पहला विश्व युद्ध और फिर दूसरा… ऐसा लगा मानो धरती पर नर्क उतर आया है और चारों ओर शैतान ही शैतान नज़र आ रहे हैं, जो इंसानियत को तबाह कर रहे हैं.

हर देश की जमीन मासूम लोगों के खून से तब लाल हो चुकी थी. जबकि दोनों तबाहियां केवल ‘अहम के टकराव’ के कारण हुईं. हमने-आपने वो मंजर नहीं देखा होगा पर कोई था जिसे मालूम था कि एक दिन ऐसा आएगा जब इंसान ही इंसान का भक्षक बन जाएगा.

कुरान, बाईबल, गीता हर धर्म की किताब में इस बात का जिक्र है पर ‘वो’ तो एक साधारण इंसान था, जिसने आने वाले कल के ऐसे सैकड़ों भीषण हादसों की तस्वीर सदियों पहले ही देख ली थी. दुनिया के भविष्य को देखने वाला वो अकेला ऐसा शख्स था, ​जो अपनी मौत के बाद की भी भविष्यवाणियां कर पाया.

जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘मिशेल दि नास्त्रेदमस’ की!

ये वही ‘नास्त्रेदमस’ हैं जिन्होंने सदियों पहले ही देख लिया था कि ‘वर्ल्ड  ट्रेड सेंटर पर हमला होगा’ और इसके साथ दूसरी तमाम चीजें भी उन्होंने देखीं.

यह बात और है कि वे दुनिया की भविष्यवाणियों में इतने मशरूफ थे कि खुद की पत्नी और दो बच्चों की मौत का आंकलन नहीं कर पाए. ‘नास्त्रेदमस’ की भविष्यवाणियों को इतिहास ने सच होते देखा है!

आइए जानते हैं कि ​कैसे एक साधारण सा डॉक्टर-शिक्षक भविष्य को जीने वाला ‘महान नास्त्रेदमस’ बन गया–

विज्ञान के साथ लिया ‘ज्योतिष का ज्ञान’

नास्त्रेदमस का जन्म 14 दिसंबर 1503 को फ्रांस के एक छोटे से गांव सेंट रेमी में हुआ. उनके परिवार में कोई नहीं था जो भविष्यवक्ता हो, इसलिए भविष्य देखने का गुण उन्हें विरासत में नहीं मिला था. उनकी अध्ययन में खास दिलचस्पी रही और इसलिए उन्होंने लैटिन, यूनानी और हीब्रू भाषाओं के अलावा गणित, शरीर विज्ञान का भी ज्ञान हासिल किया.

इसके बाद उन्होंने ज्योतिष शास्त्र पढ़ना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे उनका मन ज्योतिष की किताबों में ऐसा रमा कि उन्होंने खुद ही भविष्यवाणियां करनी शुरू कर दीं. पहले वह अपने आसपास की छोटी-मोटी घटनाओं के बारे में बयान देते थे.

ईसाई कट्टरपंथियों को भविष्यवाणियों पर खास विश्वास नहीं था, इसलिए नास्त्रेदमस का विरोध शुरू हो गया. घबराकर परिवार वालों ने उन्हें चिकित्सा विज्ञान पढ़ने के लिए मांट पेलियर भेज दिया. यहां पढ़ाई के दवाब के चलते वो अगले तीन सालों में डॉक्टर बन गए.

इसके बाद 23 अक्टूबर 1529 को उन्होंने मांट पोलियर से ही डॉक्टरेट की उपाधि ली और वहीं शिक्षक बन गए.

Michel de Nostradamus. (Pic: telemundo)

लोगों को प्लेग से बचाया लेकिन…

विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फ्रांस की यात्रा की.

तब कुछ गांवों और कस्बों में प्लेग फैलने की बात सामने आई. उस दौरान कैथोलिक धार्मिक पद्धति से प्लेग का इलाज किया जाता था, जिसके अनुसार रोगी को पानी में मिलाकर भस्म दी जाती थी. नास्त्रेदमस इस विधा के विरोधी थे.

उन्होंने ताजे गुलाब के फूलों से प्लेग के रोगियों का इलाज करना शुरू किया. रोगियों को सलाह दी गई कि वे साफ पानी पिएं और खुली हवा में सांस लें, खाने में वसा की मात्रा नाममात्र रखें. इससे उनका इलाज कारगर रहा. हालांकि बाद में विज्ञान ने साबित किया कि गुलाब से तैयार औषधि विटामिन सी का स्त्रोत है.

इसके बाद उन्होंने शादी की और कुछ ही सालों में दो बच्चों के पिता बने. वह अपने परिवार के साथ फ्रांस के एजेन शहर में बस गए. तब वहां फिर से प्लेग का प्रकोप फैला इस बार भी उन्होंने खुद को दूसरों की सेवा में झोंक दिया. इस दौरान उन्होंने कई लोगों के जीवन-मृत्यु की भविष्यवाणियां भी जारी रखीं लेकिन अपने परिवार के लिए कुछ नहीं कर सके.

उनकी पत्नी और दोनों बच्चों को भी प्लेग हो गया जिससे कुछ ​ही दिनों में उन्होंने दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद से नास्त्रेदमस की खूब आलोचना हुई. उनकी चिकित्सा विधा के साथ उनके ज्योतिष पर भी सवाल खड़े किए गए!

वहीं उनके ससुराल वालों ने दहेज वापसी के लिए इन पर केस कर दिया. आखिरकार इन हालातों से दुखी होकर उन्होंने शहर ही छोड़ दिया.

Plague, also called the Black Death. (Pic: emaze)

पोप बनने की भविष्यवाणी!

1549 में वे यूरोप पहुंचे और ऐन नाम की एक दूसरी महिला से शादी कर दोबारा अपना जीवन शुरू किया. इस बार उन्होंने चिकित्सा नहीं बल्कि ज्योतिष के क्षेत्र में काम करना शुरू किया.

कहा जाता है कि एक बार नास्त्रेदमस अपने दोस्त के साथ इटली की सड़कों पर टहल रहे थे. ऐसे में उनकी नजर एक युवक पर पड़ी, जिससे वह खासा प्रभावित दिखे और उन्होंने उसके पास पहुंचकर उसे आदर से सिर झुकाकर नमस्कार भी किया.

हालांकि बगल में खड़ा उनका मित्र ये देख कर हैरान था, उसने आश्चर्यचकित होते हुए इसका कारण पूछा, तो उन्होंने कहा कि यह व्यक्ति आगे जाकर पोप का आसन ग्रहण करेगा.

जानकारों के अनुसार वह व्यक्ति फेलिस पेरेती थे जिसे 1585 में पोप चुना गया.

हालांकि ऐसी कई प्रचलित कहानियां हैं जो इनके साथ घटित हुईं. यहां रहते हुए नास्त्रेदमस ने अपना सालाना पंचांग भी निकालना शुरू कर दिया. वे हर साल पंचांग में मौसम, फसल और राजनीतिक उठा-पटक की भविष्यवाणियां करते थे जिसमें से ज्यादातर सही साबित हुईं!

Pope Felice Peretti di Montalto. (Pic: writeopinions)

सीखी छंद में भविष्यवाणियां

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों ने लोगों को तो आश्चर्यचकित किया ही था, उनका असर राजपरिवार पर भी पड़ा. फ्रांस के राजा द्वितीय हेनरी (1519-1559) और महारानी कैथरीन ने नास्त्रेदमस से अपने बच्चों का भविष्य जानने की इच्छा जाहिर की. नास्त्रेदमस ने भविष्य देखा और वे जान गए कि महारानी के एक बच्चे की आयु बहुत कम है पर यह सच उनसे कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाए.

हालांकि वह झूठ भी बोलना नहीं चाहते थे, झूठ बोलना महारानी को धोखा देने के बराबर था इसलिए उन्होंने बीच का रास्ता निकाला. उन्होंने तत्काल मन ही मन एक छंद तैयार किया, जिसमें महारानी के राज्यकाल और उनके बच्चों की अल्प आयु का जिक्र था.

पर इसमें सीधे तौर पर बच्चे की कम उम्र के बारे में कुछ नहीं कहा गया इसलिए महारानी का दिल भी नहीं दुखा लेकिन आगे जाकर ये भविष्यवाणी सच साबित हुई. ये छंद था –

”एक जवान शेर एक युद्ध के मुकाबले में पुराने शेर की जगह लेगा,
वह एक सोने के पिंजरे के कारण अपनी आंखें फोड़ लेगा,
दो घाव एक हो जाएंगे और फिर वह एक क्रूर मौत मर जाएगा.”

इस घटना से वे एक बात समझ गए थे कि उनकी आलोचना इसलिए होती है क्योंकि वे सभी को बुरी खबर भी सीधे-सीधे उनके मुंह पर कह देते हैं. इसके बाद नास्त्रेदमस ने छंदों में भविष्यवाणियां करना शुरू कर दिया, जिसका अर्थ लोगों को स्वयं तलाशना पड़ता था.

किताब में दर्ज है 12 शताब्दियों का भविष्य!

नास्त्रेदमस ने 1555 में एक किताब लिखी थी, जिसका नाम है ‘द सेंचुरीज नास्त्रेदमस प्रोफेसीज’. इसमें आगे आने वाली कुल 12 शताब्दियों की भविष्यवाणियां की गई है!

जब यह किताब प्रकाशित हुई तो उस दौर की सबसे महंगी किताबों में से एक थी. इसके बावजूद लोगों ने इसे हाथों-हाथ खरीद लिया. किताब को अंग्रेजी, जर्मन, इतालवी, रोमन, ग्रीक भाषा में प्रकाशित किया गया था जिससे पूरी दुनिया में तहलका मच गया.

इस पुस्तक में हर शताब्दी के लिए 100 छंद लिखे हैं, कुल मिलाकर किताब में 1200 छंद हैं. जबकि 1200 छंदों में से 800 छंदों में लिखी गई भविष्यवाणियां सच साबित हो चुकी हैं!

अब तक इस किताब का हिंदी और कई अन्य विदेशी भाषाओं में अनुवाद हो चुका है.

The writer of Ancient Letters and Books. (Pic: biblestudywithrandy)

अपनी मौत का सच

नास्त्रेदमस जान गए थे कि उनकी मौत कब और कैसे होगी इसलिए उन्होंने मरने से पहले ही अपनी वसीयत बनवा ली थी.

अब समय आ गया था कि उनकी भविष्यवाणियों की सजा उन्हें दी जाए, विरोधियों ने इसकी पुरजोर कोशिश की. लिहाजा फ्रांस के न्याय विभाग ने उनके विरूद्ध जांच शुरू कर दी. इससे उनका आखिरी वक्त बहुत कष्टकारी हो गया.

उन पर जादू-टोना करने के आरोप लगे. हालांकि ये आरोप कभी साबित नहीं हो पाए लेकिन उस समय जादू-टोना करने की सजा केवल फांसी थी. इस दौरान उनकी तबीयत काफी खराब हो गई, उन्हें जलोदर रोग हो गया.

17 जून 1566 तक इन्होंने अपनी वसीयत तैयार करवा ली थी और एक जुलाई को पादरी को बुलाकर अपने अंतिम संस्कार की सारी विधि समझाई और साथ ही उनसे कहा कि 225 साल बाद कुछ समाज विरोधी तत्व मेरी ​कब्र खोदेंगे, पर उनकी वहीं मौत हो जाएगी. इसके बाद अगले ही दिन उनकी मौत हो गई.

इनकी मौत के समय की गई भविष्यवाणी के सही होने का समय आ गया था लिहाजा फ्रांसिसी क्रांति के बाद 1791 में तीन लोगों ने नास्त्रेदमस की कब्र को खोदा लेकिन इसके पहले की वे अस्थियों को बाहर निकाल पाते उनकी मौत हो गई. हालांकि ये बात आज तक पता नहीं चली कि उन तीनों की मौत का क्या कारण था.

कहा जाता है कि उनके द्वारा लिखी गई किताब में राजीव गांधी, सुषाभ चंद्र बोस और इंदिरा गांधी की मौत का सच भी लिखा हुआ है!

जो भी हो अभी तक नास्त्रेदमस एक मात्र ऐसे भविष्यवक्ता हैं जिनकी किताब में तीसरे विश्वयुद्ध की घोषणा है, जो आतंकवाद का सफाया करने के लिए होगा!

हालांकि हमें उनकी कई भविष्यवाणियों को अ​भी सच होते देखना भी है.

वैसे भविष्य के बारे में नास्त्रेदमस के ‘कथनों’ पर आप को कितना भरोसा है?

Web Title: Michel de Nostradamus: The Man Who Saw Tomorrow, Hindi Article

Featured Image Credit: indymetalvault