किसी भी देश को जानने के लिए वहां की संस्कृति को जानना बहुत जरूरी हो जाता है. इसी के बात हम तय कर पाते हैं कि वह देश, उसका इतिहास और सभ्यता कैसी रही है.

खासकर भारत की बात आती है, तो यह और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है. चूंकि ‘अनेकता में एकता’ भारत की विशेषता है. यहां अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं. साथ ही यहां की संस्कृति में विविधता का अनूठा संगम भी देखने को मिलता है.

कहते हैं कि भारत को सही मायने में समझना है, तो यहां की वास्तुकला को देखना चाहिए.

तो देर किस बात की है आईये यहां मौजूद वास्तुकला के कुछ अदभुत नमूनों को जानने की कोशिश करते हैं:

कोणार्क का सूर्य मंदिर

‘कोणार्क का सूर्य मंदिर’ भारतीय सभ्यता की बड़ी विरासत माना जाता है. इस मंदिर का निर्माण राजा ‘नरसिम्हा देव’ ने 1238 – 64 ई. के बीच कराया था. यह उड़ीसा में मौजूद है.

माना जाता है कि इसके निर्माण में लगभग 1200 श्रमिकों ने कार्य किया था. मंदिर की कुल ऊँचाई 228 फुट है. इस विशाल मंदिर को 12 साल की कड़ी मेहनत के बाद बनाया जा सका. ख़ास बात यह है कि यह मंदिर दिखने में किसी रथ की तरह दिखाई देता है.

इस मंदिर के बाहर की तरफ बारह जोड़ी पहिये हैं, जो साल के बारह महीनों को दर्शाते हैं. इन सभी पहियों का 10 फीट व्यास है, जिसे सात घोड़ों द्वारा खींचते हुए दिखाया गया है.

जाहिर तौर पर यह मंदिर भारत के उत्कृष्ट स्मारक स्थलों में से एक है.

कहते हैं कि जब नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्र नाथ टैगोर ने इसे पहली बार देखा तो वह हैरान हो गए थे. उन्होंने कहा कि ‘यहाँ के पत्थरों की भाषा इंसानों की भाषा से भी बड़ी है’.

सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि, विदेशों तक से लोग इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं.

Konark Sun Temple (Pic: loupiote)

ताजमहल

दुनिया के सात अजूबों में जिसका नाम दर्ज है. दुनिया जिसे महान प्यार की निशानी मानती है और जिसके कारण विदेशी भारत आने के लिए लालायित रहते हैं, वह है ताजमहल!

यह सुंदर वास्तुकला उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में यमुना नदी के किनारे पर स्थित है.

मान्यता है कि शाहजहां ने इसको बनवाया था. उन्हें अपनी पत्नी ‘मुमताज़ बेगम’ से बेहद प्यार था. इतना प्यार कि वह उनकी यादों को सदा के लिए अमर कर देना चाहते थे. बस इसीलिए उन्होंने इस आलीशान वास्तुकला से परिपूर्ण भव्य ईमारत का निर्माण करा दिया.

शाहजहां के आदेश पर इसका निर्माण कार्य 1632 में शुरु हुआ, जो 1648 तक चला. इसको बनाने में लगभग 20,000 श्रमिकों को लगाया गया था. कहते हैं कि एक लंबी मशक्कत के बाद जब यह बनकर तैयार हुआ तो शाहजहां ने इसको बनाने वालोंं के हाथ कटवा लिये थे. असल में वह चाहते थे कि ताजमहल जैसा कोई दूसरा नमूना न बना सके.

ताजमहल को बनाने में जो सबसे खास नाम था, वह ‘उस्ताद अहमद लाहौरी’ था. माना जाता है कि अपने समय में वह वास्तुकला के सबसे माहिर कारीगर थे.

ताजमहल में आपको इस्लामी वास्तुकला की झलक देखने को मिल सकती है. इसके चारों तरफ चार बड़ी मीनारें भी बनाई गई हैं. महल के अंदर ही मुमताज़ बेगम की कब्र है, जिसके लिए शाहजहाँ ने यह पूरा मकबरा बनवाया था.

अगर आप ताजमहल जाएं तो इसे शाम के समय जरूर देखें. ऐसा इसलिए क्योंकि कहा जाता है कि शाम को इसकी खूबसूरती में अलग किस्म का नूर देखने को मिलता है.

Taj Mahal (Pic: india)

खजुराहो मंदिर

खजुराहो मंदिर मध्य प्रदेश के छतरपुर में स्थित है. इस मंदिर को भारत के सबसे शानदार स्मारकों में से एक माना जाता है. यह जैन हिन्दू मंदिरों का एक सबसे बड़ा समूह है.

इस मंदिर में वास्तुशिल्प प्रतिभा, जटिल नक्काशी और सबसे प्रसिद्ध कामुक मूर्तियां हैं. इसका निर्माण 900 से 1130 ईस्वी के बीच में हुआ था, जोकि ‘चंदेल वंश’ का स्वर्णकालीन काल माना जाता है.

इसके माध्यम से चंदेल शासकों ने धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से राजनीति को अलग करने का प्रयास किया था. उन्होंने खजुराहो को एक धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी बनाकर महोबा में अपनी राजनीतिक राजधानी स्थापित की.

इतिहास में खजुराहो मंदिरों का पहला रिकॉर्ड 1022 ई. में ‘अल बेरुनी’ के खातों में मिला. बाद में एक अरब यात्री ‘इब्न बतूता’ के कामों में भी इसका जिक्र मिला.

खजुराहो मंदिर 9 वर्ग मील के क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां की नक्काशी मध्यकालीन युग की महिलाओं की पारंपरिक जीवन शैली को दर्शाती है. यहां कई मंदिर हैं, जिनमें ब्रह्मा, विष्णु, शिव और विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित हैं. इसके आलाव यहाँ कई जैन धर्म के मंदिर भी देखने को मिलते हैं.

Khajuraho Temple (Pic: getsholidays)

टीपू सुल्तान का महल

‘टीपू सुल्तान’ का महल, अल्बर्ट विक्टर रोड़ के एक भीड़ भरे इलाके में मौजूद है. कहते हैं कि अपने जीवन काल में टीपू सुल्तान ने जिन खूबसूरत चीजों का निर्माण करवाया उसमें यह एक है.

1781 में इसका निर्माण टीपू के पिता ‘हैदर अली’ ने शुरू करवाया था, जिसे बाद में टीपू ने पूरा कराया.

टीपू सुल्तान ने इसे पूरा करवाया था, इसलिए इसका नाम उनके नाम पर ही ‘टीपू सुल्तान महल’ रखा गया. हालांकि, इसे ‘रश-ए-जन्नत’ और ‘हाउस ऑफ हैप्पीनेस’ के नाम से भी जाना जाता था.

कहते हैं कि अपने गर्मियों के दिन टीपू इसी महल में गुजारते थे. इसे उस समय के बड़े कारीगरों द्वारा बनाया गया था. इसमें कई प्रकार के ख़ास पत्थर प्रयोग किये गये. साथ ही इसमें सुंदर फूल और दिलकश फव्वारों को लगाया गया. इस महल में ख़ास लकड़ियों का प्रयोग हुआ है, जिसके कारण इसकी खूबसूरती और भी बढ़ गई प्रतीत होती है.

महल के अंदर वास्तुकला के कई अनूठे चित्र मौजूद हैं.

यह महल इतना विशाल और सुंदर है कि देखते ही बनता है. एक बड़ी संख्या में लोग इसे देखने के लिए जाते हैं.

Tipu Sultan Fort (Pic: digitalkaleidoscope)

तो यह थे भारत की वास्तुकला के कुछ नायाब नमूने, जो भारत की गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता को उजागर करते हैं. साथ ही यह बताते हैं कि क्यों भारत अन्य देशों से अलग है और क्यों विदेशी लोग यहां आने के लिए लालयित रहते हैं.

अगर आप वास्तुकला से जुड़ी किसी और भारतीय धरोहर के बारे में जानना चाहते हैं, तो नीचे दिये कमेंट बॉक्स में बताना न भूलें. उस विषय पर हमारी टीम अगली प्रस्तुति में कार्य कर सकती है.

Web Title: History of India’s Wonderful Architecture, Hindi Article

Featured image credit: insightvacation)