदूक का अाविष्कार हुआ, जिसने दुनिया में इतिहास लिख दिया.

सन 2013 में दुनिया की सबसे जानलेवा बंदूक के निर्माता मिखाइल कलाश्निकोव का देहांत 95 वर्ष की आयु में हो गया था. मिखाइल कलाश्निकोव का जन्म रूस के अल्ताई क्षेत्र के कूरियर गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. वह बचपन से ही एक कवि बनना चाहते थे. बाद में मिखाइल सेना में भर्ती हो गये. हालांकि, सेना में उन्होंने अपनी काव्य कल्पना और अपनी शिल्पकारी कौशल को जारी रखा 

मिखाइल ने अपने कौशल के बल पर ही एके-47 जैसी खतरनाक बंदूक का निर्माण किया था. 1941 में अस्पताल में होने के बावजूद मिखाइल ने इस बंदूक की डिजाईन को तैयार किया था. मगर किसी कारणवश सेना के अधिकारियों को तब यह बंदूक पसंद नहीं आयी थी. 1946 में एके-46 जोकि, एके-47 का पिछला संस्करण था, उसका परीक्षण रुसी सेना ने किया था. सन 1947 में मिखाइल की इस बंदूक का इस्तेमाल सेना की कुछ टुकड़ियों ने करना प्रारंभ किया था, लेकिन मिखाइल ने सन 1949 में अपनी बन्दूक को एके-47 में तब्दीली करके एक मिनट में 600 गोली मारने वाली बंदूक बना डाली. इसका इस्तेमाल सोवियत सेना ने अपने ऑपरेशन में किया था. देखते ही देखते अगले 2 वर्षों में ही यह बंदूक पूरी दुनिया में मशहूर हो गई थी. तब से ही रूस ने एके-47 का निर्यात बाकी देशों में करना शुरू कर दिया, जो आज उनकी कमाई का अहम श्रोत है.

मिखाइल की बनाई बंदूक महज सोवियत बॉर्डर्स तक सीमित नहीं है. यह दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली बंदूकों की सूची में शामिल है. अब तक लगभग 10 मिलियन बंदूकों की बिक्री हो गयी है, जिसे दुनिया भर के 50 देशों में इस्तेमाल किया जाता है. एके-47 की लोकप्रियता का एक कारण उसका सरल उपयोग, विश्वसनीयता और आसान देख-रेख है, जो धारकों को बिना परेशानी के इस्तेमाल करने में मदद करती है. एके-47 को दुनिया की पहली आधुनिक बंदूक माना जाता है. इस बंदूक का इस्तेमाल 1949 से ही किया जा रहा है. हालांकि, समय के साथ-साथ इसकी आधुनिकता में काफी तब्दीली आई है मगर मूल सूत्र एक ही है.

मिखाइल ने इस बंदूक का निर्माण करते समय दो बातों का ध्यान रखा था. पहला की बंदूक का इस्तेमाल आसान हो और दूसरा की इसे आसानी से युद्ध के समय में बनाया जा सके. अगर किसी कारणवश एके-47 पानी में भीग जाती है या उसमें धूल-मिट्टी चली जाती है, तो उसके बाद भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है.

The AK-47 rifle is being tested in the dust

मिखाइल कलाश्निकोव की बनाई बंदूक की लोकप्रियता इतनी बढ़ गयी थी कि अन्य देशों ने भी इसका निर्माण प्रारंभ कर दिया था. 1960 के दशक में रूस एके-47 बंदूक का निर्माण करता था, लेकिन चीन ने 1980 से खुद का निर्माण कार्य शुरू कर दिया था.

मोजाम्बिक में यह बंदूक इतनी लोकप्रिय हुई थी कि 1983 में उन्होंने इसकी तस्वीर अपने राष्ट्रीय झंडे में लगाकर, इसे राष्ट्रीय चिन्ह घोषित कर दिया था. इसकी तस्वीर का इस्तेमाल ईस्ट तिमोर और बुर्किना फासो अपने कोट में करने लगे थे. वहीं मिखाइल उनकी बनाई हुई बंदूक को अन्य देशों द्वारा इस्तेमाल किये जाने से काफी खुश थे. उन्हें इस बात का बहुत गर्व था कि अन्य देश अपनी आजादी की लड़ाई में उनकी बंदूक का इस्तेमाल कर रहे थे.

उनका कहना था कि, ‘उनका हथियार दूसरे देशों को आजाद करने में उनकी मदद कर रहा है’. मिखाइल कलाश्निकोव की बंदूक की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता था कि अफ्रीका के बहुत से गुट अपने आप को ‘कलश बॉयज’ के नाम से लोगों के बीच में पहचाने जाने लगे थे. इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात तो यह थी कि एके-47 बंदूक का इस्तेमाल नुकसान की भरपाई के लिए होने लगा था. अमेरिकी ड्रोन ने घायल लोगों को यमन में एके-47 बंदूक को मुआवजे के रूप में दिया जाने लगा था और इस प्रणाली को उग्रवादी अब तक बरकरार रखे हुए हैं.

मिखाइल की बंदूक केवल युद्ध तक ही सीमित नहीं थी. बल्कि, साहित्य और म्यूजिक में भी शामिल हो गया थी. बहुत से लोकप्रिय गाने एके-47 बंदूक पर बनाए गये हैं. अमेरिकी रैप गायक लील वेन ने भी एके-47 बंदूक पर गीत गाये हैं. 2011 में लंदन म्यूजियम ने प्रसिद्ध डिजाईनों की सूची प्रकाशित की थी, जिसमें मिखाइल कलाश्निकोव की बंदूक भी शामिल थी. वर्ष 2006 में कोलम्बियाई म्यूजिशियन सेसर लोपेज़ ने एके-47 का इस्तेमाल कर एक गिटार बनाकर शांति पक्ष में हो रहे अभियान में गाना गाया था. कुछ समय बाद, लोपेज़ ने इस गिटार को 17,000 डॉलर्स में नीलामी कर उस रकम को विस्फोट पीड़ितों की सहायता के लिए दान कर दिया था.

Guitar built in the style of the AK47 in the hand of peace warrior Caesar Lopez

हालांकि, इस बंदूक के निर्माता ने कभी भी किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं लिया. मिखाइल कलाश्निकोव को सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर ‘स्टॅलिन मैडल’ से नवाजा गया था, जिसने उनके सम्मान में चार चांद लगा दिये थे. 10 नवम्बर 2009 को रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने ‘हीरो ऑफ़ रूस’ टाइटल से मिखाइल कलाश्निकोव को सम्मानित किया था. उस समय मिखाइल ने खुद की लिखी कविता पढ़ी थी.

मिखाइल भयानक युद्ध के माहिर कवि थे. 23 दिसम्बर 2013 को इनकी 6 कविताएं प्रकाशित हुईं थी. मिखाइल कलाश्निकोव के अंतिम समय में उन्हें इस बात का पछतावा था कि उनकी बनाई एके-47 अलकायदा जैसा आतंकवादी संगठन भी इस्तेमाल करने लगा था. रूस में हुये एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि, ‘उनकी बनाई बन्दूक ओसामा बिन लादेन के हाथों में आने से वह चिंतित हैं. मगर इसमें मेरा क्या कसूर है?

AK-47 rifle beside Osama bin Laden

उनकी बातों से मालूम होता है कि वह हमेशा अपनी खोज पर चिंतित रहते थे. उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था, ‘मुझे अपने आविष्कार पर गर्व है मगर वही आतंकवादियों के हाथों में देख कर मुझे चिंता होती है. मुझे ऐसा लगता है कि अगर मैं घास काटने वाली मशीन बनाता तो उससे मुझे ज्यादा खुशी होती’.

Original Article Source / Writer: Roar BanglaAl Imran

Translated by: Nitesh Kumar

Web Title: AK47 – A Terrible Killer Made By A Poet, Hindi Article

Keywords: AK47 – A Terrible Killer Made By A Poet, AK47, History Of AK47, Mikhail Kalashnikov, Deadly Guns, First Advanced Gun, Second World War, Weapons, Stalin Medal, Hero Of Russia

Featured image credit / Facebook open graph: Roar Bangla