”जीतने की इच्छाशक्ति, सफलता की लगन… किसी काम को अपनी पूरी क्षमता से करने की जिद्द… ये वो चाबियां हैं, जो आपके लिए दुनिया में सबसे ऊंचा मुकाम हासिल करने के दरवाज़े खोल देंगी.”

ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि यह वह सिद्धांत है जो सदियों पहले ‘कन्फ्यूशियस’ ने दिया था. उन्होंने कभी भगवान के प्रवचन नहीं सुने और न ही सुनाए, उन्होंने कभी धार्मिक किताबें नहीं बांटी, उन्होंने कभी किसी धर्म का प्रचार भी नहीं किया.

वे केवल मानवता के लिए जिये और उसी की भलाई के लिए सिद्धांत भी दिए.

उनके विचारों की प्रमुखता जितनी तब थी, उससे कहीं ज्यादा आज है. शायद यह बात ‘कन्फ्यूशियस’ जानते थे इसलिए उन्होंने लोगों को जीने का सलीका सिखाया. उन्होंने प्रेम के मायने सिखाए.

यूं तो वे चीन में जन्मे लेकिन उनका युग ‘कन्फ्यूशियसवाद’ पूरी दुनिया ने जिया!

‘कन्फ्यूशियस’ ने कहा था ‘जिस बात को हम सिर्फ सुनते हैं, उसे जल्द भूल जाते हैं, जो देखते हैं, उसे हम याद रखते हैं, लेकिन जिसे हम खुद करते हैं, उसे हमेशा के लिए समझ जाते हैं.’

तो चलिए आज ‘कन्फ्यूशियस’ की कहानी के जरिए हम भी उन्हें जीते हैं और उनके सिद्धांत समझने की कोशिश करते हैं–

नाजायज संतान के रूप में हुआ था ‘जन्म’

550 ईसा पूर्व जब भारत में भगवान महावीर और बुद्ध धर्म के रूप में नए विचार जन्म ले रहे थे तब चीन के शानदोंग में भी एक सुधारक का जन्म हुआ, जिसका नाम ‘कन्फ़्यूशियस’ था. ‘कन्फ़्यूशियस’ के जन्म के समय चीन में झोऊ राजवंश की सत्ता थी. उस दौरान चीन में कई नए राज्यों का निर्माण हो रहा था. इसलिए देश में हर जगह जंग का माहौल था.

इतिहासकारों के अनुसार ‘कन्फ़्यूशियस’ के पिता फौजी थे. उन्होंने अपनी पहली पत्नी को सिर्फ इसलिए छोड़ दिया था, क्योंकि वह तीन बेटियों को जन्म दे चुकी थी. बाद में उसने एक विकृत बेटे को जन्म दिया. इसके बाद उन्होंने येन कबीले की एक 15 वर्षीय कन्या से संबंध बनाए और तब इससे ‘कन्फ़्यूशियस’ का जन्म हुआ!

हालांकि इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण नही मिलते कि ‘कन्फ़्यूशियस’ के माता-पिता ने शादी की थी या नही, इसलिए उन्हें नाजायज संतान भी कहा गया.

‘कन्फ़्यूशियस’ के पिता की मृत्यु एक युद्ध के दौरान हो गई. उनकी मां ने भी कुछ सालों बाद जीवन को अलविदा कह दिया. वे अपनी मां के बेहद करीब थे इसलिए उनकी याद में तीन साल तक ‘कन्फ़्यूशियस’ दुखी रहे.

ज्ञान पाने की असीम इच्छा ने ही उन्हें इस दुख से बाहर निकाला. हालांकि उनकी आर्थिक स्थिति कुछ बेहतर नहीं रही इसलिए मुश्किलों से किताबों की व्यवस्था करते और समाज, इतिहास, अर्थशास्त्र के साथ धर्मों के बारे में पढ़ते.

इस तरह 17 वर्ष की उम्र में ही उन्हें सरकारी नौकरी मिल गई और इसके बाद जीवन में स्थिरता आने पर उन्होंने 19 साल की क्यूगोंन से विवाह किया. एक साल बाद उनके घर कोंग ली का जन्म हुआ. इतिहासकारों के अनुसार उनके घर दो बेटियों का जन्म हुआ था, जिसमें से एक पैदा होते ही मर गई थी.

कुछ सालों तक नौकरी करके मन भर गया तो ‘कन्फ़्यूशियस’ ने शिक्षण कार्य शुरू कर दिया. अब उनका ज्यादातर समय किताबों के बीच गुजरने लगा. वे महान विचारकों और लेखकों की किताबें पढ़ते और उससे सीखी गई बात छात्रों को समझाते. वे वही ज्ञान छात्रों को देते थे, जिसे पहले खुद पर अनुभव करके देखा हो.

कन्फ़्यूशियस’ को लोग ‘ली’ के नाम से भी पुकारते थे. लगातार पठन-पाठन के बाद वे ‘ड्यूक ऑफ लू’ बन गए!

Confucius is also known as Kong Qui. (Pic: weebly)

छोड़ दिया ‘सब-कुछ’

498 ई. में उन्होंने अपना घर छोड़ दिया और पूर्वी चीन की लंबी यात्रा पर निकल गए. इस दौरान उन्होंने लोगों को जीवन जीने के सकारात्मक तरीकों से परिचित करवाया. जो उनके सिद्धांतों से खुश थे उन्होंने उसे स्वीकार किया और सम्मान दिया. हालांकि उनके विरोधियों की संख्या भी कम नहीं थी.

कई ऐसे राज्य भी रहे जहां ‘कन्फ़्यूशियस’ को सभा संबोधित करने तक नहीं दिया गया और उनकी बातों को सिरे से नकार दिया गया.

एक स्त्री ने सिखाया पाठ!

एक बार ‘कन्फ्यूशियस’ अपने शिष्यों के साथ ताई पहाड़ी से गुजर रहे थे, तभी उन्हें किसी के रोने की आवाज सुनाई दी. वह उस आवाज का पीछा करते हुए पहुंचे, तो देखा एक स्त्री लगातार रोए जा रही है.

उन्होंने उसके रोने की वजह पूछी.

स्त्री ने कहा, यहां मेरे बेटे को चीते ने मार दिया है. ‘कन्फ्यूशियस’ ने पूछा तुम्हारा परिवार कहां है? उसने कहा मेरे पति और ससुर को भी पहले ही एक चीता मार चुका है. ‘कन्फ्यूशियस’ ने कहा, तो तुम इस भयानक स्थान पर अकेली क्यों हो? यहां से चली जाओ.

स्त्री ने कहा, ‘मैं यहां इसलिए हूं क्योंकि यहां किसी अत्याचारी का शासन नही है.’

‘कन्फ्यूशियस’ स्तब्ध रह गए और फिर विचार करने के बाद शिष्यों से कहा, इस महिला ने महान सत्य कहा है. ‘अत्याचारी शासक एक चीते से ज्यादा भयंकर है. उसके शासन में रहने से अच्छा भयानक जंगल में रहना है.’

उन्होंने कहा कि ‘अत्याचारी शासन को भय के कारण सहन करने वाला समाज किसी प्रकार की उन्नति नहीं कर पाता. जनता को अत्याचारी शासन के खिलाफ विद्रोह करना चाहिए. यह बेहद जरूरी है कि जनता दुशासन के खिलाफ हमेशा सजग रहे.

Chinese painting of six Confucian scholars. (Pic: fpif)

सिखाया ‘शासन का सही तरीका’

484 तक उनकी ख्याति दूर-दाराज तक फैल चुकी थी. उन्हें इसी वर्ष वापस अपने शहर ‘लू’ बुला लिया गया. उन्हें वहां मंत्री पद का दर्जा दिया गया. इस पद पर रहते हुए उन्होंने गुनहगार को सजा देने की बजाए उसके चरित्र सुधार पर ज्यादा बल दिया. कन्फ्यूशियस अपने शिष्यों को सत्य, प्रेम और न्याय का संदेश देते रहे.

कन्फ्यूशियस ने सिखाया कि ‘शासक का प्राथमिक कार्य अपने राज्य के लोगों का कल्याण  (सुख) और खुशी प्राप्त करना है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए शासक को पहले अपने स्वयं के आचरण के द्वारा नैतिकता (अच्छे चरित्र) का उदाहरण देना था.’

कन्फ्यूशियस से एक बार पूछा गया था कि यदि उन्हें किसी प्रदेश के शासन-सूत्र के संचालन का भार सौंपा जाए, तो वह सबसे पहला कौन सा महत्वपूर्ण कार्य करेंगे? इसके लिए उनका उत्तर था, ‘नामों में सुधार’. इसका आशय यह था कि ‘जो जिस नाम के पद पर प्रतिष्ठित हो उसे उस पद से संलग्न सभी कर्तव्यों का विधिवत पालन करना चाहिए, जिससे उसका वह नाम सार्थक हो.’

इसी विश्वास के बल पर कन्फ्यूशियस ने घोषणा की थी कि यदि कोई शासक 12 महीने के लिए उसे अपना मुख्य परामर्शदाता बना ले तो वह बहुत कुछ करके दिखा सकते हैं. यदि उसे तीन वर्ष का समय दिया जाए तो वह अपने आदर्शों और आशाओं को मूर्त रूप प्रदान कर सकते हैं.

उन्होंने जगह-जगह यात्राएं ​कीं और विभिन्न संस्कृतियों के दस्तावेज जमा किए. यह बात और है कि उन्होंने अपने सिद्धांतों को कभी किताब की शक्ल नहीं दी.

कन्फ्यूशियस का मानना था कि ‘वह विचारों के वाहक हो सकते हैं, उसके रचयिता नहीं.’

हालांकि उनकी शिक्षाओं को उनके हजारों शिष्यों ने अपनी विरासत समझा और प्रचार किया. इसके बाद कुछ इतिहासकारों ने उनके सिद्धांतों को ‘डिसीपिलिन आॅॅफ कन्फ्यूशियस’ ‘बुक आॅफ डॉक्यूमेंट’ ‘दा विस्डम आॅफ कन्फ्यूशियस’ और ‘चायनीज लिट्रेचर’ आदि में संग्रहित किया.

Confucius at the examination in Kaifeng, China. (Pic: google)

मौत का हो गया था आभास

इतिहासकार मानते हैं कि कन्फ्यूशियस को अपनी मौत का आभास हो गया था. दरअसल उन्होंने 480 ईसा पूर्व में एक हिरण को अपने सामने दम तोड़ते देखा. उसे देखने के बाद शिष्यों से कहा कि उनका अंत समय निकट है.

माना जाता है कि इस घटना के अगले दिन ही उनकी मृत्यु हो गई.

Confucius Statue of Silicone. (Pic: danielkgardner)

कन्फ्यूशियस ने कभी किसी चमत्कार या किसी देवत्व का दावा नहीं किया. वे शिक्षा की शक्ति, अतीत के सम्मान, धर्मी आचरण और भ्रष्ट व्यवहारों में सुधार पर विश्वास रखते थे. इन्हीं सिद्धांतों पर वे जिये और विरासत में हमें देकर गए.

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Web Title: Confucius History of a Chinese Philosopher, Hindi Article

Featured Image Credit: damienmarieathope