मंदिरों की बात की जाए तो भारत का शायद ही कोई राज्य होगा, जहां मंदिर न हों.

खास बात तो यह है कि यहां का हर एक मंदिर अपनी एक अगल पहचान रखता है. कुछ अपनी धार्मिक मान्यताओं के चलते प्रसिद्ध हैं, तो कुछ अपनी सुंदरता को लेकर.

इसी क्रम में अगर दक्षिण भारत के मंदिरों की बात करें तो वह वास्तुकला से पटे नज़र आते हैं. ‘कैलाशनाथ मंदिर’ इसका एक बड़ा उदाहरण है, जोकि दक्षिण भारत के कांचीपुरम में स्थित सर्वाधिक प्राचीन मंदिरों में से एक है.

इसके बारे में कहा जाता है कि हजारों सालों बाद भी यह ज्यों का त्यों बना हुआ है. यह इतना खूबसूरत है कि इसे देखने वाले देखते ही रह जाते हैं. तो आईये जानने की कोशिश करते हैं इसमें ऐसा क्या है खास कि लोग इसको देखने के लिए आतुर रहते हैं–

भारत का पहला ‘ढांचागत मंदिर’

‘कैलाशनाथ मंदिर’ भारत की नायाब धरोहरों में से एक है. इसका इतिहास सदियों पुराना रहा है. जानकारों की माने तो इस मंदिर का निर्माण 640 से 730 ईस्वी के बीच पल्लव वंश के शासन काल में हुआ. इसको राजा राजसिम्हा ने अपनी पत्नी की प्रार्थना पर बनवाया था. राजा राजसिम्हा को नरसिंह वर्मन द्वितीय के नाम से भी जाना जाता है. बाद में मंदिर के बाहर का सुंदरीकरण राजा के पुत्र महेन्द्र वर्मन तृतीय ने करवाया.

चूंकि पहले के मंदिर या तो लकड़ी से बनाए जाते थे या फिर गुफाओं व पत्थरों के चट्टानों में बने होते थे, किन्तु यह मंदिर इनसे बिल्कुल अलग था. इसमें नक्काशी के कामों पर विशेष ध्यान दिया गया. इस कारण ‘इस मंदिर’ को भारत का पहला ढांचागत मंदिर माना जाता है.

कैलाशनाथ मंदिर के अलावा उन्होंने कई और भव्य हिन्दू मंदिरों का निर्माण कराया. तिरू परमेश्वर विन्नागाराम में मौजूद बैकुंठ पेरुमल मंदिर इसमें एक बड़ा नाम है, जो अनूठे वास्तुकला के रूप में जाना जाता है.

Kailasanathar Temple (Pic: pinterest)

वास्तुकला का ‘नायाब नमूना’

कैलाशनाथ मंदिर की वास्तुकला को प्राचीन भारत की सबसे बेहतरीन वास्तुकला का नमूना बाताया जाता है. इसकी डिजाइन में प्राचीन ‘द्रविड़ स्थापत्य शैली‘ का इस्तेमाल किया गया है. वहीं मंदिर की नींव को ग्रेनाइट पत्थरों से बनाया गया है. यही कारण है कि आज हजारों सालों के बाद भी इसमें कोई भी कमी नहीं आई है. यह आज भी ज्यों का त्यों बना हुआ है.

इसके अलावा मंदिर की बाहरी क्षेत्र में बनी नक्काशियां और बलुआ पत्थरों का प्रयोग इसकी सुंदरता में चार चांद लगाते हैं. यहां देवी पार्वती और शिव की नृत्य प्रतियोगिता को दीवारों पर चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है. इनमें माता पार्वती की हंसती हुई प्रतिमा बहुत मनोरम बताई जाती है.

आपको जानकर हैरानी हो, लेकिन इस मंदिर के आसपास करीब पचास छोटे-छोटे मंदिर हैं, जिनके अंदर हिन्दू धर्म के कई देवी-देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं.

मंदिर परिसर में आने के दो द्वार हैं. एक बड़ा द्वार परिसर के पूर्व में मौजूद है, जोकि आमतौर पर बंद रहता है. इसके पीछे वजह यह मानी जाती है कि यह वास्तुनुकुल स्थान पर नहीं है. जबकि, दूसरा छोटा द्वार परिसर की दक्षिण दिशा में है, जहां से श्रद्धालु आते-जाते हैं. यहां पर शेर की खास मूर्ति मौजूद है, जो विषेश मुद्रा में विराजमान है. यह देखने में कुछ ऐसी लगती है, जैसे इसमें बने शेर मंदिर की रक्षा में तैनात किए गए हों.

एक चीज और जिस पर कम लोगों का ध्यान जाता है, वह इसकी छत है, जोकि एक गुंबद के आकार की बनाई गई है. साथ ही इस मुख्य तीर्थ स्थान की इमारत में लगभग 16 शिवलिंग भी मौजूद हैं, जोकि काले ग्रेनाइट पत्थर से ही बने हैं.

इस मंदिर परिसर के मुख्य गर्भ गृह में एक गुफा है, जिसके बारे में बताया जाता है कि अगर आप इस गुफा को पार कर लेते हैं, तो आपको सीधे बैकुंठ की प्राप्ति होती है.

Design Of Lions (Pic: commons)

‘कांचीपुरम महोत्सव’ की शान

यूं तो यह मंदिर हमेशा खास आकर्षण का केंद्र होता है, लेकिन शिवरात्रि के मौके पर इसकी रंगत देखने लायक होती है. हर साल इस खास मौके पर एक महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जोकि कांचीपुरम महोत्सव के नाम से न सिर्फ कांचीपुरम में बल्कि, पूरे भारत में प्रसिद्ध है. यह हर साल फरवरी और मार्च के आसपास आयोजित किया जाता है.

ऐसी मान्यता है कि इस मौके पर यात्रा करना बेहद शुभ होता है. यहीं कारण है कि इस अवसर पर एक बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगता है.

‘कांचीपुरम महोत्सव’ के अलावा कैलाशनाथ मंदिर में वर्ष के प्रमुख त्योहार जैसे-राम नवमी, गणेश चतुर्थी और दीपावली को भी खासतौर से बनाया जाता है.

यह मंदिर कांचीपुरम बस स्टैंड से करीब 25 किलोमीटर दूर है. यहां जाने से पहले इसके खुलने के समय का ध्यान जरूर रखें. यह मंदिर सुबह 6 से 12 बजे और शाम को 4 से 7 बजे तक के लिए खोला जाता है.

History Of Kanchi Kailasanathar Temple (Pic: tirupatibalaji…)

अपनी इन्हीं खूबियों की वजह से यह मंदिर लोगों के बीच में खासा प्रसिद्ध है और एक बड़ी संख्या में लोग इसके दीदार के लिए आते हैं.

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Web Title: History Of Kanchi Kailasanathar Temple, Hindi Article

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