हिंदू धर्म में 33 करोड देवी-देवताओं का जिक्र होता है. कहते हैं, जितने भगवान हमारे पास हैं शायद उतने किसी धर्म में नहीं. फिर भी प्राचीन रोम और भारत की धर्म व्यवस्थाओं में कुछ सामानताएं देखी गई हैं.

यही कारण है कि इसे भारोपीय (हिन्द-यूरोपीय) धर्म कहा गया, जहां मूर्तिपूजक और बहुदेवतावादी लोग रहे हैं. हिंदू धर्म की ही तरह रोम में भी अदृश्य ईश्वर की अवधारणा नहीं रही. यह बात और है कि ईसाई धर्म के प्रचार के बाद प्राचीन रोम की धार्मिक विरासत इतिहास बन गई, पर उनके देवता आज भी हमारे महीनों में बसे हुए हैं.

जी हां! हम बात कर रहे हैं रोम के उन देवताओं की, जिनके नाम पर जनवरी से दिसंबर तक के महीनों के नाम पड़े. किन्तु, इन सबमें खास हैं शुरूआत के देवता कहे जाने वाले ‘जेनस’. वहीं जेनस, जिन्होंने जनवरी माह बनाया.

हालांकि, प्राचानी रोम में इन्हें इस नाम से कोई नहीं पुकारता था.

उस वक्त ‘जेनस’ को ‘इयनियस’ कहा जाता था, क्योंकि प्रचीन लैटिन भाषा में ‘जे’ जैसा कोई चरित्र ही नहीं था. दिलचस्प बात यह है कि ‘जेनस’ के बारे में कोई सार्थक इतिहास तो नहीं मिलता, लेकिन रोचक कहानियां और किवदंतियां जरूर हैं.

तो चलिए इन्हीं के आधार जानते हैं रोमन देवता ‘जेनस’ को—

अतीत और भविष्य का बेजोड़ तालमेल

पौराणिक कथाओं में जेनस को न केवल शुरुआत का बल्कि, अंत का भी देवता कहता जाता है. वेे भूत और भविष्य पर एक साथ नजर रखने वाले इकलौते देवता हैं. यही कारण है कि जेनस के चरित्र में दो चेहरे दिए हैं, जिसमें एक भूतकाल का और दूसरा भविष्य का परिचायक है.

माना जाता है कि उन्होंने सृष्टि की शुरुआत और अंत को जाना है. वे एक साथ दोनों पर नजर रखे हुए हैं. ज​बकि, इंसान वर्तमान में जी रहा है इसलिए वह उन्हें बीच से देख पाता है. ​यदि आम इंसान उनका एक तरफ का चेहरा देखेगा, तो उसे दूसरे और देखने का अवसर नहीं मिलेगा.

जेनस का चेहरा इस बात का दर्शन करता है कि केवल देवता ही हैं, जो भूतकाल और भविष्य पर नजर रख सकते हैं. जबकि, इंसान को वर्तमान में जीना चाहिए. परन्तु उसकी योजनाएं भूतकाल से सीख ​ली हुईं और भविष्य के परिणामों को देखते हुए बननी चाहिए.

इसलिए उन्हें सभी रोमन देवताओं से पहले पूजा जाता है!

Janus the roman god (Pic: theconversation.com)

सालों तक बंद रहा जेनस का मंदिर

यूनानी पौराणिक कथाओं के लेखकों ने जेनस के बारे में कई किवदंतियां लिखी हैं. ऐसा माना जाता है कि जनदेव क्रैन और जेनस का आपस में संबंध है. क्रैन यानि कार्डिया स्पेलबाइंडिंग की देवी थी और उसके पास रक्षा करने के लिए जादुई शक्तियां भी थी.

वह अपने भक्तों को लुभाने के लिए पहाड़ी की गुफाओं में बुलाती थी और फिर वहां उन्हें कैद कर लिया जाता था. जेनस के पास शक्ति थी कि वे अपने आगे और ठीक पीछे देख सकते थे.

बाद में जब उनका सामाना कार्डिया से हुआ तो अपनी इसी क्षमता के बल पर उन्होंने उसे मार डाला.

इसके अलावा एक और कहानी बताई जाती है.

इसके अनुसार जेनस ने कैमिस के साथ लतीम राज्य (जिसके बाद रोम का गठन हुआ) पर शासन किया था. कैमिस जेनस की बहन थी. उस समय जेनस ने मंदिरों की भी स्थापना हुई थी. हालांकि, ये मंदिर सदियों तक बंद रहे, जिसके पीछे रोम निर्माण की घटनाओं में शामिल एक मिथक महत्वपूर्ण कारण माना जाता रहा है.

दरअसल राज्य में रिया सिल्विया नाम की एक महिला अपने दो बेटों रोमुलस और रामास के साथ रहती थी. रिया मध्य इटली शहर के राजा न्यूमिटर की बेटी थीं. उसके पिता युद्ध के देवता के रूप में जाने जाते थे, लेकिन न्यूमेट्रेट के भाई अमूलियस ने उन्हें मारने के लिए ट्यूबर नदी में गिरा दिया.

इसके बाद अमूलियस ने राज्य सत्ता हासिल करने के लिए अपने भाई  न्यूमेट्रेट को सिंहासन से हटाकर अल्बा लोंगर पर राज करना शुरू कर दिया. तब एक भविष्यवाणी हुई कि रोमुलस और रामास नाम के दो बच्चे साम्राज्य के पतन का करण बनेंगे. अत: उसने राज्य के सभी नवजात बच्चों को मारना शुरू कर दिया.

नए रोमास नाम के सम्राज्य की स्थापना

आगे की कहानी में लोग अपने बच्चों को बचाने के लिए जेनस के मंदिर पहुंचे, तो उसने मंदिरों को भी बंद करवा दिया. रिया ने अपने दोनों बच्चों को बचाने के लिए उन्हें भेड़िये की गुफा में छोड दिया.

हालांकि, इंसानी बच्चे होने के बाद भी भेड़िये ने उन्हें खरोंच तक नहीं आने दी.

भविष्य में हुआ भी ऐसा ही. रोमुलस और रामास ने पुराने सम्राज्य को खत्म कर नए रोमास नाम के सम्राज्य की स्थापना की, जो आगे चलकर रोम के नाम से जाना गया. उन्हीं के शासनकाल में एक बार फिर जेनस के मंदिर के दरवाजे खोल दिए गए.

कहा जाता है कि इसके बाद जेनस ने हमेशा रोम की रक्षा की. एक बार जब सब्बिन जाति के हमलावरों ने रोम में प्रवेश करने की कोशिश की, तो उन पर लावा के फव्वारे फूट पड़े.

इसी दौर में जेनस के और भी मंदिरों का निर्माण हुआ.

Romulus and Remus (Representative Pic: pinterest.com)

जारी रहा आस्था और अविश्वास का खेल

रोम में जेनस द्वार की स्थापना हुई. ये विशाल दरवाजे गोलाकार थे, जिसमें जेनास की कांस्य से अपनी प्रतिमा लगी हुई थी. इसमें दो चेहरे प्रदर्शित किए गए. दरवाजों के पीछे रहस्य था कि इन्हें तब तक बंद रखा जाएगा.

वहीं भी जब तक राज्य में शांति है और युद्ध के समय इन्हें खोल दिया जाएगा. ऐसा माना जाता है कि यह दरवाजा कई सालों तक नुमारा साम्राज्य में बंद था यानि यह दौर शांतिकाल का था.

नुमर के बाद राजा तुलुस हैस्टिलियस ने जेनस के मंदिर के द्वार खोले.

हैस्टिलियस ने अल्बा लॉन्गर के खिलाफ जंग का एलान कर दिया था, जिसके बाद करीब 400 साल तक जेनस द्वार खुला रहा. सम्राट अगुस्तास ने राज्य में शां​ति व्यवस्था दिखाने के लिए उस समय भी इन द्वारों को तीन बार बंद करने का प्रयास किया था.

इसके बाद सम्राट निरो के काल में शांति के प्रतीक माने जाने वाले सिक्कों का निर्माण हुआ, जिसमें जेनस मंदिर के बंद दरवाजों की छाप दिखाई देती थी. इसका अर्थ था कि राज्य में शांति स्थापित है.

शुभ काम सेे पहले होती थी जेनस की पूजा

कवि मार्शल ने जेनस को वर्ष के पिता के रूप में संदर्भित किया है.

वर्ष की गणना करने के लिए जेनस के मंदिर में 12 वेदियां बनाई गईं. हर वेदी एक माह को इंगित करती थी. 153 ईसा पूर्व से जनवरी के पहले दिन तक, मुख्य न्यायाधीश ने अपने कार्यालय का काम शुरू किया. उनका दिन और माह जेनस की प्रार्थना के साथ शुरू होता रहा.

पूजा के बाद वे प्रसाद के रूप में गेहूं और जौ में नमक मिलाकर बनाए गए ‘यानुअल’ केक का आनंद लेते थे. किसी भी अच्छे काम की शुरूआत से पहले, जैसे कि जन्म, विवाह आदि के पहले जेनस की पूजा की जाती रही.

Autun Janus Temple (Pic: cointalk.com)

ऐसा माना जाता था कि रोमन धर्म के अन्य देवताओं तक पहुंचने का मार्ग जेनस की आराधना के साथ ही मिल सकता है. इस तरह रोमन साम्राज्य में ईसाई धर्म के शामिल होनेे पर कई अवधारणाओं में परिवर्तन आए, लेकिन केवल जेनस ही थे, जिनका प्रतीक सदियों तक बरकरार रहा.

जेनस के दो चेहरे वाले प्रतीक को रोम के दरवाजों,सिक्कों, मुहरों में आज भी संरक्षित करके रखा हुआ है!

Web Title:  Janus the Roman God from Whom the Name January Comes, Hindi Article

Feature image Credit: artstation.com