इंदिरा गांधी भारतीय राजनीति का एक ऐसा नाम, जिन्होंने अपने साहसी फैसलों से विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ी. उनके बोल्ड फैसले ही थे, जिन्होंने उन्हें आयरन लेडी के रुप में विख्यात किया. वह स्वाधीन भारत की इकलौती महिला प्रधानमंत्री भी रहीं.

इंदिरा में सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वह शुरुआत में तो पहले प्रधानमंत्री रहे जवाहरलाल नेहरू के बेटी रुप में जानी गई, लेकिन अपनी राजनीति की सही सूझ-बूझ ने उन्हें जल्द ही विश्व स्तरीय नेता के रूप में स्थापित कर दिया.

चूंकि, उनका जीवन संघर्षों और उतार-चढ़ाव वाला रहा, इसलिए उनको तस्वीरों में जानना बेहद ही दिलचस्प होगा–

इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में हुआ. वह भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं. उनकी माता का नाम कमला नेहरु था. (Pic: Architectural)

पिता रसूखदार थे, इसलिए बचपन अच्छा बीता. अच्छे स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई हुई. यहां तक कि उन्हें ऑक्सफोर्ड जैसे संस्थान में पढ़ने का मौका मिला. वह 1941 के आसपास वहां से अपनी पढ़ाई पूरी कर भारत लौटी. (Pic: flashlarevista)

कहते हैं कि इसी दौरान उनकी मुलाकात फिरोज गांधी से हुई. दोनों में मेल-जोल बढ़ा तो बात शादी तक पहुंच गई. हालांकि, उनके पिता इस शादी के खिलाफ थे. बावजूद इसके उन्होंने फिरोज को अपना पति बनाया. (Pic: Scroll.in)

शुरु से ही वह तेज तर्रार थीं और सामाजिक सरोकार वाले कार्यों में सक्रिय रहती थीं . यही कारण था कि उन्होंने बढ़-चढ़कर स्वाधीनता आंदोलन में भी भाग लिया. (Pic: Pinterest)

एक प्रकार से इस आंदोलन के साथ ही वह राजनीति में सक्रिय हो गईं थीं , किन्तु आधिकारिक रुप से वह ताकत में तब आई जब उन्हें 1959-60 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुना गया. (Pic: Stuff )

इसी कड़ी में पिता की मौत के बाद 1964 में वह राज्यसभा की सदस्य बनाई गयीं और लाल बहादुर शास्त्री की सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री बनने में सफल रहीं. (Pic: Times)

1965 में जब एक बार फिर से पाकिस्तान ने भारत में हमला कर दिया तो इंदिरा श्रीनगर के सीमाई इलाके में भारतीय सैनिकों के साथ खड़ी नज़र आईं. उनके इस कदम ने उन्हें राजनीति के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया. (Pic: NewIndian)

इसका सीधा लाभ उन्हें तब मिला जब वह लालबहादुर शास्त्री की मौत के बाद, उस समय के कांग्रेस अध्यक्ष रहे कामराज की मदद से वह प्रधानमंत्री पद पर बैठीं. (Pic: The Wire)

वह अपने राजनीतिक करियर में चार बार देश की प्रधानमंत्री चुनी गईं. उनके कुछ एक मुख्य कार्यों की बात की जाए तो उसमें बैंको का राष्ट्रीयकरण, 1971 की लड़ाई के बाद बांग्लादेश का निर्माण और हरित क्रांति में उनकी भूमिका सराहनीय रही. (Pic: The Wire)

अपने करियर में इंदिरा गांधी के ऊपर कोर्ट के आदेश को न मानने का आरोप भी लगा. असल में 1975 के चुनाव में उनकी लोकसभा जीत को अवैध करार देते हुए, जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके 6 साल तक चुनाव न लड़ने पर रोक लगाई. , तो उन्होंने उसको अनदेखा करते हुए देश में आपतकाल की घोषणा कर दी. (Pic: CityBlog)

21 महीने तक चली इस इमरजेंसी का परिणाम उन्हें भुगतना पड़ा और 1977 में हुए आम चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा. इमरजेंसी को उनके कार्यकाल का काला अध्याय माना जाता है, तो उनके पुत्र संजय गांधी को भी जनता पर हुए तमाम अत्याचारों के लिए दोषी ठहराया जाता है. इसमें प्रेस पर सेंसरशिप जैसे कदम भी थे. हालांकि, 1980 में उनकी अगुवाई में कांग्रेस ने फिर से वापसी की. (Pic: News18)

कहते हैं कि व्यक्ति कितनी भी अच्छा क्यों न हो. कोई न कोई चूक कर ही बैठता है. कई बाहर गलतियां छोटी होती है, इसलिए उन्हें संभाल लेता है. किन्तु, कई बार उसकी गलती उसे ले डूबती है. इंदिरा जी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. (Pic: Arjunpuri)

1984 में जब कुछ आंतकवादियों ने नापाक इरादों के साथ अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में अपना कब्जा जमा लिया, तो उन्होंने ऑपरेशन ब्लूस्टार के तहत सेना को मंदिर में घुसने का आदेश दे दिया.

चूंकि, सेना ने जूतों सहित मंदिर में प्रवेश किया था, इसलिए यह मामला धार्मिक हो गया और सिख आंदोलन का रूप ले लिया. कहते हैं कि इसी कारण कुछ नाराज लोगों ने एक योजनाबद्ध तरीके से उनकी हत्या करवा दी, जिसको उनके ही अंगरक्षकों ने अंजाम दिया.

31 अक्टूबर 1984 को उन्होंने इंदिरा गांधी को अपनी गोली का निशाना बनाया और इस तरह से भारत की आयरन लेडी का अंत हो गया.

हालाँकि, उनका नाम और काम नहीं मरा और आने वाले दिनों में कांग्रेस वंशवाद की राह पर चल पड़ी और इंदिरा गाँधी के नाम को जबरदस्त ढंग से भुनाया गया.

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Web Title: Iron lady Indira Gandhi, Photo Story

Feature Image Credit: IndianFolk