मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो कि कामयाबी शोर मचा दे.

यह पंक्तियां उन लोगों पर एकदम फिट बैठती हैं, जिन्होंने अपने काम को बड़ी खामोशी व खूबसूरती के साथ अंजाम दिया और जब उन्हें सफलता मिली तो उसे दुनिया ने सराहा.

आज हम ऐसे ही कुछ नामों से जुड़ी घटनाओं का जिक्र करेंगे, जिन्होंने कहीं न कहीं तारीखों से निकलकर दुनिया को अपने नाम का एहसास कराया.

आइये जानते हैं 12 फरवरी से जुड़े इतिहास के कुछ यादगार किस्से –

बारदोली में शुरू हुआ आंदोलन!

जिस तरह से महात्मा गांधी ने अपने अहिंसा आंदोलनों से भारत में अंग्रेजों के खिलाफ विरोध की लहर पैदा की ठीक उसी तरह से गुजरात के दूसरे नायक सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आंदोलनों की लौ को कभी बुझने नहीं दिया.

भारत की आज़ादी के लिए उनके अमूल्य योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता.

इसी कड़ी में 12 फरवरी को सरदार वल्लभ भाई पटेल के कहने पर गुजरात में सूरत के पास बारदोली नामक जगह पर किसानों ने ब्रिटिश सरकार को अपनी जमीन पर ज्यादा लगान देने से मना कर दिया.

वल्लभ भाई पटेल ने जन बल के साथ इस आंदोलन को ताकत दी और मामला ब्रिटिश राजनीतिक स्तर तक लेकर गए.

इन्हों‍ने बढ़ाई गई लगान की दर का पुरजोर विरोध किया.

परिणाम स्वरूप अंग्रेज सरकार को लगान को वापस लेना पड़ा, वहीं आंदोलन से हीरो बनकर उभरे वल्लभ भाई पटेल को वहां की महिलाओं ने सरदार की उपाधि से विभूषित किया.

Vallabhbhai Patel. (Pic: marvelartgallery)

पैदा हुए अब्राहम लिंकन!

अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति रहे अब्राहम लिंकन का जन्म आज ही के दिन हुआ था. काफी असफलताओं के बाद भी अब्राहम लिंकन ने अपने जीवन में हार नहीं मानी और एक दिन आखिरकार वो दिन आया, जब उन्हें जनता ने अपना राष्ट्रपति चुना.

बेहद साधारण परिवार में जन्मे लिंकन दिन में काम करते और रात को पढ़ाई करते थे. गरीबी के कारण उनके पास किताब खरीदने तक के पैसे नहीं थे.

12 फरवरी सन 1809 ई. को पैदा हुए अब्राहम लिंकन कभी अपनी पढ़ाई दोस्तों की उधार ली गई किताबों से जलती हुई अंगीठी के सामने किया करते थे.

लिंकन ने सन 1950 में अपनी राजनीतिक पारी का पदार्पण किया. राजनीति में आने से पहले अपना पेट पालने के लिए उन्होंने कई तरह की नौकरियां कीं.

बचपन की चुनौतियों की तरह उन्हें अपने राजनीतिक जीवन में भी काफी असफलताओं का सामना करना पड़ा. उन्हें कई बार चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा, लेकिन अंतत: उन्होंने दुनिया को अपनी काबिलियत का अहसास कराया और अमेरिका के पहले नागरिक बने.

President Abraham Lincoln. (Pic: nathangreenestudio)

भारतीय सिनेमा के विलेन प्राण का जन्म!

इस इलाके में नए आए हो बरखुरदार, वरना यहां शेरखान को कौन नहीं जानता!

जंजीर फिल्म का ये डायलॉग प्राण साहब को फिर से जिंदा कर देता है.

एक और डायलॉग है, शेर खान ने शादी नहीं की तो क्या हुआ, लेकिन बारातें बहुत देखी हैं…

ऐसे तमाम डायलॉग भरे पड़े हैं, जो अगर प्राण की आवाज से न निकलते तो शायद वो मजा नहीं आता. इनको सुनकर ऐसा लगता है, जैसे मानो ये केवल उन्हीं के लिए बने हैं.

प्राण साहब का जन्म भी इसी दिन यानी 12 फरवरी, 1920 को हुआ था. दिल्ली में जन्मे प्राण साहब का पूरा नाम किशन सिकंद था, लेकिन अपने जीवंत अभिनय के कारण उन्हें फिल्मी दुनिया से प्राण नाम मिला.

वह कितने अच्छे कलाकार थे, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके साथ काम करने के लिए बड़े से बड़े अभिनेता आतुर रहते थे. खासतौर पर अमिताभ बच्चन उनके साथ कई फिल्मों में अभिनय करते देखे गए.

अपने खास अंदाज से दुनिया का मनोरंजन करने वाले प्राण साहब ने भले ही 2013 में अपनी आंखें हमेशा के लिए मूंदकर दुनिया को अलविदा कह दिया था.

किन्तु, वह अपने चाहने वालों के दिलों में आज भी जिंदा हैं.

Pran from a Movie. (Pic: chiloka)

बहादुरी के लिए हिटलर को आयरन क्रॉस!

प्रथम विश्व युद्ध में बहादुरी के लिए एडोल्फ हिटलर को आज ही के दिन सन 1915 में आयरन क्रॉस पदक से सम्मानित किया गया.

हिटलर ने जर्मन सेना की ओर से प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया था. वो सेना की बटालियन के बीच संदेश वाहक का काम करता और इधर से उधर सैन्य आदेशों को पहुंचाता था.

ये काम इतना आसान नहीं था, क्योंकि वहां लगातार बमबारी हो रही और गोलियां चल रही थीं, जबकि हिटलर ने बिना डरे बहादुरी का परिचय देते हुए अपने कार्य को जारी रखा.

प्रथम विश्व युद्ध के बाद हिटलर नाजी पार्टी का नेता बना और फिर द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ने का एक कारण भी. उसने नाजी नेता बनने के बाद यहूदियों के खिलाफ नफरत के बीज बोए और इसी के सहारे वो अपनी राजनीतिक पहुंच को प्राप्त कर सका.

यहूदियों के प्रति हिटलर की कट्टरता इस बात से देखी जा सकती है कि उसने उन्हें एक बीमारी के तौर पर संबोधित किया और जर्मनी से उनका सफाया करने के लिए काम करने लगा.

Adolf Hitler wearing Iron Cross. (Pic: pinterest)

भारत की यात्रा पर निकला ‘वास्को दा गामा’

‘वास्को दा गामा’ के नाम से कौन परिचित नहीं, कभी न कभी आपने भी जरूर ये नाम सुना ही होगा. पुर्तगाल में पैदा हुए ‘वास्को दा गामा’ नौसेना में काम करते थे. इसी कारण उनके मन में समुद्र की सैर करने का विचार जोर पकड़ रहा था.

उन्हें विश्व का सबसे सफल नेविगेशन माना जाता है. उन्होंने अपनी तेज बुद्धि के द्वारा नौसेना को नेविगेशन में सहायता दी उस समय की, जब मैप नहीं हुआ करते थे.

चूंकि, उस समय भारत अपने मसालों के लिए खासा मशहूर था. यहां के मसालों जैसा स्वाद कहीं और के मसालों में नहीं था. लिहाजा ये मसाले यूरोप के दूसरे कोने में बसे पुर्तगाल तक जाते थे.

दिलचस्प बात यह थी कि वहां पहुंचने तक इनकी कीमत बहुत बढ़ जाती थी. यही कारण था कि यूरोप के सुदूर देश ने भारत पहुंचने का रास्ता समुद्र में खोजने की कोशिश की.

जब दुनिया भारत तक पहुंचने का रास्ता नहीं जानती थी, तब पश्चिमी दुनिया के इस नाविक ने भारत यात्रा पर निकलने का मन बनाया. इसी कड़ी में ‘वास्को दा गामा’ पहली बार 17 मई 1498 को भारत पहुंचा. कहते हैं कि जब वह अपने चार जहाजों के साथ केरल के कालीकट तट पर पहुंचा तब उसे भी नहीं पता था कि उसकी यात्रा इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगी.

अपनी पहली यात्रा के बाद ‘वास्को दा गामा’ 12 फरवरी 1502 को दोबारा से भारत की दूसरी यात्रा पर निकला. इस बार उसके साथ 15 जहाजों का काफिला था.

Vasco da Gama on a Voyage. (Pic: thinglink)

तो ये थे 12 फरवरी से जुड़े कुछ अहम ऐतिहासिक किस्से. अगर आपको भी इस तारीख से संबंधित कोई विशेष घटना याद है, तो हमें नीचे दिए कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.

Web Title: Historical events of 12th February, Hindi Article

Feature Image Credit: ppcorn