मिस्त्र देश में संग्रहित होने वाली ममी के बारे में तो आपने बहुत सुना होगा. मिस्त्र में मौजूद पिरामिड इन ममी की जीती जागती गवाह हैं. वहां तो पूरे शरीर को संग्रहित किया जाता था.

लेकिन, आज हम एक ऐसे आदिवासी समुदाय की बात करेंगे जो सिर्फ अपने सदस्यों के सिर को संग्रहित किया करते थे. उस पर भी उनके सिर को संग्रहण करने का तरीका इतना अजब होता था, जिसे सुनकर आप दाँतों तले उंगलियाँ दबा लेंगे.

एक समय ऐसा आया जब आदिवासियों की यह प्रथा मुनाफे के धंधे में बदल गई. ये संग्रहित सिर जो ‘मोकोमोकई’ नाम से पुकारे जाते थे, व्यापार के लिए इस्तेमाल होने लग गए.

आग की भट्ठी में पकने वाले इन ‘मोकोमोकई’ की बहुत भारी मात्रा में तस्करी और व्यापार में इस्तेमाल किया जाने लगा था. नौबत यहाँ तक पहुंच गई कि गवर्नर को इसके न्यूजीलैंड से बाहर ले जाने से बैन करना पड़ा.

ऐसे में इस रोचक इतिहास को करीब से जानना बेहद दिलचस्प रहेगा. तो आइये, जानते हैं ‘मोकोमोकई’ का इतिहास जो मानव जीवन के रहन-सहन की एक झलक को भी दिखाता है-

सिर संग्रहित करने की अनूठी प्रथा 

दरअसल, न्यूजीलैंड में एक 'माओरी' नामक आदिवासी समूह था. माओरी रीती-रिवाज के अनुसार वह अपने समाज के मनोनीत लोगों के सिर को संग्रहित कर के रखते थे. माओरी संस्कृति में सबसे बड़े पद पर बैठे इंसान के पूरे चेहरे पर माओरी टैटू बना हुआ होता था. जबकि सबसे बड़े पद पर बैठी महिला के होठों और ठुड्डी पर यह टैटू बना हुआ होता था.

यह उनके हाई स्टेटस को दर्शाता था और सभी लोग उनका सम्मान किया करते थे. वहां जब किसी मोको टैटू धारी की मृत्यु हो जाती तब उसके सिर को संग्रहित करके रखने की परंपरा थी. इसे संग्रहित करने की प्रक्रिया भी बड़ी अनूठी-सी थी. जब कोई मोको मर जाता सबसे पहले उसके धड़ से सिर को अलग कर लिया जाता. इसके बाद उसके सिर से दिमाग को बाहर निकाल लिया जाता था.

साथ ही, दोनों आँखों को बाहर निकालकर चेहरे के सारे सुराख गोंद और फ्लेक्स फाइबर से भर दिया जाते थे.

इसकी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है. सुराखों को भरने के बाद वह सिर को गरम पानी में उबालते या फिर भट्ठी में भांप में रख देते थे. इसके बाद वह खुली आग में इसे आंच लगाते थे. यह सब करने के बाद मोको खोपड़ी को कई दिनों तक धूप में सूखने के लिए रख देते थे. जब सिर अच्छी तरह से सूख जाता था, तब उसे अंततः शार्क का तेल लगाकार संग्रहित कर दिया जाता था.

Women With High Status Used To Tattoo Their Lips And Chin (Pic: spokenvision)

व्यापार के लिए इस्तेमाल होने लगे 'मोको'

ममी की तरह संग्रहित यह सिर ‘मोकोमोकई’ नाम से जाने जाते थे. यह अपने संग्रहण के बाद उनके परिवार को ही सौंप दिए जाते थे. परिवार को यह खोपड़ी एक सुंदर से डिब्बे में रखकर दी जाती थी. मोको के परिवार वालों को यह सिर किसी भी शुभ या पवित्र कार्य में ही लाना होता था. बाकी दिनों वह इसे संभाल कर अपने घर में ही रखा करते थे.

लेकिन समय के साथ, मोको खोपड़ी दुश्मनों के मुखिया की भी बनाई जाने लगी. इन्हें बनाने के पीछे उनका मकसद होता था उनके सिर को युद्ध में अपनी जीत के प्रतीक के तौर पर रखना और गर्व महसूस करना. कुछ सालों बाद उन्होंने दुश्मनों के मोको को यूरोपियन लोगों को बेचना भी शुरू कर दिया, ऐसा वह अपने प्रतिद्वंद्वी या दुश्मनों को अपमानित करने के लिए किया करते थे.

समय के साथ, मोको खोपड़ियों को कूटनीति के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा. यह साल 1807-1842 के बीच होने वाले मसकट युद्ध में व्यापार के लिए इस्तेमाल होने वाला बहुत ही कीमती सामान बन चुका था.

19वीं शताब्दी आते-आते माओरी समुदाय को हथियारों की जरुरत महसूस हुई. अपनी इस जरुरत को पूरा करने लिए उन्होंने मोकोमोकई को व्यापार के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया.

A Preserved Mokomokai Skull  (Pic: pinterest)

गुलामों और युद्ध बंदियों से बनने लगे नकली 'मोको'

दिलचस्प बात ये है कि उस समुदाय के लोग असली मोको के साथ व्यापार नहीं किया करते थे. बल्कि गुलामों और युद्ध में बने बंदियों के सिर के मोको बनाने लगे और उसी को व्यापार के लिए इस्तेमाल करने लगे.

वह उनके मरने के बाद उनके चेहरे पर सबसे पहले मोको टैटू बनाते थे, लेकिन उनके चेहरे पर बनाए जाने वाले चिन्ह वाकई में उनके समाज में बनने वाले चिन्ह नहीं होते थे.

वह इन मोको को अपने व्यापार के लिए इस्तेमाल करने लगे. जब इसका व्यापार बड़े स्तर पर किया जाने लगा तब, साल 1831 में साउथ वेल्स के गवर्नर ने इसपर प्रतिबंध लगा दिया.

गवर्नर सर राल्फ डार्लिंग ने ये जारी किया कि कोई भी मोको सिर न्यूजीलैंड से बाहर व्यापार के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता है. हालांकि, इसकी वजह से इसकी ट्रैफिकिंग तो नहीं रुकी लेकिन कम जरूर हो गई थी. इस दौरान वैतांगी संधि के अनुसार न्यूजीलैंड एक ब्रिटिश कॉलोनी बन चुका था. 

A Preserved Moko Skull (Pic: interesting)

ब्रिटिश अधिकारी रोब्ले ने जमा किये 35 सिर

मेजर जनरल होरासियो गॉर्डन रोब्ले ब्रिटिश सेना के एक अधिकारी थे. उन्होंने साल 1860 में न्यूजीलैंड के लैंड युद्ध के दौरान वहां अपनी सेवा दी थी. सेना अधिकारी होने के साथ-साथ वह एक आर्टिस्ट भी थे. वह हमेशा से टैटू आर्ट से हैरान होते रहे थे और वे इसकी तरफ आकर्षित भी होते रहे थे. इसके साथ ही उनकी रुचि मानव जनित विज्ञान में भी थी.

यही वजह रही कि आगे चलकर उन्होंने टैटू आर्ट के ऊपर एक किताब भी लिखी थी. उनकी यह किताब सन 1896 में प्रकाशित हुई थी. न्यूजीलैंड से वापस इंग्लैंड लौटने तक उन्होंने लगभग 35 मोकोमोकई इकट्ठा कर लिए थे. रोबले ने ज्यादा से ज्यादा मोको सिर जमा करने के बारे में सोचा. उन्होंने 35 मोको खोपड़ियां इकठ्ठा कर ली. उन्होंने अपनी किताब 'माओरी टैटूइन्ग' में इसी आदिवासी समूह पर लिखा था.

साल 1908 में, उन्होंने अपने जमा किये हुए 35 मोको सिर न्यूजीलैंड सरकार को एक हजार यूरो में देने की पेशकश की. लेकिन, किन्हीं वजहों से सरकार ने इसे खरीदने से मना कर दिया. जिसे बाद में न्यूयॉर्क के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम ने 1, 250 यूरो में खरीद लिया. 

Gordon Robley Had Collected 35 Moko Heads (Pic: rarehistory)

आज भी यह मोको खोपड़ियां म्यूजियम में रखी हुईं . हर साल इसे देखने के लिए विश्व भर से लाखों सैलानी हैं. इन्हें देखकर लोग अचंभा प्रकट करते हैं. इन खोपड़ियों का संग्रहण कहीं न कहीं मानव जीवन के एक पहलु को दर्शाता है. 

अगर आप भी इस विषय में कुछ जानते हैं तो, हमारे साथ कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें.

Web Title: Mokomokai Skull Preservation System In Maori Tribal Community Of New zealand, Hindi Article

This article is about the culture of tribal community where they used to preserve the skulls of their loved ones but gradually a drastic change took place in this ritual itself.

Featured Image Credit: tnation