पुरुष प्रधान समाज होने के बाद भी भारत के गौरवशाली इतिहास में कई ऐसी महिलाओं के नाम दर्ज हैं, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया.

ऐसी साहसी वीरांगनाओं से जुड़ी सम्मान, साहस और देशभक्ति की कहानियां आज भी हमारी आंखों को नम कर देती हैं. तो आइये केदारनाथ अग्रवाल जी की इन पंक्तियों के साथ आज देश की कुछ शीर्ष वीरांगनाओं को याद करें:

मैने उनको जब-जब देखा, लोहा देखा, लोहे जैसा तपते देखा,
गलते देखा, ढलते देखा, मैने उनको गोली जैसा चलते देखा…

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई

चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,
बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी…

जी हां वह झांसी वाली रानी ही थी, जिन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में देश प्रेम की अमिट गाथा लिखी. उन्होंने अपने पराक्रम से न केवल भारत की बल्कि विश्व की महिलाओं को गौरवान्वित किया. उनका जीवन स्वयं में वीरता के गुणों से भरपूर है, तो उनके कर्म अमर देशभक्ति और बलिदान की एक अनुपम गाथा हैं.

लक्ष्मीबाई का जन्म काशी में हुआ था. उनके पितामह बलवंत राव के बाजीराव पेशवा की सेना में सेनानायक थे. लक्ष्मीबाई अपने बाल्यकाल में मनुबाई के नाम से जानी जाती थीं. अंग्रेज़ों के विरुद्ध रणयज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाले योद्धाओं में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम सर्वोपरी माना जाता है.

रानी लक्ष्मी बाई हमारी अनंत पीढ़ियों तक वीरता का प्रतीक रहेंगी, इस बात में दो राय नहीं!

Great Women in Indian history, Rani Laxmi Bai (Pic: currentcrime.com)

वीरांगना झलकारी देवी

रानी लक्ष्मीबाई की ही तरह झलकारी देवी का नाम इतिहास के पन्नों में उनके रणकौशल के लिए दर्ज है. खास बात तो यह है कि झलकारी देवी भी झांसी की ही रहने वाली थीं. वह झाँसी के एक बहादुर कृषक सदोवा सिंह की पुत्री थीं.

उनका जन्म भोजला नामक गांव में हुआ था. झलकारी देवी का ज्यादातर समय प्रायः जंगल में ही काम करने में व्यतीत होता था. जंगलों में रहने के कारण ही झलकारी के पिता ने उसे घुड़सवारी एवं अस्त्र-शस्त्र संचालन की शिक्षा दिलवाई थी.

कालांतर में उनकी शादी महारानी लक्ष्मीबाई के तोपची पूरन सिंह के साथ हो गई. रानी लक्ष्मी बाई के वेश में युद्ध करते हुए झलकारी बाई ने शहादत दे दी थी. उन्होंने तोपों से अंग्रेजों का सामना किया और तोप के गोले से ही वीरगति को प्राप्त हुईं.

Great Women in Indian history, Jhalkari Devi (Pic: dalitvision)

रानी चेनम्मा

रानी लक्ष्मी बाई की तरह रानी चेनम्मा को भले ही इतिहास में वो स्थान नहीं मिला जो मिलना चाहिए था, लेकिन इस बात को कोई नहीं झुठला सकता कि लक्ष्मीबाई से भी पहले कित्तूर की रानी चेनम्मा ने अंग्रेजों से जमकर लोहा लिया था.

रानी चेनम्मा कर्नाटक के कित्तूर की रानी थीं, जिन्होंने अंग्रेजों की गुलामी के खिलाफ बिगुल बजाया. 1824 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ अपनी सेना बनाकर लड़ने वाली वह पहली रानी थीं, लेकिन बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और तभी से वह भारतीय स्वतंत्रता अभियान की पहचान बन गयी.

कर्नाटक राज्य में उन्होंने अब्बक्का रानी, केलादि चेन्नम्मा और ओनके ओबव्व के साथ मिलकर ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई की थी.

Great Women in Indian history, Rani Chennamma (Pic: karnatakatravel)

कनकलता बरुआ

कनकलता बरुआ का रिश्ता असम की माटी से था. वहीं उनका जन्म हुआ और पालन पोषण भी. वैसे तो कनकलता बरूआ शुरू से ही अपने राष्ट्रप्रेम के लिए चर्चा में रहीं, लेकिन भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी सक्रियता ने उन्हें इतिहास बना दिया.

भारत छोड़ो आंदोलन के समय उन्होंने न्यायालय परिसर के साथ-साथ पुलिस स्टेशन के भवन पर देश का तिरंगा फहराया, जिसकी वजह से वो अंग्रेजों के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आईं. हालांकि उनको अपने इस कारनामे के लिए पुलिस की गोलियों का शिकार बन गईं.

आपको जानकर शायद हैरानी होगी इस समय वह महज 17 साल की थी. कनकलता बरुआ ने देश के लिए जो शहादत दी, उसके लिए देश हमेशा ऋणी रहेगा.

Great Women in Indian history, Kanaklata Barua (Pic: midnapore.in)

सरोजिनी नायडू

सरोजिनी नायडू का नाम कौन नहीं जानता? उन्हें देश ‘द नाइटिंगल ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है. आमतौर पर कहते हैं कि वह एक शानदार कवियित्री थीं, लेकिन उनके जीवन का एक पहलू और है, जिसे आपको जानना चाहिए.

सरोजनी नायडू देश की वीरांगनाओं में से एक थीं. उनका पूरा जीवन देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित था. भारत छोड़ो आंदोलन के समय वह जेल भी गयीं. एक कुशल सेनापति की भांति उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय हर क्षेत्र में दिया.

वह संकटों से कभी नहीं घबराई. उन्होंने देश के गांव-गांव घूमकर लोगों के दिल में देश के प्रति प्रेम की अलख जगाई. उनका योगदान देश कभी नहीं भूलेगा.

Great Women in Indian history, Sarojini Naidu (Pic: midnapore.in)

बेगम हजरत महल

देश की स्वाधीनता में अगर अवध की बात करें को बेगम हजरत महल का नाम सबसे पहले हमारी जुब़ा पर आता है. इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें, तो हम जानेंगे कि कैसे बेगम हज़रत महल ने लखनऊ में नए सिरे से शासन संभाला और कैसे अग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया.

बेगम हजरत महल की वीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने मटियाबुर्ज में जंगे-आज़ादी के दौरान नज़रबंद किए गए वाजिद अली शाह को छुड़ाने के लिए लार्ड कैनिंग के सुरक्षा दस्ता को तोड़ने के लिए पूरी योजना बना ली थी.

वो तो किसी अपने ने जयचंद की भूमिका अदा कर दी, जिसके कारण उनकी योजना का भेद खुल गया, वरना वह वाजिद अली शाह को आज़ाद कराने में कामयाब हो जातीं. उनके बारे में कहा जाता है कि बेगम खुद हाथी पर चढ़ कर लड़ाई के मैदान में फ़ौज का हौसला बढ़ाती थीं.

Great Women in Indian history, Begum Hazrat Mahal (Pic: culturalindia)

पन्ना धाय

पन्ना धाय भारतीय इतिहास का वो नाम जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती. अपना सबकुछ अपने स्वामी को अर्पण करने वाली वीरांगना पन्ना धाय का जन्म कमेरी गांव में हुआ था.

राणा सांगा के पुत्र उदयसिंह को मां के स्थान पर दूध पिलाने के कारण पन्ना ‘धाय मां’ कहलाई थी. मेवाड़ के इतिहास में जिस गौरव के साथ महाराणा प्रताप को याद किया जाता है, उसी गौरव के साथ पन्ना धाय का नाम भी लिया जाता है.

पन्ना धाय ने स्वामीभक्ति को सर्वोपरि मानते हुए अपने पुत्र चन्दन का बलिदान दे दिया था. जिसके लिए इतिहास में पन्ना धाय का नाम स्वामिभक्ति के शिरमोरों में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया है.

Great Women in Indian history, Panna Dhai (Pic: midnapore.in)

रानी दुर्गावती

वह तीर थी , तलवार थी, भालों और तोपों का वार थी , फुफकार थी , हुंकार थी, शत्रु का संहार थी , शत्रु का संहार थी…

1584ईं में महोबा (उत्तर प्रदेश) के राठ गांव में 1524 ई. की दुर्गाष्टमी पर एक लड़की का जन्म हुआ. नाम रखा गया दुर्गावती. नाम के अनुरूप ही तेज, साहस, शौर्य और सुन्दरता के कारण इनकी प्रसिद्धि सब ओर फैल गयी.

वक्त बीता और जब उन्होंने बड़े होकर तलवार थामी तो सिर्फ़ शौर्यगाथाएं गूंजीं. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से रानी दुर्गावती का शौर्य किसी भी प्रकार से कम नहीं रहा है. दुर्गावती के वीरतापूर्ण चरित्र को लम्बे समय तक इसलिए दबाये रखा गया क्योंकि उन्होंने मुस्लिम शासकों के विरुद्ध संघर्ष किया और उन्हें अनेकों बार पराजित भी किया.

जाहिर है, इतिहासकारों की भूमिका हर बार असंदिग्ध नहीं रही है, मगर आज वे तथ्य सम्पूर्ण विश्व के सामने हैं. ऐसी रानी को शत्-शत् नमन, जिन्होंने अपने मान सम्मान और धर्म की रक्षा को सदैव सबसे ऊपर रखा.

Great Women in Indian history, Rani Durgavati (Pic: ajabkhabar.com)

हाड़ी रानी

हाड़ी रानी को बलिदान का दूसरा नाम कहा जा सकता है. उनके बलिदान और समर्पण को इस बात से ही समझा जा सकता है कि विवाह के महज सात दिन बाद अपना शीश खुद अपने हाथों से काटकर पति को निशनी के तौर पर रणभूमि में भिजवा दिया था ताकि उसका पति उसके रूप-यौवन के ख्यालों में खोकर कहीं अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से ना कर पाए.

हाड़ी रानी के पत्र में लिखा था ‘प्रिय, मैं तुम्हें अपनी अंतिम निशानी भेज रही हूं. तुम्हारे मोह के सभी बंधनों को काट रही हूं. अब बेफ्रिक होकर अपने कर्तव्य का पालन करें.

मैं तो चली… स्वर्ग में तुम्हारी बाट जोहूंगी.

Great Women in Indian history, Hadi Rani (Pic: navbharattimes)

यह सच है कि देश की वीरांगनाओं के संघर्ष की तमाम धरोहरों को उतनी प्राथमिकता से नहीं सजोया गया जितनी आवश्यकता थी. फिर भी इन वीरांगनाओं का सच्चा सम्मान यही है कि देश के नागरिक इन वीरांगनाओं से प्रेरणा लें और संघर्ष का नया अध्याय लिखने के लिए आगे बढ़ें.

हाँ, किसी लड़की या महिला को छेड़ते समय, उस का अपमान करते समय या चुपचाप उसका अपमान देखते समय हमें इन महिलाओं के योगदानों को अपने मन मस्तिष्क में बिठा लेना चाहिए.

जाहिर है, अगर इन महानतम महिलाओं ने हमारे लिए संघर्ष न किया होता तो शायद हम आज भी विदेशियों / अंग्रेजों के गुलाम होते!

कोई शक?

Web Title: Great Women in Indian history, Hindi Article

Featured image credit / Facebook open graph: play.google.com