घड़ी में 8.15 का वक्त रहा होगा. एंपरर अशोका ने मुंबई के सांता क्रूज़ एयरपोर्ट से दुबई के लिए उड़ान भरी. डिपार्चर कंट्रोल ने फ्लाईट के चालक से बात शुरू की. सिग्नल मिलते ही विमान चालक ने ‘हैपी न्यू ईयर’ कहते हुए हवा से बात की.

ठीक 3 मिनट बाद विमान अरब की तरफ गिरने लगा. इससे पहले कि चालक कुछ समझ पाता, विमान 213 यात्रियों के साथ अरब सागर के अंदर कही गुम हो गया और सभी लोग काल के गाल में समा गए.

तो आईए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर उस दिन हुआ क्या था-

1971 में आया था भारत

हवा महल कहा जाने वाला अशोक 1971 में भारत आया था. यह जहाज किस किस्म का था, इसको इसी से समझा जा सकता है कि भारत में आते ही इसे एयर इंडिया के सिर का ताज कहा जाने लगा था.

एयर इंडिया का यह पहला ‘जंबो जेट’ था. कहते हैं विमान के अंदर का नाजारा एकदम शाही थी. जहां इसकी दीवारे भारतीय शैली में बनी मूर्तियों से रंगी हुई थीं, वहीं इसमें आम सीटों की जगह सोफे लगाए गए थे.

यही नहीं विमान के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरह के वॉलपेपर लगे हुए थे, जिनके रंग यात्रियों में ताजगी भरने के लिए काफी थे. यही कारण था कि एयर इंडिया तो इसे ‘आसमानी महल’ कहता था.

दूसरी तरफ इसमें लक्जरी सुविधाओं के साथ-साथ सेफ्टी के खास इंतजाम थे. यहां तक कि अगर कभी इसका इंजन काम करना बंद कर दे, तो इसमें लगे दूसरे इंजनों की मदद से यह सही-सलामत अपनी लैंडिंग कर सकता था.

बावजूद इसके यह दुर्घटना ग्रस्त हो गया, यह समझना मुश्किल था.

इशारों पर चल रहा था जहाज!

1 जनवरी 1978 रात के लगभग 8.15 पर मुंबई के सांता क्रूज़ हवाई अड्डे से दुबई जाने के लिए उड़ा. हवाई जहाज जब 8000 फीट की ऊचाई पर पहुंचा, तो एयर पोर्ट के डिपार्चर कंट्रोल ने विमान के पायलट से संपर्क किया.

पायलट ने कंट्रोल के अधिकारी से बात करनी शुरु की. उस वक्त तक सब कुछ ठीक था. विमान के पायलट मदन लाल कुकर ने अपनी बात खत्म करते हुए डिपार्चर कंट्रोल रुम के अधिकारी को ‘हैपी न्यू इयर’ कहा. तभी पायलट के सामने एटिट्यूड डॉयरेक्शन निर्देशक ने संकेत दिया कि विमान दाहिनी ओर झुक रहा है.

कुकर और उनके सह-पायलट ने इस स्थिति पर चर्चा की. साथ ही देरी न करते हुए विमाने के सभी जरूरी उपकरणों को चेक किया. इस दौरान उन्होंने पाया कि विमान के कुछ यंत्र खराब है या फिर काम नहीं कर रहे हैं.

चूंकि उस वक्त अंधेरा था, तो एडीआई की बात मानने के सिवा कोई और रास्ता नहीं था. कुकर एक तजुर्बेकार पायलट थे, वो एडीआई की बात मानते थे. उनके अनुसार विमान को वह बाई तरफ मोड़ते रहे. साथ ही इशारों पर जहाज को चलाते रहे.

तभी अचानक विमान अरब सागर के अंदर जा गिरा. विमान के पानी में इतनी तेज रफ्तार और आवाज के साथ गिरा कि मानो जैसे कोई बम विस्फोट हुआ हो.

बहरहाल, विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था. साथ ही इसमें सवार लोग अपना दम तोड़ चुके थे. उनकी चीखें अरब सागर के पानी में दब कर रह गईं.

…और भी बड़ा हो सकता था हादसा

इस हादसे को भारत के बड़े हादसों में से एक माना जाता है, जिसमें सवार सभी 213 लोग काल के गाल में जा चुके थे. बावजूद इसके कहा जाता है कि यह हादसा और भी बड़ा हो सकता था. वह तो अच्छा हुआ कि इसकी उड़ान 12 घंटे लेट थी.

इस कारण कई सारे लोगों ने या तो अपनी टिकट कैंसल करा ली थी. या फिर वे किसी और फ्लाइट से चले गए थे. बताते चलें कि इस विमान में कुल 340 यात्री बैठ सकते थे.

चूंकि, कंट्रोल रूम का संपर्क टूट चुका था, इसलिए तुरंत ही इसका खोज चालू कर दी गई. कई दिनों तक खोज में निकली टीम को इसके निशान नहीं मिले. फिर एक दिन अचानक इसका पिछला हिस्सा दिखा. उसके आगे दूर-दूर तक इसका मलवा फैला हुआ था. इतने बेहतरीन विमान का यह हाल देखकर सब हैरान थे.

उनके जुबां पर बस यही सवाल था कि आखिर ऐसा कैसे हो सकता है. एयर इंडिया को इसकी सूचना मिली, तो उसने भी इसके कारण जानने की कोशिश की.

A Boeing 747 in sea (Pic:Pinterest)

कुकर पर फूटा ठीकरा, जबकि…

एंपरर अशोका का दुर्घटना ग्रस्त होना, सिर्फ एयर इंडिया के लिए नहीं बल्कि इसको बनाने वाली कंपनी ‘बोइंग’ के लिए भी एक चिंता का विषय था.असल में यह एक लक्जरी विमान था, इस कारण यह ‘बोइंग’ का सबसे ज्यादा बिकने वाला विमान था.

ऐसे में उसके लिए यह जरूरी हो गया कि वह इस हादसे का कारणों को पता लगाएं. इसके लिए उसने एक टीम बनाई और छान-बीन शुरु कर दी. कुछ वक्त बाद बोइंग ने दावा किया कि एंपरर अशोका की दुर्घटना के पीछे खराब उपकरण जिम्मेदार नहीं थे. बल्कि, विमान चालक कैप्टन मदन कुकर जिम्मेदार थे.

वह इसलिए क्योंकि उन्होंने उड़ान से पहले मधुमेह की दवाओं को सेवन किया था. साथ ही विमान की उड़ान के दौरान उन्होंने शराब पी रखी थी. इसी कारण वह जहाज का नियंत्रण खो बैठे और यह हादसा हुआ.

जबकि, दूसरे मत के अनुसाल विमान में लगी खास मशीन ADI यानी एटीट्यूड डायरेक्टर इंडिकेटर खराब हो गई थी. विमान में यह एक खास किस्म का डिवाइस होता है, जो यह बताता है कि जमीन की सतह के हिसाब से विमान की स्थिति क्या है.

मतलब यह, दाई तरफ है या फिर बाई तरफ!

खराब होने के कारण ADI ने गलत सिग्लन दिया, जिस कारण विमान चालक ने विमान बाई तरफ झुका दिया, जबकि वह सीधा था. बस यही चूंक हो गई और एक आलीशान प्लेन क्रैश हो गया.

‘बोइंग’ ने भले ही इस बात का दावा किया था कि उनका विमान नहीं डूब सकता, किन्तु सच तो यह है कि विमान कोई भी हो वह डूब सकता है. अगर आपको याद हो तो टाइटेनिक के लिए भी कुछ ऐसा ही कहा गया था, लेकिन वो डूब गया था.

अगर आपके पास भी जहाज क्रेश की ऐसी कोई कहानी है, तो हमें साथ नीचे दिए कमेंट बॉक्स में जरूर शेयर करें.

Web Title: Story of Emperor Ashoka, Hindi Article

Featured Image Credit: Scroll.in