इतिहास के पन्नों में जब भी दिल्ली सल्तनत का ज़िक्र आता है तो अकबर, हुमायूँ, शेरशाह सूरी जैसे पुरुष सुल्तानों का नाम ही उसमें लिया जाता है.

पर इसी कड़ी में एक महिला सुलतान हुई, जिसने अपने शासन काल में अपनी काबिलियत भरपूर ढंग से बतायी. यह नाम है ‘रज़िया सुल्तान’ का!

अपने हुनर और दिमाग से कैसे रज़िया पहली मुस्लिम महिला सुल्तान बनीं… यह बहुत ही रोचक कहानी है.

तो चलिए एक बार फिर इतिहास पर थोड़ी रोशनी डालें और रज़िया सुल्तान के बारे में जानने का प्रयत्न करें–

बचपन में ही दिख गई थी रज़िया की ‘काबिलियत’…

कहते हैं कि रज़िया शुरुआत से ही शाही खानदान से नहीं थीं. वह असल में एक दास की बेटी थीं, जो बाहर से दिल्ली आए थे उस समय के शासक कुतुब-उद-दीन ऐबक के लिए काम करने!

माना जाता है शम्सुद्दीन इल्तुतमिश जो रज़िया के पिता थे उन्होंने कुतुब-उद-दीन को अपने काम से इतना खुश कर दिया था कि उन्हें दास से हटा के सल्तनत का गवर्नर बना दिया गया.

कहते हैं कि उस दिन से रज़िया के भी दिन बदल गए. अब वह भी एक अच्छी जिंदगी जीने लगी. रज़िया के पिता के चार बच्चे थे जिनमें रज़िया ही इकलौती लड़की थी. इसके बावजूद भी कहते हैं कि उन्होंने कभी भी बेटा-बेटी में भेदभाव नहीं किया.

रज़िया के भाईयों की तरह रज़िया को भी लड़ाई के गुर सिखाए गए. ऐसी धारणाएं हैं कि रज़िया बचपन से ही अपने भाईयों से ज्यादा कुशल रहीं. कहा जाता है जहाँ रज़िया के भाई सल्तनत में मजे किया करते थे वहीं रज़िया खुद को लड़ने के काबिल बनाने में व्यस्त थीं. रज़िया की यह लगन देख कर उनके पिता बहुत खुश हुए और उन्होंने रज़िया का पहले से भी ज्यादा प्रोत्साहन दिया.

उन्होंने जान लिया था कि उनकी बेटी में कुछ तो खास है!

Razia Started Learning To Fight From A Very Early Age (Representative Pic: deviantart)

आसान नहीं था सुल्तान बनने का सफर…

कुतुब-उद-दीन की मौत के बाद उसका बेटा गद्दी पर आया. कहते हैं कि उसका बेटा सल्तनत को संभालने में असमर्थ था इस मौके का फायदा इल्तुतमिश ने उठाया और गद्दी अपने नाम कर ली. माना जाता है कि 26 सालों तक इल्तुतमिश ने अपना राज चलाया.

वक़्त के साथ इल्तुतमिश को एहसास होने लगा था कि उसके पास अब ज्यादा समय नहीं बचा और इस कड़ी में उसने एक फैसला सुनाया जिसने सबको हिला दिया. इल्तुतमिश ने अपने वारिस के लिए अपने बेटों का नहीं बल्कि रज़िया का नाम घोषित कर दिया.

हर कोई यह जानकार हैरान हो गया कि भला कोई लड़की कैसे सल्तनत को संभालेगी. इल्तुतमिश की खूब आलोचनाएं हुई लेकिन वह अपने फैसले पर टिका रहा. कहते हैं इस फैसले की वजह यह थी कि रज़िया से ज्यादा काबिल तब उसे कोई और दिखा ही नहीं.

माना जाता है कि इल्तुतमिश की मौत के बाद मुस्लिम संगठन ने रज़िया को नहीं बल्कि उसके भाई को सुल्तान बना दिया. रज़िया का भाई सल्तनत संभाल नहीं पाया और तुरंत ही उसे गद्दी से हटा के उसकी माँ को गद्दी सौंप दी गई.

धारणाएं हैं कि रज़िया की माँ शाह तुरकन भी गद्दी की आड़ में अपने फायदे कर रही थीं. इसके चलते थोड़े समय बाद ही रज़िया की माँ और भाई दोनों को मौत के घाट उतार दिया गया और आखिरकार रज़िया के हाथ सल्तनत लग गई. इसके साथ ही रज़िया पहली मुस्लिम महिला सुल्तान बन गई.

Razia Become Sultan Of Delhi After His Brother Taken Out Of The Throne (Representative Pic: etrends)

जब रज़िया ने संभाली ‘दिल्ली की गद्दी’

कहते हैं कि गद्दी पर आते ही रज़िया ने पुराने रीति – रिवाजों को बदलना शुरू कर दिया. उसने बाकी मुस्लिम महिलाओं की तरह परदे में रहना पसंद नहीं किया बल्कि वह दुनिया के सामने एक सुल्तान की तरह कपड़े पहन के आई… जैसे उस समय मर्द पहनते थे.

रज़िया को अपने इस कदम के लिए बहुत आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. इतना ही नहीं माना जाता है कि उन्होंने अपना नाम भी बदल दिया. कहते हैं कि उस समय महिलाओं को सुल्ताना कहा जाता था लेकिन रज़िया ने इसे बदला और कहा कि उन्हें भी पुरुषों की तरह ‘सुल्तान’ के नाम से पुकारा जाए.

ऐसा माना जाता है कि रज़िया ने अपने आते ही साम्राज्य में चल रहे सिक्कों को बदलवा दिया और उन पर खुद की पहचान अंकित करवाई. कहते हैं कि रज़िया एक अच्छी शासक साबित हुईं. उन्होंने हर तरह से सल्तनत को आगे बढ़ाने का काम किया.

जानकारी के अनुसार, जंग में भी रज़िया का कोई मुकाबला नहीं था. वह ऐसे लड़ती थीं जैसे कि कोई पुरुष सुल्तान ही लड़ रहा हो. कई जगहों पर रज़िया ने अपना राज जमाया.

माना जाता है कि रज़िया ने कई स्कूल और पुस्तकालय भी बनवाए. इस तरह रज़िया की सल्तनत अच्छी तरह फली-फूली.

Razia Sultan Defeated Many People In War (Representative Pic: thebetterindia)

रज़िया की ‘मौत’ का खेल

कहते हैं कि रज़िया का राज बहुत बढ़िया चल रहा था लेकिन एक व्यक्ति था जिससे यह देखा नहीं जा रहा था. वह व्यक्ति था भटिंडा का गवर्नर मल्लिक अल्तुनिया.

माना जाता है कि रज़िया का राज मल्लिक को रास नहीं था. वह नहीं चाहता था कि कोई महिला इस तरह राज करे. कहते हैं कि मल्लिक के पहल करने पर हर कोई उसके साथ और रज़िया के खिलाफ हो गया. खिलाफत करने वालों में रज़िया का भाई मुईज़ुद्दीन बहरामशाह और उसकी सल्तनत के कई और बड़े अधिकारी भी शामिल थे.

हर कोई रज़िया को गिराने की फिराक में था और इसलिए उन्होंने एक धोखे का खेल रचा. उन्होंने ऐसा प्रतीत करवाया कि मल्लिक रज़िया के खिलाफ हो गया है और उससे जंग करना चाहता है.

कहते हैं रज़िया यह सुनते ही अपनी सेना लेकर मल्लिक पर हमला करने पहुँच गई लेकिन बीच जंग में ही रज़िया को धोखा दे दिया गया. उनकी सेना में एक बड़ी मात्रा उन अधिकारियों की थी जो उनकी सल्तनत में काम करते थे. उन्होंने आखिरी मौके पर खुद को पीछे कर लिया.

नतीजतन रज़िया को हार का सामना करना पड़ा और उन्हें मल्लिक द्वारा बंदी बना लिया गया.

दूसरी ओर सारे अधिकारी वापस दिल्ली लौटे और रज़िया के भाई को नया सुल्तान घोषित कर दिया. इस मौके पर मल्लिक दिल्ली पहुँचा और रज़िया के भाई से अपना ईनाम माँगा. उसने ईनाम में रज़िया को उसे दे दिया. कहते हैं कि रज़िया ने भी यह रिश्ता स्वीकार कर लिया.

रज़िया ने रिश्ता तो बना लिया था लेकिन उनके अंदर की आग अभी ठंडी नहीं हुई थी. उन्होंने मल्लिक को अपनी ओर कर लिया और अपने भाई से धोखे का बदला लेने निकल पड़ी अपनी सेना के साथ.

रज़िया की किस्मत में शायद बदला लेना नहीं लिखा था क्योंकि जंग में उनकी सेना अपने भाई की सेना के आगे टिक ही नहीं पाई. वह हार गई लेकिन उन्होंने मरते दम तक घुटने नहीं टेके और उस जंग में ही रज़िया ने अपने प्राण त्याग दिए. इसके साथ ही दिल्ली की पहली मुस्लिम महिला सुल्तान का अंत हो गया.

Razia Sultan Died In Her Last Battle Against Her Brother (Representative Pic: moviefone)

रज़िया सुल्तान वाकई में एक बेहद अलग सोच की सुल्तान थीं. उन्होंने समय-समय पर लोगों को दिखाया कि वह लड़की भले ही हैं लेकिन सुल्तान बनने की काबिलियत अपने अंदर रखती हैं.

Web Title: Razia Sultan: First Muslim Women Ruler of the Delhi Sultanate, Hindi Article

Featured Image Credit: bbc/thebetterindia/tellydhamaal