आज के समय में हमें कहीं भी जाना होता है, तो हम सबसे पहले सीधे गूगल मैप की मदद लेते हैं. हमारा मानना होता है कि इसकी मदद से हम बिना किसी से रास्ते पूछे अपनी मंजिल तक पहुंच जाते हैं. आधुनिक समय में स्मार्टफोन के चलन ने इसे और भी आसान बना दिया है.

ऐसे में शायद ही कोई होगा, जिसे कागज वाले मानचित्रों का प्रयोग करना पसंद होगा… वह भी आज के आधुनिक युग में!

बावजूद इसके क्लॉस रूम में भूगोल व इतिहास पढ़ाने के लिए इन मानचित्रों का उपयोग आज भी किया जाता है. अब जब मानचित्र हमारे जीवन में इतने अहमियत रखते हैं, तो इनके बारे में विस्तार से जानना जरूरी हो जाता है.

तो आईये जानने की कोशिश करते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई. इसे किसने बनाया और इसका स्वरूप कैसे बदलता गया–

‘अनेग्जीमेण्डर’ का पहला मानचित्र!

दुनिया में पहला मानचित्र किसने बनाया इसका सही जवाब किसी के पास नहीं मिलता. हां, इसको लेकर अलग-अलग मत जरूर हैं. एक मत के अनुसार 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व में यूनानियों को गणित के आधार पर नक्शा बनाने का श्रेय दिया जाता है. उनके अनुसार दुनिया का सबसे पहला मानचित्र प्राचीन ग्रीक के ‘अनेग्जीमेण्डर‘ ने किया था.

कहते हैं कि उन्होंने इसके लिए शुरुआत में पृथ्वी को बेलनाकार मानते हुए मानचित्र के स्वरुप की कल्पना की थी. जिसका उपयोग करते हुए बाद में ‘इरैटोस्थनिज़’ नाम के यूनानी ने मानचित्र को आकार दिया. इरैटोस्थनिज़ के मानचित्र में अक्षांश रेखाएँ, रेखांश और शंकु को जगह मिला. आगे के सफर में इसको 150 ईस्वी के आस-पास छह खंड वाले एक एटलस के रुप में विस्तार दिया गया.

यह वह समय था जह कई सारे नक्शे बना लिये गये थे.

First Made A Map Of The World Was Anaximander (Pic: binaryoptions)

वहीं, एक दूसरे मत के हिसाब से सबसे पहला नक्शा एक मानसिक छवि मात्र था. इसका प्रयोग पुराने लोगों के द्वारा उपयोग की जाने वाली जगह को व्यवस्थित करने के लिए किया जाता था.

इनकी मदद से वह स्थानीय पर्यावरण के बारे में अन्य लोगों को जानकारी देते थे. वह इनको एक रेत के केनवास पर छड़ी के उपयोग से बनाते थे, जो जल्दी मिट जाते थे. इस कारण वह कभी कागजी नहीं बन पाये और उन्हें आधारहीन माना गया.

बाद में 2300 ईसा पूर्व में बाबलियों ने मानचित्र के लिए मिट्टी की गोलियों का इस्तेमाल किया. पुराने समय की कुछ गुफा और कब्रगाहों में इनके निशान मिलते हैं.

Babylonians Used Clay Tablets To Record Map Like Images (Pic: pinterest)

जानवरों की खाल पर ‘मानचित्र’

मध्यकाल में पृथ्वी को गोलाकार माना गया, लेकिन फिर भी बहुत से भागों में नक्शे छोटे ही हुआ करते थे. जिनको योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया जाता था. इस तरह के मानचित्र को ‘टी’ और ‘ओ’ रेन्डरिंग कहा जाता था. महाद्वीपों को विभाजित करने के लिए प्रमुख जल के रास्तों को टी फॉर्म का नाम दिया गया था.

चूंकि, अभी तक के मानचित्र उतने कामयाब नहीं थे, इसलिए 1275 के आसपास इनको भेड़ की खालों पर बनाया जाने लगा. इन मानचित्रों में सबसे पहले भूमध्य सागर को दर्शाया गया. खालों पर बनाए गए इन मानचित्र को शुरुआत में ‘पोर्टलोन’ के नाम से जाना जाता था.

आगे के सफर में पानी के जहाजों में मानचित्र ‘पोटोर्लोलन चार्ट’ के रुप में दिखे. इनको बनाने के लिए कंपास का इस्तेमाल किया गया. ये ‘पोटोर्लोन्स चार्ट’ हाथों से बनाए जाते थे, इसलिए ये बहुत महंगे तैयार होते थे.

16वीं शताब्दी में आकर मानचित्र बड़ी सीटों पर तैयार किये जाने लगे. जिसको जल्द ही ‘पांडुलिपि पोर्टलों’ में बदल दिया गया. आगे भी मानचित्रों का सफर यूंही चलता रहा.

इसी कड़ी में 17 वीं से 19वीं सदी के बीच नक्शे अधिक से अधिक सटीक होते चले गये. नई तकनीक के उपयोग के साथ, विभिन्न देशों ने राष्ट्रीय नक्शों के कार्यक्रमों को अपनाया और उनकी शुरुआत की.

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद, तो मानचित्र मानो बदल से गये. हवाई फोटोग्राफी का प्रयोग करके नक्शों का सही विस्तार किया गया. यह एक क्रांतिकारी पहल थी, जिसने मानचित्रों को और ज्यादा सार्थक बना दिया.

This Map Is Burned By Hand On Soft Sheepskin Leather (Pic: imgur)

आधुनिक समय के ‘मानचित्र’

आधुनिक समय में मानचित्र का स्वरुप पूरी तरह से बदल चुका है. आज के समय में तो लोग ऑनलाइन मानचित्र का ही इस्तेमाल करते हैं. इस तरह के ऑनलाइन मानचित्र के लिए सैटेलाईट का प्रयोग किया जाता है. यह हर देश की रूपरेखा को अन्य देशों के साथ साझा की गई सीमा को दिखाता है.

आज के समय में सैटेलाइट के माध्यम से आप भारत के एक छोटे से गाँव का घर भी आराम से देख सकते हैं. यह सैटेलाइट का ही कमाल है कि आज हम अपने स्मार्टफोन पर जूम करके किसी भी लोकेशन को आसानी से देख सकते हैं.

भारत की ही बात कर लें तो वह 3,287,263 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है, जो कई पड़ोसी देशों के से सटा हुआ है. ऐसे में अगर इतने बड़े भारत को किसी चार्ट पर देखने लगे तो गांव तो छोड़िये यहां के शहरों की तस्वीर को देखना मुश्किल हो जायेगा.

ऐसे में कोई अगर चार्ट वाले मानचित्र का प्रयोग करने के लिए कह दे तो, कोई भी अपना सिर पकड़ने को मजबूर हो सकता है.

Satellite Maps (Pic: googleblog)

प्राचीन काल से ही मानचित्र के स्वरूप में बदलाव जारी है. इसी कड़ी में आज वह ‘गूगल मैप’ आदि के रुप में हमारे जीवन का अहम हिस्सा बना हुआ है. इस पूरे सफर में खास बात यह रही है कि मानचित्र की उपयोगिता किसी भी काल में कम नहीं हुई.

वह कल भी प्रांसगिक थे और आज भी हैं… तो निश्चित रूप से किसी न किसी रूप में कल भी रहेंगे!

Web Title: History of Mapping, Hindi Article

Featured Image Credit: thinglink/hayneedle