भारत में कई हजार साल पहले से सिक्कों के रूप में मु्द्रा का चलन है, हालांकि सबसे पहला नोट या कागजी मुद्रा ब्रिटिश भारत में 3 सितंबर 1812 को बैंक ऑफ बंगाल द्वारा 250 सिक्का रुपए में जारी की गई. वह बात और कि कागजी मुद्रा की शुरूआत चीन से मानी जाती है.

बैंक ऑफ हिंदुस्तान (1770-1832), वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा स्थापित बंगाल और ‘बहार जनरल बैंक’ (1773-75), बंगाल बैंक (1784- 91) द्वारा सबसे पहले बैंक नोट जारी किए गए.

अब तक सिक्के ही भारत की मुख्य मुद्रा के रूप में चलते थे, लेकिन 1857 की क्रांति के बाद राजा जॉर्ज VI ने नोटों और सिक्कों की डिजाइनों को बदल दिया और रुपए को भारतीय कॉलोनी की आधिकारिक मुद्रा बना दिया गया.

इस प्रकार भारतीय उपमहाद्वीप में रुपए वाले नोट की असल शुरूआत 19वीं शताब्दी में मानी जाती है! ऐसे में ये जानना दिलचस्प रहेगा कि भारत में 100 रुपए के नोटों की शुरूआत कैसे हुई और वर्तमान में चलने वाला सौ रुपए का ये नोट किन-किन परिवर्तनों के दौर से गुजरा.

तो देर किस बात की है, आईए जानते हैं–

अंग्रेजों के पास था नोट जारी करने का एकाधिकार

ब्रिटिश भारत में ‘द पेपर करेंसी एक्ट’ 1861 द्वारा अंग्रेज सरकार के पास ही नोट जारी करने का एकाधिकार था. सरकार ने नोट प्रबंधन का कार्य ‘द अकाउंटेंट जनरल्स एंड द कंट्रोलर ऑफ करेंसी’, मिंट मास्टर को सौंप दिया था.

इंग्लैंड की महारानी के चित्र वाले जारी किए गए ये नोट बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा मुद्रित हुए थे.

वहीं सन 1923 ई. में जॉर्ज पंचम के चित्र वाली श्रृंखला के नोट जारी किए गए और ब्रिटिश भारत में जारी सभी कागजी मुद्रा की एक अभिन्न विशेषता बन गई. इसके बाद जॉर्ज पंचम के चित्र वाले एक, सवा दो, पांच, दस, पचास, सौ, एक हजार और दस हजार के नोट जारी किए गए.

One Hundred Rupees Note of King George V. (Pic: blogspot)

…और भारतीय रिजर्व बैंक बनने के बाद

एक अप्रैल 1935 को कलकत्ता में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना तक ब्रिटिश भारत में नोट जारी करने का एकमात्र अधिकार अंग्रेज सरकार के ही पास था, लेकिन रिजर्व बैंक ने भारत सरकार की ओर से अब नोट जारी करने का अधिकार प्राप्त कर लिया.

इस प्रकार मार्च, 1938 को सर जेम्स टेलर द्वारा हस्ताक्षरित 100 रुपए का पहला नोट निकाला गया. इसके बाद से ही भारतीय रिजर्व बैंक भारत सरकार की ओर से नोट जारी करता है और उसका कार्य संभालता है.

भारतीय अर्थव्यवस्था में 100 रुपए के मूल्य वर्ग वाले नोट भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा छापे जाते हैं, जिस पर केंद्र सरकार अपनी गारंटी देती है.

भारतीय रिजर्व बैंक 1935 में अपनी स्थापना के बाद से ही 100 रुपए के नोटों को छापता आ रहा है, हालांकि इस बीच कई बार इसके आकार-प्रकार और रंग रूप में बदलाव किया गया और आगे भी उम्मीद है कि भारत सरकार इसमें बदलाव कर सकती है.

वर्तमान समय में महात्मा गांधी सीरीज के 100 रुपए मूल्य वर्ग के नोट बैंक द्वारा चलाए जा रहे हैं, हालांकि इससे पहले लॉयन कैपिटल सीरीज के नोट चला करते थे.

इन्हें 1996 में समाप्त कर दिया गया.

Rupees One Hundred Note issued in 1967. (Pic: Indian Banknote)

ब्रिटिश भारत का पहला 100 रुपए का नोट

पहला 100 रुपए का नोट ब्रिटिश भारत में जॉर्ज छह के चित्र वाला बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा जारी किया गया था. हालांकि, आजादी मिलने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने राजा जॉर्ज के चित्र को हटाकर लॉयन कैपिटल सीरीज के 100 रुपए वाले नए नोटों पर भारत का राष्ट्रीय चिह्न लगा दिया.

वहीं 100 रुपए के सबसे पहले नोट की डिजाइन बैंक ऑफ हिंदुस्तान ने बनाई, जिसमें एक फूलों की पुस्तक के ऊपर एक शेर बैठा दिखाया गया था. वहीं नोट के ऊपर अंग्रेजी, हिंदी, फारसी और बांग्ला भाषा में बैंक ऑफ हिंदुस्तान मुद्रित था और 100 सिक्का रुपीज लिखा हुआ था.इसके बाद बैंक ऑफ बंगाल ने नया 100 रुपए का नोट जारी किया, जिसमें एक मुंशी को व्यापारिक खाते तैयार करते दिखाया गया.

बैंक ऑफ बंगाल, बांग्ला, फ़ारसी और हिंदी में लिखा हुआ था, वहीं मूल्यवर्ग बांग्ला, फारसी और कैथी भाषाओं में वर्णित था. हालांकि, बैंक ऑफ बंगाल ने 100 रुपए के नोट में कई बार बदलाव किए और आखिरकार उनका बदलावों का ये चक्र 17 नवंबर 1857 को थम गया.

जब बैंक ऑफ बंगाल ने 100 रुपए के नोट की डिजाइन में एक बड़ा बदलाव कर उसे जारी किया. इस नोट को बनाने में हस्तनिर्मित श्वेत पत्र का उपयोग किया गया और उसमें ‘व्यापार’, ‘कृषि’ और ‘वाणिज्य’ के साथ शेर संग ब्रिटानिया प्रदर्शित करने वाले विशेष शब्द चित्र बने थे.

इसमें असम का एक सींग वाला गेंडा, हुगली नदी पर बोट, सासाराम (बिहार) स्थित शेरशाह सूरी का मकबरा, विभिन्न प्रांतों को दर्शाने के लिए एक हाथी के चित्र उकेरे गए.

Bank of Bengal 100 Rupees note. (Pic: classicalnumismaticgallery)

आजाद भारत का पहला 100 रुपए का नोट

आजाद भारत का पहला 100 रुपए का नोट भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जनवरी 1950 ई. को जारी किया गया, जिस पर तत्कालीन आरबीआई गवर्नर सर बेनेगल रामा राव के हस्ताक्षर थे.

इस नोट के दाईं ओर अशोक स्तंभ था और इस पर कुल 6 भाषाओं में नोट का मूल्य लिखा हुआ था. हालांकि, दिसंबर 1960 में गवर्नर एच.वी.आर. अंयगर के कार्यकाल में इसमें थोड़े बदलाव किए गए. साथ थी नोट के पीछे हीरा कुंड बांध का चित्र लगा दिया गया और नोट पर अब 13 भाषाओं में मूल्य लिखा जाने लगा, लेकिन एक बार फिर पी.सी. भट्टाचार्य के समय इसमें बदलाव किया गया.

1967 के दशक में बैंक द्वारा नोटों के आकार को छोटा किया गया.

आरबीआई गवर्नर एस जगन्नाथन के कार्यकाल के दौरान 2 अक्टूबर 1969 को महात्मा गांधी के जन्म शताब्दी समारोह के सम्मान में एक स्मारक डिजाइन श्रृंखला में 100 रुपए का नया नोट जारी किया गया, जिसमें गांधी जी को सेवाग्राम आश्रम में बैठे दिखाया गया था.

इससे पहले के नोटों में अशोक स्तंभ का चित्र लगा हुआ था.

वहीं 26 मार्च 1975 को इन्हीं के कार्यकाल में फिर से एक बार इस नोट में बदलाव किया गया. इसके बाद डॉ. सी. रंगराजन के समय जून 1996 को आरबीआई ने पूरी तरह से बदला हुआ 100 रुपए का नया नोट जारी किया.

इस पर दाए हाथ की ओर महात्मा गांधी की तस्वीर लगी हुई थी, वहीं इस पर उनका नाम एम. के. गांधी लिखा हुआ था, हालांकि उसे बाद में बदलकर महात्मा गांधी कर दिया गया. 100 रुपए के इस नए नोट में सामने की ओर महात्मा गांधी और पीछे की ओर हिमालय पर्वत था.

Latest Hundred Rupees Note. (Pic: blogspot)

वर्तमान समय में भारतीय रिजर्व बैँक द्वारा 100 रुपए के नोट को जाली नोटों से बचाने के लिए इसमें कई सुरक्षा विशेषताएं अपनाई गई हैं, वहीं नेत्रहीन लोगों की सुविधा के लिए इस पर ब्रेललिपि से भी 100 अंकित किया जाता है.

महात्मा गांधी सीरीज के इन नोटों का साइज भी पूर्व निर्धारित होता है, जो 157 x 73 एमएम है, जिस पर नीला और हरा रंग होता है. वहीं नोट के पीछे कुल 17 भाषाओं में उसका मूल्य लिखा होता है, जबकि मूल्य वर्ग अंग्रेजी और हिंदी में होता है.

Web Title: Story Behind 100 Rupees Note in India, Hindi Article

Featured Image Credit: bloomberg