खजुराहो! यह नाम लेते ही मन में अजीब सी तरंगें घूमने लगती हैं.

यदि माता-पिता से बात करें तो वे बच्चों के सामने इसका नाम तक नहीं लेना चाहते. आखिर ऐसा क्या है इन मंदिरों में जो लोगों के लिए आस्था का केंद्र न हो कर कुछ ‘और’ ही है.

दरअसल मंदिर में तो भगवान ही हैं, पर मंदिर की दीवारें कामुकता के रंग में रंगी हुई हैं. जिन्हें सदियों पहले चंदेल राजाओं ने बनवाया था. यह कोई यौन सुख का केंद्र नहीं है, बल्कि मानवजाति के लिए महत्वपूर्ण संदेश है.

काम-इच्छा और मुक्ति का ऐसा मेल दुनिया में और कहीं देखने नहीं मिलता.

तो चलिए हम आपको बतातें हैं कि आखिर क्या है खजुराहो के मंदिरों का इतिहास और क्यों झलकती है इनकी दीवारों पर कामुकता!

चंद्रमा के वंशज थे चंदेल

चंदेल वंश भारत के उन महान वंशों में से रहा है, जिसने भारतवर्ष की एकता को बचाए रखने के लिए मुगलों का सामाना किया. उन्होंने 8वीं से 12वीं शताब्दी तक स्वतंत्र रूप से यमुना और नर्मदा के बीच, बुंदेलखंड तथा उत्तर प्रदेश के दक्षिणी-पश्चिमी भाग पर राज किया.

इन्हें गोंड जनजातीय मूल का राजपूत वंश भी कहा जाता है. इसी वंश में महान रानी दुर्गावती का भी जन्म हुआ था. गुर्जरों के प्रतिहार के बाद चंदेल सत्ता में आए.

प्रारंभिक लेखों में इसे ‘चंद्रात्रेय’ वंश कहा गया है. पुराणों में कहा गया है कि वे भगवान चंद्रमा की संतान थे. ‘नन्नुक’ इस वंश का पहला राजा था. कालिंजर का युद्ध जीतने के बाद चंदेलों ने खजुराहो का रुख किया था और फिर समस्त बुंदेलखंड पर राज किया.

उस दौरान खजुराहो एक जंगल था, जहां केवल खजूर के पेड़ लगे थे. यही कारण है कि इस जगह को खजुराहो नाम दिया गया. चंदेल राजा यशोवर्मन ने महोबा जो कि उस समय कालिंजर क्षेत्र में था, उसे अपने राज्य की राजधानी बनाया और यहीं से कुछ दूर उन्हों खजुराहो के मंदिरों का निर्माण करवाया.

Khajurahoa Temple Raises Curtains From The Secrets Of Sexuality (Pic: hindufaqs)

फिर शुरू हुआ मंदिर बनने का सिलसिला

मंदिर के शिलालेखों पर अंकित है कि चंदेल वंश के राजा यशोवर्मन ने 925 से 950 ईसा तक शासन किया और इस दौरान खजुराहो में लक्ष्मण मंदिर का निर्माण करवाया.

इसके बाद राजा धंग ने 950 से 999 तक शासन किया और यहां विश्वनाथ मंदिर का निर्माण करवाया. इसके बाद चंदेल राजवंश के शासक विद्याधर ने कन्दारिया महादेव मंदिर का निर्माण करवाया. कुल मिलाकर सभी मंदिरों का निर्माण 1030 ईसा पूर्व पूरा हुआ.

राजाओं ने यहां कुल 85 मंदिरों का निर्माण करवाया था.

मंदिर की बाहरी दीवारों पर 646 तरह की कामसूत्र आकृतियां बनी हुई हैं. जबकि भीतर भगवान शिव, ब्रम्हा, विष्णु और अन्य जैन धर्म के भगवानों की मूर्तियां स्थापित हैं.

इसके अलावा इतिहास में मंदिरों के निर्माण से जुड़ी एक और कहानी मिलती है. जिसमें, हेमावती नाम की एक ब्राह्मण कन्या का ज़िक्र आता है.

वह वन में स्थित सरोवर में स्नान कर रही थी तभी चंद्रमा ने उसे देख लिया और उसे देखते ही मुग्ध हो गया. फिर चंद्रमा ने हेमावती को वशीभूत कर लिया और उसके साथ संबंध बनाए. जब हेमावती ने इसी से एक बालक को जन्म दिया, तब समाज ने उसे और उसके बालक को अपनाने से इंकार कर दिया.

इस कारण उसे बच्चे का पालन-पोषण भी वन में रह कर ही करना पड़ा.

चूंकि वह भगवान चंद्रमा की संतान थे, इसलिए उसका नाम चन्द्रवर्मन रखा गया. बड़े होकर चन्द्रवर्मन ने अपना राज्य कायम किया. हेमावती ने चन्द्रवर्मन को ऐसे मंदिर बनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे मनुष्य के अंदर दबी हुई कामनाओं का खोखलापन दिखाई दें.

जब वह मंदिर में प्रवेश करें तो इन बुराइयों को छोड़ चुके हों. तभी चन्द्रवर्मन ने खजुराहो के मंदिरों की संरचना तैयार की थी, जिन्हें आगे चलकर उनके वंशजों ने पूरा किया.

मुगलों ने किया मंदिरों पर हमला!

मंदिरों का निर्माण पूरा होने के बाद यहां शिवरात्री पर विशेष पूजन का आयोजन किया जाता रहा. दशहरा पर राजा खुद अपनी प्रजा के लिए यहां मनोरंजक कार्यक्रमों की व्यवस्था करवाते थे. यह वही दौर था जब भारत में मुगल साम्रराज्य बढ़ रहा था.

1022 ईसा पूर्व महमूद ग़ज़नवी को खजुराहो मंदिरों के बारे में पता चला. उसने इन मंदिरों को तोड़ने के लिए बुंदेलखंड पर आक्रमण कर दिया.

हालांकि, यह हमला असफल हुआ. इसके पहले ही गजनवी वापस हमला कर पाता, हिंदू राजाओं ने उसे फिरौती की रकम दे दी और इस तरह बुंदेलखंड और खजुराहों के मंदिर सलामत रहे.

कुछ सालों तक सबकुछ ठीक रहा. फिर 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के मुस्लिम सुल्तान कुतुब-उद-दीन ऐबक ने चंदेलों पर हमला बोल दिया.

इस युद्ध में खजुराहो के मंदिरों को काफी नुकसान हुआ. 85 मंदिरों में से अधिकांश पूरी तरह खत्म हो गए.

इसके बाद 1495 ईसा पूर्व में सिकंदर लोधी ने एक अभियान चलाकर मंदिरों को सबसे ज्यादा क्षति पहुंचाई. 15वीं से 18वीं शताब्दी के दौरान भी मुस्लिम शासकों ने इन मंदिरों को अश्लील बताते हुए छोटे—मोटे हमले किए और मंदिरों को नुकसान पहुंचाया.

वर्तमान में यहां केवल 22 मंदिर ही सुरक्षित हैं.

Khajurahoa Temple Raises Secrets Of Sexuality (Pic: remotetraveler)

फिर खोजा गया इतिहास

मुस्लिम शासकों के लगातार हमलों के बाद खजुराहो के मंदिर धूल में पुर चुके थे. चंदेल राजाओं का शासन भी खत्म हो गया था. इतिहास से इन मंदिरों का नाम एक बार फिर मिटने वाला था. तभी 1930 में ब्रितानी सर्वेक्षक टी एस बर्ट ने बुंदेलखंड की यात्रा की और स्थानीय लोगों ने उन्हें चंदेल राजाओं की कहानियां सुनाई. यहीं पर बर्ट ने एक बार फिर खजुराहो को तलाश लिया.

इसके बाद उन्होंने अंग्रेज पुरातत्वशास्त्री अलेक्ज़ैंडर कन्निघम की मदद से इन मंदिरों को पुन: संरक्षित करने का काम शुरू किया.

दीवारों पर कामुकता के रहस्य

अब तक खजुराहो के मंदिरों पर भारत और अन्य देशों के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने शोध किया है. अपनी बनावट के लिए दुनियाभर में मशहूर इन मंदिरों पर हुए शोध पर नजर डाली जाए तो कोई कहता है कि उस दौरान राजाओं की कामेच्छा इतनी ज्यादा थी कि वह मंदिर की दीवारों पर नजर आई.

कुछ का कहना है कि ये मंदिर उस दौरान लोगों को सेक्स एजुकेशन देने के लिए बनाए गए थे. लोगों ने तो यहां तक कहा कि गौतम बुद्ध के उपदेशों से प्रेरित होकर आम जनमानस में कामकला के प्रति रुचि खत्म हो रही थी, इसलिए उन्हें इस ओर आकर्षित करने के लिए इन मंदिरों का निर्माण किया गया होगा.

हालांकि भारतीय इतिहास मंदिरों के डिजाइन के बारे में कुछ अलग ही राय रखता है.

दरअसल चंदेल राजा चंद्रमा के उपासक होते थे. चंद्रमा और स्त्री का आपस में काफी गहरा संबंध होता है. उन लोगों के लिए ऐसे किसी मंदिर की कल्पना करना भी मुश्किल था, जिसमें स्त्री शामिल न हो. वे लज्जा का दिखावा करना नहीं जानते थे. उन्हें लगता था कि इंसानी शरीर में ऐसा कुछ भी नहींं है जो छिपाने लायक हो या जिस पर इंसान को शर्म आनी चाहिए.

हां, इतना जरूर था कि उनका धर्म उन्हें नियंत्रण से बाहर नहींं जाने देता था.

इसके अलावा मंदिरों की दीवारों पर दिखती कामुकता का एक अर्थ और भी है. कामुकता केवल बाहर होती है. मंदिर में प्रवेश करने से पहले आपको अपनी कामुकता को नहींं तो आपको कुछ भी अनुभव नहींं होगा.

जब आप बाहरी घेरे में जाते हैं, तो आपको सारी कामोत्तेजक सामग्री नजर आती है. अगर यह सब मन पर बहुत ज्यादा छाया हुआ है, तो मंदिर के भीतरी हिस्से में प्रवेश न करें.

घर जाएं और फिर दोबार साफ मन से यहां आएं.

जब तक कामोत्तेजना के विचार मन में आ रहे हैं, तब तक भीतर प्रवेश न करें. जिस दिन इन विचारों से मुक्ति पा लेंगे आपका मंदिर में ईश्वर से एकाकार हो जाएगा.

Khajurahoa Temple Raises Curtains From The Secrets Of Sexuality (Pic: indiatravelz)

खजुराहो पर दुनियाभर की नजर

खजुराहो को यूएनईएससीओ ने 1986 में विश्व धरोहर घोषित कर दिया था, जिसके बाद से खजुराहो का महत्व बढ़ गया. आज यह दुनिया भर के पर्यटकों के लिए भारत का सबसे बड़ा आश्चर्य है.

चूंकि जब पूरी दुनिया शर्म की चादर ओढ़ने का प्रयास कर रही थी, तब भारत में सेक्स को लेकर विचार काफी खुले हुए थे. जैम्स मैकोन्नचि ने तो सेक्स एजुकेशन पर लिखी अपनी किताब कामसूत्र में खजुराहो का जिक्र किया है. उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यौन संबंधों को लेकर जितनी रिसर्च इन मंदिरों के निर्माण के दौरान की गई उतनी इस विश्व में पहले कभी नहीं हुई.

Khajurahoa Temple Raises Curtains From The Secrets Of Sexuality (Pic: thehistoryhub)

आप जब भी खजुराहो जाएं इन सभी मूर्तियों के साथ आप एक निश्चित समय बिताइए. इनकी सीमाओं को देखिए. फिर जब आप मुख्य मंदिर में प्रवेश करेंगे तो सभी तरह के व्यसनों और कामेच्छाओं से मुक्त होंगे और यही ईश्वर से एकाकार होगा.

अच्छा होगा कि आप पूर्णिमा की रात में मंदिरों को निहारें, क्योंकि जब इनकी दीवारों पर चंद्रमा का प्रकाश पड़ता है तो यह और भी खूबसूरत दिखती हैं.

इसके बाद हमसे अपने अनुभव जरूर बांटें.

Web Title: Khajuraho Temple Raises Curtains From The Secrets Of Sexuality, Hindi Article

Featured Image Credit: insightvacations