छत्रपति शिवाजी महाराज भारतीय इतिहास के सबसे लोकप्रिय हिन्दू राजाओं में से एक रहे हैं.

उनकी लोकप्रियता को इससे भी देखा जा सकता है कि आज भी महाराष्ट्र के लोगों की जुबान से उनकी शौर्यता के किस्से सुनने को मिलते हैं. अपने शासन काल में उन्होंने जिस तरह से अपने सम्राज्य को बढ़ाया, वह आगे की पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बना.

शिवाजी में सबसे बड़ी खासियत यह रही कि एक सेनानायक के रूप में वह कभी विवादों में नहीं रहे. उनके अंदर दूसरी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वह एक कुशल सेनानायक होने के साथ-साथ तेज रणनीतिकार भी थे. उनकी सेना में एक लाख से भी ज्यादा सैनिकों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है.

ऐसे में हिन्दू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज की कहानी को तस्वीरों के माध्यम से समझना दिलचस्प रहेगा–

19 फरवरी 1627 ई को जन्मे शिवाजी का पूरा नाम शिवाजी राजे भोंसले था. उनके पिता शाहजी भोंसले एक शक्तिशाली और प्रभावशाली सामन्त थे. जबकि, माता जीजाबाई का अपना एक अलग रुतबा था. (Pic: godwallpaperphotos)

बावजूद इसके कहा जाता है कि शिवाजी के जन्म लेते ही उनके पिता ने उनकी मां को त्याग दिया था. असल में वह अपनी दूसरी पत्नी तुकाबाई पर ज्यादा मोहित थे, जिस कारण उनके संबंध जीजाबाई से खराब हो गए थे. (Pic: Wikipedia)

इस लिहाज से शिवाजी बचपन में पिता के प्यार के लिए तरसते रहे. हालांकि उनकी मां जीजाबाई ने समर्थ गुरु रामदास की मदद से उनके लालन-पोषण में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. कहा जाता है कि वीरता के बीज माता जीजाबाई द्वारा ही रोपित किये गए थे, जिन्होंने बाद के दिनों में छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम समूचे भारत में विख्यात किया. (Pic: Flipkart)

शिवाजी उस काल खंड में बड़े हुए, जब भारत पर मुगलों का शासन था. यह वही दौर था जब औरंगजेब सरीखे कट्टर मुगल शासक हिन्दूओं का दमन कर रहे थे. जबरन मुसलमान बनाने से लेकर हिन्दू मंदिरों को तोड़ने का क्रम जोरों पर था. (Pic: Artisera)

शिवाजी की नन्हीं आंखें मुगलों की इस बर्बरता को देखकर बड़ी हुईं. इस कारण उनके प्रति रोष स्वाभाविक था. नजीता यह रहा कि जल्द ही उन्होंने तय किया कि वह इसके खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे और मुगलों को सत्ता से उखाड़ फेकेंगे. (Pic: kaustubh)

उनकी बढ़ती ताकत को देखकर उनका दुश्मन बौखला गया. चूंकि, वह उनसे सामने से नहीं जीत सकते था, इसलिए उसने कूटनीति का सहारा लेते हुए, उनके पिता को बंदी बना लिया. उसे लगा था कि ऐसा करने से शिवाजी उसके सामने घुटने टेक देंगे. (Pic: Pinterest)

जबकि, यह उसकी गलतफहमी थी. शिवाजी ने उस पर चढ़ाई की और अपने पिता को आजाद कराया. यही नहीं उन्होंने उसके पुरंदर और जावेली के किलों पर भी अपनी विजय पताका फहरा दी. इस जीत ने शिवाजी की यशकीर्ति को दूर-दूर तक फैला दिया. (Pic: Ghumakkar)

यहां तक कि औरंगजेब के दरबार तक इसकी गूंज पहुंची. शिवाजी का इस तरह ताकतवर होना औरंगजेब के लिए चिंता का विषय था. उसने देर न करते हुए जय सिंह और दिलीप खान के हाथों शिवाजी को एक संधि प्रस्ताव भेजा. साथ ही शिवाजी को मुलाकात का न्यौता दिया. (Pic: india.)

इसके तहत प्रजा हित में जब शिवाजी औरंगजेब से मिलने पहुंचे तो औरंगजेब ने उन्हें छल से बंदी बना लिया. हालांकि, वह जल्द ही उसकी कैद से आजाद होने में सफल रहे और उसे सबक भी सिखाया. (Pic: induslibrary)

इसके बाद उन्होंने मराठाओं की एक विशाल सेना तैयार करते हुए 1674 में मराठा राज्य की स्थापना की और उसके सिंहासन पर बैठे. गद्दी पर बैठते ही उन्होंने सबसे पहले अपनी सेना को ज्यादा से ज्यादा मजबूत किया. उन्होंने गुरिल्ला के युद्ध जैसी युद्ध कलाओं को विशेष बढ़ावा दिया. (Pic: Swami…)

आगे अपनी वीरता और तेज रणनीति के चलते वह छत्रपति की उपाधि से नवाजे गए. खास बात तो यह थी कि वह एक स्वतंत्र शासक की तरह अपना शासन चलाने में कामयाब रहे. (Pic: Fact)

हालांकि, इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि उनका कार्यकाल ज्यादा नहीं रहा और 1680 में वह ईश्वर को प्यारे हो गए. बाद में उनके पुत्र संभाजी ने उनके सम्राज्य को आगे बढ़ाया और उनकी ही तरह मुगलों को लगातार चुनौती देते रहे.

आप इस महानतम राजाओं में से एक पर क्या कहना चाहेंगे, कमेन्ट-बॉक्स में अवश्य बताएं!

Web Title: Hindu Kings Chhatrapati Shivaji Maharaj, Hindi Article

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