आपने युद्ध के कई जिक्र सुने होंगे. क्या उनमें कभी आपने सुना है कि कोई सेनानायक भारी भरकम हाथियों को लेकर पहाड़ पार कर युद्ध मैदान में पहुंचा हो...वो भी कई सालों तक हजारों किमी की यात्रा करते हुए..?

जी हां! ऐसा कारनामा कर्थोज के महान योद्धा व सेनानायक हन्निबल बरका ने किया था.

हन्निबल बरका इतिहास में एक ऐसा नाम है, जो एक निडर योद्धा के रूप में याद किया जाता है. उन्होंने एक लड़ाई में अपनी सेना की अगुवाई करते हुए 70 हजार रोमन सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था.

इनकी जाबाज़ी और दिलेरी की वजह से वक़्त के शक्तिशाली रोमन साम्राज्य के शासक भी खौफ खाते थे. इन्हें रोम से सबसे अधिक नफरत करने वाले इंसान के रूप में देखा जाता है.

ऐसे में कर्थोज राज्य के इस सेनानायक से जुड़े रोचक किस्सों के बारे में जानना दिलचस्प रहेगा. तो आइए कार्थागिनीन कमांडर हन्निबल बरका की जिंदगी से रूबरू होते हैं –

खौलते पानी में हाथ डलवाकर पिता ने खिलाई कसम

हन्निबल बरका का जन्म 247 ईसा पूर्व उत्तरी अफ्रीका के कर्थोज में हुआ. इनके पिता हैम्लिकर बरका कार्थागिनीन के महान जनरल थे. इतिहास में उनकी तीन बहनें व दो भाइयों का भी ज़िक्र मिलता है. कर्थोज के पिता ने रोम के साथ पहला प्यूनिक युद्ध लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.

आगे इनके पिता ने रोमन साम्राज्य से बदला लेने के लिए अपने राज्य के विस्तार पर ध्यान केन्द्रित किया. उन्होंने आस-पास के क्षेत्रों को अपनी रणनीति व युद्ध की सफलता से अपने राज्य में शामिल करना शुरू कर दिया था.

इस बीच एक बार उनके पिता स्पेन जा रहे थे. हन्निबल ने भी उनके साथ जाने की इच्छा जताई. तब उनके पिता ने आग जलाकर पानी को गर्म किया. उस गर्म पानी में हन्निबल का हाथ डलवाकर कसम खिलवाई कि, वह रोम का मित्र कभी नहीं बनेगा. उन्होंने भी अपने पिता से वादा किया कि, वह अपने प्राण के अंतिम पलों तक रोम का दुश्मन बना रहेगा.

कर्थोजों को स्पेन की विजय हासिल करने में एक लंबा समय बीत गया था . इस दौरान जब हन्निबल लगभग 18 साल के थे, तो 229 ईसा पूर्व में उनके पिता की मौत हो गई.

पिता अपने पुत्र के हाथों कर्थोज राज्य को शक्तिशाली बनने का सपना देख चुके थे. खैर, हैम्लिकर की मृत्यु के बाद उनके दामाद हसडुबल ने शासन संभाला. 221 ई0 पू0 में उनके दामाद की भी हत्या कर दी गई. ऐसे में इबेरियंस व कर्थागिनी सैनिकों ने हन्निबल को आपसी सहमति से अपना कमांडर चुना.

Hannibal Barca (Pic: Ancienthisstory)

जब शुरू हुआ ‘द्वितीय प्यूनिक युद्ध’

26 वर्षीय सेनानायक अपने पिता की आक्रामक सैन्य राजनीति में प्रवेश कर चुका था. वह पिता की रणनीति के तरह अपने राज्य का विस्तार करता रहा. इस बीच उन्होंने स्पेनिश से रिश्ते मजबूत करने के लिए वहां की राजकुमारी से शादी रचा ली.

उनके इस राजनीतिक चाल से स्पेनिश शासन के कई क्षेत्र उनके अधीन हो गए. उन्होंने उत्तर स्पेनिश के कई स्थानों को युद्ध से भी जीता था. उस दौरान कर्थोज राज्य रोमन व यूनान की तरह शक्तिशाली राज्यों में गिना जाने लगा था. हन्निबल लगातार अपने सैनिकों को प्रोत्साहित करते हुए राज्य का विकास करते ही जा रहे थे.

ऐसे में हान्निबल रोमन साम्राज्य की आखों में गढ़ने लगे. उन्हें मौके की तलाश थी. इसी बीच 219 ई0पू0 में हन्निबल एब्रो नदी के दक्षिण में सगुंटम शहर पर हमला कर दिया, जो उनके पिता के समय रोम के साथ हुई एक संधि का उल्लंघन था.

हन्निबल ने इसको लगभग 8 महीनों की घेराबंदी के बाद जीतने में सफल हुए थे. ऐसे में रोम को हन्निबल से युद्ध करने का एक बहाना मिल गया. वहीं हन्निबल भी अपने पिता की हार का बदला लेने के लिए इस पल का बेसब्री से इन्तज़ार कर रहे थे. रोम ने अपना दूत भेजकर युद्ध की घोषणा कर दी. इतिहास में यह लड़ाई  ‘द्वितीय प्यूनिक युद्ध’ के रूप में दर्ज है.

Hamilcar Barca, The Father of Hannibal (Pic: Aleksandr)

युद्ध के लिए बर्फीले पहाड़ों का सफर

युद्ध के लिए हन्निबल अपने अधीन राज्यों के सैनिकों को भी अपनी सेना में शामिल करना शुरू कर दिए. उन्होंने युद्ध के लिए आल्प्स का रास्ता चुना, क्योंकि यह रास्ता ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों के साथ बर्फीली चट्टानों से होते हुए रोमन क्षेत्र से मिलता था.

रोम सम्राटों ने कभी नहीं सोचा था कि इस कठिन व भयानक रास्ते से हन्निबल अपने सैनिकों के साथ रोम में प्रवेश करेगा.

हन्निबल को रास्ते में हिस्पैनिया सैनिकों का भी सामना करना पड़ा, जो कर्थोज के ही प्रति बड़े वफादार थे. अंत में हन्निबल ने उन सैनिकों को भी अपनी इच्छानुसार कर्थोज सेना में शामिल होने का न्योता दे डाला.

इतिहासकारों की मानें तो हन्निबल ने लगभग 38 हजार पैदल सेना, 8000 घुड़सवार, और 37 हाथियों की एक सेना के साथ अल्पस के रास्ते युद्ध करने निकल पड़े थे.उन्होंने कुछ बचे सैनिकों को रिजर्व में अपने भाई मगो व भांजा हनो के नेतृत्व में अपने क्षेत्र में छोड़ दिया था.

एक बात तो तय है कि किसी भी सेना के लिए लगभग 3000 किमी ऊँची पहाड़ी व खतरनाक रास्तों का सफर तय करना बड़ा मुश्किल काम था.

मगर, हन्निबल के जोरदार भाषणों व जोश से कर्थोज सैनिकों को बहुत प्रोत्साहन मिला. तभी ऐसा संभव हो सका कि पैदल व घुड़सवार सैनिकों के साथ ही हाथियों की सेना भी इन पहाड़ों पर चढ़ाई करते हुए सफर शुरू कर सकी थीं.   

उस दौरान सर्द के मौसम में कपकपाती ठंड से सेना को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. बहरहाल, कई सालों बाद खतरनाक स्थानों को पार करते हुए हन्निबल अपनी सेना के साथ रोम में प्रवेश करने में सफल हुए.

मगर, अफ़सोस इस सफर के दौरान हन्निबल के कई हजार सैनिकों ने अपनी जान गवां दी थी. इस लड़ाई में ही उन्होंने अपनी एक आँख भी गवा दी थीं.

Hannibal Crossing The Alps (Pic: Pinterest)

मारे गए रोम के हजारों सैनिक

हन्निबल अपने बचे सैनिकों के साथ रोम के इतालवी शहर पहुँच चुका था. कुछ ही समय पहले पो नदी के किनारे इस शहर के आसपास इलाकों को रोम अपने अधीन कर चुका था.

यहां के निवासी हन्निबल को पसंद करते थे. ऐसे में हन्निबल को उन स्थानीय लोगों का भरपूर समर्थन मिला. उन्होंने इनका स्वागत किया. रोमन को भी गाल निवासियों के विद्रोह का अंदाजा लग चुका था. उन्होंने इन्हें रोकने के लिए एक सेना भेज दी. युद्ध में रोमन के इन सैनिकों को मुंह तोड़ जवाब मिला.

आगे हन्निबल रोम के अन्य छोटे-छोटे स्थानों पर कब्ज़ा कर चुका था. उस दौरान उसने कई रोमन विद्रोहियों को भी अपने साथ मिला लिया. 216 में रोमनों ने फैसला किया कि अब एक बड़े युद्ध से ही हन्निबल को परास्त किया जा सकता है. ऐसे में उन्होंने एक बड़ी सेना के साथ इतालवी तट के कन्नई क्षेत्र पर हन्निबल की सेना पर आक्रमण कर दिया.

हन्निबल ने प्राचीन युग की उस लड़ाई में अपनी अन्य रणनीतियों के साथ गुरिल्ला युद्ध की नीतियों को भी अपनाया. इसी के साथ ही अपने सैनिकों को लाजवाब भाषणों से प्रोत्साहन किया. हन्निबल की इसी रणनीति के चलते रोमन साम्राज्य की एक बड़ी सेना को करारी हार का सामना करना पड़ा.

आकड़ों की माने तो इस युद्ध में एक तरफ जहां रोमन की लगभग 70,000 सैनिकों की मौत हो गई थी. इसी के साथ ही हजारों सैनिकों को बंदी भी बना लिया गया. वहीं दूसरी तरफ हन्निबल की लगभग 6 हजार सैनिकों की ही मौत हुई थी.

Battle Of Cannae (Pic: Portesdetroia)

'जमा युद्ध' के दौरान हुई भयानक मौत

इस जीत के बाद हन्निबल ने रोमन के कुछ और हिस्सों को अपने अधीन किया. आगे इनके सैनिक थक चुके थे. जिसके चलते हन्निबल कई सालों बाद वापस कर्थोज जाने का फैसला लिया. उन्होंने रोमन की ही धरती पर कई सालों तक सफल लड़ाई लड़ी थी.

इस युद्ध में उन्होंने रोम के कुछ ही हिस्सों को अपने अधीन किया था. बहरहाल, किसी शक्तिशाली राज्य में उन्हीं के घर में घुसकर हन्निबल ने अपनी बहादुरी का परिचय दिया था.

इस द्वितीय प्यूनिक युद्ध की जीत के बाद ‘जमा की लड़ाई’ में हन्निबल को हार का मुंह देखना पड़ा था, जो ‘तृतीय प्यूनिक युद्ध’ के दौरान एक रोमन और कर्थोज के बीच एक लड़ाई थी.

इस युद्ध में हार की वजह उनके सहयोगी राज्यों का विद्रोह करना था. इसी लड़ाई के दौरान हन्निबल बरका ने रोमन साम्राज्य के समस्त आत्मसमर्पण न करते हुए जहर खाकर अपनी जान (181 ई.पू.) दे दी थीं.

इस तृतीय लड़ाई के दौरान रोमन सैनिकों ने कार्थेज राज्य को पूरी तरह जलाकर राख कर दिया था. इसके कुछ सालों बाद रोमनों ने ही इसे फिर से बसाया था, जो रोमन राज्य का ही होकर रह गया.

Battle Of Zama (Pic: Deviantart)

तो ये थी हन्निबल बरका के जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में, जिन्होंने अपने पिता से किये वादे को पूरा किया और अपने अंतिम समय तक रोम के लिए घातक दुश्मन बने रहे.   

Web Title: Hannibal Barca General Of The Carthaginian Army, Hindi Article

Feature Image Credit: youtube/Lindybeige