जो लोग फिल्मों का शौक रखते हैं, उन्हें समुद्री लुटेरे कुछ-कुछ ‘पाइरेट्स ऑफ़ दी कैरेबियन‘ के ‘जैक स्पैरो’ जैसे लगते होंगे. एक प्रकार से वह सही भी हैं. असल में उन्होंने आज के युग में समुद्री लुटेरों को नहीं देखा होगा.

उन्होंने ‘एडवर्ड ब्लैकबियर्ड’ का नाम भी नहीं सुना होगा. वही ‘एडवर्ड ब्लैकबियर्ड’ जो अपनी लूट के लिए वास्तविक दुनिया में कुख्यात रहा है. कहते हैं कि एक जमाना था, जब उसका नाम तक सुनकर लोगों का खून सूख जाता था. उसने अकेले दम पर समुद्री लूटों से जो तबाही मचाई थी, उसे कोई नहीं दोहरा पाया. वैसे पाइरेट्स सीरिज में भी ब्लैकबियर्ड नामक समुद्री डाकू का किरदार है, पर फ़िल्मी दुनिया और रियल वर्ल्ड में काफी फर्क है.

तो आईये चलिए, रियल ब्लैकबियर्ड को जरा करीब से जानने की कोशिश करते हैं:

समुद्री लुटेरा बनना था ‘एकमात्र’ रास्ता

एडवर्ड ब्लैकबियर्ड इंग्लैंड में पैदा हुआ था. सामान्य जिंदगी के साथ वह बड़ा हुआ. उसने बचपन से ही देखा था कि वह जिस जगह पैदा हुआ है, वहां समुद्र ही रोज़गार का एकमात्र सहारा थे. एडवर्ड को समझ आ गया था कि समुद्र ही उसकी जिदंगी है. उसने उसको करीब से जानना शुरु कर दिया. वह अपना ज्यादा से ज्यादा वक़्त समंदर की उफनती लहरों में ही बिताने लगा था. बताते चलें कि एडवर्ड के नाम के पीछे पहले ब्लैकबियर्ड नहीं लगता था. माना जाता है कि एडवर्ड का शुरूआती नाम एडवर्ड टीच था. उसने बाद में इसे खुद ही बदल लिया था.

यह वह दौर था, जब समुद्री लुटेरों का बोलबाला हुआ करता था. खुद ब्रिटिश सरकार अपने लिए समुद्री लुटेरों का इंतजाम किया करती थी. वह उन लुटेरों को अटलांटिक और कैरेबियन महासागरों में लूट करने के लिए भेजती थी. आगे चलकर एडवर्ड भी इसमें भर्ती हो गया था. उसने भी समुद्र में लूट करनी शुरु कर दी थी. वह थोड़ा छोटा जरुर था, लेकिन बहुत तेज था. इसी कारण वह गुज़रते वक़्त के साथ सीनियर्स की नज़र में आ गया था. उसका कद बढ़ने लगा था.

इसी बीच इंग्लैंड और फ़्रांस के बीच में जंग छिड़ गई. इससे समुद्री जहाज़ों की आवाजाही में इजाफा हो गया था. यह देखकर एडवर्ड और ज्यादा सक्रिय हो गया. जब तक यह जंग ख़त्म होती, तब तक उसने खुद को सबसे बड़ा समुद्री लुटेरा बनाने के लिए तैयार कर लिया था. थोड़े ही समय बाद इंग्लैंड सरकार ने एडवर्ड को अपना कप्तान बना दिया. यही नहीं उसे एक जहाज़ भी दिया गया था. यह एडवर्ड के लिए लाभदायक साबित हुआ था.

Edward Blackbeard (Representative Pic: anoncra)

नरक का शैतान कहते थे ‘ब्लैकबियर्ड’ को

1716 में एडवर्ड अपने पहले मिशन पर निकल गया था. अभी तक उसने सरकार की मदद के बिना कोई काम नहीं किया था. यह पहला मौका था, जब वह खुद से कुछ करने जा रहा था. उसे खुद पर पूरा यकीन था कि वह इस मिशन को पूरा कर सकता है. असल में वह अब तक एक खतरनाक लुटेरा बन चुका था. वह अपने राह में आने वाली हर चीज़ को लूट लेता था. फिर चाहे, सोना हो, चांदी हो या फिर रेशम. समंदर में उसके नाम भर से ही लोगों के चेहरे की रौनक उड़ जाती थी. बाद में फ़्रांस के जहाज़ को लूटकर वह आतंक का पर्याय बन गया था.

इससे पहले वह आमतौर पर सिर्फ सामान की लूट करता था, लेकिन इस बार उसने जहाज़ को ही अपने कब्ज़े में ले लिया था. उस जहाज़ को उसने बाद में अपना सबसे खतरनाक जहाज़ बना डाला था. उसने उस पर चालीस तोपें लगा दी थीं, जो दूर से आते खतरे को पहले ही ख़त्म कर देती थी. ब्लैकबियर्ड का नाम सिर्फ अपनी लूट के लिए नहीं, बल्कि लूट के दौरान की गई हिंसा के लिए भी मशहूर होने लगा था.

एडवर्ड ने अपना हुलिया भी बदल लिया था. उसने अपनी दाढ़ी काफी बढ़ा ली थी. वह उसकी पहचान बन गई थी. लोगों ने उसे नरक का शैतान कहना शुरू कर दिया था. कहते हैं कि एडवर्ड अपनी उस दाढ़ी के पीछे कुछ जलने वाली चीज रखता था, जिससे बहुत ज्यादा धुआं पैदा होता था. वह धुआं जब उसकी दाढ़ी से निकलता दिखता था तो ऐसा लगता था जैसे एडवर्ड कोई शैतान है.

रात के अंधेरे में एडवर्ड को इस तरह देखने भर से ही लोगों की रूह कांप जाया करती थी. अपने इस लुक के साथ एडवर्ड बहुत ज्यादा ही चर्चा में आ गया था. उसने अपने जहाज़ के झंडे पर भी एक कंकाल बनवाया था.

Edward ‘Blackbeard’ Most Dangerous Pirate (Representative Pic: slideshare)

आखिरी दम तक लड़ता रहा…

1718 तक एडवर्ड कई लूटों को अंजाम दे चुका था. इस कारण उसका नाम मुजरिमों में भी गिना जाने लगा था. इंग्लैंड सरकार उसके खिलाफ होने लगी थी, इसलिए उसने कुछ समय के लिए लूट से दूरी बना ली थी. उसने अपने जहाज़ को भी रंग दिया था. उसने पूरी पहचान बदल डाली थी. एडवर्ड ने लूट का सारा पैसा सुरक्षित कर लिया था. इसी कड़ी में उसने अपने जहाज़ को नार्थ कैरोलीना के तट पर ही छोड़ दिया था. उसके बाद वह सीधा वहां के गवर्नर के पास गया. उससे उनसे कहा कि उसे राजा से मिलाया जाए.

गवर्नर और एडवर्ड ने उसके बाद एक दूसरे से दोस्ती कर ली थी. दोनों के बीच में तय हुआ था कि गवर्नर एडवर्ड को छिपने में मदद करेगा. इसके लिए उसे एडवर्ड से अच्छी रकम मिलनी थी. कुछ समय तक यह सांठ-गांठ चलता रहा. कुछ दिनों बाद एडवर्ड ने गवर्नर का एक काम करने से मना कर दिया था, जिसके बाद दोनों के बीच में परेशानियां बढ़ने लगी थी. गवर्नर ने तय किया कि वह एडवर्ड को मार डालेगा.

उसने एडवर्ड को मारने के लिए अपने कुछ लोग जहाजों के साथ भेज दिए थे. एडवर्ड को इसकी खबर नहीं थी. वह अपने कुछ साथियों के साथ जहाज पर था. तभी अचानक उसने हमले को महसूस किया. लड़ाई आमने-सामने की वह थी. गोलियां भी चली, लेकिन बाद में वह चाकुओं की लड़ाई हो गई थी. एडवर्ड के साथी इसमें मारे गये, लेकिन उसने अपनी हिम्मत नहीं छोड़ी. वह अकेला ही लड़ रहा था, तभी एक गोली उसके सीने पर आ लगी और वह गिर पड़ा. दुश्मन ने मौके का फायदा उठाते हुए एडवर्ड पर चाकुओं से हमला शुरु कर दिया. वह लहूलुहान हो चुका था. बावजूद इसके वह आखिरी दम तक संघर्ष करता रहा.

अंतत: वह मारा गया था.

Edward ‘Blackbeard’ Most Dangerous Pirate (Representative Pic: legionofleia)

यह थी एडवर्ड ब्लैकबियर्ड की कहानी, जिसने अपनी तेजी से समंदर पर राज किया. उसने अपनी लूटों के लिए हिंसा तक का सहारा लिया. किन्तु कहते हैं न कि बुरे का अंत बुरा ही होता है.

Web Title: Edward ‘Blackbeard’ Most Dangerous Pirate, Hindi Article

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