भारत में कई राजवंशों ने समय-समय पर शासन किया. लोधी वंश उनमें से एक था, जिसने करीब तीन पीढ़ियों तक भारत पर राज किया था. इब्राहिम लोदी इस राजवंश का आखिरी राजा हुआ. कहा जाता है कि उसके अंदर खूब सारी खूबिया थीं, लेकिन उसके फैसले बहुत जल्दबाजी में लिए जाते थे.

साथ ही उसका व्यवहार भी कई बार अभ्रद हो जाता था!

असल में वह निरंकुश शाही शासन करना चाहता था, जिस कारण उसे विरोध का सामना करना पड़ा. परिणाम यह रहा कि वह उतना मजबूत नहीं हो सका, जितना एक शासक के तौर पर उसे होना चाहिए था. अंतत: 1526 में पानीपत की लड़ाई में उसका सामना बाबर से हुआ, जिसमें उसकी हार हुई और लोधी वंश पतन के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया.

चूंकि,  इब्राहिम लोदी लोधी वंश का आखिरी शासक था, इसलिए उसको नजदीक से जानना दिलचस्प रहेगा–

सिंकदर लोदी का बेटा था इब्राहिम 

इब्राहिम लोदी का जन्म 15 वीं सदी में हुआ. वह सिकंदर लोदी का सबसे छोटा बेटा था. जब पिता सिकंदर लोदी चल बसे तो इब्राहिम लोदी को लोधी वंश की कमान मिली और वह दिल्ली का सुल्तान बनाया गया. उसके सत्ता में बैठते ही उम्मीद की जा रही थी कि वह अपने पिता की तरह लोधी वंश को आगे ले जाएगे और उसका विस्तार करेगा.

हालांकि, यह हो न सका!

शुरुआत से उसका व्यवहार अपने लोगों के लिए ठीक नहीं रहा. उसने कठोरता के साथ अपना शासन करना चाहा. असल में उसका मानना था कि इससे लोग उससे डरेंगे और उसके हर एक कदम में उसका साथ देंगे, जबकि उसका यह दांव उस पर भारी पड़ा. उसके निरंकुश व्यवहार का लोगों ने विरोध करना शुरु कर दिया. यहां तक कि उसकी सेना के अंदर भी उसके प्रति आक्रोश का भाव पनपने लगा.

चूंकि उसके शासन काल में उसके अपने ही उससे खुश नहीं थे, इसलिए दूसरों के लिए इस स्थिति का फायदा उठाना लाजमी था. दुश्मन लोधी वंश पर कब्जा करने की फिराक में योजनाएं बनाने लगे.

Ibrahim Lodi (Representative Pic: pinterest)

पिता सिंकदर लोदी के सपने को पूरा भी किया…

इब्राहिम लोदी के पिता का सपना था कि वह किसी भी तरह से ग्वालियर के किले पर कब्जा कर सकें. इसके लिए उनके पिता ने ग्वालियर के किले पर कई बार कब्जा करने की नाकाम कोशिश की. हालांकि, वह इसमें कामयाब नहीं हो सके. बाद में अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए इब्राहिम लोदी ने उस पर हमला किया.

उसे अपने पिता के द्वारा किया गया हमलों के बारे में अच्छी तरह से जानाकारी थी. वह उन कारणों को भी जानता था, जिस कारण उसके पिता उस किले को जीत नहीं पा रहे थे. इसके चलते उसने सारी खामियों को दूर करते हुए अपनी पूरी सेना को तैयार किया.

एक खास रणनीति के चलते वह अपनी सेना के साथ आगे बढ़ा. जल्द ही वह दुश्मन सेना को हराने में कामयाब रहा और इस तरह उसने ग्वालियर का किला फतह किया. असल में इस दौरान ग्वालियर के राजा मान सिंह की मृत्यु हो गई थी… इस कारण बचे हुए छोटे शासकों को मजबूरन उसके सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा था.

…जब ‘राणा सग्राम सिंह’ से हुआ सामना!

चूंकि, इब्राहिम लोदी को लेकर उसकी सेना में असंतोष था, इस लिहाज से उसके राजवंश पर विरोधियों का हमला करना लाजमी था. कहते हैं कि इसी कड़ी में उसका सामना सबसे पहले मेवाड़ के राजा ‘राणा सग्राम सिंह’ का सामना करना पड़ा. गजब की बात तो यह थी कि इब्राहिम लोदी को इस बात की खबर तक नहीं थी कि उसके ऊपर हमला होने वाला है. जबकि 1519 के आसपास राणा संग्राम सिंह ने उसके खिलाफ अपनी सेना को तैयार कर चुके थे.

इब्राहिम को जब तक इसकी खबर मिलती ‘राणा संग्राम सिंह’ चढ़ाई कर चुके थे. आनन-फानन में वह अपनी सेना के साथ राणा संग्राम सिंह को रोकने के लिए पहुंचा. इस युद्ध को जीतने के लिए उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी.  वह बात और है कि वह अपनी हार को टाल नहीं सका. असल में महाराणा पूरी तैयारी के साथ आए थे. वह दो सेनाओं के साथ आए थे और योजना के तहत अपनी एक सेना को खतौली गांव की सीमाओं के पास खड़ा कर रखा था.

इब्राहिम लोदी इस योजना को समझ नहीं सका और हार के बाद बंदी बना लिया गया. हालांकि, कुछ वक्त बाद वह आजाद होने में कामयाब रहा. कहते हैं कि इस लड़ाई में महाराणा ने तलवार से कटने के कारन अपना एक हाथ खो दिया था.

Ibrahim Lodi King Of Lodi Dynasty (Pic: anjanadesigns)

पानीपत की लड़ाई के साथ हो गया अंत

इब्राहिम लोदी की पानीपत की लड़ाई एक ऐतिहासिक लड़ाई मानी जाती है. वैसे पानीपत में 3 बार लड़ाई हुई, किन्तु 1526 में लड़ी गई लड़ाई को सबसे बड़ी और खतरनाक लड़ाई माना जाता है. यह लड़ाई बाबर और इब्राहिम के बीच लड़ी गई थी. यह लड़ाई कितनी इब्राहिम के लिए कितनी अहम थी, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि इस लड़ाई के लिए उसने खास तरीके से अपनी सेना को तैयार किया था.

कहते हैं कि बाबर के करीब 15,000 सैनिकों के मुकाबले मुकाबले में इब्राहिम की सैनिकों की संख्या बहुत ज्यादा थी. उसकी तरफ से करीब 30,000 से 40,000 पुरूषों  ने ही इस लड़ाई में भाग लिया. बस वह कमजोर इसलिए पड़ा क्योंकि बाबर इससे पहले ऐसी कई बड़ी लड़ाईयों और कठोर योद्धा का सामना कर चुका था… इस लिहाज से उसके पास ऐसे सैन्य अभियानों का बड़ा तजुर्बा था. जबकि, इब्राहिम के पास इतनी बड़ी लड़ाई का ज्यादा अनुभव नही था.

दूसरी तरफ बाबर की सेना ने उसकी सेना पर बारुद का इस्तेमाल करके उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. बाबर अपने साथ अनुभवी तुर्क बंदूकधारी भी लाया था, जिन्होंने इब्राहिम की सेना का बड़ा नुक्सान किया. परिणाम यह रहा कि अंतत: इस युद्ध में इब्राहिम की हार हुई और दोनों तरफ की सेना के हजारों सैनिक काल के गाल में चले गए.

Battle of Panipat (Pic: panipatlover)

चूंकि, इस युद्ध में इब्राहिम लोदी भी मारा गया, इसलिए बाबर लोदी साम्राज्य का पतन करते हुए उस पर कब्जा करने में सफल रहा. आगे बाबर ने मुगल वंश की नींव रखी, जिसने सैकड़ों साल तक भारत पर राज किया.

सही कहा जाता है कि किसी का राजा होना काफी नहीं होता. विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कुशलता के साथ-साथ समाज में आपकी स्वीकार्यता होना अनिवार्य है. तभी जाकर कोई साम्राज्य विस्तार कर सकता है, अन्यथा इब्राहिम लोदी की तरह व्यक्ति अपने साम्राज्य के पतन का कारण बन जाता है. इसके साथ नए ज़माने की तकनीक के साथ लगातार अपडेट होते रहना चाहिए, अन्यथा आप पीछे रह जाते हैं.

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Web Title: Ibrahim Lodi King Of Lodi Dynasty, Hindi Article

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