भारतवर्ष की पावन भूमि के हृदय में स्थित छत्तीसगढ़ अनादिकाल की देवभूमि के रूप में प्रतिष्ठित है. इस भूमि पर विभिन्न संप्रदायों के मंदिर, मठ, देवालय हैं जो इसकी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं को और भी सुदृढ़ बनाते हैं.

ऐसी ही विशिष्टता को सदियों से समेटे रहा है छत्तीसगढ़ का सिरपुर स्थित लाल ईंटों से बना मौन प्रेम का साक्षी लक्ष्मण मंदिर. बाहर से देखने पर यह सामान्य हिंदू मंदिर की तरह ही नज़र आता है, लेकिन इसके वास्तु, स्थापत्य और इसके निर्माण की वज़ह से इसे लाल ताजमहल भी कहा जाता है.

चूंकि, यह कौशल प्रदेश के हर्ष गुप्त की विधवा रानी वासटा देवी के अटूट प्रेम का प्रतीक बताया जाता है, इसलिए जानना दिलचस्प रहेगा–

बौद्ध धर्म का तीर्थ रहा सिरपुर!

छत्तीसगढ़ में महानदी के तट पर स्थित सिरपुर का अतीत सांस्कृतिक विविधता व वास्तुकला के लालित्य से ओत-प्रोत रहा है.

यह छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर से लगभग 78 किमी दूर है. इसे 5वीं शताब्दी के आसपास बसाया गया था. ऐसे प्रमाण मिलते हैं कि यह 6ठी सदी से 10वीं सदी तक बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थ स्थल रहा. खुदाई में यहां पर प्राचीन बौद्ध मठ भी पाए गए.

वह तो 12वीं सदी में आए एक विनाशकारी भूकंप ने इस जीवंत शहर को पूरी तरह से तबाह कर दिया. कहते हैं इस आपदा से पहले यहां बड़ी संख्या में बौद्ध लोग रहा करते थे. प्राकृतिक आपदाओं के कारण उन्हें इस शहर को छोड़ना पड़ा और धीरे-धीरे यह शहर वक्त की धूल में कहीं खोता चला. बाद में इसे फिर से बसाया गया.

Archaeological consists of both Hindu & Buddhist monuments. (Pic: blogspot)

गौरवशाली रहा है इतिहास

सिरपुर को कला के शाश्वत नैतिक मूल्यों व मौलिक स्थापत्य शैली के लिए पहचाना जाता है. यह भारतीय कला के इतिहास में विशिष्ट कला तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध था. साथ ही यह धार्मिक, आध्यात्मिक व ज्ञान-विज्ञान के प्रकाश से भी जगमग रहा है.

बताते चलें कि सिरपुर प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से विख्यात रहा, सोमवंशी शासकों के काल में इसे दक्षिण कौसल की राजधानी होने का गौरव भी हासिल था.

इतिहासकारों के अनुसार छठी शताब्दी में चीनी यात्री व्हेनसांग भी यहां आया था. वहीं ऐतिहासिक जनश्रुतियां बताती हैं कि भद्रावती के सोमवंशी पाण्डव नरेशों ने भद्रावती को छोड़कर इसको बसाया था.

Mantapa of Sirpur Lakshmana Temple. (Pic: siaphotography)

पहला ईंटों से निर्मित मंदिर

छठी शताब्दी में निर्मित भारत का सबसे पहला ईंटों से बना मंदिर यहीं पर है. सोमवंशी नरेशों ने यहां लाल ईंटो से राम मंदिर और लक्ष्मण मंदिर का निर्माण कराया था. अलंकरण, सौंदर्य, मौलिक अभिप्राय व निर्माण कौशल की दृष्टि से यह अपूर्व है.

अगर आगरा के ताजमहल की बात की जाए तो शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज की याद में 1631-1658 के मध्य इसका निर्माण कराया था.

वहीं सफेद संगमरमर से बने ताजमहल से लगभग 1100 साल पहले पूर्व शैव नगरी श्रीपुर में मिट्टी की ईंटों से बने स्मारक में विष्णु के दशावतार अंकित किए गए हैं, जिसे इसे लक्ष्मण मंदिर के नाम से जाना जाता है.

आपको जानकर यह हैरानी हो सकती है कि यूरोपियन साहित्यकार एडविन एराल्ड ने इस मंदिर की तुलना प्रेम के प्रतीक ताजमहल से की है. इन्होंने ताजमहल को जीवित पत्थरों से निर्मित प्रेम की संज्ञा दी और लक्ष्मण मंदिर को लाल ईंटों से बना मौन प्रेम का प्रतीक बताया. वहीं रविंद्रनाथ टैगोर ने लक्ष्मण मंदिर को समय के गाल पर बिंदी सा चमकने वाला अद्भुत रत्न कहा है.

Laxman Temple, Sirpur, Chhattisgarh. (Pic: wikimedia)

वासटादेवी के प्रेम का प्रतीक

लक्ष्मण मंदिर प्राचीन स्मारक तो है ही, साथ ही यह दक्षिण कौशल में पति प्रेम की निशानी भी है! भूगर्भ से उजागर तथ्यों से पता चलता है कि 635-640 ई. में रानी वासटादेवी ने राजा हर्षगुप्त की स्मृति में लक्ष्मण स्मारक का निर्माण कराया था.

इसको राजा हर्षगुप्त की याद में रानी वासटादेवी ने बनवाया था. वासटादेवी मगध नरेश सूर्यवर्मा की बेटी थीं और वैष्णव धर्मावलंबी थीं. उनकी प्रेम कहानी खोदाई में मिले शिलालेखों से प्रामाणिक होती है, जिसके मुताबिक प्रेम के स्मारक ताजमहल से भी अधिक पुरानी प्रेम कहानी लक्ष्मण मंदिर स्मारक की है.

वासटादेवी की प्रेम कहानी का उल्लेख चीनी यात्री ह्वेन सांग ने भी अपने यात्रा वृत्रांत में किया है. मिट्टी से बनी पक्की ईंटों से निर्मित इस स्मारक में दक्षिण कौशल की शैव और मगध की वैष्णव संस्कृति का अनूठा मिश्रण मिलता है.

Garbha Griha of Temple. (Pic: thewanderer)

गजब है स्थापत्य शैली

एक बहुत बड़े मंच पर पूरी तरह से ईंट का बना हुआ यह अत्यंत भव्य मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. इसमें उत्तर और दक्षिण दिशा की ओर से मंदिर प्रांगण में ऊपर पहुंचने के लिए सीढ़िया बनी है, मंदिर में एक गर्भगृह, अंतराल और मंडप शामिल है.

वहीं अगर मंदिर के प्रवेश द्वार की बात की जाए तो यह अत्यंत सुंदर है, जिसके ऊपर शेषदायी भगवान विष्णु को उकेरा गया है. इस पर भगवान विष्णु के प्रमुख अवतार और विष्णु लीला के दृश्यों का भी वर्णन है.

मंदिर के गर्भगृह में 5 फन वाले सर्प पर आसीन लक्ष्मण की मूर्ति है, जो शेषनाग का प्रतीक है. संभवतः रानी ने खुद को उर्मिला के तौर पर देखा होगा जो 14 साल तक भगवान लक्ष्मण का वनवास खत्म होने का इंतजार करती रहीं.

शायद यही कारण है कि लक्ष्मण इस मंदिर के ईष्ट देव हैं, जो उर्मिला के प्रेम का प्रतीक बने हुए हैं. इस मंदिर के पत्थरों पर उकेरी गई बारीक नक्काशी स्तब्ध करती है वहीं शिखर और स्तम्भों पर किया गया.

Sirpur an Ancient Heritage of Chhattisgarh. (Pic: siaphotography)

भूकंप और बाढ़ को झेला

12वीं शताब्दी में आए भयानक भूकंप के झटकों के कारण पूरा सिरपुर यानी श्रीपुर जमींदोज़ हो गया था. वहीं इसके बाद 14वीं शताब्दी में आई महानदी की विकराल बाढ़ ने भी वैभव की इस नगरी को नेस्तानाबूद कर दिया था.

भीषण बाढ़ और जबरदस्त भूकंप की त्रासदी झेलने के बावजूद भी अनूठे प्रेम का प्रतीक बनकर मिट्टी की ईंटों से बनी ये इमारत 1400 सालों से यूं ही शान से खड़ी हुई है, जबकि इसके बिल्कुल समीप बना राम मंदिर पूरी तरह ध्वस्त हो गया और पास ही बने तिवरदेव विहार में भी गहरी दरारें पड़ गईं.

सदियों से इस महान मंदिर की बेजोड़ कलाकृति और गजब की स्थापत्य शैली लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है. ऐसे में अगर आप भी छत्तीसगढ़ घूमने का प्लान कर रहे हैं, तो सिरपुर के इस लक्ष्मण मंदिर का भ्रमण करना न भूलें.

Web Title: Sirpur Lakshmana Temple Chhattisgarh, Hindi Article

Featured Image Credit: thrillophilia