भारतीय इतिहास में जब भी सिंकदर का जिक्र होता है, तो एक नाम खासकर चर्चा में रहता है. वह नाम है हिन्दू राजा पोरस का. कहा जाता है कि इन्होंने न सिर्फ सिकंदर के विजय रथ को रोका था, बल्कि उन्हें लगभग-लगभग पराजित तक कर दिया था.

कहा जाता है कि सिकंदर की प्रेमिका के चलते उन्होंने अंतिम पल में सिकंदर से हार स्वीकार कर ली थी. बाद में इसकी जानकारी जब सिकंदर को मिली तो उसने पोरस को अपना दोस्त बना लिया था. यहीं नहीं वह भारत तक छोड़कर चला गया था.

ऐसे में सवाल कौंधने लाजमी हैं कि आखिर सिकंदर की पत्नी से राजा पोरस के क्या संबंध थे और उन्होंने जीतने के बावजूद उनके लिए सिकंदर से हार क्यों स्वीकार कर ली थी?

तो आईये इन सवालों को खोजने की कोशिश करते हैं, साथ ही इस महान राजा से जुड़े कुछ और पहलुओं को जानते हैं–

कौन थे राजा पोरस!

340 ईसा पूर्व का समय रहा होगा. भारत उस समय अखण्ड नहीं हुआ करता था. उस समय पंजाब में झेलम से लेकर चेनाब तक जिस राजा का राज था, वह कोई और नहीं बल्कि राजा पोरस ही थे. कहते हैं कि कहने के लिए उनका राज्य छोटा जरूर था, किन्तु उनके शौर्यता के चर्चे दूर-दूर तक थे.

आस-पास के कुछ पड़ोसी शासक इस बात से उनको मन ही मन दुश्मन तक मानते थे.

पोरस का वास्ता किस वंश से था, इसकी कहीं सटीक जानकारी तो नहीं मिलती, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्हें पुरू जनजाति का वंशज माना जाता है. हालांकि, कुछ इतिहासकार उन्हें यदुवंशी शोरसेनी भी मानते हैं. इसके पीछे उनके अपने-अपने तर्क हैं.

Great Hindu King Porus, (Representative Pic: cogniarchae)

‘हाइडस्पेश’ में सिकंदर के साथ युद्ध

पोरस अपने राज्य को सुचारु रूप से चला रहे थे. उनके शासन काल से उनकी प्रजा खुश थी. इसी बीच सिकंदर अपने विजय अभियान को आगे बढ़ाते हुए पंजाब की ओर बढ़ा और पोरस के राज्य तक पहुंचा. उसने पोरस से कहा कि वह उसके सामने घुटने टेक दें और उसे आगे बढ़ने दें.

किन्तु, पोरस को यह मंजूर नहीं था!

उन्होंने सिकंदर के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया. उन्होंने कहा वह युद्ध भूमि में मरना पसंद करेंगे, लेकिन कायरों की तरह घुटने नहीं टेकेंगे.

अंतत: सिकंदर और पोरस के इस टकराव ने युद्ध का रुप ले लिया.

326 ईसापूर्व  के आसपास हाइडस्पेश नदी के तट पर दोनों अपनी-अपनी सेनाओं के साथ युद्ध के लिए उतरे. सिकंदर के सामने पोरस की सेना बहुत छोटी थी. सिकंदर के पास जहां 50 हजार से भी ज्यादा सैनिक थे, वहीं पोरस के सैनिकों की संख्या 20 हज़ार के क़रीब ही थी.

युद्ध का परिणाम लगभग तय ही था!

माना जा रहा था कि पोरस जल्द ही सिकंदर के सामने घुटने टेक देंगे. किन्तु, पोरस के हौंसले सिकंदर की सेना से कहीं ज्यादा बड़े थे. वह आसानी से हार मानने वाले नहीं थे. युद्ध के शुरु होते ही पोरस मजबूती के साथ सिकंदर की सेना पर टूट पड़े. देखते ही देखते उन्होंने सिकंदर की सेना का बड़ा नुक्सान कर दिया.

पोरस सिकंदर की सोच से कई गुना मजबूती से लड़ रहे थे. नतीजा यह रहा कि एक लंबे समय तक यह युद्ध चला. अंदाजा लगाना मुश्किल था कि इस युद्ध को कौन जीतेगा. पोरस, सिकंदर को अप्रत्याशित टक्कर जो दे रहे थे!

प्रेमिका के चलते बची सिकंदर की जान

माना जाता है कि यह देखकर सिकंदर से साथ आई उनकी प्रेमिका घबरा गई थीं. उन्हें डर था कि कहीं इस युद्ध में पोरस के हाथों सिकंदर मारे न जाएँ. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करें. इसी बीच उन्होंंने तय किया कि वह पोरस के पास जाकर सिकंदर को जीवनदान देने को कहेंगी. इस मंशा के साथ जब वह राजा पोरस के शिविर की तरफ गईं, तो उनकी आवभगत हुई.

कहते हैं कि इसी बीच राखी का पर्व आ पड़ा. उन्होंने देखा कि पोरस के सैनिकों को उनकी बहनों ने रंग-बिरंगे धागे भेजे थे. यह देखकर उन्होंने इसके बारे में पूछा, तो उन्हें बताया गया कि यह रक्षासूत्र है, जो भाईयों को अपनी बहन की रक्षा के लिए बचनबद्ध करता है.

फिर क्या था, सिकंदर की प्रेमिका ने देरी न करते हुए राजा पोरस की कलाई पर राखी बांध दी. उनका भरोसा था कि ऐसा करने पर अगर परिस्थितियां बनती हैं, तो पोरस, सिकंदर को युद्ध भूमि में नहीं मारेंगे.

हुआ भी कुछ ऐसा ही!

बाद में युद्ध के समय ऐसी स्थिति आई, जब पोरस सिकंदर की जान ले सकते थे, लेकिन सिकंदर की प्रेमिका को दिये गए वचन के कारण उन्होंने सिकंदर को बख्श दिया. इस तरह जीती हुई बाजी पोरस ने सिकंदर के हाथों में दे दी.

Great Hindu King Porus (Pic: Indiaopines)

…जब सिकंदर को पता चली असलियत!

सिकंदर द्वारा पोरस बंदी बना लिए गये. कुछ दिनों की कैद के बाद जब उन्हें सिकंदर के पास पेश किया गया, तो सिकंदर ने उनसे पूछा कि उनके साथ किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए. इस पर मुस्कुराते हुए पोरस ने जवाब दिया, बिल्कुल वैसे ही जैसे एक शासक को दूसरे शासक के साथ करना चाहिए.

पोरस का जवाब हैरान कर देने वाला था, किन्तु सिकंदर पोरस को बेड़ियों में जकड़ा देखकर बहुत खुश हो रहा था. हालांकि, उनकी प्रेमिका खुश नहीं थी. उसे इस बात का इल्म था कि पोरस की हार की असली वजह क्या है. प्रेमिका को उदास देखकर सिकंदर ने उनसे इसका कारण पूछा, तो सिकंदर को सारी कहानी मालूम पड़ी. कहते हैं कि इसके बाद सिकंदर दिल से पोरस की इज्जत करने लगा.

न सिर्फ उसने पोरस को रिहा किया, बल्कि उनके साथ संधि करते हुए वापस लौट गया. हालांकि, लौटते समय रास्ते में उसका स्वास्थ्य बिगड़ा और उसकी मृत्यु हो गई. दूसरी तरफ सिकंदर के ही एक जनरल द्वारा कुछ दिनों बाद पोरस को धोखे से मार देने की खबर आई. वह बात और है कि इस बात का कहीं प्रमाण नहीं मिलता. फिर भी माना जाता है कि पोरस की मौत 321 से 315 ईसा पूर्व के बीच हुई थी.

…रील लाइफ में जिंदा है ‘पोरस’!

1941 के आसपास सोहराब मोदी के निर्देशन में बनी फिल्म ‘सिकंदर’ में सबसे पहले राजा पोरस के किरदार को दुनिया ने देखा. इसके बाद 1991 में बने टीवी सीरियल ‘चाणक्य’ में अरुण बाली के रुप में लोग पोरस से परिचित हुए. सिलसिला यही नहीं रुका… आगे 2004 में फ़िल्म ‘अलेक्जेंडर’ व 2011 ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ नाम से शुरू हुई टीवी सीरीज़ में उनका नाम चर्चा में रहा.

इसी कड़ी में 27 नवंबर 2017 को उनके नाम पर सोनी टीवी में शुरु हुआ धारावाहिक सुर्खियों में है.

Porus’ New Serial on Sony Tv (Pic: NewsTechCafe)

राजा पोरस के बारे में इसके अलावा भी कई अन्य धारणाएं हो सकती हैं, किन्तु जिस तरह से उन्होंने सिकंदर के सामने घुटने न टेकते हुए मजबूती से उसका सामना किया, उसकी जितनी चर्चा की जाए कम होगी.

शायद यही कारण है कि जब भी सिकंदर का नाम लिया जाता है, तो उनका नाम खुद-ब-खुद लोगों की जुबान पर आ जाता है.

Web Title: Great Hindu King Porus, Hindi Article

Featured Image Credit: Journal Edge