कुछ लोग अपनी जिंदगी में वो मुकाम पा जाते हैं कि मरने के बाद भी उनका नाम लोगों की जुबान पर रहता है.

मौत के बाद की तारीखें उन्हें जिंदा रखती हैं.

आज हम आपको ऐसे ही चुनिंदा लोगों की ज़िंदगी से रुबरु करायेंगे, जिनके लिए 11 फरवरी महज़ एक तारीख़ नहीं बल्कि कभी न भूलने वाला इतिहास है.

आइये जानते हैं इस तारीख़ से जुड़े कुछ यादगार किस्से–

27 साल बाद जेल से आजाद हुए नेल्सन मंडेला

साउथ अफ्रीका के गांधी माने जाने वाले प्रमुख आंदोलनकारी और पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला भले इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके चाहने वालों के लिये 11 फरवरी बहुत ख़ास है.

इस दिन दक्षिण अफ्रीका में नस्लभेद के खिलाफ़ लंबी लड़ाई लड़ने वाले नेल्सन मंडेला को जेल से रिहाई मिली थी.

सन 1964 में मंडेला को देशद्रोह का आरोप लगाकर उम्र के 46वें साल में जेल में बंद कर दिया गया था, जिसमें उन्होंने अपनी ज़िंदगी के सबसे अहम 27 साल गुज़ारे.

आपको हैरानी होगी कि जेल में उनके सोने के लिए कोई बिस्तर तक नहीं था. बावजूद इसके उन्होंने सब्र से काम लिया और आखिरकार 11 फरवरी, 1990 को उन्हें कैद से छोड़ दिया गया.

मंडेला ने अपनी रिहाई के बाद भी नस्लभेद की लड़ाई जारी रखी और साल 1993 में दक्षिण अफ्रीक़ा के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने. उनका क़द तब और बढ़ गया जब उन्हें इसी साल दुनिया के सबसे बड़े सम्मान नोबेल प्राइज़ से नावाजा गया.

Nelson Mandela. with his wife outside the Prison. (Pic: essence)

रूजवेल्ट, चर्चिल, स्टालिन ने याल्टा समझौता साइन किया

द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद दुनिया में शांति स्थापना के मकसद से विश्व की तीन बड़ी शक्तियों के नेता क्रीमिया के याल्टा नामक स्थान पर मिले. यहां तीनों नेताओं ने एक शांति समझौता स्वीकार किया, इसी को याल्टा समझौता कहा गया.

11 फरवरी 1945 को अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट, ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल और सोवियत संघ के तत्कालीन नेता जोसेफ स्टालिन के मध्य याल्टा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.

नाजी जर्मनी के बंटवारे, विश्व में शांति स्थापना और शक्तियों के बंटवारे के लिए हुए इस सम्मेलन के बाद कहीं न कहीं अमेरिका और रूस के बीच फिर खाई बढ़ने लगी.

क्वामे क्रूमा अफ्रीकन एकता संगठन के संस्थापक सदस्य थे, इन्हें 1963 में लेनिन शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था जिसके बाद ये अपने आपको अफ्रीका का लेनिन मानने लगे.

Yalta C‍onference. (Pic: onthisday)

घाना को मिला पहला राष्ट्रपति

11 फरवरी 1951 को गोल्ड कोस्ट (घाना) में हुए पहले संसदीय चुनावों में जीते क्वामे क्रूमा वहां क पहले राष्ट्रपति बने.

घाना को जब अंग्रेजों के क्रूर शासन से मुक्ति मिली, इससे पहले ही वहां संसदीय चुनाव करा लिए गए थे जिसमें क्वामे क्रूमा विजयी रहे.

घाना पहला अश्वेत अफ्रीकी देश था, जिसे 6 मार्च 1957 ई. को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली.

ब्रिटिश घाना में यूनाइटेड गोल्ड कोस्ट कन्वेंशन ऐसी पहली राजनीतिक पार्टी थी, जिसने वहां के स्वतंत्रता संग्राम की अगुवाई की और देश को अंग्रेजों से स्वतंत्रता दिलाई.

क्वामे क्रूमा इसी पार्टी से थे, जो घाना के पहले राष्ट्रपति के साथ-साथ पहले प्रधानमंत्री भी बने.

Kwame Nkrumah First President of Ghana. (Pic: newtimes)

बल्ब के आविष्कारक एडिसन का जन्म

मानव सभ्यता को अंधेरे से रौशनी के युग में ले जाने वाले थॉमस एल्वा एडिसन का जन्म 11 फरवरी को ही हुआ था.

आज हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुके लाइट बल्ब का आविष्कार करने वाले इस तेज दिमाग वैज्ञानिक ने 11 फरवरी 1847 को इस धरती पर जन्म लिया.

सन 1878 में थॉमस एडिसन ने एक प्रकाश देने वाली लैंप के लिए रिसर्च शुरू किया और इसी साल 14 अक्टूबर को इन्होंने बिजली से जलने वाली लाइट में सुधार के लिए अपने पहले पेटेंट के लिए आवेदन दिया.

इस बीच उन्होंने जलने के लिए कई प्रकार की धातुओं को अपने प्रयोग में आजमाया. आखिरकार इन्होंने अपना दूसरा पेटेंट आवेदन किया जिसमें प्लेटीना को बल्ब में इस्तेमाल किया गया था.

हालांकि, आजकल बल्ब में जलने वाली टंगस्टन धातु का इस्तेमाल इसके बहुत बाद शुरू हुआ.

पूरी दुनिया को बल्ब से जगमग करने के बाद एडिसन 18 अक्टूबर 1931 को इस संसार से विदा हो गए.

Thomas Edison Light Bulb. (Pic: freakingnews)

ईस्ट इंडिया कंपनी ने किया अवध पर कब्ज़ा!

आज के ही दिन ईस्ट इंडिया कंपनी ने अवध पर कब्ज़ा किया था.

अवध का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. यूपी में लख़नऊ क्षेत्र के आसपास के इलाके को आजादी से पहले अवध कहा जाता था.

चूंकि यहां की भूमि कृषि के लिए अच्छी थी इसलिए अंग्रेजों की इस प्रदेश पर काफी पहले से बुरी नजर थी.

लेकिन ब्रिटिश भारत में अवध एक ऐसा इलाका था जिस पर कब्जा करने में अंग्रेज सरकार के पसीने निकल गए.

सन 1856 में आज ही के दिन अंग्रेजों ने अपनी कूटनीतिक चालों के चलते अवध को अधिग्रहित कर लिया और नवाब को बंदी बना लिया गया.

वाजिद अली शाह के लिए 15 लाख की पेंशन तय कर दी गई, हालांकि उन्होंने इसे कतई स्वीकार नहीं किया.

इसके बाद तो और जोर शोर से अवध में क्रांति की ज्वाला धधकने लगी.

1857 की क्रांति का असली केंद्र अवध का इलाका ही माना जाता है. इससे आक्रोशित अंग्रेज सरकार ने वहां के नबाव पर और पैसों के लिए दबाब बनाया जिससे अवध लगभग कंगाल हो गया.

Wajid Ali Shah Nawab of Awadh. (Pic: pinterest)

बॉक्सिंग इतिहास में हुआ सबसे बड़ा ‘पलटवार’

रिंग में विरोधी बॉक्सरों के छक्के छुड़ाने वाले माइक टायसन के करियर में एक ऐसा दिन भी आया जब उन्हें शर्मिंदा होना पड़ा.

11 फरवरी 1990 को एक रोचक मुकाबले में माइक टायसन प्रतिद्वंद्वी जेम्स ‘बस्टर’ डगलस से हार गए.

इससे पहले माइक टायसन को हराना विरोधी बॉक्सरों के लिये बस दूर का ख़्वाब था.

टोक्यो में हुई इस बॉक्सिंग प्रतियोगिता को हारने से पहले बॉक्सिंग के महानायक माइक टायसन के पास वर्ल्ड हैवीवेट चैंपियन का ख़िताब था.

हालांकि जल्द ही डगलस ने उन्हें लगातार दस राउंड में हराकर उनसे ये ख़िताब छीन लिया.

किसी को उम्मीद नहीं थी कि माइक टायसन को डगलस जैसा कोई खिलाड़ी हरा भी पाएगा लेकिन खेल में कुछ भी संभव है.

फिर भी टायसन के चाहने वालों के लिए उनकी हार को बर्दाश्त कर पाना आसान नहीं था.

James ‘Buster’ Douglas knocks out Mike Tyson. (Pic: independent)

तो ये थे 11 फरवरी से जुड़े कुछ अहम ऐतिहासिक किस्से!

अगर आपको भी इस तारीख से संबंधित कोई विशेष घटना याद है तो कृपया हमें कमेंट बॉक्स में बताएं और अपनी जानकारी को पढ़ने वाले दूसरे लोगों तक पहुंचाएं.

Web Title: Important Events of February 11, Hindi Article

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