इतिहास एक दिन में नहीं बनता, लेकिन हर दिन इतिहास के बनने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है.
30 अगस्त के इतिहास के लिए भी यही मायने हैं. इस दिन इतिहास की कुछ बहुत महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं.
तो आईए नज़र डालते हैं, इस दिन घटी ऐतिहासिक घटनाओं पर-
लेनिन की हत्या करने का प्रयास
30 अगस्त 1918 के दिन व्लादमीर लेनिन को दो बार गोली मारी गई. गोलियां लगने से पहले वे एक मजदूर फैक्ट्री से भाषण देकर निकले थे. गोली चलाने वाले शख्स का नाम फान्या कैपलन था. वह सोशलिस्ट पार्टी का सदस्य था. इस घटना के बाद रूस में पहले से चल रहा गृह युद्ध और तेज हो गया.
व्लादमीर लेनिन का जन्म 1870 में हुआ था. बहुत छोटी उम्र में ही उन्होंने विभिन्न विषयों का अध्ययन कर डाला था. 1887 में इनके बड़े भाई को मृत्यदंड दिया गया था. यही वह घटना थी, जिसने लेनिन को रूस में क्रान्ति लाने की ओर निर्णायक रूप से अग्रसर किया था.
1890 के आते-आते लेनिन ने मजदूरों के हितों में एक मार्क्सवादी संगठन का निर्माण किया था. 1895 में उन्हें गिरफ्तार करके तीन साल तक साइबेरिया में कैद कर लिया गया था. लेकिन लेनिन हिम्मत नहीं हारे थे. आगे उन्होंने 1902 में ‘व्हाट इज टू बी डन’ नाम का पर्चा निकाला.
इस पर्चे में उन्होंने यह समझाने की कोशिस की कि पेशेवर क्रांतिकारियों की पार्टी ही रूस में क्रांति करके समाजवाद की स्थापना कर सकती है. 1903 से उन्होंने ऐसी पार्टी का गठन करना शुरू कर दिया. आगे 1912 में पार्टी में फूट पड़ गई औए लेनिन ने अपने धड़े को बोल्शेविक कहना शुरू किया.
बोल्शेविक रूस के लोगों को रोटी, जमीन और शांति का वादा कर रहे थे और सशस्त्र क्रांति के पक्ष में थे. आगे 1917 में उन्होंने रूस में क्रांति कर दी.
एंटी ग्लोबल वार्मिंग एक्ट पारित हुआ
30 अगस्त 2006 के दिन कैलिफोर्निया की सीनेट ने एक एक्ट पारित किया. इस एक्ट को ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों को कम और ख़त्म करने के उद्देश्य से पारित किया गया था. इस प्रकार कैलिफोर्निया ऐसा करने वाला अमेरिका का पहला राज्य बना. इस एक्ट के तहत कैलिफोर्निया में कार्यरत विभिन्न प्रकार के उद्योगों पर ग्रीन हाउस गैसों को लेकर कैप लगा दी गई.
असल में कैलिफोर्निया उस समय अमेरिका में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का दस प्रतिशत भागीदार था. इस कारण से ही यहाँ कार्बन डाई ऑक्साइड का सबसे ज्यादा उत्सर्जन भी होता था. यही वह वजह थी कि यहाँ की सीनेट को इस प्रकार का एक्ट पारित करना पड़ा था.
आगे इस एक्ट में नए प्रावधान भी जोड़े गए. एक प्रावधान के अनुसार 2025 तक कलिफोर्निया को ग्रीन हाउस गैसों में 25 प्रतिशत तक कटौती करनी है. ऐसा करने पर वह क्योटो प्रोटोकाल का भी पालन कर पाएगा. क्योटो प्रोटोकाल 1997 में जापान में पास हुआ था. यह पूरे विश्व में पर्यावरण संरंक्षण की वकालत करता है.
आगे ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने इस एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए. जॉर्ज बुश के कार्यकाल में उन्हें थोड़ी छूट भी मिली. 2008 में जब बराक ओबामा अमेरिका के नए राष्ट्रपति बने तो उन्होंने इन छूटों को ख़त्म कर दिया.
चीन ने की उत्तरी वियतनाम की मदद
30 अगस्त 1966 के दिन चीन उत्तरी विएतनाम की मदद करने के लिए राजी हो गया. इस समय उत्तरी वियतनाम दक्षिणी वियतनाम से युद्ध लड़ रहा था. अमेरिका और फ़्रांस दक्षिणी वियतनाम की मदद कर रहे थे. यह युद्ध शीत युद्ध का हिस्सा था.
शीत युद्ध पूंजीवादी अमेरिका और साम्यवादी सोवियत संघ के बीच लड़ा जा रहा था. दोनों देश विश्व के ज्यादा से ज्यादा देशों में अपनी-अपनी विचारधारा वाली सरकारों की स्थापना करना चाहते थे. चीन इस समय तक साम्यवादी हो चुका था और सोवियत संघ की तरफ था.
इससे पहले उत्तरी वियतनाम के एक प्रमुख क्रांतिकारी नेता हो ची मिन्ह ने बीजिंग का दौरा किया था. उनके इस दौरे के बाद ही तत्कालीन चीनी सरकार ने उत्तरी वियतनाम को 800 मिलियन युआन की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया.
आगे सोवियत संघ ने भी उत्तरी वियतनाम को 400 मिलियन रूबल की वित्तीय मदद दी. इसके बाद उत्तरी और दक्षिणी वियतनाम के बीच युद्ध बहुत लंबा खिंचा. आगे उत्तरी वियतनाम ने दक्षिणी वियतनाम को हरा दिया और अपने यहाँ कम्युनिस्ट शासन व्यवस्था लागू की.
युद्ध जीतने के बाद हो ची मिन्ह यहाँ के प्रधानमंत्री बने!
औरंगजेब ने दारा शिकोह को मार दिया
30 अगस्त 1659 के दिन औरंगजेब ने दारा शिकोह को मौत के घाट उतार दिया. इस तरह वह मुग़ल साम्राज्य का निर्विवादित बादशाह बन गया. दारा शिकोह औरंगजेब का भाई था. दोनों मुग़ल शासक शाहजहाँ के बेटे थे. शाहजहाँ के बीमार पड़ने के बाद दोनों के बीच सत्ता संघर्ष चल रहा था.
हम आपको बता दे कि 16 सितंबर 1657 के दिन शाहजहाँ गंभीर रूप से बीमार पड़ गए थे. इस कारण दिल्ली में राजनीतिक संकट पैदा हो गया. ऐसे में शाहजहाँ ने शिकोह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया. इस घोषणा से औरंगजेब खासा नाराज हो गया और राज्य में गृह युद्ध के बादल उमड़ने लगे. इस बीच शाहजहां अपनी हालत में सुधार के लिए आगरा चले गए.
आगे औरंगजेब ने दारा शिकोह पर युद्ध घोषित कर दिया. उसने पहले आगरा के किले को अपने नियंत्रण में ले लिया और शाहजहाँ को वहीं पर कैद कर लिया. बाद में 1666 में यहीं पर शाहजहाँ की मृत्यु हो गई.
अपने पिता को कैद करने के बाद औरंगजेब शाहजहानाबाद वापस लौट आया और उसने अपने भाई मुराद को भी कैद कर लिया. मुराद इस लड़ाई में दारा शिकोह की ओर था. इसी तरह 31 जुलाई 1658 को औरंगजेब का पहला राज्याभिषेक हो गया.
किन्तु, अभी शुजा और दारा शिकोह ने हार नहीं मानी और लड़ाई जारी रखी.
हालांकि, जनवरी 1659 में औरंगजेब ने शुजा को हरा दिया. वहीं आगे जून 1659 में औरंगजेब के सिपहसलहार मलिक जीवान ने दारा शिकोह को सिंध में धोखे से कैद कर लिया और उन्हें औरंगजेब को सौंप दिया. इस प्रकार अंततः औरंगजेब की जीत हुई और उसने 15 जून 1659 को दोबारा से अपना राज्याभिषेक करवाया. आगे उसने दारा शिकोह को मौत के घाट उतार दिया.
तो ये थीं 30 अगस्त के दिन इतिहास में घटीं कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं.
अगर आपके पास भी इस दिन से जुड़ी किसी महत्वपूर्ण घटना की जानकारी हो, तो हमें कमेन्ट बॉक्स में जरूर बताएं.
Web Title: Day In History 30 August, Hindi Article
Feature Representative Image Credit: Society