राजा-महाराजाओं की कहानियां तो हम बचपन से सुनते आ रहे हैं. कितने ही राजाओं के नाम आपको याद भी होंगे. किन्तु आज हम आपको किसी राजा की नहीं बल्कि, इतिहास में दर्ज कुछ रानियों से परिचित कराएंगे.

इन रानियों के बारे में कहा जाता है कि यह इतनी खूबसूरत थी कि लोग इनकी एक झलक पाने के लिए लालयित रहते थे. इससे भी ज्यादा दिलचस्प बात तो यह है कि इनकी अपनी-अपनी अलग कहानियां, जोकि इनकी सुंदरता से कम रोचक नहीं है.

तो देर किस बात कि है आईए इतिहास के पन्नों को पलटते हैं–

महारानी गायत्री देवी

अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर रानियों में पहला नाम आता है महारानी गायत्री देवी का. वॉग पत्रिका द्वारा गायत्री देवी को 60 के दशक की विश्व की सबसे खूबसूरत महिलाओं की सूची में पहला स्थान दिया गया था.

गायत्री देवी का जन्म 23 मई 1919 को लंदन में हुआ था, इनके पिता कूच बिहार के राजा थे और इन्होंने अपनी शिक्षा यूरोप से प्राप्त की थी. जवानी में इनकी खूबसूरती के चर्चे दूर-दूर तक मशहूर थे, यही कारण था कि सुंदरता के चलते इन्हें फैशन आइकन तक माना जाने लगा था.

भारत ही नहीं विदेश में भी इनके चाहने वाले बहुत थे. हर कोई इनका दीवाना था. फिर चाहे वह पुरुष हो या महिलाएं. अक्सर उस जमाने में महिलाएं उनके जैसे स्टाइल में साड़ी पहनने की कोशिश किया करती थीं.

इनकी शादी जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय से हुई थी और 1939 से 1970 तक ये जयपुर की महारानी रहीं. गायत्री देवी को रॉयल्टी और सहज शैली का प्रतीक माना जाता था. वहीं इन्हें एक रॉयल लाइफ जीना बहुत पसंद था.

साथ ही वह समाज कल्याण के काम में भी हिस्सा लेती रहती थीं.

Gayatri Devi, Maharani of Jaipur. (Pic: pinterest)

राजकुमारी रतन राज्य लक्ष्मी शाह

राजकुमारी रतन राज्य लक्ष्मी शाह का जन्म 19 अगस्त 1928 को काठमांडू में हुआ था. कहा जाता है कि 1955 से 1972 तक वह रानी के तौर पर नेपाल के शाही परिवार का हिस्सा रहीं.

नेपाल के राजा महेंद्र की दूसरी पत्नी के रूप में जानी जाने वाली रानी रतन राज्य लक्ष्मी शाह राणा परिवार से संबंध रखती थीं. वह नेपाल के जनरल हरि शमशेर जेबी राणा की बेटी थीं.

उनकी बड़ी बहन इंद्र की शादी 1940 में राजा महेंद्र के साथ हुई थी, लेकिन किसी कारण 1950 में उनकी मौत हो गई. आगे कुछ ऐसे हालात बने कि राजा महेंद्र से उनकी शादी हो गई.

हालांकि, इन्होंने शादी के बाद किसी बच्चे को जन्म नहीं दिया. कहते हैं कि राजा महेंद्र के पास पहले से ही तीन बेटे और तीन बेटियां थीं, इस कारण वह और संतान नहीं चाहते थे.

आगे 1972 में चितान नेशनल पार्क में शिकार करते समय राजा महेंद्र को दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई, तो रतन राज्य लक्ष्मी शाह को महारानी बना दिया गया. हालांकि, 2008 में संविधान सभा में चुनाव के बाद नेपाल से राजशाही को समाप्त कर दिया गया था.

महारानी लक्ष्मी अपने सामजिक कार्यों के लिए भी प्रसिद्ध थीं.

Ratna Rajya Lakshmi Devi Shah (Pic: bilder-aus-nepal)

सीता देवी साहिब

सीता देवी पिठापुरम के महाराजा राव वेंकट कुमार महिपति सूर्य रवि बहादुर गुरु की पुत्री थीं. इनका जन्म मद्रास के तेलुगू परिवार में 12 मई 1917 को हुआ था.

वह बचपन से ही देखने में बहुत ही सुंदर थीं. महारानी बनने के बाद भी वह अपनी साधारण जीवन शैली के लिए जानी जाती रहीं. उन्होंने अपनी जिंदगी में दो शादियां कीं, जिसमें पहली शादी वयुरु के एक जमींदार एम. आर अप्पाराव बहादुर से की.

वहीं दूसरी शादी बड़ौदा के महाराजा प्रताप सिंह गायकवाड़ से की थी. मद्रास में घोड़ों की दौड़ के दौरान सीता देवी प्रताप सिंह गायकवाड़ से मिली थीं. उस समय महाराजा प्रताप सिंह गायकवाड़ दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में थे, दूसरी तरफ सीता देवी के पास सुंदरता की अपार दौलत थी.

कहते हैं कि वह इतनी दिलकश और खूबसूरत थीं कि महाराजा एक नजर देखते ही उन पर फ़िदा हो गए. इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ी, जो शादी पर आकर ही ख़त्म हुईं.

Sita Devi. (Pic: youandi)

रानी विजया देवी

विजया देवी का जन्म 28 अगस्त 1922 को मैसूर में हुआ था. वह मैसूर के राजा कांतिरावा नरसिम्हा की पुत्री थीं. रानी को कर्नाटक के सांस्कृतिक संगीत और नृत्य में महारत हासिल थी.

कहते हैं कि विजया देवी को अपनी संस्कृति से बहुत प्यार था और इसलिए उन्होंने बचपन से कर्नाटक का नृत्य और संगीत सीखा. 1941 में इनका विवाह कोटडा संगनी के ठाकुर साहब से हो गया था. विवाह के बाद भी उन्होंने संगीत से अपना नाता नहीं तोड़ा.

इतना ही नहीं थोड़े समय बाद वह खुद को इतने ऊंचे स्तर पर ले गईं कि उनका संगीत रेडियो और टीवी के लिए रिकॉर्ड होने लगा. उन्होंने कई म्यूजिक कॉन्सर्ट में भी अपने हुनर का जौहर दिखाया. उनके व्यक्तित्व की खास बात तो यह थी कि वह देखने में जितनी ज्यादा सुंदर थीं, उतनी ज्यादा वह दूसरी कलाओं में महिर भी थीं. इस कारण लोगों को समझ नहीं आता था कि वह उनके संगीत की तारीफ करें या फिर उनकी खूबसूरती की!

Rani Vijaya Devi (Pic: wikipedia)

अनिता डेलगाडो ब्रायनस

8 फरवरी 1890 को स्पेन में पैदा हुई अनिता डेलगाडो ब्रायनस एक स्पैनिश फ्लैमेंको डांसर और गायिका थीं, जो आगे चलकर कपूरथला की महारानी प्रेम कौर बनीं.

हालांकि, वह शुरूआत से किसी राज्य या साम्राज्य की महारानी नहीं थीं.

वह तो एक मौके पर वह कुर्साल थियेटर में राजा अल्फोंसो तेरहवें की शादी के दौरान नृत्य कर रही थीं, जहां उनकी मुलाकात कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह बहादुर से हुई.

यही वह जगह थी जहां, जगतजीत अपनी पहली ही मुलाकात में अपना दिल अनिता पर हार बैठे थे. इस मुलाकात के बाद महाराजा ने उनसे शादी कर ली और वह कपूरथला की महारानी बनीं.

सन 1908 से 1925 तक प्रेम कौर कपूथला की महारानी रहीं और 72 साल की उम्र स्पेन के मैड्रिड में 7 जुलाई 1962 को इनकी मौत हो गई.

Rani Prem Kaur Sahiba. (Pic: amarujala)

सेथु लक्ष्मी बाई

केरल की महारानी सेथु लक्ष्मी बाई का जन्म 1920 को त्रिवेन्द्रम में हुआ था. त्रावणकोर के राजवंश में महिला शक्तिकरण के क्षेत्र में इन्होंने बहुत काम किया.

वह महिलाओं के लिए शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए भी जानी जाती हैं.

इन्होंने महिलाओं को स्कूल भेजने के लिए एक प्रोग्राम भी चलाया, जो काफी पॉपुलर रहा और सफल भी इसी के कारण ये अपनी रियासत में बड़ी लोकप्रिय हो गई थीं.

सथु लक्ष्मी बाई ने महिला सशक्तिकरण के लिए लोगों को भी जागरूक किया.

Maharani Sethu Parvathi Bayi And Maharani Sethu Lakshmi Bayi. (Pic: thebetterindia)

महारानी चिमनाबाई

बड़ौदा की महारानी चिमनाबाई के बारे में इतिहास में बहुत कम जानकारी मिलती है. उनको लोग चिमनाबाई द्वितीय के नाम से भी जानते थे. वह सयाजीराव गायकवाड़ की दूसरी पत्नी थीं.

चिमनाबाई के पिता का नाम श्रीमंत सरदार बाजीराव अमृतराव घाटगे था.

कहा जाता है कि  जब वह बड़ी हुईं तो उनके पिता ने उनका विवाह महाराज जिंतेद्र नारायण से करवा दिया, जो कूच बिहार में महाराजा के रूप में जाने जाते थे.

इनकी खूबसूरती के किस्से भी जमाने में कम न थे.

रानी ने महिलाओं को पुरुषों से कभी कम नहीं आंका, इसलिए इन्होंने नारी सशक्तिकरण पर काम किया. इसी के फलस्वरूप इन्होंने पर्दा प्रथा और बच्चों की शादी पर रोक लगाई और समाज को शिक्षा की ओर अग्रसर किया.

सन 1927 में रानी अखिल भारतीय महिला सम्मेलन में पहली अध्यक्ष भी बनीं.

Maharani Chimnabai. (Pic: shubh-yatra)

नूर इनायत ख़ान

नूर इनायत खान का जन्म सन 1914 में हुआ था. इनके पिता हज़रत इनायत ख़ान टीपू सुल्तान के वंशज थे. वहीं इनकी माता एक अमेरिकी महिला थीं. यही कारण था कि इनके पास शौहरत और खूबसूरती की कोई कमी न थी.

इन्हें बचपन से ही पश्चिमी देशों की सैर करने का शौक था, इसलिए इनका दिन यूरोप के किसी एक कोने में बीतता तो रात दूसरे कोने में.

इनकी सुंदरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रिटिश अफसरों ने उन्हें पहली नजर भर देखने के बाद तुरंत ही एयरफोर्स में नौकरी दे दी थी.

वहां रहते हुए उन्होंने ब्रिटिश सेना के लिए नाजी जर्मनी के खिलाफ कई खुफिया ऑपरेशनों को अंजाम दिया. नूर इनायत एक शातिर दिमाग महिला थीं.

खूबसूरती और शातिर दिमाग के मिश्रण ने उन्हें दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सीक्रेट एजेंट बना दिया. ब्रिटिश सेना ने उन्हें जासूसी के लिए नाजी फ़ौज में भी भेजा था.

वह चाहते थे कि नूर अपनी खूबसूरती का फायदा उठाकर नाज़ी अफसरों से जरूरी जानकारी निकाल लें और नूर ने अपना काम बखूबी निभाया भी, लेकिन अंत में उनके राज़ से पर्दा उठ गया और नाज़ी अफसरों ने असलियत पता चलते ही उन्हें मौत के घाट उतार दिया.

Noor Inayat Khan. (Pic: learning-history)

तो यह थीं वह रानियां, जिन्हें इतिहास में अपनी सुंदरता के साथ उनके कार्यों के लिए भी जाना गया. इन सभी के अंदर बहुत सी खूबियां थीं, जिसमें से एक इनकी सुंदरता भी थी.

Web Title: Most Beautiful Queens In The History Of India, Hindi Article

Feature Image Credit: scoopwhoop/pearl-guide