बचपन से लेकर बुढ़ापे के आख़िरी दिनों तक हम प्यार भरी कहानियां पढ़ते और सुनते आते हैं. शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसने रोमियो-जूलियट, हीर-रांझे की कहानी न सुनी हो.

यहां तक कि आज के जमाने के प्रेमी युगल भी इन कहानियों की मिसाल देते रहते हैं.

कई बार तो प्रेमी जोड़ा मोहब्बत होने के बाद यही कसम खाता है कि कुछ भी हो जाये, लेकिन वह अपनी मोहब्बत की दास्तां को अधूरा नहीं छोड़ेंगे.

तारीख़ इस बात की गवाह रही है कि इस दुनिया में दो प्यार करने वालों की मंज़िलें कभी आसान नहीं रहीं. उन्हें इसके लिए एक कठिन डगर से होकर गुजरना पड़ता है. उसके बाद भी उनके प्यार को मंजिल मिलेगी ही, इसकी गारंटी नहीं होती!

पुराने काल के भारत की सबसे मशहूर जोड़ियों में से एक मिर्जा-साहिबा की प्रेम कहानी भी कुछ ऐसी ही रही. दोनों ने साथ में प्यार के सपने तो देखे, किन्तु लाख कोशिशों के बाद भी उनका प्यार परवान नहीं चढ़ सका. इसके पीछे क्या कारण रहे और उनके बीच प्यार का फूल कैसे खिला आईये जानने की कोशिश करते हैं–

छोटी उम्र में ही बढ़ने लगी थी नजदीकियां!

मिर्जा-साहिबा की प्रेम कहानी ने पाकिस्तान के खेवा गांव में जन्म लिया. मिर्जा फतेह बीबी का बेटा था और साहिबा खेवा खान की बेटी.

साहिबा के अब्बू के नाम पर ही खेवा गांव बसा हुआ था. कुल मिलाकर साहिबा के पिता खानदानी ज़मींदार और गांव में खूब रसूख़ वाले थे. आसपास के इलाके में उनका नाम बड़ी अदब से लिया जाता था, जबकि इसके उलट मिर्जा एक बेहद साधारण गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे. जैसे-तैसे उनके घर का खर्च चलता था.

बावजूद इसके उनकी अम्मी उन्हें पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहती थी. इस सपने के तहत उन्होंने मिर्जा को पढ़ाई के लिये खेवा गांव भेजा दिया. इत्तेफाक से जिस स्कूल में मिर्जा ने दाखिला लिया उसी स्कूल में साहिबा भी पढ़ती थीं. दोनों सहपाठी थे.

शुरुआत में दोनों में आम लोगों की तरह संकोच था, फिर धीरे-धीरे बातचीत शुरु हो गई और…

Mirza Sahiban Love Story (Representative Pic: topyaps)

जवां होते ही खाई संग जीने-मरने की कसमें

आगे के कुछ ही दिनों में समीकरण कुछ ऐसे बने कि मिर्जा को साहिबा के घर रहकर अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ी. इस दौरान दोनों का ज्यादातर वक्त एक साथ बीता. परिणाम यह रहा कि दोनों के बीच दोस्ती गहरी होती चली गई. दोनों साथ-साथ स्कूल जाने आने लगे.

यूं ही वक्त बीतता गया और वे कब बड़े हो गए, पता ही नहीं चला. कहते हैं कि बड़े होने के बाद दोनों का नूर देखने लायक था. साहिबा तो इतनी खूबसूरत थी कि लोगों की उनसे नज़रें नहीं हटती थी. दूसरी तरफ मिर्जा के आकर्षक चेहरे की चर्चा दूर-दूर तक थी.

यूं तो दोनों के बीच प्यार का बीज बचपन में अंकुरित हो गया, किन्तु उन्होंने शुरुआत में गौर नहीं किया. इसी कड़ी में एक दिन मिर्जा ने साहिबा को सब्जी खरीदते हुये देखा, तो वह उन्हें देखते ही रह गया. देर न करते हुए उसने तय किया कि वह आज अपने दिल की बात साहिबा से कहके रहेगा.

हिम्मत जुटाकर उसने ऐसा ही किया. चूंकि, साहिबा के दिल में मिर्जा के लिए प्यार था, इसलिए दोनों प्यार के रास्ते पर निकल पड़े. चोरी-छिपे मिलने से शुरु हुआ सिलसिला कब संग जीने मरने की बातों तक पहुंच गया, उन दोनों तक को पता ही नहीं चला.

कांटों से भरी थी ‘प्यार की डगर’

वह इस बात से बेख़बर थे कि उनकी मोहब्बत को आगे चलकर कड़े इम्तिहानों से होकर गुज़रना है. वह उस दौर में एक-दूजे को दिल दे बैठे थे, जिस दौर में रिश्ते शोहरत, खानदान जात-पात देखकर किए जाते थे.

एक दिन वह हमेशा की तरह जमाने की नज़र से बचकर मिलने पहुंचे थे, तभी साहिबा के परिवार वालों को पता चल गया. वह गुस्से से आग-बबूला हो गए और दोनों को अलग करने का फैसला कर लिया. असल में वह चाहकर भी दोनों को शादी की अनुमति नहीं दे सकते थे. वह समाज में व्याप्त रूढ़िवादी सोच से जकड़े जो थे.

इसका तोड़ निकालते हुए पहले तो साहिबा के घर वालों ने अपने रसूख के दम पर मिर्जा को उसके गांव वापस भेज दिया, फिर जल्दी से साहिबा के लिए रिश्ता ढूंढ कर उसकी शादी करने का फैसला कर लिया. ताहिर खान नाम के लड़के से उन्होंने साहिबा की शादी करने का मन बना लिया था.

शादी तय होने पर साहिबा का रो-रो कर बुरा हाल था. वहीं मिर्जा भी अपनी साहिबा से दूर रहकर बैचेन था. मिर्जा किसी भी कीमत पर साहिबा को अपना बनाना चाहता था. हालांकि, उसे पता था कि यह आसान नहीं है. साहिबा का खानदान बहुत ताकत वाला था.

इस लिहाज से खेवा गांव में कदम तक रखना उसके लिए अपनी मौत को दावत देने जैसा था.

Mirza Sahiban Love Story (Representative Pic: localaddress)

जब साहिबा को भगा ले गए मिर्जा

तेजी से वक्त निकलता गया और साहिबा की शादी का दिन आ गया. मिर्जा को समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे, दूसरी तरफ साहिबा का रो-रो कर बुरा हाल था. अंतत: मिर्जा से नहीं रहा गया, तो उसने तय किया कि वह साहिबा से मिलने जाएगा. इसके लिए उसे अपनी जान भी देनी पड़े तो कोई परवाह नहीं.

वह शादी के ठीक पहले वह साहिबा के गांव पहुंचने में सफल रहा. वह साहिबा से जाकर मिला और उसकी सहमति से अपने साथ भगा लाया. कई घंटों तक वह साहिबा को घोड़े पर लिए भागता रहा. वह उसके गांव से बहुत दूर निकल आया था.

इस बीच साहिबा ने महसूस किया कि मिर्जा बहुत थक चुका है, बावजूद इसके अपने परिवार के डर से साहिबा चाहती थी कि वह और दूर तक का सफ़र तय करें. किन्तु, मिर्जा में अब ताकत नहीं बची हुई थी. वह किसी भी तरह आगे सफ़र करने लायक नहीं था.

एक अच्छा तीरंदाज होने के कारण मिर्जा को यकीन था कि उन दोनों को कोई जल्दी हाथ नहीं लगा सकता. इस भरोसे के साथ दोनों कुछ देर आराम करने के लिए एक जगह पर रुके. घोड़े से उतरते जैसे ही मिर्जा जमीन पर बैठा उसको नींद की झपकी आ गई.

वहीं साहिबा को डर था कि अगर उसके परिवार के लोग वहां आ गये तो, मिर्जा उन्हें अपने तीरों से मार देगा. मिर्जा के हाथ उसके किसी भी परिवार के सदस्य की मौत न हो, इसलिए साहिबा ने बिना देरी किये सभी तीरों को तोड़ दिया.

असल में साहिबा का दिल बहुत नेक था. वह अपने परिवार से भी उतना ही प्यार करती थी, जितना कि मिर्जा से!

खैर, उसे क्या पता था कि उसकी यह हरकत उसे बहुत महंगी पड़ने वाली थी.

अंतत: पकड़े गए दोनों और…

कुछ ही देर में साहिबा के भाई उनको ढूंढते हुए उन तक पहुंच गए. वह भाग न सके इसलिए दूर से ही उन्होंने दोनों को टारगेट किया और तीर छोड़ने शुरु कर दिये. तीरों की बौछार से मिर्जा की आंख खुल गई. उसने पलटवार करने के लिये अपने धनुष में हाथ डाला तो देखा कि सभी तीर टूटे हुये हैं.

इससे पहले मिर्जा कुछ कह पाता कि एक नुकीला तीर उसके गले में आकर लगा. वह लहुलुहान होकर गिर गया. खून से लथपथ मिर्जा ने खुद को संभाला. उसकी आंखें साहिबा पर टिकी हुई थीं. शायद वह साहिबा से सवाल कर रहीं थीं कि तीर क्यों तोड़े. वह कुछ और हरकत करता, एक दूसरा तीर सामने से आया और उसकी छाती में जा लगा.

मिर्जा घुटनों के बल गिर पड़ा और वहीं उसकी मौत हो गई.

साहिबा ने जब मिर्जा को मरते हुये देखा तो उसने उसी तीर पर सीने के बल लेट कर अपनी भी जान दे दी.

चारों तरफ सन्नाटा छा गया था. दुनिया में दोनों एक दूजे के नहीं हुये और मरने के बाद दोनों की लाश एक दूसरे से चिपकी पड़ी थी.

Mirza Sahiban (Representative Pic: imdb)

कहा जाता है इस प्रेम कहानी के बाद पंजाब की धरती पर इस तरह की किसी दूसरी प्रेम कहानी ने जन्म नहीं लिया. खास बात तो यह है कि दशकों बाद भी दोनों की प्रेम कहानी जिंदा है. 2016 में उनकी प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म को लोगों ने काफी सराहा.

Web Title: Love Story of Mirza Sahiban, Hindi Article

Featured image credit: topyaps