हर दिन कुछ न कुछ घटता है और उसमें से कुछ इतिहास में अमर हो जाता है.

इसी क्रम में आने वाली पीढ़ियां देखती हैं कि हमारे अतीत में क्या-क्या हुआ है. वो इससे सीखती हैं और आगे बढ़ती हैं.

'डे' इन हिस्ट्री की इस कड़ी में अाज हम 30 जून को घटित महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जानेंगे–

1943 में शुरू हुआ था 'ऑपरेशन कार्टव्हील'

30 जून 1943 के दिन ऑपरेशन कार्टव्हील शुरू हुआ. यह एक सैन्य ऑपरेशन था और द्वितीय विश्व युद्ध का हिस्सा था. इसे अमेरिका ने जनरल डगलस मैकार्थर के नेतृत्व में शुरू किया था. इसका लक्ष्य सोलोमन समुद्र में जापान द्वारा लगाए गए बैरियरों को तोड़ना था. यह ऑपरेशन नौ महीने चला.

सोलोमन समुद्र में स्थित द्वीप समूह द्वितीय विश्व युद्ध में रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण थे. जापान फिलीपींस और डच ईस्ट इंडीज पर अपना कब्जा जमाना चाहता था. इसलिए उसने इस क्षेत्र में अपना नौसैनिक अड्डा जमा रखा था.

अमेरिका के लिए भी यह क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण था. अगर जापान अपने मंसूबों में कामयाब हो जाता, तो उसे फिर यहाँ से पीछे धकेलना बहुत मुश्किल हो जाता. हालाँकि, अमेरिका के लिए इस ऑपरेशन को अपने दम पर सफल बनाना मुमकिन नहीं था, इसलिए ब्रिटेन और फ़्रांस ने भी इसमें उसकी मदद की.

30 जून को मैकार्थर के नेतृत्व में इस क्षेत्र में स्थित न्यू जोर्जिया और न्यू गिनिया पर सामानांतर हमला किया गया. जापानी नौ सेना ने भी इसका कड़ा जवाब दिया, लेकिन नौ महीने तक चले युद्ध में अनत में जापानी सेना को हार का सामना करना पड़ा.

इस ऑपरेशन ने ब्रिटेन, अमेरिका और फ़्रांस को एक बड़ी सीख भी दी. वह सीख यह थी कि यदि इस तरह के ऑपरेशन में ‘कदम- दर- कदम’ वाली युद्ध तकनीक अपनाई जाती है, तो इससे दुश्मन को संभलने का मौका मिल जाता है. ऐसे में वह दूसरे पक्ष को कहीं अधिक नुक्सान पहुँचाता है.

 इससे सबक लेते हुए फिर मित्र राष्ट्रों ने इस तरह के अन्य ऑपरेशन में नई तकनीक अपनाई!

General Douglas MacArthur Leading His Troops (Pic: Wikipedia)

भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सीजफायर 

30 जून 1965 के दिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत और पकिस्तान के बीच चल रहे युद्ध में हस्तक्षेप किया. मध्यस्थ का रोल निभाते हुए सीजफायर करवाया. इस प्रकार थोड़ी देर के लिए दोनों देशों के बीच शांति की स्थापना हुई. किन्तु, इसके बाद भी छोटी- मोटी झडपें होती रहीं. अंत में यह युद्ध सितंबर के महीने में समाप्त हुआ.

1965 में लड़ा गया यह युद्ध भारत-पाकिस्तान के बीच लड़ा गया दूसरा युद्ध था, जोकि कश्मीर को लेकर लड़ा गया. असल में विभाजन के समय पाकिस्तान ने कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया था. किन्तु, इससे उसका जी नहीं भरा. वह पूरे कश्मीर को अपने कब्जे में लेना चाहता था. कश्मीर के अलावा इस युद्ध में दोनों देशों के बीच लड़ाई का एक और मुद्दा था.

यह मुद्दा कच्छ में स्थित रन को लेकर था. पकिस्तान इसे भी अपना हिस्सा बता रहा था. पाकिस्तानी सेना ने इसी स्थान से युद्ध की शुरुआत की थी. जैसे ही पाकिस्तान ने भारत के ऊपर हमला किया, वैसे ही भारत ने जवाबी कार्यवाही की. युद्ध तेज हुआ तो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने हसतक्षेप किया और मामले को सुलझाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल का गठन किया.

इस ट्रिब्यूनल ने रन का 330 वर्ग मील का क्षेत्र पाकिस्तान को दे दिया. आगे पकिस्तान ने सोचा कि चीन से 1962 का युद्ध हारने के बाद भारत इस स्थिति में नहीं है कि वह ज्यादा लम्बा युद्ध लड़ पाए. यह सोचकर ही पकिस्तान ने आगे कश्मीर में हमला कर दिया. आगे भीषण लड़ाई हुई तो संयुक्त राष्ट्र संघ को मजबूरन मध्यस्थ का रोल निभाना पड़ा!

Indian Army During 1965 War (Pic: India TV)

क्रिकेट स्टार सनथ जयसूर्या का जन्मदिन 

30 जून 1969 के दिन विश्व क्रिकेट इतिहास में सबसे विस्फोटक बल्लेबाजों में शुमार सनथ जयसूर्या का जन्म हुआ. सनथ जयसूर्या ने श्रीलंका की तरफ से क्रिकेट खोला. श्रीलंका की टीम ने जब 1996 का विश्व कप का जीता था, तब सनथ जयसूर्या इस टूर्नामेंट के सबसे बेहतर खिलाड़ी चुने गए थे.

इसी विश्वकप के क्वार्टर फाइनल मुकाबले में सनथ ने इंग्लैंड के खिलाफ 44 गेंदों पर 82 रनों की आतिशी पारी खेली थी.

आगे जयसूर्या ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो वर्षों तक नहीं टूटा. उन्होंने सिंगापुर में पाकिस्तान के खिलाफ मात्र 17 गेंदों पर अर्धशतक जमा दिया. यह उस समय का सबसे तेज एकदिवसीय अर्धशतक था. एक दिवसीय मैचों के साथ-साथ टेस्ट में भी जयसूर्या ने काफी नाम कमाया. 1997-98 में उन्होंने कोलंबों में भारत के खिलाफ 340 रन की पारी खेली.

इसके बाद अगले ही साल उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ दोहरा शतक लगाया. बल्लेबाजी के साथ-साथ उन्होंने गेंदबाजी में भी नाम कमाया. 2007 में वे मात्र ऐसे तीसरे स्पिनर बने, जिसने एकदिवसीय मैचों में 300 विकेट का आंकड़ा छुआ हो.

Sanath Jaysuriya In Action (Pic: ICC/Twitter)

बहुचर्चित उपन्यास 'गॉन विद दि विंड' का प्रकाशन

30 जून 1936 के दिन मर्ग्रारेट मिशेल का बहुचर्चित उपन्यास ‘गॉन विद दि विंड’ प्रकाशित हुआ. आगे 1939 में इसी उपन्यास के ऊपर एक फिल्म बनी, जो सुपरहिट साबित हुई. असल में मिशेल पहले अटलांटा जर्नल में रिपोर्टर के पद पर कार्यरत थीं. 1926 में उन्हें कई चोट लगीं तो, उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी.

घर पर बैठकर उन्होंने कहानियाँ लिखनी शुरू कीं. यहीं पर उन्हें यह उपन्यास लिखने का विचार आया. 1936 में जब यह उपन्यास प्रकाशित हुआ, तो देखते ही देखते इसकी लाखों प्रतियाँ बिक गईं.

यह उपन्यास अमेरिका के गृहयुद्ध के ऊपर केन्द्रित था. आगे 1937 में उन्हें इस उपन्यास के लिए पुलित्जर अवार्ड मिला. पुलित्जर मिलने के बाद इस उपन्यास पर फिल्म बनाने की योजना बनी. मिशेल को इसके लिए मुख्य अभिनेत्री का किरदार निभाने का पर्स्ताव मिला, लेकिन उन्होंने इसे निभाने से मना कर दिया.

Margaret Mitchell With Her Typewriter (Pic: Pinterest)

तो ये थीं 30 जून से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं. 

अगर आपके पास भी इस दिन से जुड़ी किसी महत्वपूर्ण घटना की जानकारी हो तो हमें कमेन्ट बॉक्स में जरूर बताएं.  

Web Title: Day In History 30 June, Hindi Article

Feature Image Credit: ft.com